30+ Special Bhagavad Gita Quotes in Hindi | श्रीमद्भागवत गीता उपदेश

प्रेरणादायक Bhagavad Gita Quotes in Hindi. आशा करते हैं, आपको श्रीमद्भागवत गीता के इन अनमोल वचनों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

Geeta Quotes in Hindi जिन्हें आप अपने जीवन मे निवेश करके सफलता प्राप्त कर सकेंगे।


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Bhagavad Gita Quotes


◆  ” यह तीन द्वार आपको नर्क की ओर ले जाते हैं,

1.क्रोध

2. लोभ

3. वासना


अर्थात :- मनुष्य के कर्म ही उसकी नियति तय करते हैं, कहा भी जाता है कि हमें अपने कर्मों का फल इसी जन्म में किसी न किसी रूप में मिल ही जाता है। हमारे कर्मों के कारण ही हमे मरणोपरांत ईश्वर के न्याय द्वारा स्वर्ग अथवा नर्क का भोगी बनना पड़ता है।

यदि हमने जीवन में अच्छे कर्म किये हैं तो हम निश्चित रूप से स्वर्ग की ओर बढ़ेंगे, और यदि हम बुरे कर्म करते हैं तो हम स्वयं अपने लिये नरक के द्वार खोलते हैं। अतः हम सभी को अच्छे कर्म करने चाहिए, ताकि हम सभी स्वर्ग के द्वार अपने लिए खुलवा सकें।


◆  “यदि आप किसी वस्तु अथवा लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं तो, अपना लक्ष्य बदलने की बजाय आपको अपने प्रयास और रणनीति बदलने की आवश्यकता है।”


अर्थात :- कोई भी कार्तव्य या फिर  किसी  लक्ष्य को प्राप्त करना उतना कठिन नहीं होता जितना कि हम अपने मन में सोच लेते हैं। हमें सर्वप्रथम एक लक्ष्य चुनना होगा। लक्ष्य को चुनने के बाद हमें उसकी सफलता के मार्ग पर चलना होगा।

यह थोड़ा सा कठिन जरूर है परंतु असम्भव नही। यदि आप इस लक्ष्य की प्राप्ति में असफल भी होते हैं तो निराश न हों अपनी गलती से सीख कर एक बार और प्रयास करना चाहिए। सफलता अवश्य मिलेगी।


◆ ”चाहें अब हो या आने वाले समय में संसार में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि किसी इंसान ने अच्छे कर्म किये हैं औऱ उसका अंत बुरा हुआ हो।”


अर्थात :-  मनुष्य अपने कर्म से बंधा हुआ होता है। वह मनुष्य योनि में भी अपने पिछले जन्म के कर्मों की वजह से ही आता है। मनुष्य को उसके पिछले जन्म के गलत कार्यों को सुधारने का, नए जन्म में एक मौका मिलता है। और यदि वह सच्चाई और अच्छाई की राह पर चलकर अच्छे कर्म कर रहा है तो अंत में निश्चित ही उसके साथ अच्छा होगा।यदि ऐसा नहीं हुआ तो समझ लेना चाहिए कि वह अंत ही नहीं है।


◆  “फल की अभिलाषा को छोड़ जो व्यक्ति कर्म करने पर अधिक ध्यान देता है वही अपने जीवन में सफल हो पाता है।”


अर्थात :- निरन्तर कर्म करते रहना ही हमारी नियति है। परन्तु फल की आशा में हम अपने कर्म को रोक देते हैं जो कि हमारे फल को हमसे और दूर कर देता है। हमें निरतंर कर्म करते रहना चाहिए।

जीवन हमें अनेक अवसर देता है अपने आपको सिद्ध करने का , बस हमें उसको पहचानने की देर है, उस अवसर को सुनहरा अवसर बनाकर, उसके लिए  प्रयास जारी रखने चाहिए ताकि जब सफलता मिले तो लगे कि जीवन में कुछ किया है।


◆  ” मन की प्रकृति अशांत होती है, इसका नियंत्रण कठिन है, परन्तु अभ्यास से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।”


अर्थात :- हमारा मन बहुत ही चंचल होता है। इसे स्थिर करना बहुत ही कठिन कार्य है। हमारा मन जो कहता है हम वही करते हैं, लेकिन होना यह चाहिए जैसा हम कर रहे हैं वैसा ही हमारा मन भी चाहे। परंतु यह केवल मन को अभ्यस्त करके ही सम्भव है। मन के जितने चंचल कारक को नियंत्रण करना विश्व को जीते जाने के बराबर है।

