12+ Spacial Hasya Kahaniyan in Hindi (Funny Kahani) | हास्य कथा

प्रेरणादायक के साथ साथ Hasya Kahaniyan in Hindi. जिनसे आपको मनोरंजन के अलावा बहुत कुछ सींखने को भी मिलेगा। तो चलिए शुरू करते हैं।

Hasya Kahaniyan


Hasya Kahaniyan


भगवान कहाँ है?

Hasya Kahaniya in Hindi


   एक गांव में दो भाई रहते थे, दोनों बहुत ही शरारती थे। गांव में जितनी भी उटपटांग हरकते होती थी, सब मे उन दोनो का ही हाथ होता था। उन दोनों की माँ उनसे बहुत ज्यादा परेशान थी।

उनकी शिकायत सुनते सुनते उसके कान पक चूके थे।

  अब एक बार उस गांव में एक साधु आए। वह बहुत पहुंचे हुए साधु थे और उनके पास सारी समस्याओं का हल था। जब वे उस गांव में आए तो उस महिला ने भी सोचा,

कि क्या पता मेरे टेढ़े बच्चों को ये ही सीधा कर दें।

 महिला बाबा के पास गई , उन्हें प्रणाम किया और उनको सारी बात बताई। बाबा ने कहा, बेटा तुम परेशान मत हो। कल तुम दोनों बालको को मेरे पास भेज देना।

   दूसरे दिन बच्चों की मां ने बहला फुसलाकर दोनो भाइयों को बाबा के पास भेज दिया। एक बच्चा बाहर यह कहकर रुक गया कि भाई तू अंदर जा कोई घबराने की बात होगी तो न मैं तुझे बचा लूंगा।

वह छिपकर बाहर से अंदर देखने लगा।

  दूसरा बच्चा अंदर गया, उसे बाबा ने अपने पास बुलाकर पूछा, ” बेटा तुम्हें पता है कि भगवान कहाँ है?”

बच्चा कुछ नहीं बोला। और अपना मुंह खुला कर के बाबा को घूरने लगा। फिर दुबारा से बाबा ने अपने प्रश्न को दोहराया। दो तीन बार बाबा को अपने प्रश्न का उत्तर न मिलने पर उन्हें थोड़ा क्रोध आ गया और वे बोले,

” मैं तुमसे इतनी देर से कुछ पूछ रहा हू बता क्यो नहीं रहे हो?”

तब बच्चा अचानक से चेतना में आया और बड़ी तेजी से वहां से भाग गया औऱ घर जाकर दरवाजे के पीछे छिप गया। उसका भाई भी उसके पीछे पीछे आया और उसे ढूंढकर उससे पूछा,

” क्या हुआ भाई! बाबा ने तुझे मारा क्या?”

तब बच्चा बोला, ” भाई कोई भगवान है, वह गुम गया है। ये लोग उसका इल्जाम भी हमारे ऊपर ही लगा रहे हैं।”

उसकी बात सुनकर उसका भाई बेहोश हो गया।


सीख | Hasya Kahaniyan : ” कभी कभी बातों का अर्थ, सुनने वाले के लिए कुछ और ही हो जाता है। अपनी बातों को विस्तार से कहनी चाहिए।”

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बैलगाड़ी और मित्र

Hasya Katha


  एक बार एक गांव में एक रघु नामक व्यक्ति रहता था। उसके पास एक बैलगाड़ी थी, जिसमे वह सामान लादकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया करता था।

   एक दिन वह खूब सारा सामान अपनी बैलगाड़ी में भरकर बाजार जा रहा था। बैलगाड़ी उस दिन बहुत भारी हो गयी थी। रघु के लिए भी बैलों को हांकना मुश्किल हो रहा था।

थोड़ी दूर चलने पर रघु की बैलगाड़ी के बैलों का संतुलन बिगड़ गया और बैलगाड़ी पलट गई। बैलगाड़ी के पलट जाने पर रघु किसी तरह बाहर निकला,

और बैलगाड़ी को सीधा करने का प्रयत्न करने लगा।

  वहीं रास्ते में एक राहगीर भी पेड़ की छांव में बैठा भोजन कर रहा था। रघु उसकी ओर आशा भरी नजरों से देख रहा था। तो उसने रघु को दूर से आवाज लगाई और बोला,

