7 Best Moral Stories in Hindi for Class 3 | Short Story in Hindi 2020

यह हैं 7 Best Moral Stories in Hindi for Class 3. जो इन्टरस्टिंग होने के साथ Moral हैं, जिनसे आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।


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Moral Stories in Hindi for Class 3:


” चालाक मेमना और भेड़िया “


  एक बार एक शिकारी भेड़िया, भेड़ों के झुंड से एक छोटा मेमना उठा लाया। वह उसको खाकर अपनी भूख शांत करना  चाहता था। भेड़िया मेमने की ओर बढ़ ही रहा था,


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कि मेमने ने अपनी प्यारी आवाज में कहा,  “भेड़िये चाचा मुझे पता है आप मुझे खा जाओगे ,

लेकिन मेरी मारने से पहले एक इच्छा है क्या आप मेरी मरने से पहले इच्छा पूरी कर सकते हो?”

भेड़िये ने जवाब दिया, हां बोलो! क्या इच्छा है तुम्हारी?

मेमने ने कहा, “चाचा मुझे पता है आप बहुत अच्छी बांसुरी बजाते हो, मुझे बांसुरी सुनना बहुत पसंद है,

तो मैं एक बार वही सुनना चाहता हूँ। क्या आप मेरे लिये कोई धुन बजा सकते हो?”

भेड़िया कुछ बुदबुदाया और राजी भी हो गया और बांसुरी बजाने लगा। लेकिन वह थोड़ी ही देर में रुक गया।

   भेड़िये के रुकते ही मेमने ने फिर कहा, – ” वाह चाचा वाह! आप तो बहुत अच्छी बाँसुरी बजाते हो उस गडरिये से भी अच्छी! क्या आप कोई अन्य धुन मुझे सुना सकते हो मुझे और सुनना है?”

अपनी तरीफ सुनकर भेड़िया खुश हो गया और फिर से बाँसुरी बजाने लगा। इस बार उसने जोर-जोर से बांसुरी बजाना शुरू कर दिया। उसकी आवाज बहुत दूर तक जा रही थी।

        भेड़िये की आवाज गडरिये तक पहुँची और वो समझ गया कि कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है। वो अपने कुत्ते लेकर फौरन उस जगह पहुंच गया।कुत्तों ने भेड़िये को घेर लिया।

मेमना भेड़िये के चंगुल से निकलकर वापस भेड़ों के झुंड में चला गया।


” शिक्षा | Moral of This Story for Class 3 in Hindi – “कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ से ही काम लेना चाहिए।”


” चार मूर्ख “



एक बार एक जंगल में एक कोयल रहती थी। वह कोई साधारण कोयल नहीं थी, जब वह गाना गाती थी तो उसके मुंह से सोने के दाने निकलते थे। एक दिन एक बहेलिया उस जंगल में आया,

जंगल में घूमते हुए उस बहेलिये की नजर उस कोयल पर पड़ी। कोयल उस समय एक सुंदर गना गा रही थी, उसके मुंह से सोने के दाने निकल रहे थे।बहेलिया उसे देख कर खुश हो गया और मन ही मन में सोचने लगा,

“अरे वाह! ये तो अजूबा हो गया, अब मैं इसे घर ले जाकर धनवान बन जाऊंगा।”

    बहेलिये ने जाल बिछाकर उस कोयल को पकड़ लिया और अपने घर ले आया। अब वह कोयल रोज बहेलिये को सोने के दाने देती। ऐसे ही थोड़े ही दिनों में बहेलिया बहुत अमीर हो गया।

उसने सोचा कि अगर मैं इस कोयल को राजा को दूंगा तो मेरी उन्नति होगी। उसने कोयल के लिए सोने का पिंजरा बनाया और उस पिंजरे में कोयल को डालकर राजा को भेंट कर दिया,

और राजा को कोयल की दिव्यता के बारे में बताया, राजा बहुत खुश हुआ और बहेलिये को एक ऊंचे पद पर नियुक्त कर दिया।