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Geeta Quotes in Hindi


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◆ ” मृत्यु के समय जो मेरा (श्री कृष्ण) का ध्यान करता है, वह मेरे धाम में मुझसे मिलता है।”


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes in Hindi :- जब अंत समय निकट होता है तो, सभी अपने अपने कर्मों को याद करते हैं। अब उनको आगे की चिंता सताती है कि उनको स्वर्ग की प्राप्ति होगी या नहीं।

परन्तु भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार जो भी अपने अंत समय में उनका सुमिरन करता है वह सभी बन्धनों से मुक्त होकर उनसे उनके धाम में मिल सकता है। अतः सभी को अपने सुख हो या दुख किसी भी समय ईश्वर को याद करते रहना चाहिए। क्या पता कौन सा क्षण आखरी हो।


◆  “किसी दूसरे के जीवन के साथ, पूर्ण त्याग और समर्पण से जीने से अच्छा है कि हम अपने ही भाग्य औऱ नियति के साथ अपूर्ण रूप से जियें।”


अर्थात | Geeta Quotes in Hindi :-  किसी अन्य के साथ उसकी शर्तों पर जीना, उसका गुलाम बनने जैसा है। ईश्वर कभी नही चाहेंगे कि उनकी बनाई हुई संरचनाएं किसी की गुलामी करें। बल्कि वे तो स्वयं पे संयम रख , जितना हो सकता है अपने लिए स्वयं सभी चीजों की व्यवस्था कर, जीवन व्यापन करने पर बल देते हैं। सभी ईश्वर की ही सन्तानें है। अतः सबको अपना अपना जीवन अपने तरीकों से जीना चाहिए। न कि दूसरों के अधीन होकर।


◆ “जो मन को अपने वश में नहीं कर पाते, उनका मन उनके लिए शत्रु के समान कार्य करता है।”


अर्थात | Gita Updesh in Hindi :- मन को बहुत ही चंचल प्रवृत्ति का माना जाता है। हमारा मन कभी भी हमें एक कार्य को कुशलता से पूरा करने की अनुमति नहीं दे सकता, यह एक कार्य को करते समय अन्य कार्यों में भी अपना सहयोग देना चाहता है,

जिससे कि न तो वो कार्य हो पाता है, जो हम कर रहे हैं और न ही दूसरा। अतः मन को शत्रु की संज्ञा दी गयी है।मन को नियंत्रित करना ही अपने जीवन में सफलता की सीढ़ी में आगे बढ़ना है।


◆  “एक उपहार अच्छा और पवित्र तभी लगता है, जब उसे किसी उचित स्थान पर उचित समय पर किसी अन्य को दिया जाय, और सबसे बड़ी बात यह है कि उपहार देने वाला व्यक्ति उपहार के बदले में कुछ लेने की उम्मीद न रखता हो।”


अर्थात | श्रीमद्भागवत गीता उपदेश :-  उपहार देना एक पूण्य का कार्य होता है, जिसको किसी अन्य व्यक्ति को देने से हमें पुण्य की प्राप्ति तो होती है और जिसको उपहार दिया जा रहा है उसको अत्यधिक प्रसन्नता भी होती है।

इस प्रसन्नता भरे क्षण को पवित्र रखने के लिए हमें पहले अपने आप को स्वच्छ करना होगा क्योंकि यदि हमने बदले में कुछ लेने की भावना से उपहार दिया है तो न ही वह उपहार हो सकता है और न ही कोई व्यक्ति उसे पाकर प्रसन्न। इसलिये मन की स्वच्छता आवश्यक है।


◆  ” मनुष्य अपने विश्वास से बंधा हुआ होता है। जैसा वह विश्वास करता है या किसी अन्य पर रखता है वह वैसा ही बन जाता है।”


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes in Hindi :- मनुष्य किसी वस्तु या अन्य पर बहुत जल्द ही विश्वास करने लग जाता है। जिसका परिणाम यह होता है कि जिन चीजों पर वह विश्वास करता है, उनसे उसे अपेक्षाऐं उतपन्न होने लगती हैं।

जब ये अपेक्षाएं पूर्ण नहीं हो पाती तो उसको बहुत ही ठेस पहुंचती है और अंततः वह क्रूरता के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।यह न केवल उसके लिए अपितु उसके जीवन के लिए भी हानिकारक होता है। कहने का तातपर्य यह है कि जिस पर भी विश्वास करें सोच समझकर और पूरे ध्यान के साथ करें नहीं तो बाद में पछताना भी पड़ सकता है।