” ओ भाई! आप यहाँ आकर मेरे साथ पहले भोजन कर लो और फिर हम दोनो साथ मिलकर आपकी बैलगाड़ी को सीधा करेंगे।”

इस पर रघु बोला, ” नहीं भाई! मेरा मित्र बुरा मान जाएगा। मुझे यह जल्द से जल्द उठानी होगी।”

तब वह राहगीर दुबारा बोला, ” भाई कुछ नहीं होगा। मैं तुम्हारी सहायता करूँगा तो तुम्हारा कार्य जल्दी हो जाएगा और तुम्हारा दोस्त भी बुरा नहीं मानेगा।”

  रघु असमंजस में था। लेकिन वह अकेले यह कार्य नहीं कर पा रहा था तो वह राहगीर के पास चला गया और उसके साथ मिलकर दबाकर खाना खाया।

अब दोनो मिलकर बैलगाड़ी के पास आए। तब फिर से रघु बोला, जल्दी करो भाई, मेरा दोस्त बुरा मान जाएगा।

  राहगीर ने रघु से पूछा, ” वैसे तुम्हारा दोस्त है कहाँ?”

तब रघु बोला, “बैलगाड़ी के नीचे।”


सीख | Hasya Katha : हमेशा अपनी बात को साफ और सीधे ढंग से करना चाहिए। नहीं तो उसके अलग अर्थ निकल जाते हैं।”

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Funny Kahani in Hindi


प्रवचन

funny kahani in hindi


एक महापुरुष थे, वे बहुत ज्ञानी थे। लोग उनके किस्से दोहराया करते थे और आपस मे उनहीँ के चर्चे भी किया करते थे। एक बार गांव में एक सभा का आयोजन होने वाला था।

लोगों ने इस बार महापुरुष से आग्रह किया कि वे उनकी सिबह में आए और लोगों को अपने वचन सुनाकर अनुग्रहित करें। महापुरुष मान गए और उनकी सभा मे आने के लिए तैयार ही गए।

   अब सभा का दिन आ गया। सभा मे सभी जन बहुत ही उत्सुक थे महापुरुष के विचार सुनने के लिए। तब महापुरुष मंच पर आए। उन्होंने लोगो का अभिवादन किया और एक प्रश्न पूछा,

” क्या आप जानते हैं कि मैं आज आप को क्या बताने वाला हूं?”

  तब सभी लोगों ने सर हिलाकर जवाब दिया, “नहीं”।

इस बात पर महापुरुष को बहुत ही क्रोध आया और महापुरुष बोले,” जब किसी को मेरे विचारों का कोई आदर ही नहीं है तो मैं अपना समय व्यर्थ क्यों करूँ? मैं जा रहा हूँ।” महापुरुष चले गए।

   वहाँ पर उपस्थित लोगों को भी स्वयं पर ग्लानि हुई कि उन्हें महापुरुष के विचारों के बारे में कुछ नहीं पता।

अगले दिन फिर सभा का आयोजन किया गया औऱ महापुरुष को बुलाया गया। इस बार भी उन्होंने वही प्रश्न किया, “क्या आपको पता है कि मैं आज आपको क्या बताने वाला हूं?”

  इस बार लोगों ने हां कहा। तब महापुरुष बोले, ठीक है जब आप सभी को पता ही है तो मैं अब बाकी क्या बताऊँ। और वे वहां से चले गए।

     अगले दिन फिर सभा का आयोजन हुआ महापुरुष को बुलाया गया। इस बार महापुरुष के उस ही प्रश्न पर आधे लोगों का जवाब हाँ था और आधो का न। तो इस पर महापुरुष बोले,

जिन आधो को पता है वे अन्य आधो को बता दो!

सभी को बहुत क्रोध आया और आगे से कभी उन महापुरुष का नाम भी गांव में नहीं लिया गया।


सीख | Hasya Kahaniyan in Hindi : ” कभी भी सोच विचार कर ही अपनी बातों को दूसरों के सामने रखना चाहिए।

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सड़क नहीं चलती

हास्य कथा


  एक दिन शेखचिल्ली अपने दोस्तों के साथ एक नुक्कड़ पर बैठकर बातचीत कर रहा था। तभी एक सज्जन ने वहां आकर एक सवाल पूछा, “शेख साहब के घर कौन सी सड़क जाती है?”

