15+ Spacial Chidiya ki Kahani in Hindi (Birds stories) | Pakshiyon ki Kahani

प्रेरक और मन मोह लेने वाली Chidiya ki Kahani in Hindi.  जिनसे आपको मनोरंजन के साथ साथ बहुत कुछ सींखने को भी मिलेगा।

पढ़िये यह प्रेरणादायक Pakshiyon ki Kahani तो चलिए शुरू करते हैं।

chidiya ki kahani


Chidiya ki Kahani


” गौरैया और लोमड़ी “


Birds story in hindi

   एक बार एक गौरैया खाने की तलाश में घोंसले से निकली। जंगल मे उसे कहीं भी कोई खाना नहीं मिला तो वह गांव की ओर चल पड़ी। गांव में बहुत ही चहल पहल थी।

ऐसे में उसका भोजन ढूंढना थोड़ा कठिन लग रहा था।

तभी उसकी नजर पास में पड़े एक बड़े से रोटी के टुकड़े पर गयी। रोटी का टुकड़ा बहुत बड़ा था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बाहर जानबूझकर वह तुकड़ा रखा हो।

ताकि कोई पशु या पक्षी उसे खा  ले।

गौरेया झट से वहां गयी औऱ उसने वह रोटी का टुकड़ा अपनी चोंच से पकड़ा और वहां से उड़ चली। रास्ते मे मन ही मन वह सोच रही थी  कि आज तो बहुत सारा भोजन मिल गया है कुछ दिन अब इन्हीं से निकल जाएगें।

   उसने वह रोटी का टुकड़ा तब से अपनी चोंच में ही दबाकर रखा हुआ था। गांव बहुत दूर था वह कहीं पर भी नहीं रुकी थी, अतः उसको बहुत थकान लग गयी थी।

उसका घोंसले का पेड़ अब कुछ ही दूरी पे था। उसने सोचा यहां रुककर कुछ आराम कर लेती हूं। वह पास के ही एक पेड़ पर बैठ गयी। लेकिन उसने रोटी का टुकड़ा नहीं छोड़ा।

इतने में एक लोमड़ी वहां पहुंच गई। असल मे वह सुबह से अपने लिए भोजन ढूंढ रही थी। उसे कहीं पर भी कुछ नहीं मिला। तो उसे रास्ते मे वही चिड़िया दिखाई दी जिसकी चोंच में रोटी का टुकड़ा था।

लोमड़ी ने सोचा आज इसी से अपनी भूख को मिटाना होगा। पर वह मुश्किल में पड़ गयी कि आखिर चिड़िया के हाथ से रोटी कैसे छीनी जाए।

उसने एक युक्ति सोच ली। वह आगे आई और ऊपर पेड़ की तरफ देखकर बोली, ” नमस्कार गौरेया बहन कैसी हो आप !”

गौरेया ने कुछ उत्तर नहीं दिया।

फिर लोमड़ी और बोली, ” मैं अभी अभी एक खबर सुनकर आ रही थी कि, जंगल मे नई रानी का चुनाव होने वाला है। क्यों न आप भी उसमे हिस्सा लो। आप तो सुन्दर भी हो आपको रानी बनने का पूरा अधिकार है।”

   चिड़िया अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गयी। जब उसने कुछ बोलने के लिए मुह खोला तो उसकी रोटी नीचे गिर गयी। लोमड़ी झट से उस पर लपकी कर रोटी को लेकर वहां से चली गयी।

चिड़िया हाथ मलते रह गयी।


सीख | Chidiya ki Kahani : ” अपनी बुद्धि बल के क्षमता से कुछ भी किया जा सकता है। लेकिन सतर्क रहना भी उतना ही आवश्यक है।”

Also Read : Akbar Birbal Stories

Also Read : Horror Stories


” कबूतर और चींटी “


pakshiyon ki kahani

एक बार की बात है। एक पेड़ पर एक कबूतर अपने बच्चों के साथ रहता था। वह पेड़ नदी के किनारे था। वहीं दूसरी ओर एक चींटी अपने झुंड के साथ जमीन के अंदर रहती थी।

वह बहुत ही मेहनती थी।

एक दिन वह अपने से दस  गुना ज्यादा वजन उठाकर एक दीवार पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी। तभी उसका सन्तुलन बिगड़ गया और वह लुढ़कते हुए उस  नदी में जा गिरी।

नदी का बहाव बहुत ही तेज था। चींटी सम्भल नहीं पा रही थी और चिल्लाए जा रही थी।

  वह बहते बहते उस पेड़ के पास पहुंच गई जहाँ कबूतर रहा करता था। कबूतर ने चींटी की चिल्लाने की आवाज सुनी और उसको देखा और फिर उसने झटपट पेड़ का एक पत्ता तोड़कर नीचे फेंका।

 पत्ता चींटी के आगे जा गिरा। चींटी बहते बहते उस पत्ते तक आ पहुंची और उस पर चढ़ गई। पत्ता फिर नदी के किनारे आ पहुंचा। चींटी आराम से बाहर आ गयी।

जैसे ही वह बाहर पहुंची उसने देखा कि कोई शिकारी कबूतर पर निशाना लगाकर बैठा है। इससे पहले की वह कबूतर का धन्यवाद कर पाती, उसने शिकारी को देख लिया।

अब वह दौड़कर जमीन के अंदर गयी और अपने सभी साथियों को कबूतर और शिकारी के बारे में बताया । उसके सभी साथी उसके साथ बाहर चलने को मान गए।

चींटी उस ही जगह सबको बुला लाई , जिस जगह कबूतर को मारने के लिए शिकारी बैठा था। सभी चींटियों ने मिलकर उस शिकारी के शरीर मे काटना शुरू कर दिया।

शिकारी बुरी तरह से तड़पने लगा। और खुजली करते करते वहां से भाग गया।

   कबूतर उड़कर नीचे आया और सभी चींटियों का धन्यवाद दिया। उस चींटी ने भी कबूतर का धन्यवाद दिया और अपने समूह के साथ वहां से चले गई।


सीख | Pakshiyon ki Kahani : ” कठिनाई में फंसे लोगों की सहायता करनी चाहिए।”

