17+ Special Moral Stories in Hindi with Pictures | Hindi Moral Kahaniya

प्रेरणाओं से भरी Moral Stories in Hindi. आशा है, आपको आज की यह कहानियाँ यह पसंद आएँगी, और इनसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, तो चलिए शुरू करते हैं।

मनोरंजन भरी दुनिया मे फिर Moral Stories in Hindi with Pictures लेकर हम उपस्थित हैं, कुछ नई प्रेरणाओं के साथ, जिन्हे आप अपने जीवन में निवेश करके सफलता की और बढ़ सकते हैं।

Moral Stories in Hindi


Moral Stories in Hindi


” चूहा और भगवान “


 एक बार एक चूहा अपनी परेशानियों से परेशान होकर तपस्या करने गया। वह बहुत दिनों तक तपस्या में लीन रहा। तब एक दिन उसकी तपस्या सफल हो गयी, और उसे भगवान ने दर्शन दे ही दिए।

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भगवान प्रकट हुए, औऱ कहा- “मांगो वत्स क्या मांगना चाहते हो?”

 वह भगवान से बोलता है।

” भगवान जी प्रणाम ! मैं अपनी काया को लेकर बहुत ही परेशान हूँ। मुझे हर समय अपनी मृत्यु का डर लगा रहता है, कि कब बिल्ली आ जाए और मुझे अपना शिकार बना ले।

आप कृप्या मुझे बिल्ली बना दो !! “

 भगवान ने उसे बिल्ली बना दिया। अब जब वह जंगल में गया तो कुछ कुत्ते उसके पीछे पड़ गए । बिल्ली अपनी जान बचाकर भागी औऱ मन्दिर में भगवान के पास आ गयी।

वह इस बार बोली, ” भगवान जी! मुझे कुत्तों से बहुत डर लग रहा है। आप न मुझे कुत्ता ही बना दीजिए।”

  भगवान ने उसकी बात मान ली। और उसे कुत्ता बना दिया। वह फिर से जंगल में गया। जंगल में एक शेर उसका पीछा करने लगा। वह फिर से जान बचाकर भगवान के पास गया और बोला ,

” आप मुझे शेर बना दो। भगवान ने उसे फिर शेर बना दिया।

शेर बनने के बाद अब वह फिर से जंगल में आया उसने देखा कि कुछ शिकारी जंगल में आए हुए हैं अब उसे शिकारीयों का डर सताने लगा।

 वह फिर से शिकारियों से छिप-छिपकर भगवान के पास पहुंचा और कहने लगा, ” मैं कुछ भी बन जाऊं लेकिन मुझे किसी न किसी चीज का डर लगा ही रहता है।

जब मैं चूहा था तो मुझे कम डर था, क्योंकि मैंने उन परिस्थितियों से लड़ने की सीख बचपन में ली थी। मुझे कुछ नहीं बनना कृपया आप मुझे पहले की तरह चूहा बना दें।”

  भगवान उसकी बात से खुश हुए और उसको चूहा बना दिया। चूहा अपनी मूल काया प्राप्त कर बड़ा ही खुश हुआ।


सीख | Moral Stories in Hindi : रूप बदलने से मन का डर नहीं बदलता वह वैसा ही रहता है। प्रकृति में सब कुछ बहुत ही सुलझा हुआ और सात्विक है हमे इसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।


” लालची बंटी “


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बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव था त्रिपुरा। उसमे एक नदी के किनारे एक बड़ा जंगल था। जंगल मे भिन्न भिन्न प्रकार के जानवर रहा करते थे।

उन्हीं में से एक था बंटी नामक भेड़िया। वह भेड़िया बहुत ही लालची किस्म का था, और आलसी भी।

रोज वह भोजन को ढूंढने शहर की तरफ जाता था। शहर में जो भी उसे खाने के लिए मिलता, वह उसी में अपना गुजारा करता।

गर्मियां आ चुकी थीं, जंगल मे भी हर किसी जानवर को बहुत गर्मी लग रही थी। बंटी का भी गर्मी की वजह से हाल बेहाल था, वह घर मे ही अपना ज्यादा समय गुजरता था।

एक दिन बंटी को बहुत भूक लगी थी, पर उसके घर मे कुछ भी खाने के लिए नही पड़ा था।

उसने सोचा, मुझे खाना ढूंढने के लिए शहर जाना चाहिए। बंटी खाना ढूंढने शहर की तरफ चल दिया। बहुत देर तक उसने खाना ढूंढने की कोशिश की, परन्तु उसके हाथ कुछ भी नही लगा।

बहुत देर से एक होटल का मालिक बंटी को खाना ढूंढते हुए देख रहा था, होटल के मालिक को बंटी पर दया आ गयी, और उसने एक मांस का टुकड़ा बंटी को खाने के लिए दे दिया।

बंटी बहुत लालची था, उसने मांस के टुकड़े को खाया नहीं, बल्कि उसे कई देर तक चाटता रहा।

फिर कुछ देर बाद उसे प्यास लग गयी, वह पानी पीने नदी की ओर चल दिया।

नदी में जैसे ही बंटी ने पानी पीने के लिए मुह नीचे किया, उसे एक अन्य भेड़िया दिखा, जिसके मुह में भी एक मांस का टुकड़ा था ( जो स्वयं बंटी की ही परछाई थी )।

बंटी को उसे देखकर लालच आ गया, उसने उस मांस के टुकड़े को भी हथियाने की सोची, बंटी ने जैसे ही उससे मांस छीनने के लिए मुह खोला, वैसे ही उसके मुह का टुकड़ा भी नदी में गिरकर बह गया।

बंटी का यह देखकर सारा लालच चकनाचूर हो गया , और उस दिन उसे भूका ही सोना पड़ा।


सीख | Story in Hindi with Moral- जो भी मिले, उसी में खुश रहना चाहिए। कई बार बड़ी चीज के लालच के चक्कर मे छोटी चीज भी हाथ से निकल जाती है।

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Hindi Stories with Moral


” महामूर्ख का खिताब “


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   तेनालीराम अपनी बुध्दिमानी और हाजिरजवाबी के लिए विजयनगर  में बहुत चर्चित थे। उनकी ख्याति दूर दूर तक फैली हुई थी। विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय उन्हें बहुत ही अच्छा मानते थे।

  हर बार होली का उत्सव विजयनगर में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता था। होली के उत्सव में रंगारंग कार्यक्रमों के साथ पुरस्कार वितरण समाहरोह का भी आयोजन किया जाता था,

जिसमें सभी अच्छा कार्य करने वाले दरबारियों को इनाम दिए जाते थे। सबसे बड़ा खिताब “महामूर्ख” का होता था। वहां इस पुरस्कार को सर्वोच्च पुरुस्कार की उपाधि दी गयी थी।