अब कोयल गाना गाकर राजा का खजाना भर रही थी। थोडे ही दिन में राजा का खजाना सोने के दाने से भर गया। अब उसने उस कोयल को अपनी रानी को तोहफे में दे दिया।

रानी को उस कोयल की सच्चाई पता नही थी, तो रानी ने पिंजरा खोलकर कोयल को आजाद कर दिया और सोने का पिंजरा सुनार को दे दिया गहने बनाने के लिये।

   कोयल उड़कर फिर से जंगल में चले गयी। और वह पूरी घटना के बारे में सोचने लगी।

कोयल ने फिर एक नया गाना बनाया।

” पहली मूर्ख मैं, जो बहेलिये के चंगुल में आ गई।

दूसरा मूर्ख बहेलिया, जिसने मुझे राजा को दिया।

तीसरा मूर्ख राजा, जिसने मुझे रानी को दिया।

और चौथी मूर्ख रानी , जिसने मुझे आजाद कर दिया। “


” शिक्षा | Moral Stories in Hindi for Class 3 -” मूर्खता अपना ही नुकसान करवा देती है।”

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Story in Hindi for Class 3:


” सधी हुई तरकीब “


         एक बार की बात है। एक जंगल में लोमड़ी और बिल्ली कुत्तों के बारे मे बात कर रहे थे। दोनों की चर्चा चल ही रही थी कि लोमड़ी कहने लगी, “इन कुत्तों से मुझे बहुत ही नफरत है,

अगर ये पीछे पड़ जाते हैं तो जान बचाना मुश्किल हो जाता है। मैं बहुत सारी तरकीबें अपनाती हूँ अपनी जान बचाने के लिए! क्या पता कौन सी काम आ जाए!”

    ”मैं कभी इधर जाती हूँ कभी उधर, कभी झाड़ियों में कभी किसी आड़ में छिपाना फिर जान बची तो ठीक वरना सीधे भगवान के घर कटा टिकट!” लोमड़ी ने कहा।

इतने में बिल्ली बोली, -” क्या!! बहिन तुम इतनी सारी तरकीबों से अपनी जान बचाती हो? मेरे पास तो एक ही तरकीब है जो कि मेरा हर बार साथ देती है!

“कौन सी तरकीब?” लोमड़ी ने कहा

Intrusting part of this story for class 3 in hindi– बिल्ली ने जवाब दिया – “जब भी मैं मुसीबत में होती हूँ ,

या फिर कुत्ते मेरे पीछे पड़े होते हैं तो मैं बिना कुछ सोचे समझे पेड़ वाली जगह की ओर दौड़ लगा देती हूँ और पेड़ में चढ़ जाती हूं,

और कुत्ते भी कितना इंतजार करेंगे मेरा नीचे आने का! जब तक वो वह से नही जाते मैं पेड़ पर ही डटी रहती हूँ।”

  लोमड़ी ने कहा, “वाह बहिन, तुम्हारी तरकीब तो बहुत बढ़िया है।”

इतने में कुछ कुत्तों का झुंड वहां दौड़ते हुए आ पहुंचता है। बिल्ली तो झट से पेड़ पर चढ़ जाती है,

लेकिन लोमड़ी के कुछ अपनी तरक़ीब सोचने से पहले कुत्ते उसे घेर लेते हैं औऱ उसका काम तमाम कर देते है।


” शिक्षा | Moral Stories in Hindi for Class 3 – “अनेक तरकीबों के स्थान पर हमेशा सटीक और भरोसेमंद तरकीब ही मुसीबत से बचा सकती है।”

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” मछली और ईनाम “


           एक बड़ा सा राज्य था, जिसमें राजा का शासन था। राजा बहुत ही अच्छा था एकदम निष्पक्ष न्याय करता था। राजा को तत्काल पकड़ी हुई मछली के बने व्यंजन खाने का शौक था और वह हर पहर खाने में ताजी मछली ही खाता था।