Also Read : Fairy Tales Stories

Also Read : Animals Moral Stories


Chidiya aur Kauwa ki Kahani


” प्यासा कौआ


chidiya aur kauwa ki kahani

एक बार की बात है, एक जंगल मे सूखा पड़ गया। सारे पानी के स्रोत सूख चुके थे। सभी तालाब , झरने, नदियां आदि बिल्कुल सूखे पड़ गए। जंगल मे कहीं भी पानी नहीं बचा था।

सभी जानवर पानी की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे।

   एक कौआ भी उसी जंगल मे रहता था। वह भी अपने लिए पानी की तलाश कर रहा था। जंगल मे कहीं भी पानी न होने की वजह से वह जंगल से बाहर निकल आया।

दो तीन दिन भटकने के बाद वह एक गांव में पहुंच गया। गांव की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी।

पहले तो कौए ने सोचा कि यहां पानी की तलाश करना बेवकूफी होगी। लेकिन फिर उसने सोचस की बिना कोशिश किये जाना भी उचित नहीं होगा।

अतः उसने निश्चय किया कि वह पानी की तलाश करेगा। उसने सभी घर छान मारे लेकिन उसको कुछ भी नहीं मिला। उसने तो अब हिम्मत ही हार ली थी।

वह चुपचाप अब एक पेड़ की डाली पर बैठ गया।

लेकिन जब उसने पेड़ से नीचे देखा तो, उसे एक घड़ा दिखाई दिया। शायद उसके अंदर कुछ पानी भी था। उसे लग रहा था कि शायद यह उसका भृम है। लेकिन प्यास से वह तड़प रहा था,

उसने अपने मन मे सोचा, जहां इतना प्रयास किया है वहीं थोड़ा और सही।

  वह घड़े के पास गया तो उसने देखा कि घड़े के तले में सच में पानी था। पानी को देखकर उसकी खुशी की सीमा न रही। उसने अपना मुह अंदर पानी पीने के लिए डाला।

पानी तो बहुत गहराई में था, और उसकी चोंच वहां तक पहुंच नहीं पा रही थी। अब वह फिर से निराश हो गया। तब उसकी नजर नीचे पड़े कुछ कंकडों पर गयी।

फिर उसके मन मे एक योजना आई। उसने एक एक करके अपनी चोंच से कंकड़ उठाकर मटके में डालना शुरू कर दिया।

पानी का स्तर प्रति कंकड़ के हिसाब से कुछ ऊंचा हो जा रहा था। कौए ने सारे कंकड़ उस घड़े में डाल दिये।

  पानी ऊपर आ गया। अब कौआ उस पानी को पी सकता था। उसने अब पानी पिया और अपनी प्यास बुझा ली।


सीख | Chidiya aur Kauwa ki Kahani :-“सुझबुझ और मेहनत से कुछ भी सम्भव हो सकता है।”

Also Read : Vikram Betaal Stories


 ” बुराई का बुरा अंजाम “


chidiya wali kahani

एक बार एक शिकारी जंगल मे शिकार करने के लिए आया उसके पास एक धनुष था और तरकश में बहुत से बाण भी थे।

बहुत देर जंगल मे भटकने के बाद उसे कुछ नहीं मिला। तो वह जाकर एक पेड़ की छाया में जाकर बैठ गया। कुछ ही देर बाद एक कबूतर उड़कर आया और उस ही पेड़ के ऊपर बैठ गया।

शिकारी ने उसे देख लिया। लेकिन कबूतर अभी भी उस शिकारी से अनजान था।

शिकारी ने बिना कोई चहलकदमी करते हुए अपना बाण और धनुष उठाया औऱ उन दोनों पर निशाना लगाया। कबूतर अपने घोंसले में सोया हुआ था।

  जैसे ही शिकारी ने अपना बाण छोड़ना चाहा, अचानक एक सांप वहां आ पहुंचा और शिकारी के पैर में काट लिया। शिकारी के हाथ से उसका धनुष और बाण वहीं गिर गया।

और शिकारी भी तड़प तड़प कर नीचे गिर गया। सांप बहुत जहरीला था तो, उसका जहर शिकारी के पूरे शरीर मे फैल चुका था।

 शिकारी अब अपने जीवन के अंतिम क्षणों में था तो उसके मुंह से कुछ शब्द निकले, और यह शब्द थे, ” जो मैं कबूतर के साथ करना चाहता था, वह मेरे साथ ही हो गया।”

शिकारी के मुह से झाग निकलने लगा और वह वहीं तड़प कर मर गया।


सीख | Chidiya wali Kahani : “दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसे कि हम अपने साथ किया जाना पसंद करते हैं।’

Also Read : Best Moral Stories Collection


Pakshiyon ki Kahani


” ऊंची उड़ान “


Birds stories in hindi

बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में गिद्धों का एक समूह रहता था। गिद्ध झुण्ड बनाकर लम्बी उड़ान भरते और शिकार की तलाश किया करते थे।

एक बार गिद्ध यडते उड़ते ऐसी जगह पहुंच गए जहां मछलियां और मेंढक कई मात्रा में थे।

  उस जगह उन्हें किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं थी अतः उन्होंने निश्चय किया कि अब वे सभी लोग वहीं रहेंगे। ​उस झुण्ड में एक बूढ़ा गिद्ध भी था,

बूढ़े गिद्ध को अपने साथियों की ऐसी दशा देखकर बहुत चिंता हुई। वो गिद्धों को चेतावनी देते हुए बोला, ” मित्रों हम गिद्धों को ऊँची उड़ान और अचूक निशाने और उत्तम शिकारी के रूप में जाना जाता है।

तुम सभी स्वयं को अंधकार में डाल रहे हो।”

​  सभी गिद्ध उस गिद्ध की बातों पर हंसने लगे। लेकिन गिद्ध भी अब वापस पुरानी जगह उड़कर चला गया। ​कुछ दिन बाद जंगल में रहते-रहते एक दिन बूढ़े गिद्ध ने सोचा,

” मेरा जीवन अब बहुत थोड़ा ही बचा है, क्यों ना अपने सगे लोगों से मिल लिया जाये। “यही सोचकर गिद्ध ने ऊँची उड़ान भरी और टापू पर पहुँच गया।