जो कि हर साल तेनालीराम ही जीतते थे।

   एक बार होली में तेनालीराम की निंदा करने वालों ने उन्हें खूब भांग पिला दी। जिस वजह से तेनालीराम आधा समारोह समाप्त होने के पश्चात समारोह में पहुंचे।

 राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम से कहा, ” मूर्ख तेनाली ! सभा में इतने देर से क्यों आए। देखो समारोह अब समाप्त भी होने वाला है।”

 तभी दरबारी भी कहने लगे! महाराज! यह मूर्ख नही  “महामूर्ख” है। इसे हर वर्ष खिताब मिलता था न तभी यह घमण्डी हो गया है।”

तब तेनालीराम बोले। महाराज अभी आपने और दरबारियों ने मिलकर मुझे महामूर्ख बोला। इसका मतलब इस बार भी मैं सर्वोच्च सम्मान ” महामूर्ख के खिताब का हक़दार हूँ।”

  दरबारी अब अपनी ही बात में फंस चुके थे। वे  अब तेनाली को पुरुस्कार लेने से नहीं रोक पाए।

तेनालीराम इस बार भी दरबारियों से जीत गया।


सीख | Hindi Stories with Moral : ” बुद्धिमत्ता से किये गए कार्य सदैव फलदायी होते हैं।”


” साधु की कुटिया “


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एक गांव में दो मित्र रहते थे। उन्होंने साधु बनने का निश्चय किया, एक नदी के किनारे दोनो मित्र गांव से तपस्या करने के लिए आ गए वे वहां जाकर साधु बन गए।

  वे दिन भर तपस्या कर ज्ञान अर्जित किया करते थे। बहुत समय की कठिन तपस्या के पश्चात उन दोनों को ज्ञान की प्राप्ति हुई।

अब वे दोनों साधु वहीं अपनी अपनी कुटिया बनाकर रहने लगे। वे दोनों पूजा-अर्चना और भगवान की सेवा में ही अपना सारा जीवन व्यतीत कर देना चाहते थे।

   एक बार बहुत तेज आंधी आई और सभी जगह तबाही ही तबाही हो गयी। इस दौरान दोंनो साधुओं की कुटिया आधी क्षतिग्रस्त हो गयी।

पहला साधु बहुत दुखी हुआ और इस दुर्घटना के लिए भगवान को कोसने लगा।

वह बोला, ” हे भगवान! मैं ने तेरी इतनी सेवा की। इतनी आराधना की। लेकिन तूने क्या किया? मुझे मेरी भक्ति का यह फल दिया? तेरी वजह से ही आज मेरी कुटिया क्षतिग्रस्त हो गयी। अब मैं कहाँ रहूँगा?”

वहीं दूसरा साधू अपनी क्षतिग्रस्त कुटिया को देखकर मुस्कुराया और भगवान का धन्यवाद ज्ञापित करने लगा।

वह बोला, ” धन्यवाद भगवान जी! सब जगह इतनी तबाही हो गई। पक्के मकान भी इस त्रासदी में ढह गए । लेकिन इस कठिन समय में भी  आपने मेरी कुटिया की रक्षा करी।

और मेरी आधी कुटिया को बचा लिया। मैं आपका बहुत आभारी हूँ । अब मैं इस कुटिया को सही कर के दुबारा से इसको पहले जैसा बनाने का प्रयास करूंगा।

आप अपना आशीर्वाद यूं ही बनाए रखना और मेरी हर कार्य मे मेरी सहायता करना।”

  दूसरे साधु की बात सुनकर पहले साधु को भी थोड़ी हिम्मत मिली। और उसने अपने विचार बदल दिए।


सीख | Moral Stories in Hindi : “हर प्रकार की घटनाओं के दो पहलू होते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उस घटना को किस प्रकार देखने का प्रयास करते हैं।”

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Moral Stories in Hindi with Pictures


” दरबारियों के तीन सवाल “


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     मुगल सल्तनत में जब बादशाह अकबर का राज्य था, तब उनके दरबार में उन्होंने नव-रत्न चुने थे, उनमें से ही एक बहुत बुद्धिमान, बादशाह अकबर के मित्र बीरबल भी थे।

उनके पास हर मुश्किल का समाधान होता था, और सभी प्रश्नों के उत्तर भी।

   अकबर के दरबारी बीरबल से बहुत ही जलते थे, उन्हें बीरबल की बुध्दिमानी बिल्कुल भी नही भाती थी। एक बार उन दरबरियों ने सोचा कि, क्यों न बीरबल की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली जाय।

बादशाह अकबर को भी बीरबल को चुनौतियां देना बहुत ही पसन्द था। वे भी हर बार बीरबल के सामने नई नई समस्याओं और चुनौतियों को रख देते थे।

और बीरबल जल्द ही उन सभी समस्याओं को सुलझा भी लेते थे।

इस बार दरबारियों ने मिलकर बीरबल के लिए तीन सवालों का चयन किया। और इस बार उन्हें लगा कि, ये संसार के सबसे अधिक कठिन प्रश्न हैं। जिनके जवाब तो बीरबल के पास होंगे ही नहीं।

और उन दरबारियों ने इस बार शर्त रखी के यदि बीरबल इन प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाए तो, बीरबल को दरबार से निकाल दिया जाएगा।

वे तीन सवाल थे।

● पूरे संसार में रात को कितने सितारे जगमगाते हैं?

●  धरती का केंद्र कहाँ है?

● पृथ्वी में कितनी महिलाएं औऱ कितने पुरूष हैं?

बीरबल को भरे दरबार में बुलाया गया और उनसे सबकी उपस्थिति में ये सभी प्रश्न पूछे गए।

  बीरबल प्रश्न सुनकर दरबार से बाहर चले गए और कुछ क्षणों में  वापस लौटे वे अपने साथ कुछ सामान भी लेकर आए। उनमे से भेड़ प्रमुख थी। अब उन्होंने पहले प्रश्न का उत्तर दिया।

पहला उत्तर : “महाराज! मैं जो यह भेड़ लेकर आया हूँ, इसके शरीर में जितने बाल हैं उतने ही सितारे हर रात को आसमान में जगमगाते हैं। आप सब चाहें तो इन्हें गिन सकते हैं।”

पहला प्रश्न समाप्त हुआ।

दूसरा उत्तर : बीरबल ने धरती पर कुछ लकीरे खींच दी और फिर उन लकीरों के बीचोबीच उसने एक सरिए को गाढ़ दिया। बीरबल ने सबसे कहा,

” महाराज और प्रिय दरबारियों ! मैंने जो यह लकीर गाढ़ रखा है, वही धरती का केंद्र है। आप सभी चाहें तो पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर उसे मापकर मुझे गलत साबित कर सकते हैं।”

