7 Special Fairy Tales in Hindi | Fairy Tale Stories in Hindi for Kids

मनोरंजन से भरी Fairy Tales in Hindi. जो विश्व प्रख्यात होने के साथ ही इन्टरस्टिंग भी हैं। उम्मीद है, आपको यह Fairy Tale Stories पसन्द आएंगी।

इस आर्टिकल में आपको सात फेमस Fairy Tales in Hindi मिलेंगी। आशा करते हैं आपको पसन्द आएंगी, तो चलिये शुरू करते हैं।


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Fairy Tales in Hindi


सिंड्रेला


एक बार शहर में बहुत ही सुंदर लड़की रहती थी, जिसका नाम था सिंड्रेला। वह उस नगर की सबसे सुंदर लड़की थी। वह अपनी सौतेली मां औऱ दो बहनों के साथ रहती थी।

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सौतेली माँ  सिंड्रेला को बिल्कुल भी  अच्छा नहीं मानती थी।

वह सिंड्रेला से घर का सारा काम कराती थी, और सिंड्रेला को भर पेट कहना भी खाने के लिए नहीं देती थी। सिंड्रेला सब कुछ चुप चाप सहती रहती औऱ अपनी मां और बहनों का सारा कहना मानती थी।

उसका सारा दिन काम करने में निकल जाता था। उसकी माँ उन कामों में भी नुक्स निकाल कर उनको सिंड्रेला से दुबारा करवाया करती थी।

एक दिन नगर के राजकुमार ने अपने जन्मदिन के अवसर पर पूरे नगरवासियों को अपने महल में जलसे के लिए आमंत्रण भेजा। शाही दूत हर एक घर न्योता देने के लिए जा रहे थे।

तभी एक दूत सिंड्रेला के घर पर भी गया। सिंड्रेला रसोई में बर्तन साफ कर रही थी। दूत ने घर में आकर बताया, ” राजकुमार का जन्मदिन है और आप सभी को आना होगा।

और खास कर लड़कियों को !  राजकुमार अपने जन्मदिन पर नगर की ही किसी लड़की को चुनकर उससे शादी भी करने वाले हैं। आप सभी पूरे परिवार के साथ आइएगा।”

इतना कहकर राजदूत वहां से चला गया।

शादी की बात सुनकर सिंड्रेला की मां और दोनो बहने बहुत खुश हुईं। लेकिन तब ही, सौतेली मां के मन मे विचार आया कि, सिंड्रेला तो सबसे सुंदर है,

यदि यह राजकुमार के जन्मदिन पर जाएगी तो राजकुमार इस को ही पसन्द करके इसके साथ शादी कर लेंगे। अब वह सिंड्रेला को जलसे में जाने से रोकने के उपाय सोचने लगी।

   सिंड्रेला भी रसोई से सब कुछ सुन रही थी। वह बाहर आई और उसने अपनी सौतेली माँ से डरते हुए कहा, “मां मैं भी जलसे में जाना चाहती हूँ।”

   उसकी मां ने कोई उत्तर नहीं दिया और उसको झाड़ू थमा दिया। शाम को जब सिंड्रेला अपने हाथ से अपने लिए ड्रेस बना रही थी तो, उसकी मां को बहुत गुस्सा आया,

उसके हाथ से इसकी मां ने सारे कपड़े छीन लीए। और उसे घर का सारा काम करने के लिए दे दिया।

 अगले ही दिन राजकुमार का जन्मदिन था। और सिंड्रेला को बहुत सारा काम करना था। यह लगभग नामुमकिन सा था।

   अगले दिन की शाम हो गयी। सिंड्रेला की दोनो बहने और मां बहुत सज-धज कर एक बोगी में बैठ कर राजकुमार के महल चले गईं। अब सिंड्रेला घर में अकेली थी और काम कर रही थी।

उसका बहुत मन था जन्मदिन पर जाने का।

   सिंड्रेला अपनी किस्मत में रो रही थी कि वहां रोशनी अचानक बहुत बढ़ गयी। रोशनी से 1 सुंदर सी परी प्रकट हुई। सिंड्रेला अपने सामने एक सुंदर सी परी को देखकर हैरान रह गयी।

परी ने सिंड्रेला से कहा, सिंड्रेला मैं परी हूँ मुझे तुम्हारी मां ने यहां तुम्हारी मदद करने के लिए भेजा है। तुम जन्मदिन में जाना चाहती हो न! मैं तुम्हारी साहयता करुंगी।

इतना कहकर परी ने सिंड्रेला के कपड़ों को अपनी जादू की छड़ी घुमा कर एक अच्छी राजकुमारियों वाली ड्रेस में बदल दिया। सिंड्रेला के गंदे जूतों को भी अच्छे चमकदार जुतियों में बदल दिया।

अब सिंड्रेला किसी राजकुमारी से कम नहीं लग रही थी। बस जरूरत थी तो एक बोगी की, परी ने पास में पड़े एक कद्दू को अपने जादू से एक अच्छी शाही बोगी में परिवर्तित कर दिया।

    परी ने सिंड्रेला को उस बोगी में बिठाया। लेकिन परी ने सिंड्रेला को चेतावनी देकर कहा कि तुम रात के 12 बजे से पहले वहाँ से वापस आ जाना क्योंकि मेरा जादू केवल मध्यरात्रि तक ही चलेगा।

सिंड्रेला ने कहा ठीक है, मैं ध्यान रखूंगी। इतना कहकर वह शाही बोगी में चली गयी।

सिंड्रेला पार्टी में पहुंची। सबकी नजर उस पर ही टिक गई। सिंड्रेला की मां और बहने उसे पहचान भी नहीं पा रही थी। राजकुमार ने सिंड्रेला से उनके एक साथ नृत्य करने का प्रस्ताव रखा।

सिंड्रेला मान गयी और राजकुमार के साथ नृत्य करने लगी। समय का पता ही नहीं चला और 12 बजने ही वाले थे कि, सिंड्रेला को परि की सारी बातें याद आ गयी।

सिंड्रेला अब जलसे को छोड़ कर वहां से भागने लगी। राजकुमार ने उसका पीछा किया लेकिन तब तक वह जा चुकी थी।