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Bhagavad Gita Quotes in Hindi


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◆ “जो कोई भी जिस देवता में अपनी पूर्ण आस्था और विश्वास रखता है, मैं (श्रीकृष्ण) उसका विश्वास उस ही देवता में और दृढ़ कर देता हूँ।”


अर्थात | Gita Updesh in Hindi :- सभी मनुष्य अपने जीवन काल में पूजा – पाठ अवश्य करते हैं जो कि वे ईश्वर को शाश्वत मानते हुए करते हैं। मनुष्यों की देवताओं पर गहरी आस्था होती है जिसके कारण वे अपने अलग अलग देवताओं को ईष्ट बना लेते हैं।

श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि वे मनुष्य की आस्था के अनुसार इन ईष्ट देवताओं में उनकी आस्था को और प्रबल कर देते हैं। ताकि उन्हें अपने देवता पर कभी सन्देह न हो।


◆  ” लोग आपका अपमान कर सदैव आपकी निंदा कर आपके बारे में तरह तरह की बातें करेंगे, किसी सम्मानित व्यक्ति के लिए उसका अपमान होना मृत्यु से भी बदतर है।”


अर्थात | Geeta Quotes in Hindi :- सम्मान ऐसी वस्तु होती है जिसे कमाने में तो वर्षों लग जाते हैं परंतु गंवाने में एक क्षण नहीं लगता। लोगों का क्या है, उन्हें तो बस बहाना चाहिए होता है किसी की बुराई करने का, उसको अपमानित करने का।

आपको अपने कर्मों से खुद को सदैव प्रमाणित करते रहना होगा क्योंकि छवि बड़ी ही मेहनत से बनाई जाती है हमारी एक छोटी सी गलती हमारी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है।


◆ ” केवल मन ही किसी व्यक्ति का दोस्त अथवा दुश्मन हो सकता है”


अर्थात | श्रीमद्भागवत गीता उपदेश :- मन को जिस दिशा निर्देश में रखेंगे वह उसी ओर अग्रसर होगा, यह केवल अभ्यास से ही सम्भव है। यदि हम अपने मन को उचित दिशा निर्देश देकर सही मार्ग पर ले जाएंगे तो निश्चित ही हमारा मन भी हमे अच्छे कार्यों को करने के लिए प्रेरित करेगा।

इस प्रकार मन हमारा मित्र होगा। यदि हम गलत नीतियां अपने मन में भरते जाएंगे तो हमारा मन गलत मार्ग की ओर स्वयं अग्रसित हो जाएगा, और इस प्रकार मन से बड़ा शत्रु हमारे लिए कोई और नहीं होगा।


◆  ” जो वस्तु हमारे पास नहीं है उसके विषय में चिंतित होने से कोई लाभ नहीं।”


अर्थात | Bhagavad Geetha Quotes :-  कुछ वस्तुएं जो हमसे दूर होती है, प्रायः हम उसकी चिंता करने लग जाते हैं। जिससे न केवल हमको बल्कि उस वस्तु को भी असहजता महसूस होती है। जो नियति में लिखा है भविष्य में वही होना है,

तो वर्तमान में भविष्य की चिंता से क्या लाभ!  अपने से दूर गयी वस्तुओं या फिर अन्य के लिए चिंतित न होवें। ईश्वर सब जगह मौजूद हैं। अगर वे आपकी रक्षा कर रहे हैं तो निश्चित रूप से अन्य जगह आपकी उस वस्तु की भी कर रहे होंगे।


◆  “जब -जब संसार में धर्म की हानि और अधर्म का वर्चस्व बढ़ रहा होता है, तब-तब अच्छे लोगों की रक्षा, दुष्टों का संहार और धर्म की स्थापना के लिए मैं (श्री कृष्ण)  उस युग मे अवतरित होता हूं।


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes in Hindi :- महाभारत में गीता का ज्ञान अर्जुन को देते हुए श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि भविष्य में जब कभी, जिस युग में भी अधर्म , धर्म पर हावी हो रहा हो रहा होगा, असत्य अपनी चरम सीमा पर होगा, धरती में पाप बढ़ रहा होगा, उस युग में सत्य की विजय और धर्म को स्थापित कराने के लिए श्री कृष्ण स्वयं धरती पर अवतरित होंगे।

