5 Special Hindi Stories for Children | Short Hindi Child Story

मजेदार और सीख से भरी Famous Hindi Child Story. जिन कहानियों को पढ़कर आपको बहुत कुछ सींखने को मिलेगा। तो चलिए शुरू करते हैं।

आज आपके लिए लेकर उपस्थित हैं, Hindi Stories for Children आशा करते हैं, आपको यह कहानियां पसन्द आएंगी।


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Hindi Child Story


” झूठ का परिणाम “


  एक गांव में दीनू नामक लड़का रहता था, वह बहुत ही शरारती लड़का था। उसके पास बहुत सारी बकरियां थी, वह रोज बकरियों को चराने के लिए खेतों के पास वाले जंगल ले जाया करता था।

आस-पड़ोस वाले भी अपना समय बचाने के लिए अपने मवेशी दीनु को ही दे देते थे।

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दीनु के साथ कोई दोस्त जानवरों को चराने के लिए नहीं आता था।

दीनू अकेले अकेले भेड़- बकरियों को चराते चराते बहुत बोर हो जाता था। बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, अब वह बहुत परेशान हो गया था।

एक दिन उसके मन में एक शैतानी ने जन्म लिया। वह सारे मवेशियों     को जंगल में छोड़ कर दौड़ दौड़ के खेत में आया औऱ घबराहट से हांफ हांफ कर खेतों में काम कर रहे लोगों से कहने लगा,

” बचाओ, बचाओ !  जंगल में बाघ आ गया है, वह सारे जानवरों को खा जाएगा। कृपया कर कोई जानवरों को बचाने के लिए मेरी सहायता करो। “

   सभी लोग बहुत चिंतित हो गए। दीनु  के साथ सभी लोग दौड़ दौड़ कर जंगल की ओर गए। जंगल में तो सब जानवर अच्छे से चर रहे थे, कहीं पर भी कोई बाघ या जंगली जानवर नहीं था।

जब एक किसान ने पूछा दीनू से कि कहां है बाघ तो, दीनू जोर जोर से हंसने लगा। दीनू ने हंसते हंसते कहा, ” मैं तो मजाक कर रहा था मैं देखना चाहता था कि आप सभी अपने अपने जानवरों से कितना प्यार करते हैं। “

  सभी लोग समझ गए कि यह सब दीनू की शरारत है।

सभी दीनू को डांट फटकार कर वहां से अपने अपने काम को करने के लिए खेत चले गए।

  कुछ दिनों बाद फिर से दीनू ने यही शैतानी दोहराई। उसने बाघ के जानवरों को खाने की खबर सबको दे दी। सभी भागते हुए जंगल की ओर पहुंच गए।

लेकिन इस बार भी कोई जंगली जानवर अथवा बाघ वहां नहीं था। अब सभी को गुस्सा आया और वे बोले, ” इसको हम नहीं छोड़ेंगे, इसने पिछली बार भी ऐसे ही झूठ का सहारा लेकर हमें फंसाया था।

अब हम में से कोई भी इसके झांसे में नहीं आएगा। ” ऐसा कहकर सभी लोग निराश होकर वहां से चले गए। दीनू को भी बुरा लगा, लेकिन जब तक वह सब से माफी मांगता तब तक सभी वहां से जा चुके थे।

  दिन बीते, कुछ महीनों  बाद दीनू रोज की ही तरह जानवर जंगल मे चरा रहा था। तभी एक भेड़िया वहां आ गया। दीनू तो बच्चा ही था वह उतने जानवरों को कैसे बचाता,

वह एक बड़े से पेड़ पर चढ़ गया जिसकी ऊंचाई से खेत साफ दिखाई देता था। वहां से दीनू ने लोगों को मदद के लिए पुकारा, लेकिन कोई भी दीनू की सहायता करने के लिए नहीं आया। दीनू को बात समझ मे आ गया।

वह  समझ गया कि उसकी शरारत की वजह से कोई भी उसकी सहायता करने के लिए नही आ रहा है। इतने में भेड़िये ने कई भेड़ों को मार डाला और एक बकरी के बच्चे को अपने साथ लेकर चला गया।