इस प्रकार बीरबल ने इस प्रश्न का भी बहुत ही बुध्दिमानी से उत्तर दिया।

तीसरा उत्तर : बीरबल बोले, ” यह बता पाना बहुत मुश्किल है कि संसार में कितनी स्त्री व कितने पुरुष हैं।” सब दरबारी खुश हुए की बीरबल को इस प्रश्न का उत्तर नहीं आता।

अब बादशाह इसे दरबार से बाहर कर देंगे। लेकिन, फिर बीरबल बोले, ” संसार में सभी मनुष्य केवल स्त्री और पुरूष ही नहीं होते कुछ इनके बीच के भी होते हैं,

जैसा कि कुछ ऐसे लोग हमारे साथ यहां दरबार में भी हैं।”

इस उत्तर को सुनकर सभी दरबारियों के सर शर्म से झुक गए और उन्हें अपनी गलती समझ आ गयी।

राजा अकबर बीरबल की अक्लमंदी और दानिशमंदी से बहुत खुश हुए। उन्होंने बीरबल को शाबाशी के साथ-साथ बहुत से उपहार भी दिए।


सीख | Story in Hindi with Moral : ” अपने उत्तर पर दृढ़ सकल्पीत रहना चाहिए। और सभी समस्याओं को बुद्धिमानी से हल करना चाहिए।

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” चूहे की सोच “


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   एक वन के बीचोंबीच एक ऋषि की कुटिया थी। उस कुटिया में एक बड़े ही ज्ञानी और दैवी शक्तियों से सुसज्जित ऋषि रहते थे। वे प्रायः अपनी तपस्या में ही लीन रहते थे।

एक बार जंगल से एक चूहा डर के मारे भागकर वहां उस कुटिया में रहने आ गया। वह रोज ऋषि को पूजा पाठ और तपस्या करते हुए देखता था।

उस छोटे से चूहे को कुछ ही दिनों में ऋषि से काफी लगाव हो गया। वह ऋषि से प्रेम करने लगा। जब ऋषि अपनी तपस्या में लीन रहते तो उस समय वह भी प्रेमपूर्वक उनके पास बैठता और भजन सुना करता था।

  इतना ही नहीं वह शीघ्र ही पूजा अर्चना में भी अपना मन लगाने लगा। लेकिन वह सदा शेर व बिल्लियों से डरा-डरा रहता था।

  ऋषि को पहले ही पता लग गया था कि कोई चूहा उनकी कुटिया में आया हुआ है। लेकिन जब उन्होंने एक बार इसे ध्यान से देखा तो उन्हें समझ आया कि यह चूहा,

अन्य जानवरों के डर से कुछ सहमा से रहता है। ऋषि तो भिन्न प्रकार की दैवीय शक्तियों के स्वामी थे ही, उन्हे चूहे पर बहुत दया आई और उन्होंने चूहे को अपनी शक्तियों के प्रयोग से एक शेर बना दिया।

ताकि वह कुटिया में ही न रहकर पूरे जंगल में घूम सके और किसी भी अन्य जानवरों से न डरे।

  चूहा अब शेर बन चुका था। लेकिन चूहे ने अपनी काया को बदलने के साथ साथ अपनी सोच को भी बदल दिया। अब उसका भक्ति में मन नहीं लगता था।

वह दिन भर जंगल में ही घुमता रहता था। जब वहां के सभी जानवर उसे प्रणाम किया करते थे तो उसे बहुत ही प्रसन्नता होती थी। चूहे में अब घमण्ड उतपन्न हो गया।

  ऋषि तो अंतर्यामी थे, उन्हें पता लग गया कि चूहे में घमण्ड आ गया है। लेकिन फिर भी उन्होंने चूहे को समझाने का प्रयास किया।

 चूहा नहीं माना और सोचने लगा कि, केवल वही जानते हैं कि मैं शेर नहीं बल्कि चूहा हूँ। यदि इन्होंने यह बात सबको बता दी तो, मैं तो कहीं का नहीं रह जाऊंगा। कोई भी मेरी इज्जत नहीं करेगा।

उसने इस विषय के बारे में बहुत सोचा और उसे एक युक्ति सूझी। उसने सोचा कि, यदि मैं इन ऋषि को ही समाप्त कर दूँगा तो मेरी सारी समस्या ही सुलझ जाएगी। फिर मुझे किसी भी बात का भय नहीं रहेगा।

  वह ऋषि को मारने की मंशा से ऋषि के पास गुस्से से आया। ऋषि दूर से ही उसकी भावनाओं को समझ गए। उन्होंने अपने मंत्रोच्चार के द्वारा शेर बने चूहे को फिर से पहले की तरह चूहा बना दिया।


सीख | Hindi Stories with Moral : “समय और रूप बदल जाने पर भी अपनी प्रकृति को नही भूलना चाहिए।”

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Brainy Stories


” बुद्धिमान मेंढक “


 दो मेंढक थे, एक का नाम था टिल्लू और दूसरे का नाम था, टोलु। दोनों में बहुत अच्छी मित्रता थी। एक कहीं भी जाता, तो दूसरा उसके साथ उसकी परछाई की तरह चल पड़ता।

दोनों मुसीबत में एक दूसरे का साथ भी दिया करते थे।

     एक बार दोनो दोस्त मेंढक फुदकते फुदकते, एक घर के अंदर चले गए। घर के आंगन में एक हांडी रखी हुई थी, जिसमे दूध से दही जमाने के लिए रखा था। दोनों दोस्त फुदकते फुदकते उस हांडी में गिर गए।

दोनों ने बाहर आने की बहुत कोशिश की लेकिन वे बाहर नही आ पा रहे थे। दोनों दूध में तैर-तैर के थक चुके थे। लेकिन अब भी वे अपनी जान बचाने के लिए उस हांडी से बाहर आने के लिए लड़ रहे थे।

  तभी टोलु मेंढक बहुत ही थक गया, उस ने हार मान ली और थोड़ी ही देर में  डूब के मर गया।

  टिल्लू मेंढक अपने प्रिय दोस्त के गुजर जाने पर बहुत दुखी हुआ। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी वह दूध में तैरता रहा। पैरों की लगातार हलचल की वजह से, थोड़ी ही देर में दूध मथ गया।

और उससे मक्खन बाहर आने लगा। मक्खन हांडी की सतह तक आ गया था। टिल्लू मेंढक उस मक्खन के ऊपर ऊपर आ गया। और जैसे ही मक्खन हांडी की सतह तक पहुंचा, उसने छलांग लगा दी।