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Bhagavath Geetha Quotes


श्रीमद्भागवत गीता उपदेश


◆ ” जिस व्यक्ति को, दुख परेशान नहीं करता, सुख की जिसे आकांक्षा नहीं है, जिसके मन से राग, भय, और क्रोध जैसे विकार नष्ट हो गए हैं वही मनुष्य , मुनि या आत्मज्ञानी कहलाता है।”


अर्थात | Geeta Updesh in Hindi :- ऋषि-मुनियों के अंदर सभी अच्छे गुण पाए जाते हैं। वे सभी प्रकार के दोषों और विकारों से मुक्त हो गए होते हैं। उन्हें किसी भी दुर्घटना का दुःख नहीं होता, सुख के लिए वे कोई कार्य नहीं करते,

किसी भी प्रकार की होने वाली घटनाओं का भय उन्हें नहीं होता और किसी भी आपत्तिजनक वस्तु  को देखकर उन्हे गुस्सा भी नहीं आता। यदि कोई मनुष्य इन सभी विकारों पर विजय प्राप्त कर लेता है तो वह स्वयं महाज्ञान को प्राप्त कर लेता है।


◆ ” किसी जन्म लेने वाले प्राणी के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित और महत्वपूर्ण है जितना कि किसी मृत के लिए नया जन्म लेना। अतः जो अपरिहार्य है उसके लिए शोक कैसा!”


अर्थात | Bhagavad Geetha Quotes– मृत्यु पूरे ब्रह्मांड का अचर सत्य है इसे कोई भी बदल नहीं सकता। इस पर कोई आज तक भी विजय प्राप्त नहीं कर सका है। यहां तक कि जितने भी भगवान इस धरती पर अवतरित हुए उन्हें भी 1 दिन उस शरीर का त्याग करना पड़ा। अतः किसी के जन्म पर हर्ष और किसी की मृत्यु हो जाने पर शोक मनाना उचित नहीं ।


◆  ” परमात्मा (भगवान) की शांति व्यक्तियों के साथ होती है, जो अपनी आत्मा और अपने मन में एकता रख सकें, जो इच्छा और क्रोध से मुक्त हों और जिन्होंने अपनी आत्मा को भली प्रकार से समझा हो।”


अर्थात | Geeta Quotes in Hindi :- ईश्वर भी उनके ही साथ होते हैं जो स्वयं को समझने का प्रयास करते रहते हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को वश में कर रखा हो। जो प्रसन्नता, क्रोध आदि भावनाओं से परे हों। मन कि शक्ति ही हमें मोक्ष की ओर ले जाती है।


◆  ” किसी अन्य का कार्य पूर्णता से करने से बेहतर है कि अपना कार्य अपूर्णता से करो।”


अर्थात | श्रीमद्भागवत गीता उपदेश :- अपना कार्य स्वयं ही करना चाहिए, उसी निष्ठा से जिस निष्ठा से हम अन्य का करते हैं। प्रायः देखा जाता है कि हम दूसरों का कार्य तो बड़ी मेहनत और लगन के साथ करते हैं परंतु अपने कार्य को भविष्य में टालकर  उसको करने में लापरवाही दिखाते हैं परिणाम यह होता है कि वह कार्य कभी सफ़लतापूर्वक पुर्ण नहीं हो पाता। अतः अपना कार्य स्वयं व निष्ठा से करने का प्रयास करें।


◆  ” मेरे (श्रीकृष्ण) लिए सब मनुष्य एक समान हैं , मुझे न कोई कम प्रिय है और न अधिक प्रिय। परन्तु जो मेरी आराधना सच्चे मन से और प्रेमपूर्वक करता है, वो मेरे अंदर रहता है और मैं उसके जीवन में।


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes in Hindi :- श्रीकृष्ण के अनुसार भक्ति से बड़ा कोई सागर नहीं है, जो भी ईश्वर की भक्ति में लीन रहता है, उसे स्वयं ईश्वर का सानिध्य प्राप्त होता है। परंतु यह आसान नहीं है। जो कोई भी ईश्वर के सम्मुख अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता है,

उसे सत्य के मार्ग पर चलना होता है, सत्य और धर्म के पालन से ही कोई मनुष्य सच्ची भक्ति का मार्ग चुनता है और ईश्वर भी उसकी सहायता करते हैं। भक्ति से ईश्वर का समावेश अपने अंदर महसूस किया जा सकता है।


Shrimad Bhagwat Gita Updesh


◆  ” हे अर्जुन! केवल भाग्यशाली सैनिक और योद्धा ही ऐसा युद्ध लड़ने का अवसर पाते हैं। जो कि स्वर्ग के समान है ।”