  अफरा तफरी में सिंड्रेला की एक जूती महल की सीढ़ियों पर छूट गयी।राजकुमार ने उस जुती को उठाया और अपने पास रख लिया।

अगले दिन राजकुमार सिंड्रेला को ढूंढने के लिए, वह जूती लेकर नगर में आए। उन्होंने कई सारे घर देखे लेकिन किसी लड़की को भी जूती पैरों में नहीं आई। अब आई सिंड्रेला के घर को बारी।

सिंड्रेला की बहनों ने अपना अपना पैर जूती में डालने के कई प्रयास किये लेकिन जूती उन्हें नहीं आई। अब राजकुमार ने कोने में खड़ी सिंड्रेला से जुती को अपने पैरों में डालने का निवेदन किया।

जब सिंड्रेला ने वह जूती पहनी तो वह उसके पैर में अच्छी तरह से आ गयी। राजकुमार बहुत ही खुश हुआ। तब सिंड्रेला ने दूसरी जूती भी निकाल कर पहन ली।

राजकुमार ने सिंड्रेला के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। सिंड्रेला मान गयी। और दोनों की शादी हुई। अब दोनों खुशी खुशी अपना जीवन एक साथ प्रेम से व्यतित करने लगे।

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Fairy Tales Story in Hindi


 रैपिंजल 

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   एक बार की बात है, एक शहर में एक दम्पत्ति निवास करते थे। उनकी शादी को बहुत वर्ष बीत गए थे, उनकी कोई सन्तान नहीं थी। काफी वर्षों के बाद उनके घर में एक नन्हा सा मेहमान आने वाला था। होने वाले बच्चे की आने की खुशी में उसके होने वाले माता पिता बहुत ही खुश थे।

   उनके शहर में एक मुख्य प्रकार की सब्जी होती थी, जिसका नाम था रैपिंजल। उसका स्वाद बहुत ही लाजवाब होता था। लेकिन वह सब्जी केवल चुड़ैल के बाग में ही होती थी।

एक दिन अचानक होने वाले बच्चे की मां को वह सब्जी खाने का मन हुआ। उसने अपने पति से कहा, ” मुझे रैपिंजल की सब्जी खाने का बहुत मन है, यदि मुझे वह सब्जी नहीं मिली तो मैं भूखे ही रहूँगी,

और कुछ खाना भी नहीं खाऊँगी। उसका पति परेशान हो गया। और उसने अपने मन में निश्चय किया कि वह उस चुड़ैल के बाग जाएगा और वहां से रैपिंजल की सब्जी को लेकर आएगा।

   वह अपनी पत्नी को बिना बताए ही, घर से उसके लिए सब्जी को लेने के लिए चला गया। वह बिना कुछ सोचे समझे, हिम्मत कर चुड़ैल के बाग में घुस गया। वह सब्जियां तोड़ ही रहा था कि, चुड़ैल वहां आ पहुंची।

चुड़ैल ने उसको अपने हाथों से पकड़कर आकाश की तरफ को कर दिया। वह बोली, ” तेरी इतनी मजाल कि दिन दहाड़े तू मेरे बाग से चोरी कर करने के लिए आया!

अब तू यहां से वापस अपने परिवार के पास कभी नहीं जा पाएगा। हा हा हा हा…..”

तब वह रो रो कर बोला, ” मुझे माफ़ कर दो! मुझे कुछ भी करने से पहले एक बार मेरी यहां आने का कारण सुन लो फिर जो तुम फैसला करोगी मैं वैसा ही करूँगा। “

  चुड़ैल ने कुछ सोचा, औऱ कहा, ” बोल तू अपनी सफाई में क्या कहना चाहता है। वैसे मैं किसी की भी बातें नही  मानती हूं। पर तु इतना रो रहा है तो मैं तुझ पे उपकार कर रही हूँ। ”

  तब वह बोला, ” मेरी पत्नी मां बनने वाली है, उसे रैपिंजल की सब्जी खाने का बहुत मन था। तभी मैं उसके लिए यह सब्जी को तोड़ने के लिए तुम्हारे बाग में इस प्रकार चोरों की तरह आ गया।

मुझे माफ़ कर दो आज के बाद मैं कभी भी अपनी इस गलती को नहीं दोहराऊंगा।”

चुड़ैल ने पूरी बात को इत्मीनान से सुना फिर उस व्यक्ति से बोली, ” देखो लड़के, मैं तुम्हें मेरे रैपिंजल देने के लिए तैयार हूं। लेकिन बदले में तुम्हें भी कुछ देना होगा।”

व्यक्ति बोला, “आप जो कहोगी मैं आपको देने के लिए तैयार हूं।”

तब चुड़ैल बोली, “तुम्हारे घर मे जब बच्चा होगा तुम्हें वह हमेशा के लिए मुझे देना होगा।” इतना कहकर चुड़ैल वहां से गायब हो गईं।

  अब व्यक्ति के पास अफसोस करने के अलावा कुछ भी नहीं बचा था। वह घर गया और यह पूरी बात अपनी पत्नी को बताई। दोनों पति पत्नी अब इस बात पर फूट फूट कर रोने लगे।

समय बीता, और उनके घर एक प्यारी सी बेटी हुई। दोनों बहुत खुश थे। लेकिन थोड़ी ही देर में वहां चुड़ैल आ पहुंची। दोनों पति पत्नी बहुत डर चुके थे।

चुड़ैल ने डरावनी आवाज में हंसते हुए, नन्हीं लड़की को उसकी मां से छीन लिया औऱ उसे लेकर गायब हो गयी।

   चुड़ैल छोटी बच्ची को लेकर एक ऐसी मीनार पर लेकर गयी जिस पर प्रवेश के लिए कोई भी दरवाजा न था। मीनार में केवल एक खिड़की थी जो कि मीनार के सबसे ऊपरी हिस्से में थी।

और मीनार की ऊँचाई भी बहुत अधिक थी। चुड़ैल ने बच्ची को मीनार के सबसे ऊपरी भाग में रख दिया और उसका नाम रैपिंजल रख दिया, क्योंकि चुड़ैल को रैपिंजल नाम बहुत ही पसन्द था।

