13 Special Animal Stories in Hindi with Images | Short Animal Story

प्रेरणा और मनोरंजन से भरी Animal Stories in Hindi. जिन कहानी को पढ़कर आपको मनोरंजन के साथ बहुत कुछ सींखने को भी मिलेगा।

यह हैं Animal Story in Hindi आशा करते हैं, आज की यह कहानियां पसन्द आएंगी, तो चलिए शुरू करते हैं।


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Animal Stories in Hindi


” जंगल की दौड़ “


   बहुत समय पहले की बात है, एक बार जंगल मे एक कछुए और एक खरगोश की लड़ाई होने लगी। कछुआ धीरे धीरे चलता था, लेकिन वह शालीन था।

खरगोश बहुत घमण्डी था और हमेशा ही दुसरे जानवरों की मजाक बनाकर उन्हें परेशान किया करता था। तो कछुए की धीमी चाल को लेकर वह कछुए की मजाक बना रहा था।

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जब कछुए ने उससे कुछ कह दिया तो खरगोश को बुरा लग गया।

अब खरगोश की आन का सवाल था। अब उसने अपनी जीत निश्चित मान कर कछुए के सामने दौड़ की शर्त रख दी। शीघ्र ही वहां और जानवर भी इकट्ठा हो गए। कछुआ दौड़ के लिए मान गया।

   दौड़ शुरू हुई। कछुआ अपनी धीमी चाल से आगे बढ़ रहा था। और खरगोश बहुत तेज दौड़ रहा था। अन्य जानवरों को भी बहुत मजा आ रहा था वे सभी दौड़ का आनंद ले रहे थे।

    खरगोश बहुत ही आगे निकल गया। उसने पीछे मुड़ कर देखा दूर-दूर तक कछुआ क्या, उसकी परछाई भी नजर नहीं आ रही थी। उसने सोचा, कि क्यो न थोड़ा आराम कर लिया जाए।

वह जाकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

आराम करते करते उसे कब नींद आ गयी, पता ही नहीं चला। इतने में खरगोश वहां पहुंच गया। उसने देखा कि खरगोश तो सो रहा है। एक बार उसने सोचा कि इसे उठा दूँ,

लेकिन अगले ही पल उसने सोचा, यह एक प्रतिस्पर्धा है, मुझे बस अपना कार्य करना चाहिए। अब उसने अपनी जीत को अपने सामने देखा और आगे बढ़ता गया।

कुछ ही क्षणों में वह उस ही जगह पर पहुंच गया जहां से दौड़ शुरू हुई थी।

  खरगोश की अचानक नींद खुली और उसने देखा कि शाम हो चली है, तभी उसे कछुए का खयाल आया। वह दौड़ दौड़ कर आगे गया और उस जगह पहुंच गया।

वहां सभी जानवर और उनके ही साथ कछुआ भी मौजूद था। कछुआ पहले से ही जीत चुका था। खरगोश का घमण्ड अब चूर चूर हो गया।

उसने कछुए से और उन सभी जानवरों से भी माफी मांगी जिनकी वह मजाक बनाया करता था।


सीख | Animal Stories in Hindi : ” दूसरों को कभी भी खुद से कम शक्तिशाली नहीं समझना चाहिए।”

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” अनोखा तरीका “

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   एक बार की बात है, एक जंगल में एक बार एक लोमड़ी और एक बिल्ली आपस मे बातचीत कर रहे थे। फिर बातों ही बातों में कुत्तों का विषय आता।

बिल्ली और लोमड़ी दोनों ही जंगली कुत्तों के आतंक से परेशान थीं। दोनो अपनी अपनी आप बीती एक-दूसरे को सुना रही थी।

   लोमड़ी बोली, ” बिल्ली बहन मैं तो इन कुत्तों से बहुत परेशान हूँ। जहां देखो वहां पहुंच जाते हैं। इन्होंने तो मेरा जीना ही बेहाल कर के रखा है। मैं कभी भी किसी शिकार को पकड़ाती हूँ

तो पता नहीं इन कुत्तों को कौन खबर दे देता है। पहले से पहले मेरे खाने पर अपना हक जमाने के लिए पहुंच जाते हैं। और तो और मेरे पीछे तो ऐसे पड़ जाते हैं जैसे कि कितने दिनों से भोजन न किया हो।”

बिल्ली बोली, ” सही कह रही हो बहिन तुम। मैं भी तो इन कुत्तों से ही परेशान हूँ। एक तो ये इतनी ज्यादी संख्या में जंगल मे घूमते रहते हैं। आखिर जाओ तो जाओ कहाँ !

मैं तो पेड़ पर चढ़ जाती हूँ। यही तरीका मेरी जान बचाता है। अच्छा तुम ये बताओ कि इनसे बचने के लिए तुम करती क्या हो। क्या पता मुझसे बेहतर तरीका हो जो मैं भी अपना सकूं!”