और बर्तन के बाहर आ गया।

लेकिन उसको अपने मित्र की मृत्यु का बहुत दुःख हुआ।


सीख | Moral Stories in Hindi : ” मुसीबत के समय धैर्य और बुद्धि से कम लेने पर ही, कार्य सफल होते हैं।”


” भाग्यशाली कछुए “


  एक बार एक बूढ़ी महिला, हर सोमवार को नदी के किनारे पूजा करने जाती थी, तो वह हर बार वहाँ के कछुओं के पीठ की सफाई कर देती थी।

वह वहां के सभी कछुओं की इसी प्रकार से सेवा किया करती थी।

  महिला के पूजा के ही समय एक बालक वहां से रोज गुजरता था। वह हर बार इस महिला को उन कछुओं के कवच की सफाई करते हुए देखता था। उसको थोड़ा अजीब लगता था।

 एक दिन अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए, वह उस महिला के पास गया। महिला अपना कार्य अर्थात कछुओं के कवच को साफ कर रही थी।  उस बालक ने महिला से प्रश्न किया,

” सुनिए आंटी जी, यह आप क्या कर रही हैं।”

महिला बोली, ” मैं इन कछुओं की पीठ साफ कर रही हूं। इनकी पीठ, नदी मे कचरा जमा होने की वजह से मैली हो जाती है। जिससे कि इनके शरीर मे गर्मी उतपन्न होना बंद हो जाती है।

जिससे कि इनको पानी में जाने मे परेशानी होती है। मैं इनकी पीठ को साफ कर के इनकी मदद करती हूं।”

तब बालक ने एक सामान्य प्रश्न पूछा,” संसार में इन जैसे ही अनेक कछुए हैं। केवल आपके ऐसा करने से कुछ नहीं होगा। यह संसार कभी नहीं बदलेगा। “

  इस पर महिला ने एक बहुत ही सुंदर जवाब दिया।

“बेटा भले ही दुनिया नहीं बदलेगी। पर इन कछुओं का जीवन जरूर बदल जाएगा। “

उस लड़के को उस दिन महिला से प्रेरणा मिली और वह भी उस दिन से महिला की मदद करने लगा।


सीख | Story in Hindi with Moral with Pictures : ” दुनिया को बदलने के लिए भी शुरुआत एक छोटी सी चीज की जाती है।”

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Moral Stories in Hindi


” बुद्धिचंद की बुद्धिमानी “


   एक गांव में बुद्धिचंद और रत्नमणि नाम के दो व्यक्ति रहते थे। दोनो एक दूसरे के पड़ोसी थे। एक बार बुद्धिचंद ने अपने बेटे के विवाह के लिए रत्नमणि से 1000 (एक हजार) रुपये उधार लिए ।

रत्नमणि एक लालची आदमी था। कुछ दिन बीत जाने के बाद, रत्नमणि बुद्धिचंद के घर गया और बुद्धिचंद से अपने पैसों के बारे में पूछा। बुद्धिचंद के पास पैसे नहीं थे।

बुद्धिचंद ने कहा, ” आप मुझे थोड़ी मोहलत और दे दीजिए ताकि मैं रकम जुटा सकूं। मैं आपको आपकी एक एक पाई लौटा दूँगा।”

रत्नमणि मानने को तैयार ही नहीं था। असल में उसकी नजर बुद्धिचंद की झोपड़ी पर थी वह उसको हथिया कर उस पर अपने लिए एक अस्तबल बनाना चाहता था। उसने बुद्धिचंद से कहा, ” तुम या तो मेरे सारे रुपये आज ही दो या फिर तुम्हारी झोपड़ी के कागजात मुझे दे दो।”

  बुद्धिचंद समझ गया कि रत्नमणि के क्या इरादे हैं। अब उसने समझदारी से कार्य करना शुरू किया, उसने कहा, ” ठीक है, मैं तुम्हें अपनी झोपड़ी देने के लिए तैयार हूं।

लेकिन हमें कागजात तैयार करने के लिए पहले कचहरी जाना पड़ेगा।”

रत्नमणि बोला , ” ठीक है चलते हैं कचहरी”

बुद्धिचंद बोला, “वो सब तो ठीक है लेकिन मेरे पास कचहरी जाने के लिए अच्छे कपड़े नहीं है।”

रत्नमणि बोला, ” कोई बात नहीं मैं तुम्हें अपने कपड़ों को देने के लिये तैयार हूँ।”

फिर बुद्धिचंद बोला,” मेरे पास अच्छे जूते भी नही हैं।”

रत्नमणि बोला ,” चलो तुम मेरे जूते भी ले लेना।”

बुद्धिचंद बोला, ” मेरे पास तो घोड़ा भी नहीं है कचहरी जाने के लिए।”

रत्नमणि बोला, ” अरे मेरे भाई ! तुम मेरे साथ मेरे घोड़े पर चलोगे।”

बुद्धिचंद ,रत्नमणि के साथ अच्छी तरह तैयार होकर घोड़े में बैठकर कचहरी चल दिया। दोनों कचहरी पहुंचे।

बुद्धिचंद एक बार न्यायाधीश के पास गया और उनके कान में जाकर कहा, “ये जो मेरे साथ आया है वह इंसान पागल हो गया है, वह मेरी सभी चीजों को अपनी बता रहा है। आप देखते जाइये”

तब बुद्धिचंद ,रत्नमणि को न्यायाधीश के सामने ले गया और उससे पूछने लगा,” ये जो मैंने कपड़े पहने हैं ,वह किसके हैं?”

रत्नमणि ने न्यायाधीश से कहा,” मेरे।”

फिर बुद्धिचंद ने कहा,” मैंने जो जूते पहने है वो किसके हैं?”

रत्नमणि ने कहा, “मेरे ही हैं।”

फिर बुद्धिचंद ने कहा,” हम जिस घोडे में आए  वो घोड़ा किसका है?”

रत्नमणि ने तीव्र स्वर में कहा, ” मेरा है और किसका!”