​​वहाँ जाकर उसने जो देखा वो सचमुच भयावह था। पूरे टापू पर एक भी गिद्ध जिन्दा नहीं बचा था। चारों तरफ गिद्धों की लाश ही पड़ी थी। ​

अचानक एक घायल गिद्ध पर नजर पड़ी उसने बताया कि यहाँ कुछ दिन पहले चीतों का एक झुण्ड आया। जब चीतों ने हम पर हमला किया तो हम लोगों ने उड़ना चाहा लेकिन हम ऊँचा उड़ ही नहीं पाए,

और ना ही हमारे पंजों में इतनी ताकत थी कि हम उनका मुकाबला कर पाते।  गिद्ध दुखी हुआ और वापस जंगल की ओर उड़ चला।


सीख | Chidiya ki Kahani : : “आलस्य कभी भी नहीं अपनाना चाहिए। इसका परिणाम बहुत बुरा होता है। “

Also Read : Panchtantra Stories


 ” भलाई “


एक बार की बात है। एक विद्यालय के पास एक बहुत बड़ा रसीले आम का वृक्ष था। गर्मियों का समय आते ही पूरा वृक्ष आम से लद जाता था। एक बार गर्मियों में एक चिड़िया वहां रहने के लिये आयी।

उसने आम के ही वृक्ष में अपना घोंसला बनाया।

गर्मी के दिन थे पेड़ आमों से भर गया। अब कई लोग उस वृक्ष पर आकर आम तोड़कर ले जाते थे।

  कुछ विद्यालय के बच्चे भी आम तोड़ने के लिए वहां आए तो उन्होंने गौरैया को वहां देखा । बच्चों ने उससे बात की और चिड़िया को भी बच्चे अच्छे लगे ।

दोनो पक्षों में अब मित्रता हो गयी। अब जब भी बच्चे वृक्ष पर आम खाने के लिए आते तो वे गौरैया से कह देते थे। गौरैया अपनी चोंच से आम गिराकर बच्चों को दे देती थी।

  सभी बड़ी खुशी खुशी आम का आनन्द लेते थे।

गौरैया के बच्चे भी घोंसले में रहते थे। वे अभी बहुत छोटे थे। एक दिन गौरैया किसी कार्य से बाहर गयी थी वह पेड़ पर नहीं थी। एक जोर का हवा का झोंका आया और गौरैया का घोंसला नीचे गिर गया।

गौरेया के बच्चे भी नीचे गिर गए। बच्चों को डर लग रहा था कि कहीं कोई हमे खा न ले।

तभी वे विद्यालय के बच्चे वहां पहुंच गए। उन्होंने नीचे गौरेया के बच्चों को देखा, वे समझ गए कि आज गौरैया घर पर नहीं है। उन्होंने गौरैया के बच्चों और उसके घोंसले को सही सलामत पेड़ पर रखा।

  तभी गौरेया भी आ गयी। बच्चों ने सारी बात गौरैया को बताई। गौरैया बहुत खुश हुई और बच्चों का धन्यवाद दिया और अपने बच्चों को उसने अपने गले से लगा लिया।


सीख | Pakshiyon ki Kahani : ” यदि हम किसी का भला करते हैं तो हमारे साथ भी भला ही होता है।”


Chidiya Rani ki Kahani


 ” चिड़िया और किसान “


 एक बार एक खेत के पास वाले पेड़ के ऊपर एक चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया। वह वहीं रहने लगी और उसने वहीं अपने दो अंडे भी दिए।

कुछ ही दिनों में दोनो अंडों में से चिड़िया के बच्चे निकल आये। चिड़िया खुशी खुशी अपने परिवार के साथ रह रही थी।

   दिन बीते, बच्चे भी अब थोड़े बड़े हो गए थे। जिस खेत के पास उनका घोसला था, उसमे फसल पककर तैयार हो चुकी थी। एक दिन किसान वहां आया और उसने देखा कि फसल तो पक चुकी है,

उसने स्वयं से कहा, ” मैं आज ही जाकर अपने बेटे से फसल कटवाने के लिए कह देता हूँ।”

यह बात चिड़िया के बच्चों ने सुन ली। शाम को जब चिड़िया सबके लिए खाना लेकर घोंसले में पहुंची तो उसने देखा कि बच्चे थोड़े चिंतित से थे! चिड़िया ने पूछा! “क्या हुआ बच्चों?

तुम इतने चिंतित क्यों हो? क्या हुआ है? अपनी परेशानी मुझे बताओ मैं अभी उसे हल करती हूं।”

   दोनो बच्चे सहमे हुए थे, उनमे से एक बच्चा बोला, ” मां! ये जो खेत है न, इसका किसान आज यहाँ अपनी फसल देखने के लिए यहां आया था। वह कह रहा था,

कि वह अपने बेटे से कहेगा और इस फसल को काट देगा। मां इस फसल के तो बीच मे ही हमारा पेड़ औऱ घोंसला है न! इसका मतलब है हम भी अब मर जाएंगे?”

  चिड़िया बच्चे की बात सुनकर थोड़ा चिंतित हुई लेकिन वह फर कुछ देर सोचकर बोली, ” बेटा तुम लोग चिंता मत करो! जब तक तुम्हारी माँ जीवित है तुम्हें कुछ नही होने देगी। हम यही रहेंगे।”

   अगला दिन हुआ कोई भी फसल काटने नहीं आया। अब जब किसान फर से खेत मे आया तो वह बोला, ” मैं ने अपने बेटे को यह काम देकर बहुत बड़ी गलती कर दी मुझे उस पर भरोसा करना ही नहीं चाहिए था।

अब कल मैं मजदूरों को कहकर अपनी फसल कटवाऊंगा।

Pakshiyon ki Kahani Moral Part- उस दिन शाम को जब चिड़िया वापस घोसले में आई तो, बच्चों ने उसे फिर से सारी बात बता दी, इस बार भी चिड़िया ने पिछली बात ही दोहराई।

  अगले दिन कोई भी खेत मे नहीं आया। और चिड़िया का परिवार खुशी से रहने लगा।

  कुछ दिन बीत गए। अब किसान फिर अपने खेत आया, उस दिन चिड़िया अपने घोंसले में ही थी, उसने भी किसान को देखा, किसान अपने आप से बोल रहा था,