 तब लोमड़ी बोली, ” मैं तो कई तरीके आजमाती हूँ। उनसे कभी बच गयी तो ठीक, वरना मेरा तो कटा टिकट ऊपर का।”

   तब बिल्ली बोली , ” बहुत से तरीको को आजमाकर तुम अपनी ही जान को खतरे में डाल देती हो?तुम्हें एक ही तरीका आजमाना चाहिए, जो कि सफल हो सके।”

  इतने में ही पीछे से कुत्ते आ पहुंचे। बिल्ली तो अपना हमेशा का तरीका अपनाकर पहुंच गई पेड़ की ऊंचाई पर और अपनी जान बचा ली। लोमड़ी भगती रही, कभी झाड़ियों में छिपी और कभी कहीं।

लेकिन फिर उसका साथ उसके किसी भी तारिके ने नहीं दिया और वह कुत्तों के चंगुल में आ गयी।


सीख | Animal Story in Hindi : ” जिस पर पूर्ण विश्वास हो वही तरीके आजमाने चाहिए। इस प्रकार हम अपने प्राणों की रक्षा स्वंय कर सकते हैं।”

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Animal Story in Hindi


” भेड़िया और बांसुरी “

कहानी


  एक बार बहुत सी भेड़ और बकरियां जंगल मे चरने के लिए गयी। एक बकरी थी जो अपने बच्चे को पहली बार अपने साथ चराने के लिए जंगल पर ले गयी थी।

वह अपने बच्चे से बहुत प्यार करती थी। और अपने बच्चे को उसने सभी नैतिक मूल्यों से अवगत कराया हुआ था। सही-गलत सभी की जानकारी वह बचपन से ही अपने बच्चे को देती आ रही थी।

उसने बकरियों के ऊपर आने वाले खतरों से भी उसकव अवगत कराया था। मेमना भी बहुत होशियार था। उसने सभी बातें अच्छी तरह से समझ ली थी।

   सभी भेड़-बकरियां एक साथ जंगल मे चर रहीं थी। एक भेड़िया था जो कई दिनों से भूखा था। वह अपने लिए शिकार ढूंढते-ढूंढते उस ही जगह पहुंच गया जिस जगह भेड़ बकरियां घाँस चर रही थी।

तभी उसकी नजर उस छोटे से मेमने पर पड़ी। मेमने को देखते ही उसके मुँह में पानी आने लगा। मौका मिलते ही वह उसकी ओर झपट पड़ा।

उसने उस समय उसको नहीं मारा बल्कि वह मेमने को सुरक्षित अपने दांतों में दबकर अपनी गुफा में ले गया। मेमने की मां का रो रोकर बुरा हाल हो गया।

   मेमना बिलकुल भी भयभीत नहीं हुआ। बल्कि वह ये सोच रहा था कि इस भेड़िये से बचा कैसे जाए। तब वह उस भेड़िये से कोमल स्वर में बोला, ” भेड़िए चाचा। मुझे पता है कि आज मैं मर जाऊँगा।

लेकिन मेरी एक आखरी इच्छा है। आप अपने मुँह से बांसुरी बहुत अच्छी बजाते हो। मुझे वह धुन बहुत पसंद है। क्या आप मेरे लिए भी वही बांसुरी बजा सकते हो?”

  भेड़िये को अपनी तारीफ बहुत पसंद थी तो उसने मेमने को हां कर दिया और जोर- जोर से अपनी बेज़ुरी आवाज में गाने लगा। उसकी आवाज पूरे जंगल मे गूंज रही थी।

जो कि मेमने की मां और सभी भेड़ और बकरियों ने भी सुन ली। सभी मिलकर अब आवाज की दिशा में आ गए। कुछ ही देर में वे सब भेड़िये तक पहुंच गए। भेड़िया अपने गाने में ही बेसुध था।

तभी सारी भेड़ और बकरियों ने उस पर एक साथ हल्ला बोल दिया। भेड़िये को उन्होंने मार मारकर अधमरा बना दिया और मेमने को लेकर वहां से चले गए। मेमने को देखकर उसकी मां बहुत खुश हुई।

और छोटा सा मेमना भी अपनी मां को देखकर बहुत खुश हुआ।


सीख | Story of Animals in Hindi : ” कद मायने नहीं रखता हौंसले में दम और स्वयं पर आत्मविश्वास होना बहुत ही आवश्यक है।”

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” लोमड़ी की चालाकी “

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   बहुत समय पहले एक जंगल मे , एक लोमड़ी अपने भोजन की तलाश में जंगल मे इधर उधर घूम रही थी। गर्मी के दिन थे, चलते चलते उसकी हालत खराब हो गयी। वह मन ही मन बोली,

अब मुझसे एक पल भी नहीं चला जाएगा। थोड़ा आराम कर लेती हूं फिर भोजन की तलाश को जारी रखूंगी।

  अब वह थककर एक पेड़ के नीचे बैठ गयी। वह सोचने लगी कि आराम करना कितना आनन्ददायक होता है। काश मुझे ऐसे बैठे बैठे ही भोजन मिल जाता तो मैं खाना खाकर यहीं सो जाती।

