11+ Special Panchatantra Stories in Hindi for Children | पंचतंत्र की कहानियां

मनोरंजन से भरी Short Panchatantra Stories in Hindi आशा हैं आज की यह पंचतंत्र की कहानियां आपको पसन्द आएंगी, और बहुत कुछ सींखने को भी मिलेगा।

प्रेरणादायक सीख देने वाली Panchtantra ki Kahaniyan आज हम आपके लिए लाए हैं, पंचतंत्र की कहानियां। तो चलिए शुरू करते हैं।


Panchatantra Stories in Hindi


Panchatantra Stories in Hindi


” मूर्ख सियार “


   बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक सियार रहता था। वह अपने आपको बहुत ही चलाक और होशियार समझता था।

एक बार वह खाने की तलाश में जंगल में इधर उधर भटक रहा था,

panchtantra ki kahaniyan

कि उसे एक मांस का टुकड़ा मिला। वह बहुत खुश हुआ कि, वह सोच रहा था,

कि आज उसकी बुध्दिमानी की वजह से उसे बिना किसी परिश्रम के भोजन मिल गया।

वह उस मांस के टुकड़े को मुह में दबाए वहां से चल दिया। उसे एक सुनसान जगह दिखी और वह उस सुनसान जगह में जाकर बैठ गया। आज वह बहुत खुश था।

उसको बिना किसी मेहनत के भोजन जो मिल गया था। अब वह बहुत देर तक अपने मांस के टुकड़े को निहारता गया, बहुत देर तक उसे देखते रहने के कारण सियार को नींद आ गयी।

जब वह जगा तो उस्की नजर अपने भोजन अर्थात उस मांस के टुकड़े पर पड़ी। फिर उसे याद आया कि अरे, मैं ने तो खुशी के मारे, अपना भोजन खाया ही नहीं ।

    अब वह उस मांस के टुकड़े को खाने लगा,

जैसे ही उसने अपने मुह में वह टुकड़ा डालना चाहा, वैसे ही उसे प्यास लगने लग गयी। अब आस पास तो पानी था नही,

तो वह चल दिया जलाशय की ओर, और अपना मांस का टुकड़ा अपने मुह में ही दबा लिया।

   थोड़ी देर चलने के बाद उसे एक तालाब मिला, तालाब में जैसे ही वह पानी पीने के लिए झुका, उसको अपनी ही परछाई, तालाब के पानी में दिखी।

उसने सोचा कि इसके अंदर कोई दूसरा सियार है,

जो मुझसे मेरा भोजन छीनना चाहता है। मैं इसे अपना भोजन कभी भी नहीं दूंगा। यह सोचकर वह जोर से आवाज निकालने लगा।

लेकिन जैसे ही उसने अपना मुह खोल, वैसे ही उसका भोजन पानी में गिर गया।

अब उसे बिना भोजन खाए ही वहां से जाना पड़ा।


■ सीख | Panchatantra Stories in Hindi : ” अपने आपको जरूरत से ज्यादा चालाक नहीं समझना चाहिए।”

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” चूहे और शेर की मित्रता “

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    एक बार एक घने जंगल मे एक पेड़ के नीचे शेर आराम कर रहा था, गर्मी के दिन थे। शेर पेड़ की छाया में आराम से सोया हुआ था। वहीं पास मे एक पेड़ और था, जिसके नीचे एक चूहे का बिल भी था।

    चूहा, बार बार अपने बिल से अंदर-बाहर कर रहा था।

जिस कारण शेर की नींद भंग हो रही थी, और वह अभी कच्ची नींद में ही था। चूहे को भनक ही नहीं थी,

कि उसके आस-पास कोई शेर भी है, नहीं तो वह ऐसा करने का दुस्साहस कभी नहीं करता, बल्कि वह तो चुपचाप अपने बिल में ही घुसा रहता।

   थोड़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा, अब खेल खेल में चूहा, दौड़ते दौड़ते शेर के पास जा पहुंचा और शेर को स्पर्श भी कर दिया। शेर के शरीर से स्पर्श होते ही अचानक चूहे की नजर बड़े शरीर वाले शेर पर पड़ी।