   इससे पहले कि कोई जवाब देता शेखचिल्ली बोला, ” माफ कीजिएगा ! कोई भी सड़क शेख साहब के घर नहीं जाती।”

  दरअसल वह व्यक्ति शेखचिल्ली के पिता का दोस्त था और उसी से उसके घर का रास्ता पूछ रहा था। शेख साहब सब शेख चील्ली के पिता को ही कहते थे।

  इसके बाद वह व्यक्ति बोले, “क्या कह रहे हो बेटा? इन तीनों में से कोई भी सड़क शेख साहब के घर नहीं जाती? इसी गांव में तो रहते हैं शायद शेख साहब! क्या यह उनका गांव नहीं है?”

   इस प्रकार सवालों की बौछार पर शेखचिल्ली बोला, ” श्रीमान! गांव तो यही है। और उनका घर भी यहीं है। बस इनमें से कोई सड़क वहां नहीं जाती।

ये सड़कें तो बस यहीं पड़ी रहती है दिन रात! जाना तो आपको ही होगा।”

” मैं उनका बेटा हूं, शेखचिल्ली मैं आपको खुद पहुंचा देता हूं। आपको मेरे साथ चलना होगा और आप पहुंच जाएंगे।”

यह सब सुनकर शेखचिल्ली के दोस्त हंसने लगें और वो सज्जन भी हंसने लगे। और शेख चील्ली के साथ उसके घर को चल दिये।


Hasya Katha


  महाराज का वादा


हास्य कथा- महाराज अकबर, बीरबल के हाजिरजवाबी के कायल थे। बीरबल जी बहुत ही होशियार और अक्लमंद थे। वे अच्छी तरह से जानते थे कि कौन सा कार्य किस समय मे और किस ढंग से किया जाना चाहिए।

    एक बार महाराज अकबर ने बीरबल जी को एक कार्य के बाद इनाम देने का एलान किया था। लेकिन महाराज अकबर उस बात को भूल गए थे। बहुत दिन हो गए लेकिन बीरबल को वह इनाम नहीं मिल सका।

अब  बीरबल जी उलझन में पड़ गए कि यह बात आखिर राजा अकबर को याद कैसे दिलाएं।

एक दिन राजा अकबर और बीरबल शाम को कहीं घूमने के लिए निकले, वे टहलते टहलते एक ऐसी जगह पर पहुंच गए जहाँ पर कुछ ऊंट अपने झुंड और कुछ आदमियों के साथ ठहरे हुए थे।

बीरबल और राजा अकबर वहीं बैठ गए थोड़ी देर और बातें करने लगे.

   तभी महाराज अकबर के मन मे ऊंटों को देखकर एक सवाल आया तो उन्होंने बीरबल से पूछ लिया। सवाल था, ” बीरबल यह बताओ कि ऊंटों की गर्दन मुड़ी हुई क्यो होती है?”

तब बीरबल ने मन मे सोचा, यही मौका है जब मैं महाराज को उनकी भूली हुई बात को याद दिला सकता हूँ। तब बीरबल बोले, ” महाराज! यह ऊंट भी पहले राजा हुए करता था।

Hasya Kahaniyan Moral Part- फिर एक बार यह किसी से वादा कर के भूल गया औऱ भगवान जी ने इसे राजा से ऊंट बना दिया और इसकी गर्दन भी ऐसी टेडी कर दी।

तब से यह ऐसे ही पृथ्वी पर अपने इस रुप मे ही विचरण कर रहा है। “

  बीरबल के ऐसा कहने पर महाराज अकबर को भी अपनी कही हुई बात याद आई और उन्होंने बीरबल से कहा, ” जल्द से महल चलो। एक आवश्यक कार्य है।”

महाराज जल्द से बीरबल को महल ले गए और पूरे दरबार के सामने बीरबल को सम्मानित करते हुए उनकी इनाम राशि बीरबल को सौंप दी। अंत मे महाराज बोले,

” बीरबल अब तो मेरी गर्दन टेडी नहीं होगी न!”