   इतने में एक कौआ उड़कर आया। वह लोमड़ी के सामने वाले पेड़ में बैठ गया।जब लोमड़ी की नजर उस पर गयी तो उसने देखा कि, कौए के मुह मे एक रोटी है। रोटी पूरी , आधी थी।

जिसे कि कौआ रखकर पूरे 2-3 दिन आराम से खा सकता था। लोमड़ी को उस रोटी को देखकर लालच आ गया। उसने अब यह सोचा कि यह रोटी कैसे भी करके इस कौए से मुझे लेनी है।

नहीं तो ये भोजन भी हाथ स्व निकल जाएगा।

   वह अब कौए से बातचीत की कोशिश करने लगी। कौए ने तो मुह में रोटी दबाई हुई थी अपनी चोंच से, तो वह कुछ भी उत्तर नहीं दे रहा था। तब लोमड़ी बोली,

” कौए भाई तुम कौन सा गाना गाते हो जो कि पूरा जंगल तुम्हारी तारीफों के पल बांधता रहता है। जरा मुझे भी तो सुनाओ।”

 कौए ने सोचा यह मेरी तारीफ कर रही है, अब इतनी जिद है इसकी तो अपनी सुरीली आवाज में गाना इसे सुना ही देता हूँ।” जैसे ही उसने अपना गाना गाने के लिए मुह खोला वैसे ही उसकी रोटी नीचे गिर गयी।

लोमड़ी ने उस पर झपट्टा मार लिया और रोटी को लेकर नौ दो ग्यारह हो गयी।

कौआ देखता ही रह गया।


सीख | Animal Stories in Hindi : : “दूसरों की फिजूल की बातों में  कभी नहीं फसना चाहिए।”

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Short Animal Stories in Hindi


” शेर और चूहा “


  एक बार की बात है। गर्मी के दिन थे। शेर अपने शिकार के लिए गूफ़ा से बाहर निकला हुआ था। वह धूप में जंगल मे घूमते घूमते बहुत परेशान हो गया था।

उसने थक कर फैसला किया कि वह अब थोड़ा आराम करेगा। शेर एक पेड़ के नीचे बैठ गया और आराम करने लगा।

    उस पेड़ के नीचे एक चूहा अपने बिल में सो रहा था। तब उसकी नींद खुल गयी। चूहे को शैतानियां करना बहुत अच्छा लगता था। वह उस जगह अकेला रहता था,

तो वह स्वयं को ही वहां का मालिक समझा करता था और बहुत सी उटपटांग हरकते भी करता था। वह बिल से बाहर निकला और अपनी शैतानियां उसने चालू कर दी।

गलती से अब वह फुदकते हुए शेर के पास चले गया। शेर तो सोया हुआ था तो शेर को कुछ फर्क नहीं पड़ा। और चूहे को भी पता नहीं चला कि वहाँ पर शेर उपस्थित है ।

अब चूहा नादानी में शेर के ऊपर चढ़ गया। शेर को गुदगुदी सी हुई तो शेर जग गया। शेर के जगने के बाद चूहे को एहसास हुआ कि जिसके ऊपर वह चढ़ा था वह दरसल एक शेर है।

अब डर के मारे उसकी कपकपी छूटने लगी। चूहे को समझ नहीं आ रहा था कि अब वह करे तो क्या करे।

    तभी शेर की नजर उस पर पड़ी शेर बोला, ” नन्हें प्राणी क्या तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता जो कि तुम मेरे ऊपर चढ़कर अपनी मनमानी कर रहे हो?

” तभी चूहे ने डर के मारे शेर की पूँछ के नीचे ही अपने आपको छिपा लिया। चूहे की इस हरकत पर शेर को बहुत हंसी आई और उसने चूहे से सामने आने के लिए कहा, चूहा शेर के सामने आकर चुपचाप खड़ा हो गया।

Animal Story in Hindi Moral Part- शेर ने कहा, ” जाओ मैं ने तुम्हें माफ किया। और ऐसे मदहोश रहकर कोई भी काम मत किया करो।”

  चूहा बहुत खुश हुआ और बोला, ” आपने आज मेरे प्राण बचाकर मुझे जीवनदान दिया है। मैं कभी भी आपके किसी काम आ सकूं तो मुझे बड़ी खुशी होगी।

” तब शेर ने सोचा एक छोटा सा जानवर मेरे किस काम का! शेर उसको अनदेखा कर के वहां से चला गया। चूहा भी अपने बिल में चला गया।

   कुछ दिन बीत गए। शेर फिर से जंगल मे शिकार के लिए घूम रहा था। जिस क्षेत्र में उस दिन वह गया वहां इंसानों ने एक जाल बिछा रखा था जिसमे कोई जानवर फंसे और वे उसको अपने साथ ले जाकर बेच सकें।

शेर उस ओर आया और जाल में फंस गया। शाम का समय था। शेर बहुत जोर जोर से दहाड़ने लगा। उसकी दहाड़ में कुछ दर्द था। उसकी आवाज पूरे जंगल मे गूंजने लगी ।