जिसके लिए उसने खास मछुआरों को वेतन पर मछली पकड़ने के लिए रखा था।

    एक बार राज्य के पास वाले समुद्र, जहाँ से मछलियाँ लाई जाती थी, में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआरा समुद्र से मछली लाने  को तैयार नहीं था।

राजा तो मछली से बने व्यंजन के बिना भोजन ही नही करता था , राजा को बहुत बेचैनी हो गयी।

इसलिए राजा ने अपने मंत्री से कहकर पूरे राज्य में घोषणा करवा दी कि

      “जो भी राजा के लिए मछली लेकर आएगा तो उसे राजा मुँह मांगा इनाम देगा।”

यह खबर एक गरीब मछुवारे ने सुनी। वह अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र से मछली ले आया,

और राजा को देने राजमहल चला गया। राजमहल के द्वार पर पहुंचते ही द्वार पर खड़े सैनिकों ने उसे रोक दिया और कहा, – “क्या काम है?”

मछुआरे ने जवाब दिया , “मैं एक मछुआरा हूँ। महाराज की घोषणा के अनुसार मैं उनके लिए ताजी मछलियाँ ले आया हूं।”

सैनिक ने यह सुनकर जल्द से मंत्री को बुलाया।

मंत्री ने पूरी बात सुनी लेकिन उसने मछुआरे के राजा के पास जाने के लिए एक शर्त रखी।

शर्त यह थी कि राजा जो भी मछुआरे को इनाम में देगा उसका आधा हिस्सा मंत्री को देना होगा।

मछुआरे ने हामी भरी।

        मंत्री मछुआरे को राजा के पास ले गया। राजा बहुत खुश हुआ और मछुआरे से इनाम मांगने को कहा।

Main part in this short story for class 3 in hindi – मछुआरा गरीब जरूर था लेकिन मूर्ख नहीं।

मछुआरे ने बड़ी ही बुद्धिमानी से कहा, -” महाराज ! मुझे इनाम में पचास कोड़े चाहिए। मेरी पीठ पर!”

महाराज ने कहा, -”ठीक है अगर तुम यही चाहते हो तो तुम्हारी इच्छा पूरी की जाएगी।”

महाराज ने अपने एक सैनिक को मछुआरे के पीठ पर हल्के से पचास कोड़े मारने के आदेश दिए।

सैनिक कोड़े मारने लगा। लेकिन पच्चीस कोड़े होते ही, मछुआरे ने कहा महाराज आगे के पच्चीस कोड़े मेरे साझेदार को मारिये क्योंकि वो इनाम में बराबर का हिस्सेदार है।

महाराज ने पूछा, ‘कौन है तुम्हारा साझेदार’?

मछुआरे ने जवाब दिया “महाराज!आपका मंत्री।”

यह सुनते ही महाराज को बहुत गुस्सा आया और महाराज ने फिर से सैनिक को मन्त्री को पच्चीस कोड़े मारने का आदेश दिया लेकिन जोर जोर से।

मछुआरे की चतुराई पर राजा ने उसकी बहुत प्रशंसा की। और उसको मुह मंगा इनाम दिया।


” शिक्षा | Short Moral Stories in Hindi for Class 3 -” अधिक लालच मुश्किल में फंसा देता है।”

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Moral Stories For Kids:


” वाह रे मित्रता “


      एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे, सभी जानवर बहुत प्रेम से रहते थे। वहीं एक खरगोश था, वह बहुत दयालु और मैत्रीपूर्ण स्वभाव का था। उसने सभी जानवरों को अपना मित्र बनाया था।

यदि कभी कोई भी जानवर किसी मुसीबत में होता, या फिर किसी जानवर को कोई काम होता तो खरगोश हमेशा उनकी मदद करने के लिए पहुंच जाता ।