दीनू को अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ।


सीख | Hindi Child Story : ” कभी कभी जानबूझकर की गई शैतानियां बहुत हानिकारक होती है। हमेशा सोच समझकर ही सारे कार्य करने चाहिए।”

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Hindi Stories for Children


” नकलची बन्दर “

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  एक बार एक कपड़ों का व्यापारी अपने कपड़ों को लेकर बेचने के लिए दूसरे गांव में जा रहा था। गांव दूर था, रास्ता भी लम्बा था।

  चलते चलते उसे बहुत थकाई लग गयी थी। वह बहुत देर से सोच रहा था कि कहीं बैठ कर आराम कर ले, लेकिन उसे कोई भी अच्छी जगह नहीं मिल रही थी,

जहां बैठ कर वह आराम कर सके। गर्मी के भी दिन थे,

वह धूप में बैठकर तो आराम नही कर सकता था। थोड़ी देर चलने के बाद उसे एक बड़ा सा वृक्ष दिखा, अच्छी बात तो यह थी कि उस वृक्ष के नीचे एक चबूतरा बना हुआ था।

व्यापारी ने सोचा कि थोड़ी देर यहीं बैठ कर आराम कर लिया जाए!

  व्यापारी ने अपना कपड़ों का पोटला वहीं चबूतरे में रख दिया और खुद भी आराम करने लगा। बैठे बैठे आराम करते हुए उसे भी कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला।

   थोड़ी देर मे अचानक से उसकी नींद खुली औऱ उसे लगा कि अब तो बहुत देर हो गयी है, आराम करते करते, अब मुझे अपने कार्य पर निकल जाना चाहिए।

वह उठा लेकिन जैसे ही उसने सामान को उठाने के लिए पोटले को देखा तो, वह एक दम खाली था। उसमें एक भी कपड़ा नहीं था। यह देख कर वह हैरान हो गया,

और सोचने लगा कि आखिर मेरे सारे कपडे गये कहाँ, कोई चोर तो नहीं आये!

   तभी उसे कुछ आवाज आई उसने इधर उधर देखा कोई नहीं था। तभी उसकी नजरें पेड़ पर गयी। पेड़ पर बहुत बन्दर थे, व्यापारी ने उन बंदरों के बारे में सुना भी था।

कि बन्दर बहुत शैतान है और दोनो गाँव के बीच के पेड़ में रहते हैं, अब उसे समझ में आ गया कि यह विशाल पेड़ वही बंदरों वाला पेड़ है। व्यापारी के सारे कपड़े बंदरों ने खुद ही पहन रखे थे।

   व्यापारी को कुछ समझ में नही आ रहा था कि अब वह बंदरों से अपने कपड़े कैसे वापस ले। व्यापारी ने बंदरों को पत्थर मरना शुरू के दिया। बन्दर भी बड़े ढीठ थे,

उन्होंने व्यापारी की नकल करते हुए पेड़ से फल तोड़े और व्यापारी के ऊपर मारना शुरू कर दिये।

   अब व्यापारी को उनकी नकल करने की आदत समझ में आ रही थी, व्यापारी ने अपनी टोपी उतारी और जमीन पर गिरा दी। बंदरों ने भी व्यापारी के समान से जो टोपियां पहनी हुई थी वह नीचे गिरना शुरू कर दी।

   अब व्यापारी ने सूझ बूझ से काम करना शुरू कर दिया। व्यापारी ने बंदरों को दिखा कर अपना कुर्ता निकाला और जमीन पर फेंक दिया। नकलची बंदरों ने भी अपने अपने कपड़े उतार कर जमीन पर फेंक दिए।

और साथ ही उनके पास जो भी समान था वह सब भी उन्होंने नीचे फेंक दिया। अब व्यापारी को अपने कपड़े वापस मिल गए, उसने फटाफट अपना कुर्ता पहना, सामान पकड़ा और वहाँ से भाग निकला।

व्यापारी की सूझ बूझ ने उसको इस मुसीबत से बचा लिया।


सीख | Child Story in Hindi : ” मुश्किल समय मे हिम्मत न हारकर, हर कार्य को बुध्दि और विवेक की सहायता से करना चाहिए।”