चूहा वहां से कुछ ही दूरी पर रहता था। उसने भी शेर की आवाज सुनी। वह फौरन शेर के पास पहुंच गया और शेर से कहा, ” आप ऐसे इसमें कैसे फंस गए। रुकिए मैं आपकी सहायता करता हूं।”

  तब शेर ने बोला, ” तुम क्या करोगे जाओ कोई और मदद लेकर आओ।”  चूहा मुस्कुराया और जाल के साथ कुछ करने लगा। शेर को आश्चर्य हो रहा था। असल मे चूहे के पास नुकीले दांत थे,

जिनकी सहायता से वह जाल को कुतर कुछ ही क्षणों में चूहे ने पूरी जाल को जगह जगह से कुतर डाला और शेर को उस जाल से आजाद करा। शेर को अचंभा हुआ कि इतना छोटा जानवर भी कुछ कर सकता है।

शेर ने चूहे को धन्यवाद दिया और चूहे को अपनी पीठ पर बैठा लिया फिर दोनो खुशी खुशी एक साथ वहां से चल दिये।


सीख | Animal Story in Hindi : ” कभी कभी जितना हम सोचते भी नहीं लोग हमारे उतने काम आ जाते हैं। इसलिए किसी को भी कम महत्वपूर्ण नहीं समझना चाहिए।”


” लालची कुत्ता “


Animal Kahani- एक बार एक कुत्ते को कहीं से एक रोटी मिली वह इसे अपनी बहुत बड़ी जीत समझ रहा था। क्योंकि इतना भोजन उसके हाथ पहली बार लगा था।

वह खुशी से झूम रहा था लेकिन रोटी को अपने से अलग नहीं होने दे रहा था। उसने रोटी को अपने मुह में दबा रखा था। अब उसको भूख लग चुकी थी।

उसने सोचा पहले एक एकांत जगह पर जाता हूँ जहां मुझसे मेरी रोटी कोई भी छीन न सके और मैं अपना भोजन चैन से खा सकूं।

   वह एकांत में गया और रोटी लेकर बैठ गया। वह रोटी मुह में डालने ही वाला था कि उसको प्यास लग गयी उसने सोचा कि पहले पानी पी लेता हूँ गला सूखा हुआ होगा तो रोटी कैसे खाऊंगा,

Animal Kahani Moral Part- और फिर इसका स्वाद भी नहीं आएगा। यह सोचकर वह तालाब की ओर चला गया। जैसे ही उसने पानी मे देखा तो,

उसको वहां एक और कुत्ता दिखाई दिया जो कि पानी के अंदर था।

उसके मुंह मे भी रोटी थी, जिस प्रकार बाहर के कुत्ते के मुह में थी।

    वह अपनी परछाई को ही दूसरा कुत्ता समझ रहा था।

 कुत्ते के मुह में तालाब में अपनी परछाई के पास एक रोटी देख कर लालच उतपन्न हो गया। अब कुत्ते ने सोचा, यदि मैं किसी तरह से इस कुत्ते की रोटी छीन लूं तो मेरे पास दो रोटियां हो जाएंगी जिससे कि मेरा पेट पूरा भर जाएगा।

   यह सोचकर वह दुसरे कुत्ते पर झपटने के लिए तालाब मे कूद गया। तालाब में तो कोई भी नहीं था। कुत्ते को अब सारी बात समझ आ गयी। उसे तो तैरना भी नहीं आता था।

वह पानी मे थोड़ी देर छटपटाता रहा और फिर वहीं डूब कर मर गया।


सीख | Story of Animals in Hindi : ” लालच बुरी बला है। कभी भी किसी की भी चीज को देखकर लालच नहीं करना चाहिए। “


Story of Animals in Hindi


” खरगोश की बारी “


     एक बार एक जंगल मे एक शेर का आतंक बहुत बढ़ गया। वह जंगल के बहुत से जानवरों का शिकार एक ही दिन में कर डालता था। सभी उसके अत्याचार से बहुत परेशान थे।

   2-3 रोज के कर कर के बहुत से जानवर शेर ने मार डाले। अब जंगल मे जानवरों की संख्या भी कम होने लगी। सभी जानवरों को इसकी चिंता हुई।

सभी जानवर एक दिन मिले और इस विषय पर बात करने लगे। सभी का एक ही मुद्दा था कि, यदि इसी प्रकार शेर जंगल के जानवरों को मारता रहेगा तो जल्द ही जंगल से जानवर लुप्त हो जाएंगे।

भालू थोड़ा समझदार था उसने कहा, ” हमे इस बारे में शेर से बात करनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि वह हमारी बात जरूर सुनेगा।” भालू सयाना था और बुध्दिमान भी।

सभी ने उसकी बात मानी तब सभी जानवर एक साथ चल दिये शेर की गुफा की ओर।

   सभी ने एक साथ शेर की गुफा में प्रवेश किया और अपनी बात शेर के सामने रखी। शेर ने धैर्यपूर्वक सभी की बात सुनी और बोला, ” मुझे कोई दिक्कत नहीम है।