” मैं पागल था जो मैं ने दुसरो पर विश्वास किया, मुझे स्वंय ही अपना कार्य करना चाहिए।” इतना कहकर वह अपना फसल काटने का सामान लेने चला गया।

   इतने में चिड़िया अपने बच्चों से बोली, ” बच्चों तैयार हो जाओ! अब जाने का समय आ गया।” चिड़िया और उसके बच्चे उड़कर एक दूसरी जगह चले गए! चिड़िया ने अपने लिए पहले ही दूसरी जगह घोंसले का इंतजाम कर लिया था।

अब वे सब वहीं खुशी खुशी रहने लगे।


सीख | Chidiya wali Kahani : ” अपना कार्य दूसरों के भरोसे न छोड़कर, स्वंय ही करना चाहिए। “


” जन्मभूमि “


   एक बार एक गांव के पास एक बड़ा सा जंगल था। उस जंगल मे गांव वाले अक्सर अपनी भेड़-बकरियों को चराने के लिए ले जाया करते थे।

एक बार एक आदमी अपनी गायों को चराने के लिए उसी जंगल मे गया और उसको वहीं शाम हो गयी। अंधेरा होने लगा। रास्ते के अनुमान और जंगली जानवरों को डराने के लिए उसने एक मशाल का प्रबंध किया। और वापस गांव को आने लगा।

आते वक़्त उसको अपने कुछ आती मिल गए तो उसने अपनी वही जलती हुई मशालें जंगल मे ही छोड़ दी। फिर वह अपने साथियों के साथ गांव को चल दिया।

     किसने सोचा था कि ऐसा हो जाएगा! मशाल की आग सुखी घास ने पकड़ ली एयर सुबह होने तक पूरा जंगल धधकती हुई आग की लपटों में समाने लगा।

   जंगली जानवर अपनी अपनी जान को बचाने के लिए इधर से उधर भाग रहे थे। सभी दुसरे ठिकाने की तलाश के लिए जंगल से बाहर निकल रहे थे।

  जब एक बन्दर औरों की तरह अपनी जान को बचाने के लिए जंगल के बाहर जा रहा था, तब उसने रास्ते मे जो देखा उसे देखकर वह दंग रह गया।

Pakshiyon ki Kahani Moral Part- एक नन्हीं सी चिड़िया अपनी चोंच में भरे हुए पानी से आग को बुझाने की कोशिश कर रही रही थी।

वह चिड़िया पास के तालाब से पानी लाकर आग को बुझाने का प्रयत्न कर रही थी।

   बन्दर को कुछ समझ नहीं आया वह चिड़िया के पास गया,

और बोला, ” तुम यह क्या कर रही हो? क्या तुम्हारे ऐसा करने से आग बुझ जएगी?”

   चिड़िया ने बहुत ही शालीनता के साथ उत्तर दिया, ” मैं जानती हूं कि मेरे ये सभी प्रयास विफल हो जाएंगे। मेरा जन्म यहीं हुआ है। इन प्रयासों से मुझे संतुष्टि इस बात की होगी कि मैं ने अपनी जन्मभूमि को बचाने के लिए प्रयत्न तो किया!”

   बन्दर को चिड़िया की बातों ने अंदर तक जँझोर कर रख दिया। अब बन्दर और चिड़िया दोनो मिलकर जंगल की आग बुझाने में लग गए।

थोड़ी ही देर में आसमान पर काले बादल छा गए और बारिश होने लगी। बारिश की फुहार से कुछ समय मे आग बुझ गयी। बंदर और चिड़िया दोनो ने ईश्वर का धन्यवाद दिया और खुशी खुशी जंगल मे रहने लगें।


सीख | Chidiya Rani ki Kahani : ” ईश्वर भी उन्हीं की सहायता करते हैं जो स्वयं की सहायता करना जानते हैं।”


Birds Stories in Hindi


” काला कौआ “


Chidiya ki Kahani- बहुत समय पहले एक जंगल में एक चील रहा करता था।वह अपने जीवन से बहुत परेशान रहने लगा। उसकी परेशानी का कारण कुछ और नहीं बल्कि उसका काला रंग ही था।

जब भी वह जंगल के अन्य पक्षियों को देखता तो यही सोचता कि भगवान ने मुझे ही ऐसा बनाया और सबको सुंदर! यह सोच सोच कर उसने अपनी भावनाओं को कुंठित कर लिया।

​​एक दिन वह अपने भोजन की तलाश में यूं ही इधर उधर भटक रहा था। उड़ते उडते वह एक तालाब के पास पहुंच गया। वहां उसने एक सफेद और सुंदर बत्तख देखा।

उसे फर से अपने काले होने का एहसास हुआ। अब चील नीचे बत्तख के पास आया।

​​बत्तख के पास जाते ही चील उससे बोला, “तुम बहुत भाग्यशाली हो जो तुम्हारा रंग सफ़ेद है। बत्तख यह सब सुन रहा था। फिर वह कौवे से बोला “हाँ मैं सफ़ेद तो हूँ

लेकिन जब मैं तोते को देखता हूँ तो मुझे अपने इस सफ़ेद रंग से गुस्सा आता है।”

​बतख की बात सुनकर वह चील वहा से चला गया और कुछ समय बाद वह तोते के पास पहुंचा।

​चील तोते से बोला, ” तुम्हारा रंग तो बहुत सुन्दर है तुमको यह देखकर बहुत अच्छा लगता होगा।” चील की बात सुनकर तोता बोला,” हाँ,मुझे लगता तो अच्छा है की मैं इतना सुंदर हूँ

लेकिन मैं सिर्फ हरा हूँ और जब कभी भी मैं मोर को देख लेता हूँ तो मुझे बहुत बुरा लगता है क्योंकि मोर बहुत खुबसूरत है और उसके पास बहुत सारे रंग है।

​चील को लगा यह बात भी सही है क्यों न अब मोर के पास ही चला जाए।

​​वह चील जंगल में मोर को ढूढने लगा किन्तु उसे मोर नहीं मिला फिर वह कुछ दिन बाद एक चिड़ियाघर में जा पहुंचा।

