[Best]* Kabir Das Biography in Hindi (Kabir Das ki Rachnaye in Hindi) 2020

Kabir Das Biography in Hindi- आज हम जानेंगे, महान कवि और समाज सुधारक संत कबीर दास ka Jiwan Parichay, तो चलिए जानते हैं, Kabir Das Biography in Hindi.


Kabir Das Biography in Hindi


कबीर दास जिनको दुनिया कबीरा के नाम से भी जानती है, एक महान कवि होने के साथ साथ एक महान समाज सुधारक भी थे,

उन्होंने धर्म , भेदभाव, ऊंच- नीच और जाति आदि से ऊपर उठकर,ऐसी रचनाये लिखी , जिससे आज वे भारत मे ही नही बल्कि पूरे विश्व मे प्रख्यात हैं।


Kabir Das Biography in Hindi:


   नाम    संत कबीर दास (कबीरा)
   जन्म    1398 ई. (काशी)
   पिता    नीरू
   माता     नीमा
   मुख्य रचनाये    साखी, सबद और रमैनी
   पंचतंत्र में विलीन    1518 ई. (मगहर, उत्तर प्रदेश)

कबीर दास जिनको दुनिया कबीरा के नाम से भी जानती है, एक महान कवि होने के साथ साथ एक महान समाज सुधारक भी थे,

उन्होंने धर्म , भेदभाव, ऊंच- नीच और जाति आदि से ऊपर उठकर, ऐसी रचनाये लिखी , जिससे आज वे भारत मे ही नही बल्कि पूरे विश्व मे प्रख्यात हैं।

कबीर दास जी का जन्म एक उलझी हुई गुत्थी है, कबीर दास के जन्म को लेकर अलग अलग विद्वानों की अलग अलग चेतनाएं हैं।

पर ज्यादातर विद्वान इस वाक्य से मानते हैं- “काशी मैं परगट भरै रामानंद चेताये। ” कि संत कबीर दास जी का जन्म 14 – 15 वीं शताब्दी के बीच लहरतारा, काशी में हुआ था।


Short Biography of Kabir Das in Hindi :


विद्वान मानते हैं, कि, इनकी माता एक ब्राह्मड़ी थी, जो विधवा थीं, और लोकलाज के भय से इनको पैदा होते ही एक तालाब के किनारे छोड़कर चली गयी। जिसका नाम, रामतारा तालाब था।

फिर एक मुस्लिम पति पत्नी जिनका नाम नीरू और नीमा था, वे कबीर दास जी को अपने घर ले आये, और इनका पालन पोषण किया। कोई नही जानता कि इनके वास्तविक माता पिता कौन थे।

इनके पिता और माता का उल्लेख उनके द्वारा लिखे गए इस वाक्यांश में मिलता है- “जाति जुलाहा नाम कबीरा, बानी बानी फिरो उदासी”।

कबीर दास अपने दोहों, कविताओं और अन्य रचनाओं के माध्यम से पूरे विश्व मे भारत की संस्कृति को बांटने का प्रयास किया, और लोगों को सही तरीके से जीवन व्यतीत करने का मार्ग बताया।

संत कबीर दास जी भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति की धारा को मानते थे। वे सभी धर्मों को एक समान मानकर लोगो को जीवन जीने को कहते थे।

तभी संत कबीर दास जी का प्रभाव हिन्दू धर्म के अलावा सिख और मुस्लिम धर्म मे भी देखने को मिलता है।


Kabir Das Ji ki Shiksha:


कबीर दास जी अपनी शिक्षा दीक्षा गुरु श्री रामानंद जी से लेना चाहते थे, परंतु किसी कारण से रामानंद जी उनको अपना शिष्य बनाने के लिए नही माने,

पर कबीर दास भी नही माने , और उन्होंने मान लिया कि गुरु तो रामानंद ही बनेंगे , जब एक दिन गुरु रामानंद जी स्नान करके आ रहे थे, तब वे उनके पैरों तले लेट गए, और जैसे ही रामानंद जी का पैर उनके ऊपर पड़ा,

उनके मुह से “राम” निकला, और गुरु रामानंद, संत कबीर दास को शिक्षा देने के लिए तैयार हो गए।

कबीर दास जी सब लोगों को ईश्वर के पुत्र मानते थे, और चाहते थे, कि लोग हिन्दू मुस्लिम और जाति धर्म छोड़ एक साथ मिल जुलकर रहे, जिससे बिना किसी बैर के सबका एक साथ विकास हो।

संत कबीर दास मानते थे, हमारे जो कर्म होते हैं, वे ही हमें मिलने वाले हमारे फलों के उत्तरदायी होते हैं।