मैं तो जंगल मे शिकार ही नहीं करूंगा यदि तुम सभी मेरे खाने का इंतजाम रोज का रोज कर दो तो।”

  सभी जानवर अब सोचने लगे। तब भालू बोला, ” हमे आपकी राय मंजूर है लेकिन आपको हमसे वादा करना होगा कि आप किसी भी जानवर को नहीं मरेंगे।” शेर मान गया।

  अब रोज एक -एक करके किसी न किसी जानवर की बारी लगाई जाती औऱ उसे विवश होकर स्वंय ही शेर के भोजन के लिए गुफा में जाना पड़ता।

   यही सिलसिला चलता गया। अब बारी आई खरगोश की। वह बहुत ही चालाक था। खरगोश ने अपने बचने की योजना पहले से ही बना रखी थी। वह आराम से खेलते कूदते हुए शेर की गुफा में गया।

उसने शेर को प्रणाम किया। शेर तो खाना न आने की वजह से गुस्से से लाल हुआ पड़ा था। उसने गुस्से से दहाड़ते हुए बोला, ” समय देखा है अब आ रहे हो तुम ऊपर से आज भूख ज्यादी लगी है,

तो जानवरों ने इतने पिद्दी से खरगोश को भेजा है। लगता है वे अपनी बाते भूल रहे हैं। उनको भी अब सबक सिखाना होगा।”

   तब खरगोश कोमल स्वर में बोला, ” नहीं महाराज ऐसी कोई बात नहीं है। आपको पता है जंगल में एक दूसरा शेर आ गया है। “

“दूसरा शेर?” शेर ने चकित होकर बोला।

फिर खरगोश बोला, ” महाराज ! हाँ दूसरा शेर! जानवरों ने आपके लिए मुझ जैसे ही 4 खरगोश और भेजे थे। हम कुल 5 थे। लेकिन हमारा सामना रास्ते में उस दुसरे शेर से हो गया।

उसने हमारी एक न सुनी और चारों ख़रगोशों को कहा गया। जब मैं ने उससे कहा कि हम तो आपका भोजन हैं तब वह हंसने लगा और बोला, इस जंगल का एक ही राजा है और वो हूँ मै।

जाओ बोल दो अपने राजा से। महाराज! मैं तो जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भागा हूँ वहां से। आपको उसकी खबर देने के लिए।”

Animal Story in Hindi Moral Part- यह सब सुनकर शेर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शेर बोला,  तुम झट से मुझे उसके पास ले चलो आज फैसला हो ही जएगा,

कि जंगल का असली शेर है कौन!

   खरगोश खुश हुआ। यह सब खरगोश की ही युक्ति थी उसने अपनी युक्ति में शेर को फंसा लिया था। अब वह शेर को ले कर चल दिया।

   खरगोश शेर को एक कुँए के पास लेकर चला गया। खरगोश बोला , ” महाराज! यहीं रहता है वह इस कुँए के अंदर।”

शेर ने कुँए के अंदर देखा तो उसे अपनी ही परछाई दिखाई दी। जब वह दहाड़ा तो परछाई ने भी वैसा ही किया। उसे लगा कि पानी का शेर दहाड़ रहा है।

अब शेर दुसरे शेर को मारने के उद्देश्य से पानी में कूद गया। वहीं कुँए में डूबकर ही उसकी मृत्यु हो गई।

वापस लौटकर खरगोश ने यह घटना पूरे जंगल वासियों को सुना दी। सभी बहुत खुश हुए और खरगोश को शाबाशी भी दी। खरगोश ने पूरे जंगल को शेर के आतंक से मुक्त कर दिया।


सीख | Animal Stories in Hindi : ” कठिन स्थितियों में बुध्दि का प्रयोग करना चाहिए।”


” बन्दर और गुल्ली “


Animal Stories in Hindi- एक बार की बात है। एक बढ़ई जंगल मे लकड़ियों को चीरने का कार्य कर रहा था। वह सुबह से ही जंगल मे कार्य कर रहा था।

पहले वह जंगल से लकड़ियों को काटकर लेकर आया।

अब वह अपनी कुल्हाड़ी से लकड़ियों को चीर रहा था। लकड़ियों को चीरकर वह एक गट्ठा बना रहा था ताकि उसको अपने घर ले जाने में आसानी हो सके

   पास के पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था। वह बढई को लकड़ियां चीरते हुए बहुत समय से देख रहा था। और उसे बहुत  मजा भी आ रहा था। वह सोच रहा था कि यह कार्य तो बहुत आसान है।

मैं भी इस कार्य को आसानी से कर सकता हूँ।

   दोपहर हो गयी थी। खाने का समय भी हो रहा था। बढई को भूख भी लग रही थी। अब उसने सोचा कि मैं खाना खाकर ही कार्य आगे बढ़ाऊंगा। उस समय जो लकड़ी वह चीर रहा था, वह आधी ही चिरी हुई थी।

निशानी के तौर पर उसने एक छोटी सी लकड़ी की गुल्ली पकड़ी और वह उस चीरे हुए भाग में लगा दी। फिर वह खाने के लिए चला गया।

