#1 Best Biography of Surdas in Hindi | About Surdas ji ka Jeevan Parichay

आज हम बात करने जा रहे हैं Biography of Surdas in Hindi. जिसमे हम सूरदास जी की पूरी जीवनी, और उनकी रचनाओं के बारे में बात करेंगे।


Biography of Surdas in Hindi


भारतीय साहित्यिक इतिहास में सूरदास जी का नाम सर्वोपरि है, सूरदास जी ने बहुत सारी ऐसी महत्वपूर्ण रचनाएं की। जिनसे उनका नाम इतिहास के पन्नों में सदा के लिए बस गया। तब चलिए जानते हैं about Surdas ji ka Jeevan Parichay.


Biography of Surdas in Hindi :

   पूरा नाम   सूरदास
   जन्म   1478 ईसवी , रुनकता
   पिता   रामदास सारस्वत
   मृत्यु   1580 ईसवी
   रचनाएँ   सुरसारावाली, सूरसागर, साहित्य लहरी।

हिंदी साहित्य के सर्वोपरि कवि माने जाने वाले सूरदास जी के जन्म को लेकर अलग अलग विद्वानों के अलग अलग मत हैं। ज्यादातर विद्वान मानते हैं,

सूरदास जी जन्म सन 1478 ईसवी में रुनकता नाम के एक गांव में हुवा था।

सूरदास जी अपने जन्मकाल से ही अंधे थे, पर उन्होंने ऐसी रचनाएँ कर डाली, जिससे पूरा संसार उन्हें आज याद करता है, सूरदास जी के अंधे होने को लेकर आज भारतवर्ष में कई सारे मतभेद है,


Surdas ka Jeevan Parichay


सबसे बड़ा मतभेद यह है, सूरदास जी जन्म से ही अंधे थे, पर उन्होंने उनके द्वारा रचित रचनाओँ में मनुष्य के स्वभाव का, बच्चो की लीलाओं , एवं प्रकृति का ऐसा सटीक वर्णन किया है,

जो कोई भी मनुष्य बिना दृष्टि के नहीं कर सकता। पर सूरदास जी ने एक पद के द्वारा अपने को जन्मांध ही कहा है।

सूरदास जी के पिता का नाम रामदास सारश्वत था,

और माना जाता है कि रामदास जी भी एक महान गीतकार थे। पर सूरदास जी की माता का कही कोई प्रमाण नहीं मिलता है।

सुरदास जी भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त था, उन्होंने अपने को पूर्ण रूप से कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया था। बचपन से ही कृष्ण भक्ति होने के कारण,

उन्होंने मात्र साढ़े 6 साल की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। और यमुना नदी के एक तट गऊघाट पर रहने लगे गए।


About Surdas ji ka Jeevan Paricahy :


सूरदास जी को बचपन से ही श्रीमदभगवदगीता में रुचि थी, इसी कारण उस समय के एक सुप्रसिद्ध आचार्य बल्लभाचार्य ने सूरदास जी को शिक्षा देने के लिए सहमत हुवे।

आचार्य बल्लभाचार्य प्रतिदिन अपने शिष्यों को गोर्वधन पर्वत पर स्थित मंदिर ले जाते थे, तथा वहां श्रीनाथ जी की सेवा कराने के साथ साथ नए नए पद बनाकर शिस्यों को शिक्षा देते थे।

कुछ महीनों बाद ही आचार्य बल्लभाचार्य ने सूरदास जी को “भागवत गीता ” का गुणगान करने को कहा,

और सूरदास जी भागवत गीता का गुणगान करते करते  कृष्ण भक्ति में लीन हो गए।

इससे पहले वे केवल आचार्य जी द्वारा दिये गए विनय पद ही पढा करते थे।

महाकवि सूरदास जी और उनके आचार्य जी के विषय मे इस कहा जाता है, की आचार्य जी की आयु करीबन सूरदास जी से 1 महीना ही बढ़ी थी।

सूरदास जी बल्लभाचार्य से शिक्षा लेने के बाद कृष्ण भक्ति में इतने लीन हो गए , कि उन्होंने मोह- माया सब छोड़ दी।

कृष्ण भक्त के रूप में सूरदास जी : बल्लभाचार्य से शिक्षा लेने के पश्चात अब सूरदास जी कृष्ण भक्ति में लीन हो गए, और उन्होंने कृष्ण जी पर आधारित बहुत सारी रचनाये की।

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Surdas ki Rachnaye :

अभी तक ज्ञात जानकारी से यह पता चलता है, सूरदास जी के द्वारा 5 ग्रन्थ लिखे गए हैं, जिनमे सबसे बड़ा ग्रन्थ सूरसागर है, और अन्य ग्रन्थ सुर-सारावली, साहित्य लहरी, नल दमयंती, एवं ब्याहलो हैं।


” सूरसागर “

सूरसागर सूरदास जी द्वारा लिखा गया सबसे बड़ा तथा सबसे प्रख्यात ग्रन्थ है। ऐसा माना जाता है, कि सूरसागर में सूरदास जी ने 1 लाख से ज्यादा पद लिखे थे,