  रैपिंजल को चुड़ैल ने मां की तरह पाला। लेकिन उसे हमेशा बाहर की दुनिया से दूर रखा ताकि कोई भी उसको चुड़ैल से अलग न कर सके। रैपिंजल अब बड़ी हो चुकी थी। खास बात यह थी कि उसके बाल बहुत सुंदर थे,

सुनहरे लम्बे बाल रैपिंजल की खासियत थी। उसके बाल इतने लम्बे थे कि यदि वह अपने बालों को खिड़की से नीचे फेंकती तो वे मीनार की सतह को छू सकते थे। चुड़ैल जब बाहर से आती थी,

तो वह रैपिंजल का नाम तीन बार पुकारती थी, रैपिंजल बाहर आकर अपने बाल खिड़की से नीचे गिराती थी और चुड़ैल बालों को रस्सी के समान पकड़कर ऊपर चढ़ जाती थी।

   एक दिन 1 राजकुमार उस मीनार के रास्ते से गुजर रहा था। वह थक गया। और वहीं एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा। संयोग से उस समय चुड़ैल वहां आई और रैपिंजल को पुकारा।

रैपिंजल बाहर आई उसने अपने बाल नीचे फेंके और वह चुड़ैल ऊपर चढ़ गई। यह सब राजकुमार ने देख लिया। अब अगले दिन राजकुमार फिर से उस ही जगह आया,

और चुड़ैल की तरह आवाज निकालकर रैपिंजल को तीन बार पुकारा।रैपिंजल ने अपनी चुड़ैल मां को ही समझकर अपने बाल नीचे गिराए। राजकुमार बालों की सहायता से ऊपर चढ़ गए।

  रैपिंजल उसको देख कर डर गई और उसको मारने लगी। क्योंकि चुड़ैल ने उसे बताया था कि बाहर की दुनिया बहुत गंदी होती है।

   राजकुमार ने प्यार से उसका हाथ पकड लिया।औऱ उससे कहा, बाहर की दुनिया तुम्हें बुला रही है। क्या तुम मेरे साथ वह दुनिया देखना चाहोगी!” रैपिंजल ने भी हां कर दी। तब राजकुमार ने रैपिंजल से कहा,

मैं कल आऊंगा और तुम्हें इस कैद से वापस ले जाऊंगा। रैपिंजल की बालों की सहायता से वह वापस चला गया। जब चुड़ैल आई तो उसने अपनी शक्तियों से यह पता कर लिया कि, यहां कोई आया था।

अब वह ऊपर गयी और रैपिंजल को खूब खरी खोटी सुनाई उसके सुंदर सुनहरे बाल भी चुड़ैल ने काट दिये और रैपिंजल को अपने जादू से जंगल के बीचोबीच छोड़ दिया।

Fairy Tales Stories in Hindi Last Seen- अब अगले दिन राजकुमार फिर से उस जगह आया तो उसने रैपिंजल को पुकारा तो चुड़ैल वहां आ गयी।

चुड़ैल ने राजकुमार को अपनी शक्तियों से अंधा बनाकर वहीं नीचे फेंक दिया।

अब राजकुमार भी जंगल मे भटकने लगा। रैपिंजल बहुत मीठा गाना गाती थी। रैपिंजल कि आवाज सुनकर राजकुमार भी रैपिंजल के पास पहुंच गया। अब रेमपीजल उसकी हालत देखकर रोने लगी।

उसने रोते हुए राजकुमार के सर को अपनी गोद में रखा और सहलाने लगी। जब रैपिंजल के आंसू राजकुमार की आंखों में गिरे तो उसकी आँखों की रौशनी वापस आ गयी।

     अब राजकुमार रैपिंजल को अपने महल ले गया और उससे शादी कर ली। थोड़े ही दिनों बाद राजकुमार ने रैपिंजल के असली माता पिता को भी खोज निकाला और सभी प्रेम से एक साथ रहने लगे।

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Pari ki Kahani


राक्षस और फैरी

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    एक बार एक व्यापारी अपनी तीन बेटियों के साथ अपने घर में हंसी ख़ुशी रहता था। मां के न होने पर भी व्यापारी ने अपनी तीनो बेटियों को राजकुमारियों की तरह पाला था।

तीनो बेटियां बहुत ही अच्छी और गुणी थी। एक का नाम था स्वीटी, दूसरी का सिरी और तीसरी का फैरी। फैरी तीनो में से सबसे सुंदर थी। वह जितनी सुंदर थी उतनी ही शालीन भी थी।

   एक बार व्यापारी किसी आवश्यक कार्य से घर से 2-3 दिनों के लिए बाहर जा रहा था। व्यापारी ने अपनी तीनों बेटियों से पूछा, कि किसको क्या क्या चाहिए।

तब दोनों बहनों ने महंगे कपड़े और गहने मांगे, लेकिन फैरी ने केवल एक गुलाब का फूल मांगा।

   व्यापारी अपने घोड़े को लेकर समुद्र की ओर चल दिया। जब व्यापारी समुद्र मे अपने जहाज की ओर पहुंचा तो जहाज तूफान के कारण क्षतिग्रस्त हो चुका था। अब वह कहीं भी नहीं जा सकता था।

वह निराश हो गया औऱ सोचने लगा कि मैं अपनी बेटियों की इच्छा को कैसे पूर्ण करूँ।

   वह अपने घोड़े में बैठकर वापस आ रहा था। रास्ते में जब वह जंगल से गुजर रहा था तो बहुत भयंकर तूफान आ गया। घोड़ा तूफान में आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं था।

व्यापारी नीचे उतरा और आस-पास कोई ढंग की जगह देखने लगा ताकि वह वहां रुककर तूफान से बच सके।

  थोड़ी ही दूरी पर व्यापारी को एक महल दिखाई दिया, जंगल के बीचोबीच एक महल देखकर वह आश्चर्य चकित रह गया। लेकिन उसके पास सोचने का समय नहीं था। अतः वह अपने घोड़े को लेकर महल में चला गया।

घोड़े को एक सुरक्षित स्थान पर बांधकर व्यापारी महल के अंदर चला गया। महल के अंदर जाने पर उसने देखा कि पास में भर सा खाना पड़ा हुआ है।

व्यापारी ने सभी पकवान चखे और जब उसका पेट भर गया तो वह आराम करने चला गया।

सुबह हुई। वह अपने घर के लिए निकल रहा था, तभी उसको महल के बाहर एक बाग दिखाई दिया जिसमें बहुत से गुलाब के फूल रखे हुए थे। गुलाबों को देखकर व्यापारी को याद आया,

कि उसकी छोटी बेटी फैरी ने गुलाब मांगा था। सब एक गुलाब तोड़ लिया। लेकिन गुलाब को तोड़ते ही, वहां एक राक्षस आ पहुंचा।

  राक्षस ने व्यापारी से कहा, ” मैं ने तुम को इतना स्वादिष्ट भोजन दिया रहने के लिए जगह दी लेकिन तुमने मेरा ही नुकसान किया?”