तभी न्यायालय में बैठे सब लोग रत्नमणि को पागल समझने लगे! और उसकी बातों को सुनकर ठहाके लगाकर हंसने लगे।

न्यायाधीश ने उसको पागल समझकर उसे वापस जाने को कहा। बुद्धिचंद ने अपना घर अपनी बुध्दिमानी से बचा लिया। दोनों घर आ गए।


सीख | Moral Stories in Hindi with Pictures : ” बुद्धि का प्रयोग, हर मुश्किल से हल दिला सकता है।”


” साहूकार का बटुआ “


   एक बार गांव में एक साहूकार आया।  वह किसी काम से गांव आया हुआ था। शायद वह किसी रिश्तेदार से मिलने आया हुआ था। वह एक किराने की दुकान से कुछ सामान ले रहा था।

उसने समान लिया और चल पड़ा। गलती से उसका बटुआ वहीं रास्ते पर गिर गया।

    वह बटुआ एक मोहन नामक छोटे लड़के को मिला। मोहन बहुत ही ईमानदार और सच्चा बच्चा था। उसने वह बटुआ सम्भाल कर रख लिया। ताकि जब कोई बटुए की पूछताछ के लिए आए,

तो वह उनको बटुआ दे सके।

  तभी वह साहूकार वापस अपना बटुआ ढूंढ़ते हुए वापस आया। उसने सबसे अपने बटुए के बारे में पूछताछ की, और कुछ देर तक बटुआ न मिलने के कारण उसने एलान किया ,

” यदि किसी को भी मेरा बटुआ मिल जाएगा, और वह मुझे देगा तो, उसको मैं 100 रुपयों का इनाम दूंगा।”

    सब उसका बटुआ ढूंढ़ने लगे। तभी किसी ने मोहन को इस बारे में बताया। वह बटुए के मालिक को बटुआ देने के लिए पहुंचा।

Intrusting Part of this moral kahaniya- मोहन ने साहूकार को बटुआ दे दिया। साहूकार के बटुए में पहले कुल 1000 रुपये थे। उसने बटुए को अच्छी तरह देखा, लेकिन अब साहूकार के मन में लालच उतपन्न ही गया।

उसने 100 रुपये न देने के चक्कर से मोहन से कहा, ” मैं अब तुम्हें क्या दूं, तुम तो अपना इनाम इसमें से पहले ही ले चुके हो। इसमें पहले 1100 रुपये थे, और अब 1000 ही हैं।” उसने झूठ बोला।

  मोहन को इनाम का कोई लालच नहीं था, उसने कहा,” साहब मैं ने आपके कोई रुपये नहीं लिए मैं ने तो बटुआ खोल के भी नहीं देखा और मुझे तो यह भी पता नही था,

कि आप ने बटुए के मिलने पर इनाम रखा है।”

   साहूकार बोला,” झूठ मत बोल बच्चे!!”

मोहन बोला, “ठीक है, अगर तुम नही मानते हो तो चलो सरपंच के पास।”

  आस पास के लोग, मोहन और साहूकार को लेकर सरपंच के पास चले गए।

सरपंच ने दोनों की बात सुनी।

साहूकार जब हड़बड़ा कर बोला, कि मेरे बटुए में 1100 रुपये थे, तब ही सरपंच को पता लग गया कि यह झूठ बोल रहा है।

सरपंच बोला, ” तुम्हारे बटुए मे 1100 रुपये थे न, इसका मतलब यह बटुआ तुम्हारा नहीं है।”

  सरपंच ने बटुआ और उसके सारे रुपये मोहन को दे दिए।

और सरपंच के फैसले के आगे साहूकार हाथ मलता रह गया।


सीख | Hindi Stories with Moral :- “कभी कभी झूठ बोलना स्वयं के लिए भारी पड़ जाता है।


Cunning Stories


” घोड़े की पूँछ में घंटी “


    एक मनसुख नाम का व्यक्ति था। उसके पास बहुत सी बकरियां और एक घोड़ा था। वह थोड़ा मंदबुद्धि का था। उसे कोई भी आसानी से मूर्ख बना देता था।

  एक बार उसके परिवार मे उसकी पत्नी की तबियत बहुत खराब हो गयी थी। उसके पास अपनी पत्नी के इलाज के रुपये नहीं था, अब उसके पास अपने मवेशियों को बेचने के अलावा कोई चारा नहीं था।

  वह अगले ही दिन अपने प्यारे घोड़े और अपनी एक बकरी को लेकर चल दिया, बाजार की ओर। वह खुद घोड़े के ऊपर बैठा हुआ था और बकरी को घोड़े की पूंछ से बांध दिया था।

मनसुख ने बकरी के गले में एक घण्टी लगा दी। ताकि घण्टी की आवाज से बकरी के साथ होने का पता लग सके।

Intrusting Part of this moral kahaniya- रास्ते में तीन ठग घूम रहे थे। उन्होंने मनसुख को उसकी बकरी औऱ घोड़े के साथ देख लिया। मनसुख अपनी ही धुन में सीधा चलता जा रहा था। तभी एक ठग वहां आया।

उसने पीछे बंधी बकरी की घण्टी उतार दी और घोड़े की पूंछ पर लगा दी और बकरी को घोड़े की पूंछ से छूटाकर वहां से भाग गया। घण्टी की आवाज आ ही रही थी तो मनसुख चलता गया।

तभी दूसरा ठग आ गया। वह मनसुख के सामने गया और उससे कहा, ” हा हा हा…! तुमने अपने घोड़े की पूंछ पर घण्टी क्यो लटकाई है?”

इतने में तीसरा ठग दौड़ता हुआ आया। वह मनसुख से बोला, ” भाई क्या वह तुम्हारी बकरी थी? उसे एक इंसान भागता हुआ ले जा रहा था।”

मनसुख ने मुड़ कर देखा तो बकरी नहीं थी, वास्तव मे घण्टी घोड़े की पूंछ पर लटकी हुई थी। वह डर गया। कहने लगा,” कोई मेरी बकरों वापस ला दो!

नही तो मेरी पत्नी मर जाएगी।” वह रोने लगा।

  तभी तीसरा वाला ठग बोला, ” रो मत भाई। मैं तुम्हारी मदद करूँगा। तुम मुझे उस चोर को पकड़ने के लिए अपना घोड़ा दे दो। मैं अभी के अभी तुम्हारी बकरी ले आऊंगा। “

हड़बड़ी में मनसुख उतरा घोड़े से और घोड़ा उस ठग को थमा दिया। एक ठग तो पहले ही बकरी लेकर रफ्फूचक्कर हो गया था ।

अब वह ठग भी अपने दोस्त के साथ घोड़े को लेकर भाग गए और वापस नहीं आए। मनसुख अपनी मन्दबुद्धि के कारण हाथ मलता रह गया।


सीख | Moral Stories in Hindi with Pictures : ” अनजाने लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।”


” अंगूर खट्टे हैं “


  एक बार एक भूखी लोमड़ी एक बाग से गुजर रहीं थी। बाग बहुत ही सुंदर औऱ हरा भरा था। उसमें बहुत प्रकार के फल औऱ सब्जियां लगी हुई थी।

   बाग के द्वार पर बहुत सारी बेलों ने एक बहुत ही सुंदर प्रवेश द्वार बनाया था। उनमें से एक बेल अंगूरों की भी थी। अंगूर की बेल में बहुत से अंगूर लटक रहे थे।

भूखी लोमड़ी को उन अंगूरों को देखकर पानी आ गया। वह अंगूरों को तोड़ने के लिए थोड़ा उचका लेकिन उसके मुह में अंगूर का एक दाना तक नहीं आया। रासीलेदार अंगूर , लोमड़ी की भूख को और अधिक बढ़ा रहे थे।