​जहा उसे मोर दिख गया लेकिन मोर को देखने के लिए बहुत सारे लोगो की भीड़ जमा हुई थी तो चील ने उन लोगो के जाने का इन्तेजार करने लगा। जब वे सब लोग चले गये तो,

​Chidiya ki Kahani Moral Part- चील मोर के पास पहुंचा और मोर से बोला,” वाह मोर,तुम तो सच में बहुत खुबसूरत हो तभी सब तुम्हारी इतनी तारीफ करते हैं। तुमको तो खुद पर बहुत गर्व महसूस होता होगा।”

​चील की बात सुनकर मोर बड़े दुःख के साथ बोला,” तुम्हारी बात बिल्कुल ठीक है पर मेरे अलावा इस दुनिया में कोई और दूसरा खुबसूरत पक्षी नहीं है इसलिए मैं यहाँ चिड़ियाघर में कैद हूँ।”

​​यहाँ पर सब मेरी रखवाली करते है जिस कारण में कही भी नहीं जा सकता और अपने मन के मुताबिक कुछ भी नहीं कर सकता है। ​मैं भी काश तुम्हारी तरह चील होता,

तो मुझे भी कोई कैद करके नहीं रखता और मैं भी हमेशा तुम्हारी तरह खुले आसमान में जहा चाहो वहा घूमता रहता पर एक मोर के लिए यह सब नहीं हो सकता।

​​चील ने मोर की सारी बातें सुनी और फिर वहा से चले गया और सारी बात समझ गया। उसे इस बात का अहसास हो गया था कि सिर्फ वो ही नहीं बल्कि हर कोई उसकी तरह दुखी और परेशान है।


सीख | Chidiya ki Kahani : ” दूसरों को देखकर उनके जैसे बनने का प्रयास नहीं करना चाहिए बल्कि स्वंय के गुणों को समझकर उसी के हिसाब से अपना आचरण रखना चाहिए।”


” गौरैया की कहानी “


Pakshiyon ki Kahani- एक बार की बात है, एक घने जंगल के बीचोबीच एक घना और विशाल पेड़ था। उस पेड़ के ऊपर एक गौरैया ने अपना घोंसला बनाया था। घोसले में गौरेया खुशी खुशी रहती थी। उसी घोंसले में वह अपने अंडे भी देती थी।

   लेकिन उसके अंडे ज्यादे दिनों तक घोंसले में टिक नहीं पाते थे।

वह सोचती थी कि इतना घना पेड़ है शायद अंडे हवा से गिरकर इधर उधर चले जाते होंगे।

 लेकिन ऐसा बहुत बार हो गया। एक दिन तो गौरेया इतनी उदास हो गयी कि उसे समझ मे नहीं आ रहा था कि वह क्या करे । वह स्वयं को कोस रही थी कि क्या वह अपने बच्चों को कभी जन्म नहीं दे पाएगी?

   एक दिन, गौरेया ने हर बार की तरह ही अंडे दिए। लेकिन इस बार उसने अपने घोंसले को पेड़ के थोड़े ऊंचे भाग में रख दिया। और छिप कर देखने लगी कि आखिर मेरे अंडे जाते कहाँ हैं! वह पास के पेड़ में बैठ गयी।

   थोड़ी देर में पेड़ पर कुछ हलचल हुई। गौरेया ने देखा, वहां एक बहुत बड़ा और मोटा सांप अपना फन फैलाए पेड़ के पास बने गड्ढे से बाहर निकल रहा था। गौरेया सांप को देख कर डर गई।

उसने देखा कि सांप पेड़ पर जा रहा है और चिड़िया के अंडे सूंघ रहा है। वह अंडों को सूंघते हुए ऊपर रखे घोंसले तक पहुंच गया और चिड़िया के अंडे खा लिए। चिड़िया यह सब असहाय देखते रह गयी।

उसे बहुत दुख हुआ। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब वह करे तो क्या करे। वह जोर जोर से रोने लगी।

    फिर उसने सोचा,” मेरे रोने से कुछ नहीं होगा, मुझे कुछ न कुछ उपाय करना ही होगा।”

Chidiya ki Kahani Moral Part- तब जाकर वह अपने मित्रों के पास गई। लेकिन सब सांप का नाम सुनकर ही डर गए। अब चिड़िया ने सोचा, कि मेरी सहायता कोई भी नहीं करने वाला है!

मुझे अपनी सहायता स्वंय करनी होगी।

   उसने फिर से अपने अंडे दिए औऱ उनको घोंसले में छोड़ दिया। और दुसरे पेड़ पर चली गयी। जैसे ही सांप अंडों की सुगंध से बाहर आया ,

गौरेया ने सांप के बिल में एक तरल पदार्थ डाल दिया, जो कि इसे जंगल मे दाना चुगते समय मिला था।

   जब सांप वापस अपने बिल में जाने लगा तो, उस तरल पदार्थ से सांप का शरीर जलने लगा । वह बहुत तड़प रहा था और तड़प तड़प कर मर भी गया।

   चिड़िया के हौंसले की जीत हुईं। अब वह खुशी खुशी रहने लगी।


सीख | Pakshiyon ki Kahani : “मन के हार जाने से ही हार होती है। अतः अपने दृण निश्चय को कभी टूटने न दें।”


Tony Chidiya ki Kahani


” उल्लुओं से बदला “


 बहुत समय पहले की बात है, एक बार एक जंगल मे एक बहुत घना पेड़ था। उस पेड़ में जंगल के रंग बिरंगे और अनेक तरह के पक्षी मिल जुलकर रहते थे।

   युवा पक्षी सभी के लिए खाना जुटाने के लिए सुबह जंगल को चले जाते थे और जो बुजुर्ग पक्षी होते थे वे सभी छोटे नन्हें पक्षियों की देखभाल किया करते थे।

उनके पेड़ के ही पास एक गूफ़ा थी। जिसमें उल्लू रहते थे। उल्लू दिन भर तो सोए रहते थे और जब रात हो जाती थी तो अपनी गूफा से बाहर निकल जाते थे।