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Hindi Story for Children


” बुरी आदत “

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    बादशाह अकबर के बेटे को अंगूठा चुसने की बुरी आदत थी। बादशाह अकबर इस बात से बहुत परेशान थे। उनका बेटा बहुत बड़ा हो चुका था,

लेकिन उसकी यह आदत छूटने के नाम ही नहीं ले रही थी। बादशाह अकबर ने कई हकीमो को इस बारे मे बताया लेकिन कोई भी बादशाह अकबर की इस परेशानी को दूर नहीं कर पा रहा था।

   एक बार बादशाह अकबर की रियासत में एक साधू आए। वह बडे ही ज्ञानी थे, उन्होंने टेढ़े से टेढ़े व्यक्तियों को सीधा किया हुआ था।

राजमहल के लोगों ने राजा अकबर को उन साधू के बारे में बताया, अकबर ने सोचा, लगता है कि यही साधु अब मेरी इस मुश्किल से मुझे छुटकारा दिला सकते हैं।

तब राजा अकबर ने अपने दूतों द्वारा साधु को महल बुलवाने का आदेश दिया। साधु महल में आए।

   राजा अकबर ने अपने बेटे की बुरी आदतों के साथ अपनी सारी दुविधाओं को साधु के सामने रख दिया।

महल की सभा में उस समय राजा अकबर के साथ उनका बेटा, बीरबल और सभी दरबारी मौजूद थे। सभी दरबारियों सहित राजा अकबर की नजरें साधु के कार्य पर थी।

सभी यह देखना चाहते थे कि आखिर साधु ऐसा क्या करने वाले हैं जिससे कि राजा अकबर के बेटे सलीम की वह बुरी आदत छूट जाए।

   लेकिन साधु किसी सोच में डूबे हुए थे। साधु ने कुछ देर सोचकर राजा से बोला, ” महाराज! मैं आपके महल में 1 हफ्ते के बाद आऊंगा। मुझे आपके बेटे की आदत छुड़ाने के लिए कुछ आवश्यक कार्य करना है।”

इतना कहकर साधु राजा के दरबार से चला गया।

तब सभी दरबारियों ने सोचा कि जरूर कोई न कोई कठिन कार्य होगा जिसकी वजह से साधु इतनी शीघ्रता से चले गए हैं।

Hindi Child Story Intrusting Part – 1 हफ्ता हो गया, ठीक हफ्ते के आख़री दिन साधु महाराज महल पधारे।  उस दिन भी सबकी निगाहें साधु पर ही थी।

  साधु ने कुछ खास करने की मंशा तो नहीं बनाई थी लेकिन फिर भी सभी दरबार के लोग सोच रहे थे कि साधु कुछ तैयारी कर के आए हैं।

साधु ने अकबर के बेटे सलीम को अपने पास बुलाया और उससे प्रेम पूर्वक बात की। और उससे अंगूठा न चूसने के लिए कहा। सलीम बात मान गया,

औऱ आज के बाद अंगूठा न चुसने का सभी से औऱ अपने पिता से वादा भी किया। राजा अकबर बहुत खुश हुए।

  लेकिन सभी दरबारी अचंभित रह गए , क्योंकि उन्हें कुछ चमत्कार की उम्मीद थी तब एक मंत्री बोला,” महाराज! इतना कार्य तो ये 1 हफ्ते पहले भी कर सकते थे,

लेकिन इन्होंने 1 हफ्ते का समय लेकर हम सभी के समय का नुकसान किया है। अतः ये दण्ड के अधिकारी हैं। फिर सभी दरबारी उसकी हां में हां मिलाते हुए बोले, कि साधु को दण्ड मिलना ही चाहिए।

    साधु चुपचाप अपना अपमान सहते रहे। पास में खड़े बीरबल यह सब बहुत देर से देख रहे थे, सबकी बात समाप्त होने के पश्चात बीरबल बोले,

” महाराज, माफ करना! लेकिन हमें इनको अपना गुरु समझना चाहिए और इनसे शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। असल मे इन साधु को भी एक बुरी आदत थी, तम्बाकू खाने की। ये बार बार तम्बाकू खाया करते थे।

तो इन्होंने पहले अपनी बुरी आदत को छोड़ा, जिसमे इन्हें 1 हफ्ता लग गया। फिर सलीम की बुरी आदत को छुड़ाने के लिए ये यहां आए।