व्यापारी राक्षस से माफी मांगने लगा । औऱ उसको अपनी परेशानियों को बताया। तब उसने गुलाब को तोड़ने का कारण भी उसे बता दिया।

राक्षस बोला, ” मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ लेकिन बदले में तुम्हें मुझे अपनी वही बेटी देनी होगी जिसके लिए तुम यह गुलाब का फूल ले जा रहे हो। “

व्यापारी की बात बिना सुने राक्षस ने उसके जहाज को ठीक कर दिया और उसको बहुत सारी सोने की मुद्राएँ दी। और वहां से गायब हो गया।व्यापारी बहुत दुखी हुआ और उस जगह से अपने घर को चल दिया।

   घर पहुँचकर उसने सारी बात अपनी बेटियों को बताई, तीनो बेटियां बहुत रोने लगी। लेकिन फैरी ने निश्चय किया कि वह उस राक्षस के पास जाएगी।

  अगले ही दिन वह राक्षस के महल के लिए रवाना हो गयी। महल के अंदर पहुंचते ही उसने भी खाना देखा और उसको खाने लगी लेकिन तभी वहां पर राक्षस पहुंच गया। राक्षस बहुत भयानक था।

उसे देख कर फैरी डर गई। लेकिन राक्षस ने फैरी के साथ कुछ गलत नहीं किया। और उसको एक कमरे में ले गया। वह कमरा बहुत सुंदर था उसमें फैरी की पसन्द का सारा सामान था।

और वहां एक खास जादुई दर्पण था जिसमे फैरी अपने घर की कार्यवाही को देख सकती थी।  फैरी खुश हुई और उसने मन मे सोचा कि राक्षस उतना बुरा भी नहीं है।

   अब वह राक्षस के साथ रहने लगी। राक्षस फैरी को बहुत अच्छे से रखता था। एक दिन अचानक फैरी के पिता की तबियत खराब हो गयी। तब फैरी ने राक्षस से अपने घर जाने की विनती की।

राक्षस मान गया उसने अपनी एक अंगूठी उसे दी और कहा, तुम इसे पहन कर अपने कमरे में जाना और आँखे बंद करना तुम अपने घर पहुंच जाओगी। लेकिन फिर तुम्हें 7तवे दिन वापस आना होगा।

नहीं तो मैं मर जाऊंगा।”

राक्षस की बात सुनकर फैरी अपने कमरे में गयी औऱ आंखे बंद की । जब उसकी आंखे खुली तो उसने खुद को अपने खुद के घर मे पाया। वह बहुत खुश हुई। उसने अपने बीमार पिता की खूब सेवा की।

और वे ठीक हो गए। 6 दिन बीत चुके थे। अब फैरी को सातवें दिन याद आया कि राक्षस ने क्या कहा था।

  वह फिर से अपने कमरे में गयी झटपट अंगूठी पहनी औऱ अपनी आंखों को बंद किया। जब उसकी आंखें खुली तो वह महल में पहुंच चुकी थी। उसने पूरे महल में देखा राक्षस कहीं नहीं था,

Fairy Tales Stories in Hindi ​Last Part- तब वह राक्षस को ढूंढने के लिए बगीचे में गयी। उसने वहां देखा कि, राक्षस जमीन पर गिरा हुआ है। फैरी ने सोचा कि राक्षस मर चुका है,

फैरी उसके पास गई और उससे चिपट कर खूब रोने लगी।

फैरी के आंसुओं की वजह से राक्षस दुबारा से जीवित हो गया। फैरी बहुत खुश हुई और मैं तुमसे प्रेम करने लगी हूँ कहकर उसे गले से लगा लिया। तब वह राक्षस एक राजकुमार में परिवर्तित हो गया।

फैरी यह बदलाव देखकर चकित हो गयी। टैब राजकुमार ने फैरी को बताया कि , मैं एक श्राप की वजह से राक्षस बन गया था। तुम्हारे प्रेम ने मुझे नया जीवन प्रदान किया है। अब दोनों ही बहुत खुश थे।

दोनो ने शादी कर ली। और फैरी के परिवार के साथ सब महल में खुशी खुशी रहने लगे।

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Story of Fairies


सात परियां और राजकुमारी

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एक रियासत में राजा का शाशन था। उसका विवाह हुए 2 साल हो चुके थे। दो साल बाद उनके घर मे एक राजकुमारी हुई। उसको आशीर्वाद देने के लिए सभी जगहों से बड़े बड़े लोग आए।

साथ ही उसे आशीर्वाद देने के लिए 7 बहुत ही सुंदर परियाँ भी आ पहुंची।

   सभी ने इस छोटी सी गुड़िया को आशीर्वाद दिया। अब परियों की बारी थी। एक- एक करके सभी 6 परियों ने राजकुमारी को आशीर्वाद दिया,

लेकिन छठी परि के बाद वहां एक बुरी परी प्रकट हुई। उसने राजा से कहा, ” क्यों राजन! तुमने सभी को आमंत्रित किया लेकिन तुम मुझे बुलाना तो भूल ही गए। चलो कोई बात नहीं मैं खुद ही आ गयी।”

सभी उस बुरी परी को देखकर बहुत दुखी हुए। अब बुरी परी फिर बोली, ” मैं इस बच्ची को आशीर्वाद देती हूँ कि यह अपने 18वें जन्मदिन पर केवल एक कांटा चुभने से मर जयगी।”