किन्तु इस समय सूरदास ग्रन्थ में केवल 5000 पद ही हैं। इस ग्रन्थ में 75 % से ज्यादा पद सूरदास जी ने कृष्ण भक्ति पर आधारित लिखे हैं। आपको यह भी बताते चलें कि सूरदास जी के सूरसागर में कुल 12 अध्याय हैं,

जिनमे से 10वां अध्याय काफी संक्षिप्त है। सूरदास जी के इस ग्रंथ की आयु 16वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक बताई जाती है।


” सुरसारावली “

सुरसारावली , सूरदास जी का सूरसागर से छोटा ग्रन्थ है। और सूरसागर के बाद सर्वप्रख्यात Surdas ki Rachnaye भी यही है। सूरदास जी के इस ग्रन्थ में कुल 1107 छंद हैं। कीच विद्वान कहते है, जब सूरदास 66 साल के थे,

तब उन्होंने इस ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ में भी सूरदास जी का भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम की भावना ही देखने को मिलती है।


” साहित्य लहरी “

साहित्य लहरी भी सूरदास जी का एक विश्वप्रख्यात ग्रन्थ में से एक है। सूरदास जी के इस ग्रन्थ साहित्य लहरी में 118 पद हैं। यह ग्रन्थ भी सूरदास जी ने कृष्ण भक्ति में ही लिखा है।

इस ग्रन्थ के आखरी पद में सूरदास जी ने अपने वंश की भी व्याख्या की है, जिससे पता चलता है, कि सूरदास जी का पूरा नाम ” सूरजदास ” था।


” नल दमयंती और ब्याहलो “

इस ग्रन्थ में सूरदास जी ने कृष्ण भक्ति नहीं बल्कि एक नल तथा एक दमयन्ती की महाभारत काल की कहानी लिखी है।और ब्याहलो भी नल तथा दमयन्ती की तरह ही कृष्ण भक्ति से अलग एक Surdas ki Rachnaye me कहानी संग्रह है।

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Information about Surdas Death in hindi :

जिस प्रकार सूरदास जी के जन्म को लेकर विद्वानों में कई मतभेद है, उसी प्रकार सूरदास जी की मृत्यु को लेकर भी कई मतभेद हैं। पर ज्यादातर विद्वानों का कहना है,

सूरदास जी ने अपनी आखरी सांस बृज 1580 ईसवी में ली। इस प्रकार सूरदास जी ने अपना सम्पूर्ण  जीवन कृष्ण भक्ति में व्यतीत कर दिया।

यह biography of surdas in hindi का बहुत दुखद हिस्सा था, जब सूरदास जी की मृत्यु हुई।


Surdas ji ki ek Vikhyat Kahaani :

सूरदास जी की एक कथा बहुत प्रसिद्ध है, एक दिन सूरदास जी कृष्ण जी के भजन गाते गाते कुवे से पानी पीने गए। अंधे होने के कारण वे भज गाते गाते कुवें में गिर गए।

कुवें में गिरने के पश्चात वे भगवान श्री कृष्ण को याद करने लगे।

तभी भगवान श्री कृष्ण कुँए के सामने स्वयं प्रकट हुवे, और सूरदास जी को बाहर निकाला। सूरदास जी को बाहर निकलकर कृष्ण जी ने उन्हें उनकी आंखों की ज्योति भी लौटा दी।

सूरदास जी ने सर्वप्रथम कृष्ण जी को देखा, और कहा है प्रभु आपको देख मेरा जीवन सफल हुआ।

तब कृष्ण जी बोले आप मेरे सच्चे भक्त हो, आप मुझसे कुछ भी मांग सकते है, सूरदास बोले- है प्रभु मेने आपको देख लिया मेरा जीवन सफल हुवा,

अब आप मेरी इन आँखों की ज्योति मुझसे वापस ले लीजिए। में आपके अलावा और कुछ नहीं देखना चाहता। सूरदास के सच्चे भक्त होने के कारण कृष्ण जी ने उनकी आंखों की ज्योति वापस ले ली।

और कृष्ण जी ने उन्हें एक और वरदान दिया, कि तुम्हारी ख्याति पूरे विश्व मे प्रख्यात होगी।

यह biography of surdas in hindi का बहुत अहम हिस्सा था, जब सूरदास जी को कृष्ण जी ने आँखों की ज्योति लौटा दी थी।

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Conclusion : Biography of surdas in hindi


महाकवि सूरदास जी ने भारतीय साहित्य में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है। पूरे हिंदी साहित्य में उनसे बड़ा कृष्ण प्रेमी और कोई नहीं नज़र आता।

अत्यधिक कृष्ण प्रेमी होने के कारण उन्होंने ऐसी रचनाएँ की, जिससे वे पूरे संसार मे विश्वप्रख्यात हो गए।

दोस्तों आज आपने जाना Biography of Surdas in Hindi। जिसमे आपको About Surdas ji ka Jeevan Parichay के बारे में बहुत कुछ पता चला होगा।

उम्मीद करते हैं, आज की यह पोस्ट आपको पसंद आई। ऐसी ही हिंदी साहित्य की और जानकारी के लिए बने रहिये Sarkaariexam. कॉम के साथ.

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