उसने अपने इसी व्यवहार के कारण पूरे जंगल मे अपने मित्र बनाए।

      एक दिन 1 लोमड़ी उसके पीछे पड़ गयी। लोमड़ी खरगोश का शिकार करने चाहती थी। खरगोश ने जैसे ही उसे देखा वो तेजी से भागने लगा और भागते हुए एक झाड़ी में छिप गया।

उसने अपने मन में सोचा , -” अगर मुझे जल्द से जल्द कोई मित्र नहीं मिला तो मैं आज इस लोमड़ी का भोजन बन जाऊंगा।”

तभी उसे झाड़ी से कुछ दूरी पर घोड़ा जाते हुए दिखाई दिया।

वो दबे पांव घोड़े के पास गया और उसने घोड़े से कहा, -” दोस्त मेरी जान खतरे में है एक लोमड़ी मेरे पीछे पड़ी है, वो मुझे मार देना चाहती है। कृपया आप मुझे अपने पीठ पर बैठकर कुछ दूरी पर छोड़ सकते हैं?”

घोड़े ने कहा, “खरगोश भाई! मुझे अभी जरूरी काम से कहीं जाना है, वो देखो तुम्हारा दोस्त बैल आ रहा है, तुम उससे मदद के लिए कहो।’

     खरगोश बैल के पास गया, और बैल से मदद मांगी।

तब बैल ने कहा, “मुझे अभी अपने दूसरे दोस्तों के पास जाना है, वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे! वो देखो तुम्हारा दोस्त बकरा आ रहा है तुम उससे मदद के लिए कहो।

    खरगोश निराश होकर बकरे के पास गया और मदद मांगते हुए कहा, “बकरे चाचा! मुझे आपकी मदद चाहिए। मेरी जान खतरे में है और मेरे पीछे लोमड़ी पड़ी है वो मुझे मार डालेगी।

क्या तुम मुझे आपनी  पीठ पर बैठा कर कुछ दूरी तक पहुंचा सकते हो?”

बकरे ने कहा, “मेरी पीठ खुरदुरी है तुम्हे इसमें बैठने में तकलीफ होगी।

तुम्हारा भेड़ दोस्त आ रहा है तुम उससे कहो वो तुम्हारी मदद जरूर करेगा।

Intrusting Part of this short moral stories in hindi for class 3– मरता क्या न करता! फिर खरगोश भेड़ के पास गया।

उसे अपनी परेशानी बताई और मदद मांगी। भेड़ ने भी कुछ बहाना बनाकर उसको टाल दिया।

    खरगोश बहुत दुःखी हुआ। उसे लगा कि वह तो सबकी मदद करता था लेकिन जब उसको दोस्तों की जरूरत है तो किसी ने भी उसकी मदद नहीं की। उसने व्याकुलता से कहा, –

“वाह रे मित्रता!”

अगर ऐसा ही रहेगा तो कोई दोस्त और दोस्ती पर भरोसा नहीं करेगा!

अब उसने सब अपनी किसमत पर छोड़ दिया। लेकिन लोमड़ी सूंघते हुए उस तक पहुबच ही गयी, और उसे मार कर खा गयी।


” शिक्षा | Moral of this Short Story in Hindi for Class 3 -” स्वार्थी मित्रों पर कभी भी विश्वास नही करना चाहिए।”


” न्ययी राजा “


          राजा विक्रम बहुत दयालु और न्यायप्रिय राजा थे। वह अपनी न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार राजा विक्रम अपने लिए नया एक शानदार महल बनवा रहे थे।

महल का नक्शा लगभग तैयार था। और निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया था। लेकिन निर्माण में एक समस्या आ रही थी, महल की जगह के पास एक झोपड़ी थी जो कि महल की शोभा नष्ट कर रही थी।

  मंत्री ने इस बारे में राजा को बताया और राजा ने झोपड़ी के मालिक को बुलवाने का मंत्री को आदेश दिया।

झोपड़ी का मालिक दरबार में पहुंचा। राजा ने खुद उससे बात की और झोपड़ी के बदले मोटी रकम देने का प्रस्ताव रखा। परन्तु झोपड़ी का मालिक बहुत अड़ियल था उसने राजा से कहा, -” माफ करें महाराज!