  एक बार उल्लू उड़कर जंगल घूम रहे थे,

तभी एक बुजुर्ग उल्लू उस पेड़ से टकरा गया। जिससे कि पक्षियों का एक घोंसला नीचे जमीन पर गिर गया। सभी पक्षियों की आंखे खुल गयी। और सभी आपस मे झगड़ा करने लग गए।

उल्लू रात को अधिक शक्तिशाली हो जाते थे तो लड़ाई में वे सभी पक्षियों से जीत गए और तभी से उल्लूओं और पक्षियों के बीच दुश्मनी चालू हो गयी।

  तब से रोज रात को आकर उल्लू पक्षियों को परेशान करने लगे।

  इन सब से परेशान हो कर पक्षियों ने एक सभा का आयोजन किया और उसमें उल्लूओं की हरकत का जवाब देने का मुद्दा उठाया। सभी पक्षी उल्लूओं के रवैये का मुह तोड़ जवाब देना चाहते थे।

  तभी एक वृद्ध पक्षी ने एक उपाय सुझाया। पहले सबको थोड़ा अजीब लगा लेकिन फिर सब मान गए।

   सभी पक्षियों ने मिलकर उस बूढ़े पक्षी को खूब पीटा और वृद्ध पक्षी जल्द से उड़कर उल्लूओं के पास गया और उल्लूओं के राजा से मदद मांगने लगा। उल्लूओं के राजा ने पूछा, “क्या हुआ आप हमारे यहां कैसे?”

तो पक्षी बोला, ” जब मैं ने कहा कि पक्षियों, उल्लू और उनके राजा तुमसे आशिक बलशाली हैं तो तुमने मेरी बात नहीं मानी । अब भुगतो! तो मेरी इस बे पर सभी ने मुझे मारा और घर से भी निकाल दिया।

अब मैं आपकी शरण मे हूं। कृपया मेरी सहायता करिए। मैं अपना घोंसला यही आपके निकट बनाना चाहता हूं।”

  उल्लूओ का राजा , उसकी चापलूसी करने वालो को बहुत अच्छा मानता था, वह बोला, ” आप जब तक चाहे यहां रह सकते हैं! मैं देखता हूँ आपको कौन यहां हानि पहुंचाता है।

Chidiya ki Kahani Moral Part- इस प्रकार वृद्ध पक्षी वहीं रुक गया और उस पेड़ पर एक एक करके लकड़ियों को जमा भी करता गया। औऱ जब दिन में उल्लू सो जाते तो अपने परिवार से भी मिल आता।

   15-20 दिन बाद कौए ने कई सारी लकड़ियों को जमा कर लिया। और अपने सभी साथियों को वहां इकट्ठा कर लिया।

सभी ने मिलकर लकड़ियों को उठाकर गूफ़ा के प्रवेश द्वार पर रख दिया और कौए ने जमीन से दो पत्थर के टुकड़े उठाए उनमे रगड़ पैदा की जिससे कि,

आग उतपन्न हुई और उन्होंने सभी लकड़ियों को जला दिया।

अंदर गर्मी और आग की लपटों से तड़प तड़प कर सभी उल्लू मर गए।

और इस प्रकार वृद्ध पक्षी की योजना सफल हुई और उन्होंने उल्लूओ से अपना बदला लिया।

 अब पक्षियों को हमेशा हमेशा के लिए उन सभी धूर्त उल्लुओं से छुटकारा मिला।


सीख | Chidiya wali Kahani : ” बुद्धिमत्ता और सावधानी से किये गए कार्य सदा सफल होते हैं।”


” गौरेया और कबूतर “


Pakshiyon ki Kahani- एक बार की बात है। एक घना जंगल था, जिसमे भिन्न भिन्न प्रकार के जानवर रहा करते थे। इस ही जंगल मे बहुत सारे पक्षी भी अपने अपने घोंसलों में निवास करते थे।

   एक पेड़ पर एक गौरैया अपने बच्चों के साथ हंसी खुशी रह रही थी। तथा वे सभी अपने अपने जीवन मे बहुत खुश थे। एक दिन अचानक बहुत ज़ोर ज़ोर से बारिश होने लगी।

पूरा जंगल तहस नहस होने लगा। गौरैया का घोंसला नीचे गिरकर टूट गया। गौरेया को अब समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह करे तो करे क्या।

   तब उसे अपने दोस्त कबूतर की याद आई। वह जंगल के सबसे घने वृक्ष पर रहता था। उसे लगा कि अब वही मेरी कुछ मदद कर सकता है।

क्योंकि उसका घोंसला तो अच्छी जगह पर था टूटा नहीं होगा इतनी भयानक बारिश में। यह सोचकर वह अपने बच्चों को लेकर कबूतर के घर की तरफ उड़ चली। वे सभी बुरी तरह भीग चुके थे।

   सभी उस घने पेड़ पर पहुंचे। गौरैया ने बाहर से ही आवाज लगाई, ” कबूतर ओ कबूतर! कहा हो तुम? बाहर आओ मुझे कुछ बात करनी है तुमसे। कबूतर बाहर नहीं आया।

कुछ देर हो जाने के बाद, गौरैया फिर बोली, “कबूतर मेरा घोंसला तेज बारिश की वजह से गिर चुका है। क्या केवल आज के लिए मैं अपने बच्चों को तुम्हारे घर मे रख सकती हूं। मैं कल ही नया घोंसला बना लुंगी।”

फिर अंदर से आवाज आई। “मेरे बच्चे सो चुके हैं। हल्ला मत करो। तुम्हारा घोंसला टूट गया है तो मैं क्या करूँ? मेरा घोंसला भी तोड़ना चाहती हो क्या? मैं तुम्हारी कोई भी सहायता नहीं कर सकता।”

   चिड़िया ने कहा ठीक है, औऱ वे सभी वहां से चले गए।

Birds stories in hindi Moral Part- जैसे तैसे उन सभी ने रात गुजारी। अगली ही सुबह चिड़िया ने मेहनत करके एक घोंसला बनाया और उसके बच्चों ने भी उसकी सहायता की। अब सभी खुशी से वहां रहने लगे।