इतना कहकर बुरी परी वहां से चले गयी। राजकुमारी के माता पिता बहुत दुखी हुए और रोने लगे। तब सातवीं परी आगे आयी और बोली, ”राजा आप दुखी मत हों।

मैं बुरी परी के श्राप को पूरी तरह से खत्म तो नहीं कर सकती लेकिन मैं तुम्हारी बेटी को आशीर्वाद देती हूं कि जब इसे इसके 18वे जन्मदिन पर कांटा चुभेगा तो यह केवल बेहोश होगी,

और इसके साथ ही पूरा महल भी गहरी नींद में  सो जयगा। महल का समय थम जाएगा। जब तक एक नेक दिल राजकुमार आकर आपकी बेटी को नहीं छुएगा तब तक समय थमा ही रहेगा।”

  इतना कहकर वह अपनी अन्य परी साथियों के साथ वापस चले गई। समय बीता। धीरे धीरे राजकुमारी बड़े होने लगी। उसका एक के बाद एक जन्मदिन बीतता चला गया और अब 18वाँ जन्मदिन आ गया।

जन्मदिन की शुभकामनाएं देबे सभी लोग आए। और एक महिला भी आई वह अपबे साथ बहुत सारे गुलाब के फूलों को लाई थी। उसने सारे गुलाबों को जाकर राजकुमारी को दे दिया।

राजकुमारी को गुलाब बहुत पसंद थे। जैसे ही राजकुमारी ने गुलाब पकड़े गुलाब का एक कांटा राजकुमारी के हाथों में चुभ गया। राजकुमारी उसी समय बेहोश हो गयी। साथ ही पूरा महल भी अब गहरी नींद सोने लगा।

   असल मे वो गुलाब देने वाली महिला और कोई नहीं बल्कि बुरी परी थी। उसने अपना असली रुप धारण किया ।उसको सातवीं परी के आशीर्वाद के बारे में नहीं पता था और वह बुरी परी राजकुमारी को मरा हुआ समझकर वहां से चले गई।

सातों परियाँ भी राजकुमारी के 18वें जन्मदिन पर महल में आई थी। लेकिन वे सभी बुरी परी के सामने छिपी हुई थी। जैसे ही बुरी परी गयी वैसे ही अच्छी परियाँ बाहर आईं,

और राजकुमारी को उसके कक्ष में ले गयी। उसको अच्छी तरह से तैयार किया और उसके पलंग पर उसे सुला दिया। सभी परियाँ वहां से चली गयी।

  बहुत साल बीत गए और वह महल विरान हो गया क्योंकि उसका समय तो थम चुका था।

सौ साल बीत गए लेकिन वहां कोई भी नहीं आया।

  लेकिन सौ साल बाद एक राजकुमार अपनी रियासत में शिकार से बाद लौट रहा था, तब वह सीधे रास्ते से न होकर एक बड़े रास्ते से मजे लेते हुए गुजर रहा था। तभी उसकी नजर एक बड़े ही सुंदर महल पर पड़ी।

उसने मन मे सोचा कि, इतना समय हो गया मुझे सफर करते करते, लेकिन आज तक मैं इस महल के बारे में नहीं जान सक़ा और न ही किसी ने मुझे इस महल के बारे में बताया। चलो महल चलकर देखते हैं।

यह सोचकर उसने अपने घोड़े का रुख महल की ओर मोड़ दिया। घोड़े को बाहर खड़ा करके वह अंदर जाने लगा। उसने देखा कि, सारे पहरेदार दिन में ही खर्राटे मारकर सो रहे हैं। उसे बहुत ही आश्चर्य हुआ।

वह महल के अंदर की ओर गया। जब वह राजसभा में पहुँचा तो उसने देखा कि, वहां के रानी और राजा भी सो रहे हैं। राजकुमार को महल में कुछ गड़बड़ लगी।

वह इस बात की तह तक जब के लिए  महल की तलाशी लेने लगा। तलाशी के लिए, वह इधर-उधर भटक रहा था। उसने सभी कक्षों में देखा लेकिन उसको कुछ भी नहीं मिला।

फिर वह एक महल के आखिरी कक्ष में गया। उसने देखा कि कक्ष बाहर से बहुत ही सुंदर तरीके से सजा हुआ है। और उसके मार्ग में फूल बिछे हुए हैं। राजकुमार आगे गया।

और कक्ष का दरवाजा खोलकर अंदर गया। अंदर जाकर उसने देखा कि एक बहुत ही सुंदर राजकुमारी अपने पलंग पर सो रही है। राजकुमारी ने उसका मन मोह लिया,

Fairy Tales in Hindi ​Last Part- राजकुमार से रुका नहीं जा रहा था। वह राजकुमारी के पास गया औऱ उसे स्पर्श किया। जजीसे ही राजकुमार ने राजकुमारी को स्पर्श किया,

वैसे ही, राजकुमारी की अचेतन अवस्था टूट गयी और वह उठ गई ।

राजकुमारी को पूरी बात समझ मे आ गयी। राजकुमारी के जगते ही, पूरे महल में जादू की लहर दौड़ी औऱ सभी अपनी अपनी नींद से जाग गए।

   राजकुमारी ने, राजकुमार को सारी बातें बता दीं।अब राजकुमार ने राजकुमारी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। राजकुमारी ने उसको अपने माता पिता से मिलवाया और उससे शादी करने के बारे में कहा।

राजा ओर रानी मान गए। और राजकुमार के घरवालों से मिलकर दोनों का विवाह करवा दिया।

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Fairy Tales in Hindi Snow White

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स्नो व्हाइट और सात बौने


  ऊंची पहाड़ियों पर एक महल था। उस पर एक लड़की रहती थी, जिसका नाम था स्नो व्हाइट। वह बहुत ही सुंदर थी। उसका रंग पहाड़ियों की बर्फ की तरह सफेद और चमकदार था।

वह उस समय की संसार की सबसे सुंदर लड़की थी। माँ के गुजर जाने के बाद उसके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया और उसकी सौतेली माँ घर आ गयी।

   सौतेली माँ खुद को सबसे सुंदर औरत समझती थी। उसको अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता था। उसके पास एक जादुई आईना था।

जादुई आईने मे देखकर जब भी वह कहती कि, के आईने बता सबसे सुंदर कौन है? तब आईना जवाब देता कि आप ही सबसे सुंदर औरत हो।

   लेकिन जब शादी के बाद वह महल आई तो, उसने एक दिन आईने से पूछा कि इस महल की सबसे सुंदर महिला कौन है?

