Great Bagula aur Kekda ki Kahani | Stork and Crab Story- सारस और केकड़ा

प्रेरणादायक Bagula aur Kekda ki Kahani. आशा करते हैं, आपको हमारी यह Stork and Crab Story कहानी पसन्द आएगी, और इससे बहुत कुछ सींखने को भी मिलेगा।


bagula aur kekda ki kahani


Bagula aur Kekda ki Kahani


   बहुत समय पहले की बात है। प्राचीनकाल में विजयगढ़ नामक राज्य के समीप एक बहुत बड़ा तथा सुंदर जंगल था। उस जंगल में बहुत से पशु पक्षी रहते थे।

जंगल के बीचोबीच एक तालाब था। तालाब के बीच मे होने की वजह से जंगल और भी अधिक सुन्दर लगता था।

    तालाब में बहुत सारी मछलियां केकड़े आदि रहते थे। वहीं तालाब के आस पास सारस भी रहता था। सारस अब बूड़ा हो चला था। सारस को अपना भोजन पकड़ने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। जो कि उस से अब नहीं हो पा रहा था।

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  एक दिन वह तालाब के किनारे आया और वही से तालाब में तैरती मछलियों औऱ केकड़ो को देखने लगा।

वह सोच रहा था, मुझमें अब इतनी शक्ति तो रही नहीं कि मैं अब इनका शिकार कर सकूं और भूख भी सहन नहीं हो रही है। मुझे अपने भोजन के लिए कुछ अन्य उपाय करना ही पड़ेगा। अन्यथा मैं बुढ़ापे से पहले भूख से ही मर जाऊंगा।

    यह सोचकर वह अपने आवास पर चले गया। जब वह सो रहा था तो उसे एक सपना आया। सपने में उसे बहुत सारी मछलियां अपने भोजन के रूप में दिख रही थीं।

जैसे ही वह मछलियों को खाने लगा,

उसका स्वप्न टूट गया और वह वास्तविकता में आ गया। उसे बहुत बुरा लगा। अब वह अपनी निर्बलता के बारे में सोचने लगा। तब उसे ध्यान आया कि, यदि वह कोई ऐसी योजना बनाए जिससे कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे तो मजा ही आ जाएगा।

   अब वह इस कूटनीति को आगे बढ़ाने के बारे मे सोचने लगा। उसने मन ही मन योजनाओं के कई ख्याली पुलाव पका लिए थे। लेकिन किसी भी योजना को पूर्ण करने के लिए उसके पास उतना बल नहीं था।

    फिर उसे एक उपाय सूझा, उसके बाद वह खुश होकर सो गया।

अगले दिन वह उठा और सीधे चल दिया तालाब की ओर। वहां पहुंचकर वह कुछ नाटक करने लगा और आकाश की ओर देखकर बड़बड़ाने लगा। तालाब में तैर रही कुछ मछलियों ने उसे देख लिया।

और वे उसे देखकर आपस मे बात कर के हंसने लगी। सब उसे पागल समझ रहीं थी। तब एक मछली ने सारस से पूछा, ” सारस दादा! यह आप क्या कर रहे हो?

आपके सामने आपका मनपसंद आहार तैर रहा है, फिर भी आपका ध्यान यहाँ नहीं है। कहीं आपका मरने से पहले ही भगवान से सम्पर्क तो नहीं हो गया! हा हा हा”

   इस बात पर उसकी अन्य साथी मछलियां भी हंसने लगीं। अब सारस ने उनकी ओर देखा और कहा, “ध्यान तो मेरा सब जगह रहता है। बस मैं तो अपने आहार की ही गिनती कर रहा था।”


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“आहार? कौन सा आहार?” मछली बोली।

   तब सारस बोला, ” अरे तुम्हें उस नए तालाब के बारे में नहीं पता क्या!” शायद नहीं पता होगा। मैं बताता हूँ। इस तालाब में सुनामी आने वाली है और यह तालाब उसके बाद किसी दलदल में बदल जाएगा।

मुझे तो अपनी चिंता है।

जब से मुझे यह बात पता चली मैं ने अपने लिए नया स्थान ढूंढना शुरू कर दिया था। और देखो कल ही मेरी खोज पूरी हुई और मुझे नई जगह मिल भी गयी। मुझे एक नया तालाब मिला है। जो इस तालाब से बहुत बड़ा है। और उसमें मेरा ठीक ठाक गुजारा भी हो जाएगा।”

   मछली को सुनामी आने की बात से बहुत डर लग गया। उसने तालाब में सुनामी आने की बात पूरे तालाब में फैला दी। कुछ ही समय मे वहां तालाब के सारे जीव एकत्रित हो गए।

Bagula aur Kekda ki Kahani Middle Part- सभी जानवर सुनामी की बात सुनकर इतना डर गए थे कि वे अब सारस से अपनी शत्रुता भुलाकर उस नए तालाब के बारे में जानना चाहते थे।

सारस भी सबको देखकर खुश हो रहा था क्योंकि, सब उसकी बातों में फंस चुके थे। यह सब उसकी योजना थी औऱ उसकी योजना के हिसाब से ही सब हो रहा था।

    अब तालाब से एक आवाज आई, वह केकड़े की थी।

वह अपने झुंड में सबसे चालाक और बुद्धिमान था। उसने कहा, ” सारस दादा! क्या सच मे सुनामी आने वाली है हमारे प्यारे तालाब में! हम ने तो पहले ऐसा कभी सुना नही कि किसी तालाब में कभी सुनामी आई हो.”