अब वह डर के मारे कांपने लगा। वह बहुत ही डर गया था। अब उसने यह सोच लिया कि अब तो मेरी मृत्यु निश्चित ही है। तभी शेर की भी आंख खुल गयी।

शेर को नींद आ रही थी तो वह अभी शिकार करने के लिए तैयार नहीं था,

हालांकि वह वहाँ पर बैठे वैठे उस छोटे से चूहे का सारा खेल खत्म कर सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

    चूहा बहुत ही छोटा और प्यारा सा था। चूहे को देखकर शेर के मन में दया आ गयी। शेर ने उस चूहे से कहा, ” अपनी सलामती चाहता है तो यहां से भाग जा नहीं तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा।”

  चूहे ने सोचा, शेर ने मुझे अभी तक नहीं खाया इसका मतलब है, यह मुझे अच्छा मान रहा है, मैं भी इससे दोस्ती कर लेता हूं ।

चूहा बोला, “क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे! “

शेर को चूहे की बात बहुत ही अजीब लगी। शेर ने कहा,

” भला शेर और चूहे की दोस्ती कभी हुई है, हा हा हा..” वह हंसने लगा।

 चूहे ने कहा, ” आज तुमने मुझे न खाकर मुझे जीवन दान दिया है। जरूरत पड़ने पर मैं तुम्हारे लिए जान भी सकता हूँ।” इतना कहकर वह अपने बिल में चला गया।

   बहुत दिन बीत गए।

  फिर एक दीन, शेर जोर जोर से दहाड़ने लगा, उसकी आवाज में दर्द था। पूरे जंगल में उसकी आवाज गूंज रही थी, चूहे ने भी शेर की आवाज सुनी।

चूहा समझ गया कि शेर किसी न किसी मुसीबत में है।मैं उसे अपना दोस्त मानता हूं। मुझे उसकी मदद  करनी चाहिए।

चूहा निकल पड़ा। जब वह शेर के पास पहुंचा तो, उसने देखा कि शेर तो एक शिकारी की जाल में फंसा हुआ है।

  शेर ने चूहे को देख लिया और उससे कहा,

” जाओ किसी और को बुला कर लाओ।”

  तब चूहे ने कहा, ” तुम्हे मैंने दोस्त माना है मैं ही तुम्हें बचाऊंगा। तूम बस देखते रहो।”

  चूहे ने झटपट अपने नुकीले दांतों की सहायता से जाल को कुतर दिया और शेर को आजाद कराया। अब शेर ने भी मान लिया, कि चूहा ही उसका अबसे अच्छा और सबसे प्यारा मित्र हैं।

अब दोनों खुशी, खुशी एकसाथ जंगल की सैर करने लगे।


■ सीख | Panchtantra ki Kahaniyan : ” किसी को भी उसके कद या मानसिकता से नहीं आंकना चाहिए। “

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Panchtantra ki Kahaniyan


” बुद्धिमान हंस “

पंचतंत्र की कहानियां

 


  बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक बहुत घना और विशाल पेड़ था, उस पेड़ पर बहुत से हंस, खुशी से रहा करते थे।

   उस पेड़ की शाखाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। और उन शखाओं से छोटी छोटी बेलें लिपटी हुई थी। एक दिन पेड़ के सबसे बुजुर्ग और बुध्दिमान हंस की नजर उन बेलों पर पड़ी।

वह हंस बहुत ही चतुर और दूरदर्शी था। उसने अपने साथियों को और युवा हंसों को चेतावनी दी, की यदि इन लताओं को अभी नहीं निपटाया गया तो,

ये बड़ी होकर हम सभी के लिए खतरा बन सकती है। हमे जल्द से जल्द इनको यहां से हटाना होगा।

  उस समय सबने वृद्ध हंस की बातों को अनसुना कर दिया।

तब बुद्धिमान हंस ने कहा, ” अभी तुम्हें आने वाले खतरे का अंदेशा नहीं है। तुम लोगों को नहीं पता कि तूम सब कितनी बड़ी गलती कर रहे हो।

बाद में कहीं तुम्हे अपनी मूर्खता पर पछताना न पड़े।

   बाकी के हंस यही सोच रहे थे कि इन की अब उम्र हो चली है, इन्हें खुद पता नहीं है कि ये कह क्या रहे हैं। हमें इनकी बातों को मन से नहीं लगाना चाहिए। और वृद्ध हंस की बात किसी ने भी नहीं मानी।