मैं अपनी झोपड़ी नही छोडूंगा। मेरी झोपड़ी मुझे बहुत प्रिय है। मेरा बचपन वहीं बीता है, मेरी उस झोपड़ी से अनेक यादें जुड़ी हुई है जो एक बार अगर चले गयीं तो कोई रत्न मुझे वो वापस नहीं दे पाएगा।

मुझे अपनी झोपड़ी नहीं छोड़नी।”

Moral Part of this Story in Hindi for Class 3 राजा विक्रम न्यायप्रिय थे उनकी न्यायप्रियता दूर दूर तक मशहूर थी।

राजा को उस व्यक्ति पर बहुत दया आई और राजा ने उस इंसान से कहा, ” मैं तुम्हारी भावनाओं का सम्मान करता हूँ

और अब मुझे तुम्हारी झोपडी से कोई दिक्कत नहीं है।”

राजा ने भरे दरबार में कहा अगर कोई महल को देखेगा तो इसकी दिव्यता को देखकर उसकी प्रशंसा जरूर करेगा।

और अगर कोई इस झोपड़ी को देखेगा तो मेरी न्यायप्रियता उसे अवश्य दिखाई देगी।

    झोपड़ी का मालिक बहुत खुश हुआ और जोर जोर से, महाराज की जय हो ! महाराज की जय हो! नारे लगाने लगा।

फिर पूरा दरबार भी महाराज की जय जयकार करने लगा।


” शिक्षा | Small moral stories in Hindi for class 3-” सभी प्राणी एक समान होते हैं अतः जियो और जीने दो”

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Hindi Story for Class 3 with Moral:


” चुहिया का विवाह ”


             बहुत समय पहले की बात है एक चूहा-चुहिया का जोड़ा था, उनकी शादी के कई वर्ष हो गए थे परंतु उनकी कोई संतान नहीं थी,

तो चूहे दम्पत्ति ने सूर्यदेव की आराधना की और सूर्यदेव से प्रार्थना की संतान के लिए। और सूर्यदेव ने उनकी आराधना से प्रसन्न होकर उन्हें एक सुंदर सी चुहिया बेटी के रूप में प्रदान की।

वो दोनों अपनी बेटी को पाकर बहुत खुश थे, उन्होंने उसका लालन-पालन बहुत अच्छे ढंग से किया। अब वह बड़ी हो चुकी थी और सुंदर भी। अब उसका विवाह करवाना था।

       चुहिया को अब उसकी शादी की चिंता होने लगी। चुहिया को अपनी बेटी के लिए एक योग्य और विश्व में सबसे शक्तिशाली वर चाहिए था। एक दिन वह इस विषय में सोच रही थी,

कि उसे याद आया सूर्यदेव ने ही हमें बेटी दी थी, उसने सोचा कि वही सबसे शक्तिशाली हैं वही मेरी बेटी के लिए सबसे ज्यादा योग्य हैं।

Intrusting Part of this short story in hindi for class 3 – चुहिया सूर्यदेवता के पास जाती है और कहती है, –

सूर्यदेव आप पूरे विश्व में सबसे ज्यादा शक्तिशाली हो,

मुझे मेरी बेटी के लिए एक योग्य औऱ शाक्तिशाली वर चाहिए! मेरी बेटी बहुत सुंदर है ,क्या आप मेरी बेटी से विवाह करेंगे?”