    सारस कुछ सोचकर बोला, ” अरे केकड़े भाई! क्या जो कभी नही हुआ वो अब नही होगा? और यह पक्की खबर है कि हमारा यह तालाब जंगल के बीचोबीच है।

यह तालाब ही नहीं यह पूरा जंगल इस सुनामी की वजह से खतरे में पड़ गया है। सभी जानवर भी धीरे धीरे यहाँ से पलायन कर रहे हैं।”

सारस की ऐसी बात पर केकड़ा भी डर गया और उससे पूछने लगा, “तो क्या इससे बचने का कोई उपाय है?”

  केकड़े की बात पर सारस मुस्कुराया और बोला, “नया तालाब ही इसका एकमात्र उपाय है। वैसे वो जगह तो मैं ने अपने लिए ढूंढी है, लेकिन तुम सब चाहो तो मैं तुम्हारी वहां जाने में सहायता भी कर सकता हूँ।”

    सब ने आपस मे इस बारे में बात की, और सब नए तालाब में जाने के लिए तैयार हो गए। सभी केकड़े भी राजी हो गए।

    अब सारस के तो मन मे लड्डू फूटने लगे। उसे अपने भोजन का जरिया मिल चुका था। उसने कहा, ” मैं ऐसे तुम सबको एक साथ तो वहा नहीं ले जा सकता। और तुम सब खुद चलकर भी वहाँ नही जा सकते क्योंकि वह बहुत दूर है।

मछलियां तो रस्ते में ही मर जाएंगी। इसलिए मैं रोज एक एक कर के तुम सभी को उड़कर वहां पहुंचा दूँगा। कल को एक मछली तैयार रहना।”

  सारस इतना कहकर वहां से चला गया। सभी जलीय जीवों में बहुत उत्साह था।  उन्हें सारस के गंदे विचारों की भनक तक नहीं थी। वे सब खुश थे।

अगला दिन हुआ, मछली तालाब के किनारे आई। सारस भी आ गया। मछली को जाते हुए देखने के लिए और मछलियां भी वहाँ आई।

   सारस ने एक मछली को उठाया अपनी पीठ पर रखा और उड़ चला।

 अगले दिन फिर एक मछली की बारी आई।

The Stork and The Crab Story in Hindi Moral Part- अब केकड़ा गुस्सा हो गया। वह सारस के पास आया औऱ बोला,”

आप रोज मछलियों को ही नए तालाब में ले जाते हो हमारी बारी कब आएगी?”

  तब सारस बोला,” चिंता क्यो करते हो? कल तुम्हारी ही बारी आएगी।”

अगली सुबह केकड़ा तैयार था। सारस आया और उसको अपने पीठ पर बैठाकर उड़ चला। वह मन ही मन सोच रहा था कि, रोज मछलियों का ही मांस खाना ठीक नहीं होता आज केकड़े को खाकर मजा आ जाएगा।

    सारस उड़ता जा रहा था। बहुत देर हो गयी लेकिन दूर दूर तक कोई तालाब नहीं दिख रहा था। केकड़े को शक हुआ। अब उसे जमीन पर पड़ी, मछलियों के कंकाल दिखाई देने लगे। वह अब पूरी बात समझ गया।

उसने सारस से कहा, ” मुझे तुम्हारी सच्चाई पता चल गई है। तुम हमे मारने के लिए तालाब से यहां ला रहे हो”

   सारस मुस्कुराया औऱ बोला, ” तुम अकेले मेरा क्या कर लोगे मैं ने तुम्हें भी मूर्ख बनाया और तुम्हारे सभी बचे हुए साथी भी मेरा भोजन बनेंगे। कोई कुछ नही कर पाएगा।”

  केकड़े को बहुत क्रोध आया उसने पीठ से ही अपने आगे के हाथों से उस सारस की  गर्दन जकड़ ली। सारस वहीं तड़प तड़प कर मर गया।

    केकड़े ने वापस जाकर यह पूरा किस्सा तालाब के जीवों को बताया। सभी ने केकड़े को उनकी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। अब सब सुरक्षित थे।


सीख | the stork and the crab story in hindi : ” स्वार्थ के लिए की गई बेईमानी का एक न एक दिन अंत जरूर होता है।”

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Conclusion | सारस और केकड़ा


आज आपने पढ़ी Bagula aur Kekda ki Kahani. आशा है आपको the stork and the crab story in hindi पसन्द आयी, अगर आयी तो बताइए कमैंट्स में और बने रहिये sarkaariexam के साथ।

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