  दिन बीतते चले गए। अब वो लताएं और लम्बी हो गयी।

अब उन बेलों ने उस घने लंबे और विशाल पेड़ को ऐसे जकड़ लिया जजीसे कि वे उस पेड़ का ही भाग हों।

दरअसल अब वो बेलें पेड़ पर जाने के लिए सीढ़ियों का कार्य कर रहीं थी।

  एक दिन एक शिकारी जंगल में आया। वह शिकार की तलाश में था। उसकी खोज उस पेड़ पर जाकर खत्म हुई। उसने सोचा कि यह इतना विशाल वृक्ष है , यदि मैं अपना जाल इस मे बिछा दूं तो कोई न कोई अवश्य ही फंस जाएगा।

   उस समय सभी हंस अपने लिए खाना ढूंढने के लिए गए हुए थे। शिकारी ने वहां उन बेलों की मदद से पेड़ पर चढ़कर अपना जाल बिछा दिया और वहां से चला गया।

   सारे हंस जब वापस पेड़ पर लौटे तो,

वे सभी जाल में फंस गए। अब उन सब को समझ मे आया कि उस समय वृद्ध हंस की बात मान लेनी चाहिए थी।

अब सभी हंस मुसीबत की इस घड़ी में वृद्ध हंस से ही मदद मांगने लगे। वृद्ध हंस ने उन्हें समझाया, कि हमेशा दूरगामी परिणामो को देखकर ही हर कार्य करना चाहिए। अब  उन्होंने सब से कहा,

” जब कल शिकारी जाल को उठाने के लिए आएगा, और हमे नीचे रखेगा तब सब अपना अपना पूरा जोर लगाकर पूरी ताकत के साथ उड़ना, तभी हम इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं।

    अगले दिन शिकारी आया। उसने देखा कि बहुत से हंस जाल में फंसे हुए थे, वह बहुत खुश हुआ। और जाल को उतारकर नीचे रख दिया। जैसे ही शिकारी ने जाल नीचे रखा,

वैसे ही सारे हंस वृद्ध हंस के 1 इशारे पर एक साथ उड़ गए।

अब उन्हें जाल से छुटकारा मिल गया। शिकारी हाथ मलता रह गया।

सभी हंसो ने वृद्ध हंस का धन्यवाद दिया और अब सब नई जगह पर प्रेम और सौहार्द के साथ रहने लगे।


■ सीख | Panchatantra Stories in Hindi : ” बड़े-बुजुर्ग हमारी भलाई के लिए ही, हमे समझाते हैं। हमें उनकी बात समझकर उस पर अमल करना चाहिए। “

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” बलवान कौन “

Panchatantra Stories in Hindi (2)


पंचतंत्र की कहानियां- एक बार वायु और सूर्य में बहस छिड़ गई कि दोनों में से अधिक बलवान कौन है, वायु अपनी हार मानने को तैयार नहीं था।

और अपनी जिद पर अड़ा हुआ था कि अधिक बलवान तो मैं ही हूँ।

सूर्य शालीनता से उसकी बातों को सुन रहा था। सूर्य को अपने ऊपर थोड़ा सा भी घमंड नहीं था। अतः वह वायु के उकसाने पर भी चुप था।

   बहुत देर के बाद जब सूर्य वायु की बातों से तंग आ गया तब सूर्य ने कहा, ” चलो परीक्षण ही कर लेते हैं, की कौन सबसे बलवान है!” इतना कहकर सूर्य अब मौके की तलाश करने लगा।

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- तभी थोड़ी सी देर में एक व्यक्ति उन दोनों कोआता हुआ दिखा। ठंडी के दिन थे अतः इस व्यक्ति ने शॉल ओड़ा हुआ था।

सूर्य को एक युक्ति सूझी, सूर्य की युक्ति के अनुसार,

जो कोई भी इस व्यक्ति के शरीर से वह शॉल निकालने में सफल होगा, वही बलशाली कहलाएगा।

  वायु इस चुनौती को सुनकर खुश हुआ औऱ सोचने लगा, मैं तो एक पल में ही इस चुनौती को पूरा कर लूंगा और फिर सबसे शक्तिशाली कहलाऊँगा। वायु ने सूर्य की यह चुनौती स्वीकार कर ली।