     एक दिन अचानक फिर से बहुत तेज बारिश हो रही थी, तो गौरेया के घर पर कबूतर अपने बच्चों को लेकर पहुंच गया। कबूतर का भी घोंसला टूट चुका था।

गौरैया ने उसकी हालत देखी और उसकी बात भी सुनी। उसने झट से उन सब को अपने अंदर बुला लिया। तब कबूतर को अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ और उसने चिड़िया से माफी भी मांगी।


सीख | Ek Chidiya ki Kahani : “आवश्यकता पड़ने पर सभी की सहायता करनी चाहिए। तभी कोई हमारी भी सहायता करेगा। क्या पता अगली बार हम भी किसी मुसीबत में फसें।”


Birds Story in Hindi


” कबूतर और बहेलिया “


Chidiya ki Kahaniyan- एक गांव के पास एक बहुत बड़ा जंगल था। यह जंगल दो गांवों के बीच मे था।

   जंगल मे एक बहुत बड़ा पेड़ था। उसमें बहुत सारे कबूतर निवास करते थे। कि कबूतरों में कुछ कबूतर वृद्ध भी थे। जो कि सभी का मार्गदर्शन करते थे और बुरे मार्ग पर जाने से अन्य कबूतरों को रोकते थे।

उन्हीं में से एक कबूतर था, वह बहुत बुद्धिमान और समझदार था। वह कबूतरों का सरदार था।

  पेड़ की शाखाओं से लताएं निकलने लगीं थी।

वह छोटी ही तभी कबूतरों के सरदार ने उनसे कहा, ” हमे यह लताएँ काट देनी चाहिए। नहीं तो भविष्य में इसकी वजह से हम सब खतरे में भी पड़ सकते हैं।”

सब ने उसकी बात सुनी और सबको लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है। भला पेड़ की लताएँ हमारे लिए खतरनाक कैसे हो सकती हैं। किसी ने तो यह भी कहा कि लगता है

अब कबूतर बूड़ा हो चुका है तभी ऐसी बातें कर रहा है। हमे इसकी बात नहीं सुननी चाहिए।

   किसी ने भी कबूतर की बात नहीं मानी।बहुत दिन बीत गए और वे लताएँ मजबूत और मोटी हो गयी और जमीन को छूने लगी। उसकी सहायता से कोई भी पेड़ पर आसानी से चढ़ सकता था।

एक दिन गांव से एक बहेलिया उस जंगल मे आ गया। वह उस ही पेड़ के पास पहुंच गया। बहेलिये ने अपने मन मे सोचा, यह पेड़ तो बहुत बड़ा है। कोई न कोई तो इसमें रहता ही होगा! इस मे ही अपना जाल बिछा देता हूँ। वह लताओं की सहायता से पेड़ पर चढ़ा और उसने  एक बड़ा सा जाल पेड़ पर बिछा दिया।

Birds Stories in Hindi Moral Part-उस समय पेड़ पर कोई भी नहीं था। सभी अपने लिए भोजन लेने के लिए बाहर गए थे।

जैसे ही कबूतर वापस अपने पेड़ पर आए तो वे बहेलिये के उस जाल में फंस गए।

    सरदार बोला, ” यह तो होना ही था। जब मैं पहले सबको समझा रहा था तो किसी ने भी मेरी बात नहीं सुनी। अब भुगतो सब।”

सभी कबूतरों को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने वृद्ध कबूतर से माफी भी मांगी और इस समस्या को सुलझाने को कहा।

कबूतर ने एक युक्ति सोची और सभी को उसके बारे में बताया। सभी कबूतर मान गए।

  अगले दिन जब बहेलिया आया और कबूतरों को फंसा हुआ देख तो वह बहुत खुश हुआ और उसने जाल सहित सभी कबूतरों को पेड़ से निचे उतारा।

   ऐसा लग रहा था कि जैसे सभी कबूतर मर गए हैं। जब बहेलिये ने जाल उनपर से हटाया तो, सभी पक्षी अचानक उठ गए और सरदार के एक इशारे पर सब आसमान की ऊंचाइयों में उड़ चले। इस प्रकार वृद्ध सरदार की योजना सफल हुई और उसने सभी की जान भी बचाई।


सीख | Chidiya ki Kahani : ” अपने से बड़ों की बातों को हमेशा मानना चाहिए।”


” नकल और अकल “


Tony Chidiya ki Kahani- एक बार एक जंगल के पास की चट्टान के ऊपर एक गिद्ध रहता था। वह बहुत ही चालक और शिकारी प्रवृत्ति का था। वह चट्टान से ऊंची उड़ान भरकर अपना शिकार किया करता था।

जंगल मे बहुत सारे पशु पक्षी रहा करते थे। गिद्ध की पैनी नज़र जब भी किसी को देखती तो गिद्ध सतर्क हो जाता और उस पशु अथवा पक्षी का शिकार कर लेता था।

    चट्टान के ही पास बहुत सारे खरगोश रहते थे। खरगोश बहुत ही चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी चालाकी से गिद्ध से बचे रहते थे।

वही पास के पेड़ पर एक कौआ रहता था। वह रोज गिद्ध को शिकार करता हुआ देखता था। और उसकी नजर उन खरगोशों पर भी थी। वह स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझता था।

लेकिन जब भी वह कोई कार्य करने की सोचता तो उसका उल्टा ही हो जाता था।

  एक दिन जब गिद्ध शिकार करने के लिए बैठा था तो, कौआ उसको ध्यान से देख रहा था। गिद्ध ने झट से एक ऊंची उड़ान भरी और शिकार को अपनी चोंच से दबाकर ले आया।

Birds story in hindi Moral Part- कौए ने सोचा मैं भी अब ऐसा ही करूँगा।

वह खरगोश का शिकार करने की सोच रहा था। उसने भी पेड़ से ऊंची उड़ान भरी। लेकिन खरगोश ने उसे उसकी ओर आते हुए देख लिया। वह जाकर चट्टान की खोह में जाकर छिप गया।

लेकिन कौए को धोखा हुआ औऱ वह खरगोश को पकड़ने के चक्कर मे चट्टान से टकरा गया और उसकी गर्दन टूट गयी।