  सब हंसने लगे । और अकबर ने बीरबल को गले से लगा लिया।


सीख | Hasya Katha : “अपनी कहीं गयी बातों और वादों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।”


लहरें गिनना


Hasya Kahaniyan- एक बार राजा अकबर के दरबार मे एक व्यक्ति आया। वह व्यक्ति राजा अकबर से नौकरी मांगने के लिए आया था।

राजा अकबर ने उस पर दया कर उसको मुंशी का पद दे दिया।

  लेकिन वह व्यक्ति बेईमान था। इसलिए वह अपने उस कार्य मे बेईमानी करने लगा और लोगों से रिश्वत भी लेने लगा। जब बादशाह अकबर को इस बात का पता लगा तो उन्हें बहुत गुस्सा आया।

लेकिन उन्होंने उसकी हालत को देखकर उसे नौकरी से नहीं निकाला। उन्होंने उस व्यक्ति को एक दुसरा काम देने का निर्णय किया।

तब उन्होंने उसका तबादला ऐसी जगह करने का फैसला किया जहां वह रिश्वत न ले सके और बेईमानी भी न कर सके।

     बादशाह अकबर ने उसे अब घुड़साल का मुंशी बना दिया। यहां रिश्वत लेने जैसा तो कोई कार्य था नहीं लेकिन वह व्यक्ति इतना चालाक था कि, उसने यहां भी रिश्वत लेना प्रारंभ कर दिया।

वह वहां काम करते लोगों से कह रहा था कि, तुम लोग घोड़ो को दाना पानी ठीक तरह से नहीं दे रहे हो जिस कारण घोड़े कम लीद दे रहे हैं। मैं तुम सबकी शिकायत बादशाह से कर दूंगा।

” इस डर के मारे अब सभी लोग लीद तौलने का एक रुपया मुंशी को देने लगे।

Hasya Kahaniyan Moral Part – परेशान होकर वहीं के एक व्यक्ति ने यह बात बादशाह अकबर को बता दी। बादशाह अकबर ने इस बार फैसला लिया,

कि इसको ऐसी जगह भेजेंगे कि यह रिश्वत न ले पाए और चालाकी भी न कर पाए।

अब उसको एक नदी के पास भेजा गया और लहरे गिनने का कार्य सौंप दिया गया। मुंशी अपनी आदत से बाज न आया। वह वहां के नौका विहार वालों को परेशान करने लगा।

जब नौकाएं वहां आती तो वह नौकाओं को यह कहकर रोकता कि मुझे लहरें गिननी हैं। इसी कार्य के चलते 2-3 दिनों तक नाव वहां फंसी रह जाती थी। इससे बचने के लिए लोग अब मुंशी को दस रुपये रिश्वत के रूप में देने लगे।

  इस बात का पता भी अकबर को लग गया। इस बार तो राजा अकबर के गुस्से की सीमा ही टूट चुकी थी, तो राजा अकबर ने उसे देश निकाला ही दे दिया।


सीख | Hasya Kahaniyan : “धूर्त अपनी धूर्तता से कभी बाज नहीं आता।”


Hasya Kahaniyan in Hindi


बुरा सपना


हास्य कथा- एक बार, शेखचिल्ली को कुछ दिनों से रात को नींद ही नही आ रही थी। शेखचिल्ली की मां ने एक दिन शेख चील्ली से कहा, ” बेटा क्या हुआ क्या तुम्हें रात को ठीक से नींद नहीं आ रही है?

मैं जब रात को पानी पीने के लिए जा रही थी तो मैं ने देखा कि तुम डर के मारे कराह रहे थे।”

    शेखचिल्ली ने उत्तर दिया। मां कुछ दिनों से मुझे एक सपना आ रहा है। जिससे कि मुझे रात में नींद नहीं आ रही है और मैं सो भी नही पा रहा हूँ।”

   मां ने पूछा, ” कौनसा सपना?”