उनके गाँव मे लोगो मे यह गलत धारणा फैली थी, कि इस गॉव मगहर में मरने वाले लोग पापीयों की श्रेणी में आते हैं,

और ऐसे लोग मारने के बाद सीधे नर्क में जाते हैं, और काशी में मरने वालों को ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यह बात कबीर दास जी को गलत लगी ,

और वे इस बात को भ्रम साबित करने के लिए अपने अंतिम समय मे मगहर रहने चले गए थे। और वहीं उन्होंने अपनी अंतिम सांसे ली। और वे 1518 ईसवी में पंचतंत्र में विलीन हो गए। yeh Kabir Das Biography in Hindi ka antim hissa raha.


Kabir Das ki Rachnaye in Hindi:


Short Biography of Kabir Das in Hindi


कबीर दास जी के Shishyon ने कबीर दास जी के सारे दोहों और कविताओं को एक काव्य में संग्रहित करके रखा, जिसको उन्होंने स्वयं ही तीन भागों में बाटा था –  सबद, साखी और रमैनी। और यह काव्य विश्वप्रसिद्ध रहा।

साखी– इस काव्य संग्रह में कबीर दास जी के द्वारा दिये गए सारे धर्म उपदेशो का संग्रह है।

सबद– इस काव्य संग्रह में कबीर दास जी के द्वारा दिये गए प्रेम प्रसंगों का संग्रह है।

रमैनी– इस काव्य संग्रह में कबीर दास जी के द्वारा दी गयी चौपाईयों का संग्रह है।


Kabir das ji Dwara Rachit Kahani:


एक साड़ी वाला था। वह बहुत नम्र स्वभाव औऱ निर्मल मन का था। एक दिन वह ऐसे ही अपनी दुकान में साडी बेच रहा था, तभी वहां से दो लड़के गुजर रहे थे। उनमें से एक लड़का बहुत अमीर परिवार से था।

और अमीर परिवार से होने के कारण बहोत अहंकारी था, उन लड़कों ने साड़ी वाले को देख उसके साथ शरारत करने की सोची।
वे दोनों साड़ी वाले के पास गए ,और सबसे महंगी साडी दिखाने को कहा।

साड़ी वाले ने साडी निकली और उनको दी। तब लड़के ने साड़ी का दाम पूछा।

साड़ी वाला- 10 रुपये।

पर लड़के ने साड़ी के दो टुकड़े कर कहा, मुझे पूरी साडी नही , आधी साड़ी चाहिए ये कितने में पड़ेगी?

तब साडी वाले ने गुस्सा न करते हुवे नम्र स्वभाव से कहा, 5 रुपये की।

तब लड़के ने साड़ी के चार टुकड़े कर कहा, मुझे आधी साडी भी नही ,  इतनी ही साड़ी चाहिए ये कितने में पड़ेगी?

तब भी साडी वाले ने नम्र स्वभाव से कहा, ढाई रुपये की।

तब लड़के ने साड़ी के बहुत सारे  टुकड़े कर दिए और कहा, यह तो बहुत छोटी हो गयी है, इतनी छोटी साड़ी से में क्या करूँगा।

तब साड़ी वाला बोला – बेटा अब यह साडी तुम्हारे क्या किसी और के काम की भी नही।

यह सुनकर लड़के को बहुत पछतावा होने लगता है। और वह कहता है, मेने आपकी साडी बर्बाद की है, इसके पैसे आप मुझसे ले लीजिए।

पर साड़ी वाला कहता है, जब तुमने साड़ी ली ही नही, तो मै तुमसे पैसे कैसे ले सकता हूँ?

(Yeh kahani aap sant Kabir short essay in hindi me bhi likh sakte hain.)

लड़के को यह सुनकर बहुत पछतावा हुआ, और उसका सारा अहंकार नष्ट हो गया, और वह बोला- मेने आपका नुकसान किया है, यह कैसे पूरा होगा।

साड़ी वाला बोला- बेटा अगर में तुम्हारे ये रुपये ले लूंगा , तो उसमें शायद मेरा चल जाएगा, पर तुम्हारे जीवन का वही हाल होगा, जो साड़ी का हुवा है।

साड़ी तो में दोबारा बना लूंगा, पर अगर तुम्हारे अंदर यह अहंकार रहता, तो तुम अपने जीवन मे कुछ नही कर पाते।

यह सुन लड़का साड़ी वाले के पैरों में पढ़कर माफी मांगता है। और पश्चाताप करते हुवे अहंकार छोड़ देता है।


 

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