Intrusting Part of this good moral stories in hindi- लोमड़ी एक डंडा लेकर आई, लेकिन उसकी यह तरकीब भी असफल हो गयी। उसने बेलों को हिलाया लेकिन एक भी अंगूर का दाना नीचे नहीं गिरा।

इसी प्रकार से कई बार उसने प्रयास करके देख लिया। उसके हाथ अंगूर का एक भी दाना नहीं लगा। वह थक कर हार गई। और जाते जाते अपनी बेइज्जती न होने के डर से कहने लगी,

” कितने खट्टे अंगूर थे, पूरा मुँह का स्वाद बिगड़ गया।”

 इतना कहकर वह वहां से चले गए।


सीख | Story in Hindi with Moral :- “कभी भी हार नही माननी चाहिए।”


Moral Stories in Hindi with Pictures


“किसमे कितना है दम “


बहुत समय पुरानी बात है। सूर्य औऱ पवन अच्छे मित्र हुआ करते थे। वे दोनों 1 दूसरे की मदद किया करते थे। यदि धूप थोड़ी तेज हो जाती थी तो हवा बहने लगती थी, ताकि सन्तुलन बना रहे।

   एक बार वायु में घमण्ड सा आ गया कि मैं अधिक शक्तिशाली हूँ। जब वायु इस बारे में सूर्य से बात करने गया तो एक बार सूर्य औऱ वायु में झड़प हो गयी कि अधिक बलवान कौन है।

 सूर्य को इस बात पर कोई दिलचस्पी नही थी कि, वायु अपने आपको बलवान समझ रहा है, वह तो केवल यह सोचकर लड़ रहा था कि दोस्ती में घमंड नही होना चाहिए औऱ  वायु का घमण्ड तोड़ना भी तो जरूरी ही था।

   एक दिन वह दोनो आमने सामने आए। रास्ते से एक बुजुर्ग आदमी जा रहा था। हवा तेज थी उन्हें सर्दी लगी थी अतः उन्होंने एक चादर से अपने आपको ढका हुआ था।

  व्यक्ति को वायु ने देख लिया। औऱ उसे चादर ओढ़ा हुआ देख बहुत खुश हुआ। उसने मन मे सोचा मैं अपनी शक्ति से इसकी चादर पल भर में गिरा सकता हूँ। इसलिए यह सोचकर वह  बोल पड़ा।

Intrusting Part of this good moral stories in hindi- वायु ने सूरज से कहा, ” मुझे एक युक्ति सूझी है जिससे यह साबित हो जाएगा कि अधिक बलवान कौन है। तो सुनो! यह जो वृद्ध जा रहा है, इसने एक चादर ओढ़ी है।

यदि हम दोनों में से कोई भी यह चादर व्यक्ति से उतरवा दे तो वही सबसे बलवान कहलाएगा।”

  सूरज मुस्कुराया और उसकी बात मान ली।

अब पहले बारी आई पवन की, पवन ने अपनी शक्ति दिखाई और जोर जोर से बहने लगी। जिस कारण वातावरण में ठण्ड बढ़ गयी। बुजुर्ग व्यक्ति की चादर नहीं गिरी,

बल्कि वह चादर को गिरने से बचाकर ठण्ड से बचने के लिए चादर को और कस के ओढ़ने लगा। पवन ने और शक्ति लगाई। पवन जितनी शक्ति लगाता बुजुर्ग उतना ही कस के चादर को ओढ़ता जाता।

अब वायु का समय समाप्त हो गया। वह खुद की ही दी गई चुनौती को पूरा नहीं कर सका।

  अब आई सूर्य की बारी। वह मुस्कुराया और थोड़ी शक्ति का प्रयोग कर उसने अपनी गर्मी बढ़ा दी। वातावरण भी गर्म होने लगा। बुजुर्ग को पसीने आ रहे थे, गर्मी के कारण।

अतः उसने चादर ओढ़ने की जरूरत नही समझी और चादर को स्वयं ही खोल दिया।

   इस प्रकार सूर्य को अधिक कुछ परिश्रम भी नहीं करना पड़ा और वह बुजुर्ग की चादर निकालने में सफल रहा। और वायु की चुनौती में विजयी हुआ।

वायु का घमंड चूर-चूर हो गया। उसे अब अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सूर्य से माफी मांगी और वे दोनो फिर से मित्र बन गए।


सीख | Moral Stories in Hindi with Pictures : ” घमण्ड या फिर आवेश में आकर स्वयं को अधिक बलवान या बुद्धिमान और दूसरों को कम आंकने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए।”


” बाँट का खेल “


     दो मित्र थे, एक था फलवाला, जो फल बेचने का कार्य किया करता था और एक था व्यापारी। फलवाला थोड़ा गरीब जरुर था लेकिन वह बहुत ही ईमानदार इंसान था।

व्यापारी कंजूस औऱ एक नम्बर का ठग इंसान था। दोनों मित्र आपस में समय समय पर मिलते रहते थे।

  एक दिन व्यापारी अपने घर के लिए कुछ फल लेने के लिए, अपने मित्र के पास उसके ठेले में आया। उसके मित्र ने उसे फल तोलकर दिये। जब फलवाला फल तौल रहा था,

तो व्यापारी की नजर अपने दोस्त के बाँट में गयी। वह बहुत ही सुंदर थे। अब व्यापारी के मन मे लालच जाग गया और उसने फलवाले से कहा, ” मित्र मुझे कुछ समय के लिए तुम्हारे ये बाँट चाहिए।

क्या तुम यह मुझे दे सकते हो? “

  फलवाला साफ मन का था। उसने अपने मित्र को बिना कुछ सोचे समझे वो बाँट दे दिए।

Intrusting Part of this good moral stories in hindi- थोड़े दिन बीत गए। व्यापारी ने फलवाले के बाँट वापस नहीं किये। फलवाले का कार्य बाँट की वजह से रुक गया। वह एक दिन व्यापारी के पास पहुंचा जब उसने अपने बाँट व्यापारी से वापस मांगे,

तो, व्यापारी उन बांटों को फलवाले को वापस नहीं देना चाहता था, इसलिए वह  बोला, “मुझे माफ कर दो मित्र, मैं तुम्हारे बाँट की रक्षा नहीं कर सका। उनको चूहों ने खा लिया। ”

  फलवाले को बहुत ही गुस्सा आया। लेकिन उसने अपने गुस्से को नियंत्रित करा, और मन में कुछ सोचकर बोला, ” अच्छा कोई बात नहीं मित्र! लेकिन क्या तुम अपने पुत्र को मेरे साथ थोडे समय के लिए भेज दोगे!