तब आईने में जवान दिया, ” आप तो सुंदर हो ही, लेकिन इस महल की सबसे खूबसूरत महिला स्नो व्हाइट है।”

यह सुनकर वह महिला तिलमिला उठी। उसने अपने सैनिकों को बुलवाया और स्नो व्हाइट को जंगल ले जाकर मार डालने का आदेश दिया।

Fairy Tales in Hindi ​Intrusting Part- सैनिक स्नो व्हाइट को जंगल ले गए लेकिन उनको स्नो व्हाइट पर दया आ गयी और उन्होंने स्नो व्हाइट को जीवित छोड़ दिया,

औऱ सोचा कि, जंगली जानवर तो इसे खा ही जाएंगे।

सभी सैनिक स्नो व्हाइट को जंगल मे छोड़कर  महल वापस चल दिये। स्नो व्हाइट  को बेहोशी की हालत में वहां लाया गया था। जब स्नो व्हाइट को होश आया तो उसने स्वयं को जंगल में पाया।

उसको जंगल के रास्ते नही पता थे। तब वह जंगल मे भटकने लगी। जंगल मे भटकते भटकते उसे एक घर मिला। घर बहुत ही छोटा सुर बहुत ही अच्छा था।

स्नो व्हाइट अंदर गयी और उसने देखा कि अंदर सात बौने हैं। वह छोटा सा घर सात बौनों का था। स्नो व्हाइट ने अपनी पूरी कहानी बौनों  को सुना दी। बौनो ने निर्णय लिया कि स्नो अब से हमारे साथ ही रहेगी।

स्नो व्हाइट दिन भर घर का काम करती थी और बौने बाहर जक्त उसके औऱ अपने लिए खाने का समान लाते थे।

  वहीं महल में जब स्नो व्हाइट की सौतेली मां ने एक दिन और अपने आईने में देखकर बोला, ” बता आईने दुनिया मे सबसे सुंदर कौन है?

तब आईना बोला, ” आप सुंदर हो, लेकिन दुनिया में सबसे सुंदर स्नो व्हाइट है।”

तब महिला को स्नो व्हाइट के जीवित होने पर आश्चर्य हुआ और उसका जीवित होने का कारण सैनिकों की लापरवाही समझा।

उसने कहा, अब मैं स्नो व्हाइट को अपने हाथों से मरूँगी। ए आईने! तू यह बता कि स्नो व्हाइट कहां रहती है?तब आईने ने जवान दिया कि वह जंगल के बीचों स्थित बौनो के घर मे रहती है।

वह बिना देर किए एक बड़ी फल बेचने वाली महिला का वेश धारण कर स्नो व्हाइट के पास पहुँच गई। स्नो व्हाइट घर पर ही थी। बौने खाने का इंतजाम करने के लिए बाहर गए हुए थे।

Fairy Tales in Hindi ​Last Part- बूढ़ी महिला ने बाहर से दरवाजा खटखटाया।  अंदर से स्नो व्हाइट ने दरवाजा खोला। दरवाज़े के खुलते ही महिला को स्नो व्हाइट दिखी और उसने स्नो व्हाइट को फल दिए।

स्नो व्हाइट ने फल लेने से इनकार कर दिया। बढ़िया बोली। बेटी फल बहुत मीठे हैं। तुम चख कर देखो। तुम्हें पसन्द आएंगे। और मैं तुमसे रुपये भी नहीं लुंगी। स्नो व्हाइट ने एक फल चखा।

जैसे ही उसने एक कौर मुह में डाला वह बेहोश हो गयी। उसकी सौतेली मां उसे मरा हुआ समझ कर वापस महल चले गई।

 बौने वापस आ गए। उन्होंने देखा कि स्नो व्हाइट बेहोश पड़ी हुई है। उन्होंने स्नो व्हाइट के हाथ का ज़हरीला फल देखा औऱ उन्होंने भी उसको मरा हुआ समझ लिया जैसे ही वे स्नो व्हाइट को ताबूत में बंद कर रहे थे,

वैसे ही वहां पर एक राहगीर युवक आया। उसने स्नो व्हाइट को देखा वह उसे देखते ही उस पर मोहित हो गया। उसने स्नो व्हाइट को हाथों में उठाया,

झटका लगने की वजह से स्नो व्हाइट के मुह से वह जहरीला फल बाहर निकल गया। फल के बाहर निकलते ही, स्नो व्हाइट बिल्कुल ठीक हो गयी। राहगीर उसे अपने साथ अपने घर ले गया।

दूसरी ओर महल में पहुंचते ही, महिला ने आईने से खुश होकर पूछा, ” अब बता आइने, दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला कौन है?”

आईने ने उत्तर दिया , ” दुनिया की सबसे सुंदर महिला स्नो व्हाइट है। यह सुनते ही महिला को बहुत अधिक क्रोध आया और उसने सोचा यह आईना झूठ बोल रहा है, यह सोच के क्रोध में उसने अपना आईना ही फोड़ डाला।


Hindi Fairy Tales


लालच का अंजाम 


   एक राज्य में एक राजा का शासन था। वह राज बहुत ही पराक्रमी औऱ बहादुर था। राजा की दो रानियां थी। बड़ी रानी और छोटी रानी। छोटी रानी बड़ी रानी से अधिक सुंदर और रूपवान थी।

उसके रूपवान होने की वजह से राजा उससे अधिक प्रेम करता था। छोटी रानी राजा का प्रेम पाकर और महल की प्रतिष्ठा को पा कर बहुत हो घमण्डी हो गयी थी।