शेख चील्ली बोला, ” मां वही सपना जो मुझे बचपन मे भी परेशान किया करता था। “

दरअसल जब शेखचिल्ली छोटा था तो उसे बिल्लियों से बहुत डर लगता था। और वह सपने में देखता था कि वह एक चूहा बना हुआ है और पूरे शहर की बिल्लियां उसके पीछे पड़ी हैं,

और इसको मारना चाहती है।

उसकी मां ने कहा, ” बेटा तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हे हाकिम जिन के पास ले जाऊंगी। वे तुम्हारी इस बुरे सपने की बीमारी को हमेशा के लिए दूर भगा देंगे।

अगले दिन दोनों हकीम जी के पास गए। शेखचिल्ली की माँ ने सारी बात हकीम जी को बता दी। हकीम जी ने कहा, ” बेटा तुम्हारी परेशानी दूर तो हो जाएगी पर तुम्हें उसके लिए रोज शाम को एक चक्कर यहां दवा लेने के लिए आना होगा।”

  शेखचिल्ली मान गया।

Hasya Katha Moral Part- जब उस दिन वह दवाई लेने हकीम जी के पास आया तो हकीम जी ने उससे बहुत देर तक बात की और उसे यह एहसास दिलाया और कहा कि यह याद रखना कि तुम चूहे नहीं हो।”

और उसे कोई भी लाभदायक दवा दे दी। शेखचिल्ली अपने घर चले गए।

रात को उस दिन शेख चील्ली को बहुत अच्छी नींद आई। कुछ दिनों बाद इसको बूरे सपने आना भी बंद हो गए।

  एक दिन जब शेखचिल्ली हकीम के पास दवा लेने के लीए आ रहा था तो,हकीम जी के घर के बाहर एक बिल्ली खड़ी थी। उसे देखते ही शेखचिल्ली डर गया औऱ दौड़कर जाकर हकीम के पीछे छिप गया।

  हकीम जी ने कहा, ” बेटा डर क्यो रहे हो? अब तुम चूहे नही  हो । यह बिल्ली तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।”

  इस पर शेखचिल्ली बोला, ” हकीम जी यह बात आप जानते हैं , मैं जानता हूँ,मेरी अम्मी भी जानती है। लेकिन क्या किसी ने इस बिल्ली को यह बात बताई है?”

यह सुनकर हकीम जी हंसने लगे और बिल्ली को वहां से भगा दिया।


सीख | Funny Kahani in Hindi : “बुरी यादों को भूल जाना ही बेहतर होता है।”


अक्ल की दुकान


हास्य कथा- एक बड़े से राज्य में प्रकाश नाम का एक लड़का रहा करता था। उसके नाम के तरह ही उसका आचरण था। वह एक अच्छा लड़का होने के साथ साथ बहुत ही होशियार भी था।

एक बार उसने अपने ही घर के बाहर एक दुकान खोली और लिख दिया कि यहां अक्ल बेची जाती है।

   उसका घर राज्य के बीचोंबीच था तो जो लोग भी वहां से आते जाते हुए लोग उस को देखते और हंसते थे। लेकिन प्रकाश को विश्वास था कि उसकी दुकान एक न एक दिन अवश्य ही चलेगी।

एक दिन एक दीनु नाम का लड़का वहां से गुजर रहा था, तो उसने दुकान देखी और उससे रहा नहीं गया । वह दुकान के अंदर चला गया। वह एक अमीर बाप का बेटा था।

दीनु ने प्रकाश से कहा, ” कितने की है अक्ल? मुझे लेनी है।”

प्रकाश बोला, ” जितने पैसे लगाओगे उतने की और उतनी ही अच्छी अक्ल मिलेगी । “

   तब दीनु ने उसे 1 रुपया दिया और कहा मुझे 1 रुपये की ही अक्ल चाहिए।

  प्रकाश ने कहा, ” ठीक है।” और उसको एक कागज पर लिख कर दिया कि दो लोगो के झगड़े के बीच में कभी नहीं बोलना चाहिए।

दीनु उस पर्चे को लेकर घर चला गया और यह सारी बात जाकर अपने पिता को बता डाली। उसका पिता महाकंजूस था। वह अगले ही दिन प्रकाश के पास गया,

और उसको वह पर्ची थामते हुए कहा कि ये लो अपनी अक्ल औऱ मुझे मेरे रुपये वापस कर दो। प्रकाश ने उन्हें बिन कुछ कहे रुपया वापस कर दिया।