कौआ वहीं तड़प तड़प कर मर गया।


सीख | Pakshiyon ki Kahani :  ” नकल के लिए भी अक्ल चाहिए होती है। किसी भी कार्य को करने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार कर लेना चाहिए। “


Chidiya wali Kahani


” मित्रता “


Pakshiyon ki Kahani- एक जंगल था उसमें बहुत से जानवर रहते थे। उस जंगल में हिरन, कौआ, कछुआ और चूहे के बीच बहुत पक्की मित्रता थी।

वे सभी सुख दुख में एक दुसरे का साथ दिया करते थे।

​​   एकबार जंगल में शिकारी आया और उस शिकारी ने हिरन को अपने जाल में फंसा लिया। ​अब बेचारा हिरन असहाय सा जाल में फंसा था उसे लगा कि आज मेरी मृत्यु निश्चित है ।

उसे बहुत डर लग रहा था, इस डर से वह घबराने लगा।

वह अपने मित्रों को ही याद कर रहा था। तभी उसके मित्र कौए ने ये सब देखा और उसने कछुआ और चूहे को भी हिरन की सहायता के लिए बुलाया, क्योंकि यह कार्य आसान नहीं था

और वह अकेले नहीं कर सकता था।

​​कौए ने जाल में फंसे हिरन पर , बिना कोई नुकसान पहुंचाए इस तरह चोंच मारना शुरू कर दिया जैसे कौवे किसी मरे जानवर की लाश को नोंचकर खाते हैं।

Birds Story in Hindi Moral Part- अब शिकारी को लगा कि कहीं यह हिरन मर तो नहीं गया।

​​तभी कछुआ उसके आगे से गुजरा। शिकारी ने सोचा हिरन तो मर गया इस कछुए को ही पकड़ लेता हूँ। यही सोचकर वह कछुए के पीछे पीछे चल दिया।

​इधर मौका पाते ही चूहे ने हिरन का सारा जाल अपने नुकीले दांतों से काट डाला और उसे आजाद कर दिया।

​​शिकारी कछुए के पीछे- पीछे जा ही रहा था कि तभी कौआ उड़ता हुआ आया और कछुए को अपनी चोंच में दबाकर उड़ा ले गया।

शिकारी देखता ही रह गया। इस तरह सभी मित्रों ने मिलकर एक दूसरे की जान बचायी। और सभी जंगल मे जाकर खुशी खुशी रहने लगे।


सीख | Chidiya wali Kahani : ” हमेशा ऐसे मित्र बनाने चाहिए जो सुख तथा दुख दोनों में ही साथ रहें। “


” कोयल औऱ दयालु पेड़ “


Tony Chidiya ki Kahani- एक बार की बात है एक जंगल में एक कोयल रहा करती थी। उसने एक पेड़ में अपना घोंसला बनाया हुआ था।

उस घोंसले में वह अपने बच्चों के साथ रहती थी। बरसात के दिन थे।

कभी धूप आ रही थी कभी नहीं। कोयल ने पहले से ही अपने और अपने बच्चों के लिए खाना पहले से ही जुटा कर रखा था।

  लेकिन कुछ दिनों बाद कोयल का खाना खत्म हो गया। अब कोयल के बच्चों को भूख लगने लग गयी। कोयल ने अपने बच्चों से कहा, ” बच्चों तुम चिंता मत करो मैं अभी तुम्हारे लिए खाना लेकर आती हुं।”

वह उड़कर खाना लेने के लिए चली गयी। लेकिन थोड़ी ही देर में तेज बारिश होने लगी। बारिश से कोयल के पंख पूरे गीले हो गए। अब वह उड़ भी नहीं पा रही थी। कोयल ने सोचा,

मैं अब उड़ नहीं पा रही हूं। मुझे कुछ देर कहीं पर बैठ जाना चाहिए। जब मेरे पंख सुख जाएंगे तब मैं उड़कर अपने घर चली जाऊंगी।

  लेकिन अब एक समस्या थी कि वह बैठेगी कहां! उसे पास में एक आम का पेड़ दिखा, वह पेड़ के पास गई और बोली, ” मीठे आम के पेड़ मेरे पंख भीग चुके हैं। मैं अब उड़ नहीं पा रही हूं।

क्या आप मुझे अपनी डाली पर बैठने के लिए थोड़ी सी जगह देंगे?”

आम का पेड़ बोला, ” नहीं नहीं! कोयल, तुम मेरे ऊपर बैठोगी तो मुझे दर्द होगा और अगर तुमने मेरे फल खा लिए तो? तुम कोई दूसरा पेड़ देख लो।”

  कोयल वहां से चली गयी। अब उसे एक पपीते का पेड़ दिखाई दिया। वह पपीते के पास गई और उससे मदद मांगी।

पपीते के पेड़ ने भी उसे मना कर दिया। अब कोयल बहुत ही निराश हो चुकी थी। उसके पंखों में दर्द भी होने लगा था।

Birds story in hindi Moral Part- अब उसे एक नीम का पेड़ दिखाई दिया उसने निम के पेड़ से कहा,” कड़वे नीम के पेड़ मेरे पंख भीग गए हैं..

” बस इतना कहना था कि नीम का पेड़ बोला, ” तुम बहुत परेशान लग रही हो।

तुम जितनी देर चाहें यहां आराम कर सकती हो। लेकिन मेरे पास तुमहे खाना देने के लिए ये कड़वे फल ही है।”

  चिड़िया भावुक हो गयी और बोली, ” तुम बहुत अच्छे हो। आज से तुम कड़वे पेड़ नहीं बल्कि दयालु पेड़ हो।”

कोयल थोड़ी देर वहां बैठी और पंख सूखते ही अपने घर को वापस चली गयी।


सीख | Chidiya ki Kahani : “केवल बाहरी आवरण से कुछ नही होता। आन्तरिक मन और गुण होने भी अति आवश्यक है।”


Conclusion | Stories


आज आपने पढ़ी Chidiya ki Kahani. आशा करते हैं आपको हैं आपको आज की हमारी यह Birds stories in Hindi पसन्द आयी, अगर आईं तो बताइए कमैंट्स में, और ऐसी ही रोचक कहानियां पढ़ने के लिए बने रहिये sarkaariexam के साथ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.