उसको आप के शिव कोई भी दिखाई नहीं देता था। रानी ने राजा को बड़ी रानी के खिलाफ भड़काया । राजा भी अपनी रानी के प्रेम और सुंदरता में इतना रम चुका था,

कि उसको सही गलत समझ मे नहीं आ रहा था। राजा छोटी रानी के कहने पर बड़ी रानी को महल से बाहर निकल दिया। अब छोटी रानी महल में बिना किसी भय के रह रही थी।

    बड़ी रानी महल से निकले जाने से बहुत ही दुखी थी वह नदी के किनारे जाकर एक पेड़ के नीचे बैठ गयी। वह बीती बातों कप दोहरा रही थी एयर फूट फूट कर रोए जा रही थी।

उसने तो आत्महत्या करने का भी मन बना लिया था। जैसे ही वह नदी डुबकी लगाने पहुंची तो, वहां

पे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। पेड़ पर एक रौशनी सी उभरि और थोड़े ही देर में वहां एक परी प्रकट हुई।

Fairy Tales in Hindi ​Intrusting Part- परी ने रानी से पूछा, ” तुम इतना क्यो रो रही हो ?  और आत्महत्या करने क्यों जा रही थी! पता है ना जीवन कितना अनमोल होता है।”

परी की बात सुनकर रानी ने अपनी बात बताई और यह भी बताया कि उसके साथ क्या क्या हुआ। राजा ने उसकव कुरूप होने की वजह से उठाए घर से बाहर कर दिया।

अगर मैं कुरूप हूँ तो इसमें मेरा क्या दोष है? आप ही बताइए। ” इतना कहकर वह और जोर जो से रोने लगी।

 परी ने कहा, ‘ यदि तुम रोम बन्द नहीं करोगी तो मैं तुम्हारी कोई भी है सहायता नहीं कर पाउंगी। तुम बैठो और सबसे पहले त रोना बन्द करो।”

परि की बात पर रानी चुप हो गयी। अब परी ने रानी से कहा,  जैसा मैं कहूँगी तुम्हें वैसा ही करना होगा। न उससे कम न उससे ज्यादा।

रानी मान गयी।

परी ने अपनी जादू की छड़ी घुमाते हुए कहा, ” तुम पहले नदी मे जाना और तीन बार डुबकियाँ लगाना। तीसरी डुबकी के बाद तुम आगे अनार के पेड़ पर जाना और एक अनार तोड़कर छीन लेना।

” इतना कहकर परी वहां से गायब हो गयी।परी के गायब होते ही रानी नदी की ओर चल दी। रानी को परी द्वरा कही गयी सभी बातें याद थी। परी के अनुसार उसने सबसे पहले नदी में तीन डुबकियाँ लगाई।

पहली डुबकी के साथ उसका रंग-रूप साफ हो गया। दूसरी डुबकी में उसके गंदे कपड़े अच्छे चमचमाते कपड़ों में बदल गए। और तीसरी डुबकी के साथ ही उसके तन पर कीमती जेवर भी आ गए।

अब वह नदी से बाहर आई। नदी से बाहर आते ही, रानी को परी की दूसरी बात याद आई।

वह अनार के पेड़ के पास गई और पास मे पड़ी लकड़ी की सहायता से उसने एक अनार तोड़ लिया जीसे ही उसने अनार को छीला अनार के सभी दाने उछल के नीचे गिर गए और एक एक करके सैनिकों में बदल गए।

जब रानी ने अनार का छिलका नीचे रखा तो वह एक सुंदर पालकी में बदल गया। रानी ने मन ही मन परी का धन्यवाद दिया। अब रानी सैनिकों के साथ पालकी में बैठ कर महल चले गई।

   महल में पहुंचकर राजा बडी रानी को ऐसे देख कर बहुत ही खुश हुआ और रानी ने सारा वृत्तांत राजा को सुना दिया। राजा और बड़ी रानी की बातें छोटी रानी भी सुन रही थी।

Fairy Tales in Hindi ​Last Part- वह चुपके से नदी के किनारे चले गई और झूठ मूठ का रोने लगी। रानी को रोता हुआ देलह परी प्रकट हुई।

रानी में परी को बताया कि बड़ी रानी ने उसे महल से बाहर निकाल दिया है।

 परी ने रानी से कहा, तुम्हें वही करना है जो कि मैं तुमसे कहूँगी। न उससे कम न इससे ज्यादा।

परी ने तीन डुबकी और एक अनार वाली बात उसको बताई। और परी अदृश्य हो गयी।

रानी नदी में डुबकी लगाने के लिए गयी। उसकव भी पहली डुबकी में सुंदर रूप, दूसरी डुबकी में सुंदर कपड़े, तीसरी डुबकी में गहने मिले। अब रानी के मन में लालच आ गया।

रानी ने सोचा यदि मैं दो-तीन डुबकियाँ और लगाती हूँ तो मुझे न जाने और क्या क्या प्राप्त हो जाएगा।

  रानी ने और डुबकियाँ लगाना शुरू कर दिया। तब उसके सारे मनोरथ क्षीण हो गए उसके कपड़े फट गए गहने भी गायब हो गए। वह निराश होकर महल को गयी।

महल में किसी ने भी उसे पहचानने से इनकार कर दिया औऱ उसकव द्वारपलो ने महल की सीमा से भी बाहर निकाल दिया।

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Fairy Tales Stories in Hindi


मोची और परियाँ


बहुत समय पहले की बात है एक गांव मे एक जूते चप्पल बनाने वाला रहता था। वह बहुत ही अच्छे जूते बनाता था और उससे अपने घर का पालन पोषण करता था,

उसके घर मे उसकी एक पत्नी थी वह उस से बहुत प्रेम करता था। किंतु दुर्भाग्यवश उस मोची का काम बहुत अच्छा नही चलता था और वह अन्य मोचियों के मुकाबले गरीब होता जा रहा था।

उसका कार्य ही उसका एकमात्र कमाने का जरिया था जिससे कि वह अपने परिवार को पालता था।

​    ​फिर एक दिन वह अपनी गरीबी के कारण इतना दुखी हो गया कि उसने अपने पास बचे हुए जूते बनाने के अंतिम सामान को देखा और उसे अच्छे दाम पर बेचने की भावना को लिए अपने घर के बाहर एक मेज लगाकर उसके उपर रख दिया।