Hasya Kahaniyan Moral Part – अब एक दिन उस ही राज्य की महरानी की दो नौकरानियों में लड़ाई होने लगी। पास में दीनु भी मौजूद था। नौकरानियों  में फैसला हुआ कि वे इस बात की शिकायत महाराज से करेंगे।

उन्होंने दीनु को साक्ष्य बनाकर राजा के सम्मुख प्रस्तुत हिने को कहा। अब दीनु फस चुका था। वह दौड़ कर प्रकाश के पास गया और उसको पूरी कहानी बताई।

   तब प्रकाश बोला, ” मैं ने तुमसे पहले ही कहा था, जितने रुपये लगाओगे उतनी ही अच्छी अक्ल मिलेगी। मेरे पास इसका उपाय तो है लेकिन इसके तुम्हें पांच हजार रुपये देने होंगे।

” दीनु मरता क्या न करता।

  उसने पांच हजार रुपये प्रकाश को दे दिए और पागल होने का नाटक कर अपनी जान राजा से बचा ली। राजा ने महारानी को ही अपनी नौकरानियों को दण्ड देने के लिए कह दिया।

और सारा मामला सुलझ गया।


सीख | Hasya Katha : ”कभी भी दो लोगों के झगड़े में अपनी टांग नही अडानी चाहिए।”


Funny Kahani


मिया मिट्ठू


Hasya Kahaniyan- एक जंगल मे एक तोता रहा करता था। वह बहुत ही अच्छा गाना गाया करता था। जंगल मे सभी को उसकी आवाज बहुत पसंद थी।

सभी उसका गाना सुनने के लिए अक्सर एकत्र हो जाया करते थे।

  एक दिन एक शिकारी उस जंगल मे आया। उस समय भी तोता गाना गा रहा था। शिकारी ने उसकी आवाज सुन ली। शिकारी ने अब इस तोते को जीवित पकड़ लिया,

और उसको पिंजरे में कैद कर के अपने घर ले आया और पिंजरे सहित घर के बाहर बगीचे में टांग दिया। अब वह केवल रात ही रात में गाना गाया करता था।

Hasya Katha Moral Part- एक चमगादड़ रोज रात को उस बगीचे से गुजरता था, और उसका गाना सुनता था। 2-3 बार वह दिन में भी आया,

दिन में उसका गाना चमगादड़ को सुनाई नहीं दे रहा था। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ।

   एक दिन तोता रात में गाना गा रहा था। चमगादड़ वहीं से गुजर रहा था। उससे आज रहा नहीं गया और वह तोते के पास चला गया। जैसे ही तोते का गाना खत्म हुआ, चमगादड़ तोते से बोला,

” मिया मिट्ठू गाना तो बहुत अच्छा गा लेते हो। लेकिन मैं ने गौर किया है कि तुम केवल रात में गाना गाते हो! यह बात मुझे कुछ ठीक नहीं लगी। आखिर इसके पीछे का राज क्या है.?”

तब तोता बोला, ” भाई मैं पहले दिन रात गाना गाया करता था। लेकिन मेरे दिन में गाना गाने की एझ से आज मैं इस पिंजरे में कैद हूँ। तो अब मैं रात में ही गाना गाता हूँ।”

   तब चमगादड़ मुस्कुराया और बोला, ” अब सावधानी बरतने से क्या फायदा। अब तो तुम कैद हो ही चुके ही।” फिर वह वहां से चला गया।


सीख | Hasya Kahaniyan in Hindi : ” किसी भी दुर्घटना होने से पहले ही हमे कुछ भी कार्य करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।”


किशमिश और शेर


Funny Kahani in Hindi- बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल के किनारे बहुत ही अच्छा गांव था। लेकिन उस गांव के ही पास में एक चट्टान थी, जिस पर शेर ने अपना रहने का ठिकाना बनाया हुआ था।

गांव के लोग शेर से बहुत ज्यादा डरते थे।

    एक बार शेर को बहुत तेज भूख लगी। जंगल मे तो वह जा नहीं सकता था क्योंकि जंगल चट्टान से बहुत दूर था। उसने निश्चय किया कि वह आज गांव में ही जाकर शिकार करेगा।