सूर्यदेव ने कहा, ” वास्तव में तुम्हारी बेटी बहुत सुंदर है।तुमने मुझे अपनी बेटी के वर योग्य समझ मैं बहुत भाग्यशाली हूँ। लेकिन मैं तुम्हारी बेटी से  विवाह कर तो लेता,

लेकिन मैं संसार में सबसे शक्तिशाली नहीं हूँ।

मुझसे ज्यादा शक्तिशाली तो वरुण देव हैं वो अपने बादलों से मुझे ढक देते हैं तो आप उनके पास जाईए।”

चुहिया मान गयी और वरुण देव के पास चले गई।

      वरुण देव के पास जाकर भी चुहिया ने कहा , “वरुणदेव आप बहुत शक्तिशाली हैं मुझे मेरी बेटी के लिए आप जैसा ही वर चाहिये मेरी बेटी बहुत सुंदर है। क्या आप मेरी बेटी से विवाह करेंगे?”

वरुणदेव ने कहा, “मैं बहुत भाग्यवान हूँ जो आपने मुझे इस योग्य समझा। आपकी बेटी मुझे पसंद है मैं उससे विवाह कर लेता लेकिन मैं संसार में सबसे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हूं।

मुझसे ज्यादा शक्तिशाली पवनदेव हैं जो मुझे उड़ा कर इधर से उधर ले जाते हैं। वही आपकी बेटी के लिए सबसे योग्य हैं।

    यह सुनकर चुहिया पवनदेव के पास गई और अपनी बेटी के विवाह प्रस्ताव के बारे में अपना पक्ष रखा, लेकिन पवनदेव ने भी चुहिया से कहा , ” चुहिया चाची मैं आपकी बेटी से विवाह कर लेता,

मुझे वो पसंद है, लेकिन मुझसे ज्यादा शक्तिशाली तो पर्वतराज है वो मेरे मार्ग में आ जाते हैं औऱ मुझे वायु प्रसारित करने मे कठिनाई हो जाती है। आप कृपया पर्वतराज के पास जाएं।

      चुहिया फिर थक-हारकर पर्वतराज के पास गई और सारी बात बताई। चुहिया ने अपनी बेटी के बारे में भी बताया कि वह बहुत सुंदर है और उसके लिए ही वर चाहिए। अब पर्वतराज ने भी चुहिया से कहा ,

Moral Part of this Story in Hindi for Class 3– ” वास्तव में तुम्हारी बेटी बहुत सुंदर है।तुमने मुझे अपनी बेटी के वर योग्य समझा मैं बहुत भाग्यशाली हूँ।

मैं तुम्हारी बेटी से  विवाह कर तो लेता, लेकिन मैं सबसे शक्तिशाली नहीं हूँ। मुझसे ज्यादा शक्तिशाली तो

सभी चूहों के राजा मूषकराज है। वो मेरी बड़ी बड़ी चट्टानों को छेदकर अंदर से खोखला कर देता है। आप कृपया उसके पास जाएँ।”

    अब अंततः मूषकराज के पास जाकर चुहिया अपनी बेटी के विवाह का प्रस्ताव रखती है।

और मूषकराज खुश हो जाता है। वह कहता है, –

“मुझे आपकी बेटी बहुत पसंद है और मैं उससे विवाह करने के लिये तैयार हूं।”

यह सुनकर चुहिया की ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहता।

और अंत में मूषकराज के साथ चुहिया की बेटी का विवाह बड़ी ही धूमधाम से होता है। जिसमें सूर्यदेव, वरुणदेव, पवनदेव ,पर्वतराज आदि भी शामिल होते हैं


” शिक्षा | Moral of this Story in Hindi for Class 3 – ” दूर के ढोल सुहाने ही लगते हैं।


Conclusion:


आज आपने पढ़ी, 7 Best Moral Stories in Hindi for Class 3. आशा करते हैं, आपको कुछ नया सीखने के साथ साथ इन कहानियों ने बहुत एंटरटेन भी किया होगा।

आज की यह कहानी कैसी लगी आपको , बताएं कमेंट्स में, और ऐसी ही रोचक और मजेदार कहानियां पढने के लिए बने रहिये, sarkaariexam.com के साथ।

thanks *!*

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