Animal Kahani Moral Part- बन्दर ने जब वह गुल्ली देखी तो उसका ध्यान लकड़ियों और बढई से हटकर उस गुल्ली पर ही आ गया।

जैसे ही बढ़ई खाने के लिए गया, वैसे ही बन्दर, पेड़ से उतर कर लकड़ी के पास आ गया।

वह उस चीरे हुए भाग के ऊपर ही बैठा हुआ था। उसे पता नहीं चला लेकिन उसकी पूंछ लकड़ी के चीरे हुए हिस्सों के बीच मे फंस गई। बेसुध बन्दर ने उस लकड़ी की गुल्ली को बाहर निकाल लिया।

जैसे ही उसने गुल्ली को बाहर निकाला वैसे ही उसकी पूंछ बुरी तरह से लकड़ी के दोनो हिस्सो के बीच फंस गई।

    उसने बहुत कोशिश की , कि वह अपनी पूछ निकाल सके, लेकिन वह अपने प्रयासों में असफल रहा। बढई भी अब भोजन करके आ रहा था। जैसे ही बन्दर ने बढई को देखा,

वैसे ही बन्दर ने पूँछ में जोर से झटका लगाया उसकी पूंछ आधी वहीं पर कट गई। पूरी लकड़ी लहूलुहान हो गयी। वह वैसी ही स्थिति में वहां से भाग कर चला गया।


सीख | Animal Story in Hindi : ” जिन चीजों के विषय मे जानकारी न हो, उन चीजों को छेड़ना स्वंय के लिए खतरा बन सकता है।”


Animal Kahani


” गधे की ईर्ष्या “


   एक व्यापारी ने अपने घर पर कुत्ता और गधा दोनों पाल रखे थे। कुत्ता दिन भर घर की रखवाली करता और गधा व्यापारी का वजनदार समान इधर-उधर ले जाया करता था।

   गधा कुत्ते से ईर्ष्या किया करता था। उसे लगता था, कि मालिक उससे अधिक प्रेम करते हैं। और उससे कम!

वह अपने खाली समय में यही सोचता रहता था कि, कुत्ते के तो कितने ठाठ है। आराम से दिन भर घर के अंदर ही रहता है। इतना अच्छा अच्छा और महंगा महंगा खाना खाता है।

आखिर काम ही क्या है उसका बस यदि कोई घर पर अजनबी आए तो उस पर भौंक देना। इस के लिए ही मालिक ने उसे अपने सर पर चढ़ा रखा है।

उसकी पीठ पर तो मालिक कितने प्यार से हाथ फेरते हैं और मेरी पीठ पर तो डंडे बरसाए जाते हैं। मैं तो इस कुत्ते से तंग आ गया हूँ। अगर यह नहीं होता तो इसके हिस्से का प्यार भी मालिक मुझसे ही करते।

    फिर उसने सोचा, कुत्ता भी तो मालिक को खुश रखता है। जब वो घर आते हैं तो उनके ऊपर प्यार से भौंकता है। पूँछ हिलाता है। और अपने आगे के पैरों की सहायता से उनके ऊपर चढ़ जाता है।

शायद तभी मालिक उससे प्रसन्न रहते हैं। आज मैं भी मालिक के आने पर ऐसा ही करूँगा फिर मालिक मुझसे भी खुश हो जाएंगे।

Animal Story Moral Part-  शाम हुई व्यापारी घर पहुंचा। गधे ने तो पूरी तैयारी कर के रखी थी। उसने व्यापारी के आते ही कुत्ते से भी पहले व्यापारी को देख ढेंचू ढेंचू करना शुरू कर दिया,

और अपनी पूँछ भी हिलाने लगा।

फिर वह व्यापारी के और करीब आया और अपने आगे के पैरों को उठाकर व्यापारी के उपर चढ़ गया। व्यापारी यह सब देख कर अचंभित रह गया। उसने सोचा गधा आज पागल हो गया है।

तभी ऐसी हरकतें कर रहा है। इसका इलाज करना पड़ेगा।

   तब व्यापारी ने दरवाजे के पीछे से अपना मोटा डंडा निकाला और गधे को उससे खूब पीटने लगा। बेचारा गधा, प्यार पाने चला था और डंडे खाकर आ गया।


सीख | Story of Animals in Hindi : ” ईर्ष्या या द्वेष भाव किसी के प्रति भी नहीं रखना चाहिए। इससे हमारा ही नुकसान होता है।”


” शेर का हिस्सा ”


Animal Stories in Hindi- बहुत समय पहले, जंगल मे एक दिन शेर की सहसम्मति से भेड़िया, लोमड़ी और शेर जंगल मे शिकार ढूंढने के लिए निकले। शेर की अगुवाई में ही भेड़िया और लोमड़ी कार्य कर रहे थे।

   भेड़िया और लोमड़ी दोनो ही कई दिनों के भूखे थे, जब वे दोनों एकसाथ शेर के पास मदद मांगने के लिए गए तो शेर को पहके तो गुस्सा आया।