  अब वह चलता गया, और उसे पास में ही एक झोपड़ी दिखी। उसमे दिए कि रौशनी दूर दे ही चमक रही थी। दिए कि रौशनी को देख शेर को लगा कि यहां कोई न कोई तो जरूर होगा, आज यहीं चलता हूँ।

शेर झोपड़ी के पास आ पहुंचा। लेकिन जब उसने खिड़की से अंदर झांक कर देखा तो वहां एक बच्चा था जो बहुत जोर जोर से रो रहा था। शेर अंदर प्रवेश करने ही वाला था,

कि वहां उस बच्चे की मां आ गयी और अपने बच्चे को चुप कराने लगी।

  बच्चे की मां बोल रही थी, ” चुप हो जा बेटा नहीं तो भालू आ जाएगा।” बच्चा चुप नहीं हुआ।

इस पर शेर सोचने लगा कि, कैसा बच्चा है भालू से नहीं डर रहा। तब फिर से उसकी मां बोली, ” बेटा चुप हो जा, लोमड़ी बाहर ही खड़ी है, वह तुझे ले जाएगी।” बच्चा तो फिर भी चुप नहीं हुआ।

शेर का आश्चर्य अब बढ़ता ही जा रहा था।

   अब उसके चुप न होने पर उसकी मां बोली, ” बेटा चुप हो जा, देख तुझे लेने शेर आया है, वह खिड़की के पीछे से झांक रहा है।”बच्चा तभी भी चुप नहीं हुआ।

  शेर अब बालक और उसकी मां से बहुत भयभीत हो गया। वह सोचने लगा, इसे कैसे पता लगा कि मैं यहां हूं, और यह बालक तो मुझसे भी नहीं डरता। जरूर यह कोई मायावी बालक होगा।

Hasya Kahaniyan Moral Part – फिर उसकी मां ने उसे एक किशमिश दी और वह तुरंत चुप हो गया। तब उसकी मां बोली, ” सब तुम्हारा नाटक था, तुम्हें तो किशमिश चाहिए थी! है न?”

   अब शेर किशमिश का नाम सुनकर डर गया और सोचने लगा कि, कौन है यह किशमिश, शायद मुझसे अधिक शक्तिशाली जानवर होगा तभी तो यह बच्चा चुप हो गया।

तभी एक जोर की आवाज हुई। और शेर के पास कुछ गिरा। शेर को लगा कि किशमिश को उसके बारे में पता चल चुका है और वह उसको मारने आया है।

शेर बहुत ही डर गया और उसने झटपट अपनी चट्टान की ओर दौड़ लगा दी। वह बिना कुछ खाए ही अपनी गुफा में चला गया।


सीख | Funny Kahani in Hindi : किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले अपने सारे भ्रम दूर करने अति आवश्यक होते हैं।


Short Hasya Kahaniyan


जूते की कहानी


Hasya Kahaniyan- एक बार एक राजा अपने राज्य का मुआयना करने के लिए पैदल ही भेष बदलकर राज्य के लोगों से मिला। इस कार्य मे रात हो चुकी थी।

बहुत सारे कंकड़ पत्थर राजा के पैरों में चुभ गए थे।

राजा जब महल में पहुंचा तो राजा के पैरों में बहुत ही दर्द हो रहा था। उस समय पैरों में पहनने के लिए कुछ खास उपाय नहीं थे।

अब राजा ऐसी युक्ति सोचने लगा जिससे कि सबके पैर बचे रहें। तभी उसे एक युक्ति सूझी और उसने अगले दिन सभा बुलाई। राजा अपने मंत्री से सबके सामने कहने लगा,

” पूरे राज्य की सड़कों को चमड़े की परत से ढक दिया जाए।”

   राजा का मंत्री इस आदेश को सुनकर चकरा गया क्योंकि इस कार्य मे बहुत अधिक मेहनत, चमड़ा और रूपये खर्च होने वाले थे। लेकिन राजा के सामने मुंह खोलता तो उसे ही डाँठ मिलती इसलिए वह चुप खड़ा था।

Hasya Katha Moral Part- उसी सभा मे एक समझदार मंत्री बैठा हुआ था। वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और चतुराई से  बोला,” महाराज आप की आज्ञा हो,

और आपको इस कार्य मे कुछ धन बचाना हो तो एक बात कहूँ!”