महाराज! हम सभी को वही उपदेश दुसरो को देने चाहिए जो कि हम स्वयं पर भी लागू करते हैं और साधु ने बिल्कुल ऐसा ही किया।”

 बीरबल की बात सुनकर सभी दरबारियों का सर झुक गया तथा सभी ने साधु से माफी मांगी। और राजा अकबर ने भी उस दिन एक बहुत बड़ी शिक्षा ग्रहण की।


सीख | Hindi Stories for Children : ” दूसरों को उपदेश देने से पूर्व उन बातों को स्वयं के ऊपर लागू कर लेना चाहिए।”

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Child Story in Hindi


” दुष्ट सर्प “


   बहुत समय पहले की बात है, जंगल के एक घने पेड़ में गौरैया रहती थी। गौरैया ने अपना घोंसला पेड़ की डाली में बनाया हुआ था। लेकिन उसी पेड़ के नीचे एक सांप भी रहता था,

सांप ने अपना बिल पेड़ के नीचे इसकी जड़ों के पास बनाया था।

जिसका आभास गौरैया को बिल्कुल भी नहीं था।

     गौरैया जब भी अंडे देती थी, गौरैया की अनुपस्थिति में वह सांप अंडों की गन्ध से पेड़ के ऊपर रेंगता हुआ आता था और अंडों को डकार जाता था और अपने बिल में चला जाता था।

गौरैया जब खाने को तलाश से वापस आती थी, तब वह अपने अंडों को घोंसले में म पाकर बहुत विचलित हो जाती थी।

  बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। वह सोचने लगी कि क्या मैं अपने बच्चों को सही सलामत कभी जन्म नहीं दे पाउंगी! वह यह सब सोचकर बहुत दुखी हुई।

   गौरैया ने सोचा, क्या पता मैं कुछ ज्यादा ही सोच रही हूं, शायद मेरे घोंसले से हवा के कारण मेरे अंडे इधर उधर लुढ़क कर नीचे गिर जाते हैं,

मुझे अपने घोंसले को थोड़ा ऊंचाई पर रख देना चाहिए। गौरैया ने अपना घोंसला ऊपर रख दिया।

  अब सांप जब ऊपर जाता अंडे खाने के लिए तो उसे अंडे नहीं मिलते लेकिन वह देखता की, चिड़िया तो रोज इसी पेड़ से उड़ती है, तब उसने ढूंढा तो उसको चिड़िया के अंडे मिल ही गए।

अब सांप चिड़िया के अंडे दुबारा खाने लग गया। अब गौरैया को चिंता होने लगी कि जरूर कोई न कोई गड़बड़ है, मुझे ध्यान रखना चाहिए।

   फिर एक दिन गौरैया ने अपने अंडे दिए और उन्हें घोसले में ही रहने दिया लेकिन इस बार वह अपना दाना ढूंढने नहीं गयी और पास के पेड़ की डाली में , पत्तो के पीछे छिप गई,

यह देखने के लिए कि आखिर उसके अंडे जाते हैं तो कहाँ!

Hindi Child Story Intrusting Part -सांप ने अपने बिल से बाहर झांका तो गौरैया अपने घोंसले में उसको नहीं दिखी। फिर सांप मौके का फायदा उठाने के लिए अंडों की गंध सूंघते हुए चिड़िया के बिल में गया और अंडे कहा गया।

अंडों को खा कर वह झट से अपने बिल में छिप गया।

   दूर डाली में, पत्तों के पीछे बैठी हुई गौरैया ने यह सब देख लिया। यह सब देखकर गौरैया का कलेजा मुह को आने लगा। वह यह सब देख कर बहुत ही दुखी हुई और बैठे बैठे बहुत जोर जोर से रोने लगी।

  तभी लोमड़ी उस रास्ते से गुजर रही थी उसने गौरैया के रोने की आवाज सुनी, उससे रुका नहीं गया और वह गौरैया के पास चली गयी। लोमड़ी ने गौरैया से कहा,