क्योंकि मुझे बाजार से नए बाँट लाने होंगे, अतः मुझे एक सहायक की जरूरत है।”

  व्यापारी ने अंदर से अपने पुत्र को बुलाया और भेज दिया फलवाले के साथ।

 शाम तक जब वे दोनों वापस नहीं आए तो, व्यापारी को अपने पुत्र की चिंता होने लगी। वह फलवाले के घर अपने पुत्र को पूछने के लिए चल दिया। उसने फलवाले से पूछा, ” तुम तो आ गए! मेरा पुत्र कहाँ है? “

   फलवाला बोला, ” अरे! गजब हो गया मित्र, मैं तुम्हारे बेटे के साथ चल रहा था तो, कहीं से एक कबूतर आया और तुम्हारे बेटे को उड़ाकर ले गया।”

  व्यापारी को आश्चर्य हुआ वह बोला, ” इतने बड़े बच्चे को भला एक छोटा सा कबूतर कैसे उड़ा सकता है।?”

फलवाला बोला, ” ठीक वैसे ही जैसे चूहे बाँट खा सकते हैं।”

  व्यापारी अब सब समझ गया। उसने फलवाले से माफी मांगी और उसे उसके बाँट भी वापस कर दिए। फिर फलवाले ने भी उसके बेटे को अंदर से बुलाया और अपने दोस्त को सौंप दिया।

व्यापारी अपने बेटे के मिल जाने पर बहुत खुश हुआ।


सीख | Hindi Stories with Moral with Pictures : ” सीमा से अधिक चालाकी स्वयं पर ही उल्टी पड़ जाती है। “


Motivational Stories


” एकता में बल “


     एक किसान था उसके चार बेटे थे। बचपन में तो उनमें बड़ा ही प्रेम था परन्तु जैसे जैसे वे बडे हुए उनमें प्रेम, लगाव सब उनके बढ़ने के साथ कम होने लगा।

चारों भाई आपस में प्रेम से रहने की बजाय लड़ने झगड़ने लगे। किसान अपने बच्चों के ऐसे व्यवहार से बहुत दुखी था।

   एक बार किसान ने सोचा, कि यदि ये लोग ऐसे ही झगड़ा करते रहे तो, इन चारों का लोग फायदा उठाने लग जाएंगे, और ऐसे इनका विनाश निश्चित है।

भले ही ऐसा न हो, लेकिन क्या पता मैं कल रहूं या न रहूं। इनकी मदद करने कौन आएगा तब।

  यह सोच सोचकर वह बहुत ही परेशान हुआ। लेकिन फिर उसको अपने बच्चों को करीब लाने का उपाय सुझा। वह जल्दी से जाकर एक लकड़ी का गट्ठा उठा लाया।

    उसने अपने चारों पुत्रों बुलाया, उसके बेटे आ गए। और लकड़ियों को देख कर अचरज में पड़ गए।वे सब लकड़ियों को देखकर अपने मन में अलग-अलग विचार बनाने लगे। तभी उनके पिता ने उन चारों से कहा,

Intrusting Part of this hindi stories with moral- “इस गट्ठे में से सब एक एक लकड़ी अपने लिए निकाल लो।”

सभी ने एक एक लकड़ी निकाल ली। फिर किसान बोला, ” अब इस लकड़ी को मेरे सामने तोड़ के दिखाओ।”

  सब ने हाथ मे पकड़ी हुई लकड़ी को तोड़ दिया।

फिर किसान बोला, ” अब  इस बड़े गट्ठे को एकसाथ पकड़कर तोड़ के दिखाओ। ”

  उन चारों को अपने पिता की बात पर बड़ा ही आश्चर्य हो रहा था।

पहला और सबसे बड़ा पुत्र आया। उसने गट्ठे को उठाया उसने बहुत कोशिश की परन्तु वह उससे नहीं टूटा।

एक एक करके सभी लड़के उस गट्ठे को तोड़ने आए, सबके एक जैसे ही हाल थे, किसी से भी वह नही टूटा।

अब उनके पिता ने, उन्हें एक नैतिकता की बात समझाई और कहा, ” जिस प्रकार इस गट्ठे में एक साथ बंधी लकड़ियों को तुम सब नहीं तोड़ पाए, उन्हीं लकड़ियों के अलग अलग होने पर तुमने उन्हें तोड़ डाला।

उसी प्रकार तुम चारो का भी है, यदि तुम लोग अभी अलग अलग रहोगे तो तुमको कोई भी आसानी से अपने वश में कर, तुम्हारा अहित कर सकता है,

लेकिन यदि तुम एक साथ मिलजुलकर रहोगे तो तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। बच्चों! एकता में बहुत बल होता है ।”

   उन चारों भाइयों को अपने पिता की बात समझ आ गयी और उन्हें अपने व्यवहार पर बहुत दुःख हुआ। सबने एक दूसरे से और अपने पिता से माफी मांगी! चारों ने एक दूसरे को गले लगाया। और किसान भी बहूत खुश हुआ।


सीख | Moral Stories in Hindi : ” एकता ही लोगों को बांधे रखती है, जिसके होने से कोई भी किसी का अहित करने का नही सोच सकता।”


” फूलदानों की सुंदरता “


   बहुत समय पहले स्वर्णनपुर नामक राज्य हुआ करता था। वहां राजा विक्रमसिंह नामक राजा राज किया करता था। विक्रमसिंह बहुत ही महान और प्रतापी राजा था।

उसने बड़े बड़े दिग्गजों को युद्ध में परास्त करा था।

   एक बार भगवान विष्णु जी ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए । वे उसकी बहादुरी और पराक्रम से बहुत खुश थे। अतः उन्होंने विक्रमसिंह को एक वरदान मांगने को कहा। विक्रमसिंह बोले, ” नहीं भगवन!!

यह सब जो कुछ भी मेरा है, वह आपकी ही तो देन है। मैं अपने जीवन से संतुष्ट हूँ। कृपया आप मुझ पर अपना आशीर्वाद यूं ही बनाए रखें।”

भगवान विष्णु बहुत खुश हुए औऱ उसको आशीर्वाद दिया।उन्होंने उसको 20 सुंदर दिव्य फूलदान उपहार स्वरूप दिए औऱ कहा,” इनका सदुपयोग करना। ” इतना कहकर वे लुप्त हो गए।

  राजा ने अपने राज्य का गौरव मानकर उन फुलदानो को अपने महल में सजा दिया।

Intrusting Part of this hindi stories with moral- एक दिन एक गरीब नौकर उनके महल की सफाई कर रहा था, उसको इन दिव्य फूलदानों के बारे में नही पता था। अतः वह उनकी भी सफाई करने लगा। गलती से उससे एक फूलदान टूट गया।

यह खबर धीरे धीरे पूरे महल में फैल गयी। राजा ने उसको और सभी लोगों को अपनी सभा मे उपस्थित होने को कहा। सभा हुई।

राजा को उस नौकर पर बहुत गुस्सा आ रहा था, राजा विक्रमसिंह ने उसे दण्ड देने का ऐलान कर दिया। तभी पास में खड़ा एक बुद्धिमान व्यक्ति आगे आया औऱ वह बोला,” महाराज!