अर्थात | Geeta Updesh in Hindi :- श्री कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो महाभारत का युद्ध तुम लड़ रहे हो ऐसा यद्ध केवल भाग्यशाली वीरों को ही लड़ने को मिलता है,  यह पुण्य अभी तुम्हारे हाथों में आया है, तुम्हे ही धर्म की स्थापना करनी है सत्य को विजित कराना है। विपक्ष में जो भी तुम्हारे विरोध में है वे तुम्हारे सम्बधी है परंतु उन्हें तुम्हें केवल शत्रु की दृष्टि से देखना है।


◆ ” सदैव सन्देह और तर्क करने वाले मनुष्य के लिए प्रसन्नता या प्रसन्न रहना इस लोक में तो क्या, किसी लोक में भी सम्भव नहीं है।”


अर्थात | Quotes from Bhagavad Gita on Success :- सन्देह मनुष्य को ले डूबता है। सन्देह करने वाले लोग कभी भी चैन से अपना जीवन व्यापन नहीं कर सकते। किसी भी व्यक्ति पर सन्देह या फिर अपने द्वारा किए जा रहे कार्यं पर सन्देह ही मनुष्य को सफल होने से रोकता है। सन्देह करने वाले व्यक्तियों को चाहें कहीं भी ले जाएं वे अपनी प्रकृति नही छोड़ सकते , और यदि उन्हें स्वर्ग भी उपहार में दे दिया जाय तो यह उस पर भी सन्देह कर उसे भी अपने कर्मो से खो देंगे।


◆  ” सभी करुणा द्वारा कर रहे कार्यों को ध्यान से करो।”


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes :- करुणा द्वारा किये गए कार्य, भावनात्मक दृष्टि से तो दृढ़ हो सकते हैं परंतु उसकी वास्तविकता अलग होती है,  करूणा किसी व्यक्ति के लिए सही हो सकती है, लेकिन यह उस व्यक्ति के करुणा से भरे कार्य को बिगाड़ने के लिए पर्याप्त है।

किसी कार्य को करने के लिए करुणा के साथ साथ बुद्धि का प्रयोग भी आवश्यक है। अतः किसी कार्य को करते वक्त भावनाओं तथा सावधानी दोनो ही अपनानी चाहिए।


◆  ” सब उस वस्तु के लिए शोक करते हैं जो कि शोक करने योग्य नहीं है, और फिर बाद में ज्ञान की बातें करते हैं। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो जीवित या मृत किसी भी वस्तु के लिए शोक, राग द्वेष से रहित रहे।”


अर्थात | Geeta Quotes in Hindi:-  सभी को अपने अंदर ऐसे गुणों को विकसित करना होगा जिससे कि वे सभी प्रकार के विकारों से मुक्त रहे। किसी भी अप्रिय घटना के लिए दुखी न हो, किसी भी अच्छी हो रही घटना के लिए अधिक खुश न हो। जिसने इस सुख-दुख के रहस्य को समझ लिया उसे ही परम ज्ञान प्राप्त होगा और वही अपने जीवन में सफल होगा और मोक्ष पाएगा।


श्रीमद्भागवत गीता उपदेश


◆  “कर्म मुझे (श्रीकृष्ण) को बांध नहीं सकता। क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई आवश्यकता नहीं।


अर्थात | Quotes from Bhagavad Gita on Success :- श्रीकृष्ण के अनुसार वे प्रतिफल से रहित हैं वे स्वयं कर्म करने में विश्वास करते हैं और उस कर्म के अनुसार ही कार्य करते हैं। फल तो एक न एक दिन मिलना ही है। अतः कर्म करते रहिये यही आपकी नियति है, कर्म का फल आपको अवश्य ही प्राप्त होगा। श्री कृष्ण स्वयं दूसरों को उनके कर्मों का फल देते हैं अतः वे अपने प्रतिफल से मुक्त हैं।


◆  ” मन की अच्छी भावनाओं के साथ ईश्वर की शक्ति सर्वदा तुम्हारे साथ हैं, यह केवल एक साधन को लेकर तुम्हारे सभी कार्य करती है, वो साधन हो स्वयं तुम।”