” बहिन तुम रो क्यों रही हो? ऐसा क्या हुआ, बताओ मुझे, तुमने भी तो मेरी कितने बार मदद की है, मैं भी तुम्हारी सहायता करना चाहती हूं । तुम बेझिझक अपनी परेशानियों को मुझे बता सकती हो।”

   तब गौरैया बोली, ” क्या बताऊँ बहन, वहां पास में मेरा घोंसला है। मैं उसमें जब भी अंडे देती हूं , वहीं पेड़ की जड़ के बिल से एक सांप उन अंडों को चुराकर खा लेता है। मैं बहुत परेशान हूं।

तुम ही बताओ मैं क्या करूँ।”

तब लोमड़ी ने गौरैया को एक उपाय बताया। लोमड़ी के उपाय के अनुसार गौरैया ने महल से तालाब में स्नान करने आई, राजकुमारी का एक महंगा हार चुरा लिया।

उसे सैनिकों ने देखा सैनिक उसके पीछे दौड़े, सैनिकों को अपने पीछे आता देख गौरेया ने अपना रुख अपने पेड़ की ओर कर लिया। सैनिक भी अब उसके पीछे ही आने लगे।

Hindi Stories for children Moral Part- सैनिकों ने गौरैया से हार छीनने की कोशिश की लेकिन गौरेया ने जानबूझकर वह हार सांप के बिल में डाल दिया।

  जैसे ही एक सैनिक हार को देखने के लिए उस बिल में झांकने लगा उसने देखा कि एक जहरीला नाग वहां अपना फन पसारे हुए कुंडली मार कर बैठा है,

यह देखकर सभी सैनिको ने मिलकर सांप का बिल तोड़ दिया जैसे ही सांप बाहर निकलने लगा सैनिकों ने सांप को भाले की सहायता से धर दबोचा और उसे मार डाला। सैनिक फिर राजकुमारी का हार लेकर वहां से चले गए।

  अब गौरेया को भी सांप से हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया। अब वह अपने बच्चों का लालन-पालन बहुत अच्छे से कर सकती थी। वह बहुत खुश हुई।


सीख | Hindi Story for Children : ” जो दूसरों को जानबूझकर परेशान करते हैं, उनके कर्मों का फल उन्हें एक न एक दिन जरूर मिलता है। “


Stories for Kids in Hindi


” अविवेक का मूल्य “


  एक कुम्हार था, वह मिट्टी के बर्तन बनाया करता था, और उन्हें ही बेचकर अपना घर चलाता था। एक बार वह एक मिट्टी के टूटे हुए घड़े की मरम्मत कर रहा था,

तभी अचानक उसका सर घड़े के नुकीले हिस्से में जा लगा। और घडे का नुकीला भाग कुम्हार के माथे में बहुत अंदर तक चला गया , जिससे कि उसके माथे में एक गहरा घाव बन गया।

घाव इतना अधिक विक्राल हो गया था कि किसी भी दवा उस पर असर नहीं कर रही थी। तब वह एक बड़े वैद्य के पास गया और उनसे अपने घाव को ठीक कराने के लिए विनती की।

वैद्य मैन गए लेकिन उस घाव के उपचार मे कई महीने लग गए और वह घाव ठीक हो गया ठीक होने के बाद भी उस घाव का निशान कुम्हार के माथे पर रह गया।

   घाव के ठीक हो जाने के बाद कुम्हार ने फिर से अपना कार्य प्रारम्भ करने का सोचा, लेकिन अब उसके गांव में कई और लोग मिट्टी के घड़े बनाने और उन्हे बेचने का कार्य करने लगे।

उसका तो काम जैसे ठप ही हो गया। अब उसने किसी और कार्य को करने की अपने मन में ठानी। वह एक दूसरे राज्य में गया और वहां राजा की सेना में भर्ती हो गया।

  एक दिन राजा जब अपनी सेना को परखने और उनकी क्षमता का परीक्षण करने के लिए आए तो उन्होंने कुम्हार को देखा, कुम्हार को देखते ही उनकी नजर कुम्हार के माथे पर बने घाव पर पड़ी।

घाव बहुत ही गहरा प्रतीत हो रहा था। घाव को देखते ही, राजा ने अपने मन मे यह सोचा कि जरूर यह कोई न कोई शूरवीर है, यह युद्ध में अपने शत्रुओं से लड़ रहा होगा,