लेकिन लोमड़ी चालाक थी तो उसने शेर को बहला फुसला कर उसे उनकी मदद करने के लिए राजी कर लिया। तब सभी लोग एक साथ जंगल मे निकल पड़े।

  सभी दबेपाँव आगे को बढ़ रहे थे। शेर जैसा जैसा बोल रहा था भेड़िया और लोमड़ी वैसा ही कर रहे थे । उन्हें अधिक इंतजार नहीं करना पड़ा। शीघ्र ही उन्हें एक मोटा तगड़ा भैंसा मिल गया।

भेड़िये और लोमड़ी को उसे मारने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वह भैंस बहुत शक्तिशाली दिख रहा था। तो शेर ने फैसला किया कि इसका शिकार तो अब मुझे ही करना पड़ेगा।

    शेर ने झाड़ी के पीछे से जोर से छलांग लगाई और वह शेर , भैंसे के ऊपर टूट पड़ा। कुछ ही क्षणों मे शेर ने भैंसे को मार डाला।

अब भेड़िया और लोमड़ी भी आगे शिकार की जगह आ गए। लोमड़ी के मुंह मे तो पानी आ रहा था। उसने फटाफट शिकार के तीन हिस्से कर दिए। शेर को गुस्सा आ गया। शेर ज़ोर से दहाड़ कर बोला,

” दूर हट जाओ सब मेरे शिकार से!” दोनो की हालत अब खराब हो गयी। लोमड़ी ने घबराकर धीमी आवाज मे कहा, ” क्या हुआ मालिक हमसे कोई गलती हो गयी?”

Animal Kahani Moral Part- तब शेर बोला, “यह शिकार मेरा है। इसे छूने की हिम्मत भी न करना। मैं ने स्वयं ही इस शिकार को पाया है।

अब यह मेरा ही हुआ। और जो तुमने इसके तीन हिस्से किए हैं वो भी मेरे ही है।

पहला तो जो मैं ने शिकार किया उसका हिस्सा। और दूसरा, मेरे बच्चों का । अब रही तीसरे हिस्से की बात तो तुम दोनों साथ मे आओ मुझे कोई दिक्कत नहीं है,

मुझसे मुकाबला करो और ले जाओ इस हिस्से को।”

लोमड़ी और भेड़िया तो पहले से ही डरे हुए थे। उन्होंने शेर को पलटकर कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप निराश होकर वहां से चले गए। बेचारे मदद लेकर आये थे,

और मंजिल के इतने करीब से भी वे भूखे और खाली हाथ ही लौट गए।


सीख | Animal Stories in Hindi : ” जो बुद्धिमान और ताकतवर होता है, वही अपनी बात दूसरों से मनवा सकता है। कहा भी गया है जिसकी लाठी उसकी भैंस।”


Animals Stories in Hindi


” गधे का दिमाग “


    एक घने जंगल मे एक शेर रहता था। अब वह बूढ़ा हो चला था। उसकी गूफा में एक शियार मंत्री के पद पर कार्यरत था। शेर जो कुछ भी शिकार किया करता , उसका बचा हुआ भाग वह शियार को दे दिया करता था।

सियार का यह मंत्री पद का मेहनताना हुआ करता था।

  एक दिन शेर को बहुत तेज भूख लगी थी। शेर ने शियार को अपने पास बुलाया और कहा, ” मंत्री मेरी  बात ध्यान से सुनो। मैं बहुत भूखा हूँ बहुत तेज भूख लगी है। और धीरे धीरे मैं बूढ़ा भी हो रहा हूँ,

आज मुझे बाहर जाकर शिकार करने की हिम्मत नहीं आ रही है, क्या तुम मेरे लिए आज गुफा में ही किसी प्राणी को लेकर आ सकते हो? जिसे मारकर मैं अपनी भूख मिटा सकूं! और तुम्हारा हिस्सा तो तुम्हें मिल ही जाएगा।

जाओ तुम एक शिकार मेरे लिए यहाँ ढूंढ कर ले आओ।”

   मंत्री को अब अपने महाराज की आज्ञा तो माननी ही थी। सियार ने हाँ कर दी। अब वह बाहर जंगल की ओर निकल गया । मन ही मन वह सोच रहा था कि,

शेर को वचन तो दे दिया लेकिन ऐसा कौन सा जानवर होगा जो खुशी खुशी मरने के लिए तैयार हो जाएगा। शेर भी वैसे तो बड़ा राजा बना फिरता है, आज ऐसी मूर्खतापूर्ण बात कर रहा है।

   अब सियार सोचने लगा। कुछ देर सोचने के बाद उसे एक युक्ति सूझी। और जल्द ही उसकी तलाश भी खत्म हो गयी। उसे पास में ही एक गधा दिखा। तो युक्ति के अनुसार वह पहले गधे से मिला और फिर उससे बोला,

” अरे गधे मित्र तुम यहां क्या कर रहे हो! तुम्हें पता नहीं है क्या शेर ने तो तुम्हें अपना मंत्री घोषित किया है। तुम्हें तो अभी शेर के पास होना चाहिए। शेर तो ऐसे नाराज हो जाएगा।