अर्थात | श्रीमद्भागवत गीता उपदेश :- मनुष्य अपने कर्मचक्र से नहीं बच सकता। परन्तु जो कर्म वो कर रहा है उसकी शक्तियां उसे कर्म करने की भावना के लिए जो प्रदान करता है, वे हैं ईश्वर। यह  शक्ति ईश्वर का  रूप ही है जो मरने तक हमारे साथ चलती है व हमारे सभी कार्यों को सरल कर उसे पूर्ण करती है। इस शक्ति के बिना मनुष्य केवल सांस लेने वाले पुतले के समान है।


◆ ” कर्म-योग वास्तव मे एक बहुत बड़ा रहस्य है।”


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes in Hindi :- कर्म करना किसी साधना से कम नहीं है, और मनुष्य को अपने कर्म, जीवन व्यापन करने के लिए करने ही पड़ते हैं, चाहें वह किसी भी परिस्थिति में क्यों ना हो। सभी परिस्थितियों के लिए अलग अलग कर्मों का निर्धारण पहले से ही निश्चित हो गया होता है। निर्धारित समय आने पर ही हम इस निश्चित कार्य को कर अपने खाते में पूण्य अर्जित करते हैं।


◆  ” सुख, इंद्रियों की दुनिया में खुशियों की शुरुआत है, और अंत भी। जो की दुखों को जन्म देता है।”


अर्थात | Quotes from Bhagavad Gita on Success :-  कभी किसी कार्य के शुभ होने पर हम खुश होते हैं जो कि हमारी इंद्रियां हमें महसूस करातीं है तथा हमें फिर हर कार्य के शुभ होने की आशा लगे रहती है। जिससे कि जब कोई कार्य असफल हो जाता हैं तो हमें अत्यंत दुःख पहुंचता है।

तातपर्य यह है कि इन्द्रीयों के कारण ही हम अपने जीवन में सुख या दुख अनुभव कर पाते हैं , परंतु हमारे सुख या दुख का कारण ये इंद्रियां ही हैं। अतः जिसने इन इंद्रियों पर काबू कर लिया समझ लीजिए वही संसार का सबसे सुखी इंसान हैं।


◆  ” जो कोई भी आध्यात्मिकता के चरम पर पहुंच चुके हैं, उनका मार्ग है निःस्वार्थ कर्म। जो ईश्वर के साथ जुड़े हुए हैं उनका मार्ग है स्थिरता और शांति।


अर्थात | Bhagavad Gita Quotes in Hindi :- आध्यात्म के शिखर पर पहुचना कोई आसान कार्य नहीं , यहां पहुंचने के लिए, त्याग की आवश्यकता है। सभी प्रकार के दोषों व विकारों को निकाल कर जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर अग्रसर होता है वही आध्यात्म के शिखर तक पहुंच सकता है।

परन्तु उस शिखर पर पहुँचना ही लक्ष्य नहीं है, वहां पहुंचकर निःस्वार्थ कर्म जो कर सकेगा वही ईश्वर को भी प्राप्त करेगा तथा जिसने ईश्वर को प्राप्त कर लिया है अब उसका कार्य स्थिरता और शांति के पथ पर चलना ही है। इस प्रकार कर्म चक्र चलता ही रहता है।


◆  “जब कोई अपने स्वयं के कार्य में आनन्द ढूंढ लेते हैं तब वही सही अर्थ में पूर्णता प्राप्त कर पाते हैं।”


अर्थात | Geeta Quotes in Hindi :-  कोई भी मनुष्य अपने कार्य को केवल पूर्ण करने के लिए करता है, चाहें वह कार्य मनोरंजक हो या नहीं। परन्तु यह सब तो केवल एक मिथ्याभिमान है। यदि कोई मनुष्य अपने कार्य को करने के लिए कड़ी मेहनत करता है,

और फल की चिंता न करते हुए उस कार्य में ही अपनी खुशी को ढूंढ़ लेता है तो श्रीकृष्ण के अनुसार वह पूर्ण हो जाता है, फिर उसको चाहें फल मीले या न मिले कोई चिंता नहीं रहती। परन्तु अन्ततः उसको अपने द्वारा किये गये सभी कर्मों का एक कुशल परिणाम भी प्राप्त होता है।


Conclusion | Bhagavad Gita Quotes


आज आपने जाने Bhagavad Gita Quotes in Hindi. आशा करते हैं आपको आज के यह Geeta Quotes in Hindi पसन्द आए होंगे, और इनसे बहुत कुछ सीखने को भी मिला होगा।

श्रीमद्भागवत गीता उपदेश ऐसी और प्रेरणादायक जानकारी के लिए बने रहिये, के साथ।

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