तब इसको युद्ध में शत्रुओं को मारने के दौरान ही इसको यह चोट लगी होगी और यह घाव बन गया होगा।

इतना सब सोचने के बाद राजा ने बिना परीक्षण किए ही कुम्हार को अपनी सेना के अच्छे पद पर तैनात कर दिया। कुम्हार के साथ सेना म भर्ती होने आए युवक यह देखकर बहुत निराश हुए।

Hindi Child Story Intrusting Part – कुम्हार अपने कौशल के बल पर राजा का प्रिय बन गया लेकिन राजा ने उससे किभी भी उसके निशान के बारे में नहीं पूछा,

और न ही कुम्हार ने कभी यह जानने की कोशिश की,

कि राजा ने उसको बिन परीक्षण के ही अपनी सेना मे भर्ती क्यों कर दिया। राजा कुम्हार को बहुत ही पराक्रमी समझता था।

  लेकिन अब उस राज्य में कठिन दौर की शुरुआत हो गयी।  राज्य को अपने वश में करने और राजा को गुलाम बनाने के लिए पड़ोसी राज्य के राजा युद्ध के लिए आ गए।

तब राजा ने सभी को, तैयार रहने के लिए कहा, और अपने विश्वास पात्र कुम्हार को अपने पास बुलाया और उससे कहा, ” जिस प्रकार तुमने वीरता से शत्रुओं को पिछले युद्ध में धूल चटाई थी,

और अपने शरीर की चिंता किए बिना ही अपने माथे में इतना गहरा निशान भी खा लिया, तुम्हें यही पराक्रम इस युद्ध में भी दिखाना है।”

   राजा की बात सुनकर कुम्हार चौंक गया। उसने राजा से कहा, ” नहीं महाराज ! मैं तो एक कुम्हार था, औऱ जब मैं एक दिन अपने टूटे हुए घड़े की मरम्मत कर रहा था,

तो उसके कोने से मुझे बहुत तेज लग गयी थी, जिसका घाव मेरे माथे पर अभी तक है, यह कोई वीरता की निशानी नहीं है, लेकिन हां इस बार युद्ध में मैं अपनी वीरता को जरूर साबित करूँगा।

 कुम्हार की बातें सुनकर राजा को बहुत क्रोध आया और राजा ने बोला,

” मूर्ख तेरी इतनी हिम्मत, छल का सहारा लेकर तू हमारी सेना में भर्ती हुआ और अपनी चालाकी से इतने बड़े पद को भी प्राप्त किया! इससे पहले कि मैं तुझे मार-मार कर यहां से निकलूं तू खुद ही मेरी नजरों से दूर हो जा।”

Hindi Story for children Moral Part- राजा की बात सुनकर कुम्हार बोला, ” महाराज मैं एक कुम्हार जरूर हूँ लेकिन इसका मेरी वीरता और मेरे कौशल से कोई सम्बन्ध नही है,

मैं आपकी सहायता करूँगा, कृपया मेरा विश्वास करें।”

राजा ने क्रोध में कहा, ” जिस प्रकार गीदड़ का बच्चा शेर के बीच पलते हुए भी गीदड़ ही रहता है, उसी प्रकार तू सेना में होते हुए भी, सैनिक नहीं बल्कि कुम्हार ही रहेगा।

तो जल्द से जल्द तू हमारी नजरों से दूर हो जा इससे पहले कि तेरा कोई नुकसान हो! “

राजा की बातों को सुनकर कुम्हार को बहुत बुरा लगा और वह हमेशा हमेशा के लिये राजा और उसके महल को छोड़कर चला गया।


सीख | Short Stories for Children in Hindi: ” मनुष्य को अपने जाति-धर्म के अनुसार नहीं बल्कि उसके कर्मो के हिसाब से मापा जाना चाहिए। क्योंकि कोयले की खान से भी हीरे निकलते हैं।”


Conclusion | Hindi Child Story


आज आपने पढ़ी Hindi Child Story आशा करते हैं,आपको यह पसन्द आयी। और इन Hindi Stories for Children से कुछ नया सींखने को मिला, ऐसी और Stories for Kids in Hindi पढ़ने के लिए बने रहें के साथ।

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