मैं ने शेर की गूफ़ा देखी है चलो मैं तुम्हें वहा छोड़कर आता हूँ।”

गधा तो मंत्री वाली बात सुनकर खुशी से फूला नहीं समा रहा था। उसे लग रहा था कि अब उसका जीवन सफल हो गया है, एक अच्छा कार्य उसे मिल गया है।

सियार बात करते करते उसे शेर की गुफा के अंदर ले गया।

  जैसे ही शेर ने गधे को देखा वह उस पर टूट पड़ा और उसको मार डाला। शेर भोजन करने से पहले स्नान करना चाहता था। अतः उसने

Animal Story Moral Part- सियार से कहा,

” तुम भोजन का ध्यान रखना मैं अभी आता हूं स्नान कर के।”  सियार तो स्वामिभक्त था वह मान गया।

   लेकिन सामने स्वादिष्ट भोजन देख कर उससे रहा नहीं गया। उसने कुछ सोचा फिर झट उसका दिमाग खा गया।

इतने में शेर भी वापस आ गया। जब दोनों भोजन कर रहे थे तो सियार से शेर ने पूछा, ” इसका दिमाग कहाँ है?”

सियार बोला, ” महाराज आप कैसी बातें कर रहे हैं। गधे का तो दिमाग होता ही नहीं। यदि होता तो वह स्वयं ही यहां शिकार बनने के लिए यहाँ आपकी गुफा में क्यों आता!”

  शेर उसकी बात मान गया अब दोनो फिर से शिकार का आनन्द लेने लगे।


सीख | Animal Story in Hindi : ” धूर्त अपनी चालाकी से कभी नहीं चूकता। “


” शिकारी कुत्ते और नन्हा कबूतर “


Animal Stories in Hindi- एक गांव में एक किसान रहता था। वह कड़ी मेहनत करके अपने खेत मे अनाज उगाता था। परंतु जब भी उसकी फसल तैयार होती थी,

तो उसे किसान के काटने से पहले ही, कबूतर और कौए आकर नष्ट कर जाते थे।

यह हर बार की बात हो गयी थी। अब किसान उन सभी पक्षियों से बहुत तंग आ चुका था। किसान ने अब ठान ही लिया था कि कैसे भी कर के मुझे इन पक्षियों को पकड़ना ही होगा।

   एक बार जब उसकी फसल तैयार होने वाली थी तब किसान ने अपने खेत मे एक जाल बिछा दिया और ऊपर से दाने भी डाल दिये।

ऊपर से चिड़ियाओं ने देखा तब उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि इस बार फसल इतने जल्द पक गयी। सभी चिड़ियाएं आई और दाना चुगने लगीं। लेकिन वे सब उड़ नहीं पाई।

क्योंकि अब वे बुरी तरह से किसान के बिछाए हुए जाल में फंस  चुकी थी। उनको समझ मे नहीं आ रहा था कि अब वे करें तो क्या करें।

   तभी किसान पक्षियों का कोलाहल सुनकर वहां अपने खेत मे पहुँच गया। खेत मे जब उसने देखा तो जाल में फंसी हुई सारी  चिड़ियाएं ,काले काले कौए थे।

अब किसान को कौओं पर बहुत गुस्सा आया वह मन ही मन सोच रहा था कि अच्छा तो मेरा नुकसान करने वाले कौए थे! लेकिन अब तो इनके कोलाहल का कोई फायदा ही नहीं है।

ये अब कुछ नही कर सकते । मैं इनको सबक सिखा कर रहूँगा। अब ये बुरी तरह से मेरे जाल में फंस चुके हैं।

  तब जाल में से कौओं की कांव कांव के बीच से एक करुण आवाज आ रही थी। वह आवाज एक नन्हें कबूतर की थी। किसान की नजर उस पर पड़ी। किसान को उस पर दया आई।

Animal Kahani Moral Part- वह बोला, ” अरे तू यहां इन काले कौओं की संगति में कैसे पड़ गया।

लेकिन अब कुछ भी नहीं हो सकता जिस प्रकार गेंहू के साथ घुन भी पिस जाते हैं!

ठीक उसी प्रकार से अब कौओं के साथ साथ तू भी मेरा दुश्मन बन गया है। तुझे भी मैं नहीं छोड़ूंगा। इतना कहकर उसने अपने शिकारी कुत्तों को एक इशारा किया।

सभी किसान के इशारे पर खेत मे आ पहुंचे और सभी कौओं और उस नन्हे से कबूतर को मार डाला।


सीख | Story of Animals in Hindi : ” बुरी संगति का परिणाम भी बुरा ही होता है।”


Conclusion


आज आपने पढ़ी Animal Stories in Hindi. आशा करते हैं, आपको हमारी Animal Story in Hindi पसन्द आईं, और इनसे कुछ नया सींखने को मिला, ऐसी ही अन्य रोचक कहानी पढ़ने के लिए बने रहें sarkaariexam के साथ।

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