कृपया रुक जाइये मैं आपके इस फूलदान को फिर से पहले जैसा कर सकता हूँ। लेकिन उसके लिए मुझे अन्य फूलदान भी देखने होंगे।”

  राजा ने सभा में अन्य फूलदान भी मंगवा लिए।

अब उस बुद्धिमान व्यक्ति ने पहरेदार का लठ लिया और सभी फूलदानों को तोड़ डाला, और कहा, ” माफ करिए महाराज! लेकिन अब ये सब एक जैसे ही हो गए हैं।

और ये निर्जीव फूलदान किसी के प्राणों से अधिक तो अनमोल नहीं हैं ना!”

उसकी बात सुनकर राजा को आत्मग्लानि हुई कि वह क्या करने जा रहा था, फिर उसको विष्णु जी की भी बात याद आई, कि इनका सदुपयोग करना है,

अगर इन फूलदानों की वजह से किसी की मृत्यु हो जाती तो, विष्णु जी मुझे कभी क्षमा नहीं करते।

    राजा बुद्धिमान युवक की बात से बहुत प्रभावित हुआ और उसके बेबाक बोलने से प्रसन्न भी हुआ। उसने नौकर को क्षमा कर दिया और उस बुध्दिमान युवक को अपने महल में ही रख लिया।


सीख | Story in Hindi with Moral with Pictures : ” वस्तुओं का उचित उपयोग ही जीवन के कठिन मार्ग को सरल बनाता है। “

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Moral Story in Hindi


” नौकर और मुर्गे की बांग “


  एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी। उसने बहुत सारे मुर्गे अपने घर में पाल रखे थे। और उसके घर में बहुत सारे नौकर भी थे, वे थोड़े आलसी भी थे। वहीं मुर्गे समय के बहुत ही पाबंद थे।

वे सब मुर्गे रोज सुबह चार बजे बांग दिया करते थे, जिस कारण बुढ़िया सुबह चार बजे ही जग जाती थी। तो वह अपने नौकरों को भी जगा देती थी।

सुबह सुबह ही वह अपने नौकरों को काम पर लगा देती थी। और बहुत कार्य करवाती थी।

     बहुत दिनों तक ऐसा चलता रहा, नौकर सुबह उठने से बहुत परेशान हो गए। फिर कुछ दिनो बाद उन नौकरो ने मुर्गों से छुटकारा पाने के लिए कुछ उपाय सोचा।

उनको कैसे भी उन मुर्गों से छुटकारा पाना था। उन लोगों ने बुढ़िया के मुर्गों के खाने वाले दानों में जहर मिला दिया।

Intrusting Part of this moral stories in hindi- जहर वाला खाना खाने के कारण सारे मुर्गे मर गए।

   बुढ़िया को बहुत दुख हुआ। लेकिन नौकरो की सारी योजना विफल हो गयी। नौकरों ने सोचा था कि यदि वे सभी मुर्गों को मार डालेंगे तो बुढ़िया सुबह कैसे उठेगी।

इसलिए बे निश्चिंत थे, लेकिन हुआ इसका विपरीत।

   अब बुढ़िया पहले की अपेक्षा और जल्दी उठ जाती थी, रात में कभी भी नींद खुलती थी तो, वह सोचती थी कि, सुबह के चार बजे चुके है।

तो वह उसी समय अपने नौकरों को भी उठा देती थी और काम पर लगा देती थी। अब उसके नौकर और ज्यादा परेशान हो गए।


सीख | Hindi Stories with Moral : ” बिना सूझ-बूझ के किये गए कार्य कभी सफल नही होते ।”


” सोना का सपना “


   बहुत पहले एक गांव में सोना नाम की लड़की रहती थी। वह पूरे गांव में सबसे सुंदर थी। सब उससे कहते थे कि वह बहुत सुंदर है, उसे बहुत ही अच्छा लड़का मिलेगा।

सोना भी अब यही सोचती कि उसे बहुत अच्छा लड़का मिलेगा। वह गरीब थी और उसके परिवार में कोई भी नहीं था। इसलिए वह खुद ही काम करके रुपये कमाती थी।

वह प्रत्येक दिन कुछ न कूछ नई चीजें बाजार में बेचकर आती थी और जो भी उसे पैसे मिलते थे उससे वह अपना जीवन यापन करती थी।

   एक दिन वह कुछ फूल लेकर बाजार में बेचने जा रही थी। अब वह कुछ सोचने लगी। वह अपने मन में अपने भविष्य के बारे में सोच रही थी।

Intrusting Part of this moral stories in hindi- उसने सोचा, ” इन फूलों को बेचकर मैं कुछ अंडे ले लूँगी।

अंडों को मैं कुछ नहीं होने दूँगी। उन्हें मैं सहेज कर रखूंगी। फिर कूछ दिनों बाद उन अंडों से चूजे निकलेंगे चूजों से मुर्गियां बनेंगी । फिर मैं मुर्गियों का व्यापार करूंगी।

फिर मैं बहुत रुपये कमाऊंगी।

फिर मैं अपने लिए सुंदर सुंदर गहने, साड़ियां और सामान खरीदूंगी। उनको पहनकर मैं बहुत सुंदर लगूंगी। मुझे सुंदर-सुंदर लड़के देखने के लिए आएंगे। जो लड़का मुझे पसंद नहीं आएगा मैं उसे ना कह दूँगी।”

  बस इतना कहना और उसके सर हिलाने की ही देर थी। एक तांगेवाला वहां से बड़ी ही तेजी से गुजर रहा था। तांगेवाले से सोना की टक्कर हो गयी और सोना के फूल नीचे गिर गए।

उसके फूलों को तांगेवाला रौंदकर आगे बढ़ गया । सोना के फूलों के साथ उसके सारे सपने भी चूर चूर हो गए। खुली आँखों से दिन मे स्वप्न देखना उसे बहुत महंगा पड़ा।

सीख | Moral Stories in Hindi with Pictures :” अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिये, मेहनत करनी चाहिए। केवल उनका स्वप्न देखने से ही वे पूरी नहीं होती।”

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Conclusion


आज आपने पढ़ी Moral Stories in Hindi . उम्मीद करते है, आपको यह पसन्द आयी, और इनसे कुछ नया सीखने को मिला होगा।

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