महाराज ने आज्ञा दी।

मंत्री बोला, ” महाराज! आपको इतना धन सड़को पर खर्च करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आप सड़को को चमड़े से लीपने की बजाए चमड़े के एक छोटे टुकड़े का प्रयोग अपने पैरों के लिए क्यों नहीं करते! इससे धन भी बचा रहेगा और आपके पैर भी।”

राजा को मंत्री का विचार पसन्द आया और राजा ने अपने दुज़रे मंत्री को जूता बनाने का कार्य सौंप दिया। और कहा जाता है तब से ही चमड़े का जूता अस्तित्व में आया।


सीख | Hasya Katha : ” सब तरह के लाभ और हानियों को देखते हुए ही भविष्य की चिंता कर के ही निर्णय लेने चाहिए।”


नकल


Hasya Kahaniyan- बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल के किनारे एक ऊंची चट्टान थी, उस पर एझ गिद्ध रहा करता था। गिद्ध शिकारी प्रवृत्ति के होते हैं

अतः वह शिकार दिखने पर चट्टान से शिकार करने के लिए ऊंची उड़ान भरता था। तथा अपने लक्ष्य अर्थात अपने शिकार को लेकर ही लौटता था। और उसे चट्टान में ही लाकर खाया करता था।

  चट्टान के पास में ही एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। जब भी गिद्ध शिकार करने के लिए जाता था, कौआ उसे देखता था और उससे प्रेरित होकर स्वंय भी शिकार करने की सोचता था।

एक दिन गिद्ध को एक शिकार दिखा, वह बहुत बड़ा जानवर था। कौआ भी उस पर नजर गड़ाए बैठा था। अब कौआ उसे ध्यान से देखने लगा।

गिद्ध होशियारी से ऊंची उड़ान भरकर अपने शिकार के ऊपर गया और उसको चालाकी से अपने पंजो में दबोचकर, चट्टान पर ले आया। फिर उसका शिकार कर खाने लगा।

कौए ने देखा, और आज तो उसने ठान ही लिया कि अब वह भी शिकार कर के रहेगा। वह सोचने लगा! आखिर कब तक कीड़े मकोड़ो से अपना पेट भरूं!

   चट्टान की खोह में छिपकर कुछ खरगोश रहा करते थे। वे अपनी चतुराई के बल पर जंगली जानवरों से बचे हुए थे। जब भी कोई उनका शिकार करने आता तो वे लोग, चट्टानों के छेदों में घुस जाते थे।

Hasya Kahaniyan Moral Part – एक दिन एक खरगोश खेलते हुए बाहर आया हुआ था। कौए ने खरगोश को देख लिया। अब उसने खरगोश के शिकार करने की सोची।

 वह ऊंची उड़ान भरकर खरगोश के ऊपर मंडराने लगा। वहीं चतुर खरगोश ने उसे अपने ऊपर मंडराते हुए देख लिया। खरगोश सारी बात समझ गया। अब वह जानबूझकर वहीं खड़ा हुआ था।

जैसे ही कौआ खरगोश की तरफ आया खरगोश दौड़ कर एक चट्टान के पीछे छिप गया। कौआ भी उसके पीछे ही था। परन्तु जब खरगोश चट्टान के पीछे छिपा उस समय ही,

कौए का सर उस चट्टान से बड़ी जोर से टकराया और उसकी गर्दन टूट गयी। वह तड़प तड़प कर मर गया।


सीख | Funny Kahani in Hindi: ” स्वंय के ऊपर इतना आत्मविश्वास भी नहीं होना चाहिए जिससे कि अपने प्राणों को ही हानि हो जाए।”


Conclusion | हास्य कथा


आज आपने पढ़ी Hasya Kahaniyan in Hindi. आशा करते हैं, आपको यह हास्य कथा पसन्द आईं , अगर आईं तो बताइए जरूर कमैंट्स में। और बने रहिये sarkaariexam के साथ।

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