उसकी पत्नी जो सब देख रही थी और एक सुंदर और बुद्धिमान महिला थी। उसने मन मे ठान लिया था कि वह अपने पति का साथ देगी और उसे इस मुश्किल समय से बाहर निकालेगी।​

उसने अपने पति को धैर्य रखने और साहस रखने के लिए कहा और उसे परेशानियों से लड़ने के लिए समझाया। वह मोची सामान को बेचने के लिए मेज के पास बैठ गया। थोड़ी देर जब कोई भी वहां नहीं आया तो,

उसनव सोचा कि थोड़ा आराम के लेता हूँ। आराम करते करते वह थक कर कब सो गया उसे पता नही चला।

Fairy Tales in Hindi ​Intrusting Part- वहाँ से कुछ परिया निकल रही थी जो उन की बात सुनकर उनकी इस अवस्था पर बहुत दुखी हुई।

और उन्होंने निश्चय किया कि हमे उनकी मदद करनी चाहिए जब रात हो गई।

मोची और उसकी पत्नी सोने चले गए तब परियो ने आकर एक जोड़ी सुंदर जूते बनाये और मेज पर रख कर चली गई । जब सुबह मोची जागा तो उसे वह जूते दिखाई दिए.

और वह बहुत आश्चर्य चकित व खुश हुआ, उसकी पत्नी भी खुश हुई। और मोची ने बाजार मेँ जाकर उन जूतो को बेचा उसे अच्छे पैसे मिले|

​मोची को जो रुपये मिले ​उनसे मोची ने नए जूते बनाने का सामान खरीदा और घर ले आया शाम होने पर वह जब सोने को चला गया तो फिर से परियां आई,

और उन्होंने मोची द्वारा लए हुए सामान से चार जोड़ी सुंदर जूते बनाए और सुबह जब मोची फिर से जागा तो बहुत खुश हुआ।

Fairy Tales in Hindi ​Last Part- अब यह काम काफी समय तक चलता रहा रात मे मोची सामान लाकर रख देता था,

और सुबह जब सो कर उठता तो सारे झूते बनकर तैयार हो जाते थे।

​​फिर एक दिन मोची और उसकी पत्नी ने सोचा आखिर मेरी सहायता कौन करता है? क्यों न इन्हे देखा जाये! और यह सोच कर वे दरवाजे के पीछे चिप गए,

और उन्होंने अपनी सहायता करने वालों को कुछ उपहार देने के लिए सुन्दर वस्त्रो को वहां रख दिया।

​फिर जब रात में परिया आई तो उन्होंने वह सुन्दर वस्त्रो को देखा वे उसे पहनकर बहुत खुश हुई और उन्होंने वे जूते बनाये और सदा के लिए वहाँ से चली गयी।

मोची और उसकी पत्नी ने बुरे समय में साथ देने के लिए उनका धन्यवाद किया और ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे।


Fairy Tales in Hindi


जादू की छड़ी 


​एक बार की बात है एक लड़का जिसका उसकी माँ के सिवाए इस धरती पर कोई नही था। अपने रूम में बिस्तर पर लेटा हुआ अपने मित्र के भरे परिवार के बारे में सोच रहा था।

अचानक उसके कमरे की खिड़की पर बिजली चमकी। वह घबराकर उठ गया। उसने देखा कि खिड़की के पास एक परी हवा में उड़ रही है। उस परी को देख कर लड़का डर गया,

किन्तु उसने हिम्मत करके ​उस से कहा- कौन है आप?

​वह परी खिड़की के पास आ कर बोली – डरो मत मैं तुम्हारे पिता के सन्देज़ह पर यहां आई हूँ। तुम बहुत अच्छे लड़के हो। इसलिए मैं तुमसे मिलने आई हूँ उन्होंने खास मुझे तुमसे मिलने के लिए भेजा है।

बच्चे ने परी में अपने पिता को देखा और महसूस किया तो वह बहुत खुश हुआ। काफी समय तक वे दोनों आपस में बात करते रहे। और जाते हुए परी ने उसे ​एक जादुई छड़ी देते हुए कहा-

​​“ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़कर दो बार घुमाओगे वह चीज गायब हो जाएगी। अगले ही दिन लड़का वह छड़ी अपने स्कूल ले गया।

​​वहां उसने मस्ती करना शुरू किया। लड़के ने स्कूल में पहले टीचर की किताब गायब कर दी फिर कई बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला,

कि यह लड़के की छड़ी की करामात है। ​जब वह घर पहुंचा तब भी उसकी शरारतें बंद नहीं हुईं। लड़के को इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था। किचन के दरवाजे के सामने एक कुर्सी रखी थी।

​लड़के ने सोचा- क्यों न मैं इस कुर्सी को गायब कर दूं। जैसे ही उसने छड़ी घुमाई वैसे ही लड़के की मां किचन से बाहर निकलकर कुर्सी के सामने से गुजरी और कुर्सी की जगह उसकी मां गायब हो गई।

Fairy Tales in Hindi ​Last Part- लड़का घबरा गया और रोने लगा। इतने में उसके सामने वही परी आ गई। लड़के ने परी को सारी बात बताई।

परी ने लड़के से कहा, मैं तुम्हारी मां को वापस ला सकती हूं,

लेकिन उसके बाद मैं तुमसे ये जादू की छड़ी की वापस ले लूंगा।

​लड़का रोते हुए बोला, आप जो भी चाहिए ले लो, लेकिन मुझे मेरी मां वापस ला दो। तब परी ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते लड़के की मां वापस आ गई।

​लड़के ने मुड़कर परी का शुक्रिया कहना चाहा, लेकिन तब तक परी बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी। लड़का अपनी मां को वापस पाकर बहुत खुश हुआ और दौड़कर गले से लग गया।


Conclusion


आज आपने पढ़ीं Fairy Tales in Hindi. आशा करते हैं आपको आज की हमारी यह Fairy tale Stories in Hindi पसन्द आयी होंगी। ऐसी ही और इन्टरस्टिंग पोस्ट्स पढ़ने के लिए बने रहें  के साथ।

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