अब पहले वायु की ही बारी आई, घनघोर अंधेरा छा गया, सूर्य ने अपनी रोशनी बादलों के पीछे छिपा ली, और पवन जोर जोर से बहने लगी। वायु के इतने तेज बहाव के कारण व्यक्ति की शॉल उसके कंधे से खिसकने लगी।

वायु खुश हुआ, लेकिन वायु जैसे जैसे बढ़ रही थी, ठंडी भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही थी। ठंडी के कारण व्यक्ति ने अपनी शॉल को और जकड़कर पहन लिया।

Panchtantra ki Kahaniyan Moral Part- जैसे जैसे वायु अपनी पवन को बढ़ता जाता, व्यक्ति अपने शॉल को भी उतनी ही तेजी से जकड़ लेता। वायु अब तक चुका था, उसने हार मान ली।

लेकिन उसने सूर्य से कहा,” अब तुम्हारी बारी है,

जब मैं ही नहीं कर पाया तो यह कैसे कर पाएगा,..हा हा हा”

   सूर्य अब बादलों के पीछे से हट गया। बादलों के पीछे से हटने के बाद,  सूर्य ने अपनी किरणों की गर्मी बड़ा दी। जिस कारण वातावरण में गर्मी बढ़ने लगी।

गर्मी के बाद जाने के कारण व्यक्ति ने अपनी शॉल निकाल दी  और वह वहां से बिना किसी ठण्ड के सिकुड़े, आराम से चला गया। सूर्य जीत गया।

और इस प्रतियोगिता से यह भी सिद्ध हो गया कि असल मे सबसे अधिक बलशाली कौन है।


■ सीख | Panchatantra Story in Hindi: ” अपनी क्षमता पर कभी भी घमण्ड नहीं करना चाहिए।

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Panchatantra Story in Hindi


” कौओं के काले होने का राज ”


एक प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीनकाल में कौए भी दूध की तरह ही सफेद हुआ करते थे। लेकिन एक कौए की गलती की वजह से, पूरी कौआ प्रजाति को घृणा और बदसूरती का सामना करना पड़ा।

      बहुत समय पहले की बात है, एक बार एक ऋषि को बहुत कठिन परिश्रम और तपस्या को करने के पश्चात अमृत का पता लगा। लेकिन अमृत को वे ऋषि स्वयं नहीं ला सकते थे।

उनके आश्रम में बहुत सारे छोटे छोटे पशु-पक्षी रहा करते थे, और उस समय कबूतरों के ही समान कौए भी सफेद रंग के होते थे। कौओं को जिम्मेदार भी माना जाता था।

अतः ऋषि ने भी एक कौए को अपने पास बुलाया और उससे पूरी बात की चर्चा की। कौए ने कहा, ” ठीक है गुरुदेव जैसा आप चाहें, मैं आपके लिए वह अमृत ला सकता हूँ, कृपया मुझे अपनी सेवा का अवसर दें।”

    ऋषिवर मान गए और कौए को उस निश्चित स्थान का पता दे दिया जहां से अमृत लाना था। लेकिन उन्होंने कौए को चेतावनी देकर कहा कि, गलती से भी अमृत को चखना मत।

  कौआ मान गया और उस पहाड़ी की ओर चल पड़ा जहाँ से अमृत को लाना था। बहुत दिनों तक उड़ते उड़ते औऱ कड़ी मेहनत के बाद कौए को वह जगह मिली,

और कौए ने एक कमंडल में अमृत को भरा और कौआ उस अमृत को लेकर वापस आ ही रहा था, लेकिन रास्ता बहुत लंबा था, बार बार उसका मन अमृत की ओर ही जा रहा था।

उसे याद था कि ऋषि ने उसे अमृत को पीने से मना किया था।

  लेकिन अब उसके सब्र का बांध टूट चुका था। उससे रुका नहीं गया और उसने थोड़ा सा अमृत चख लिया।

यह समझकर कि यदि मैं ऋषि को अपने अमृत पीने की बात नहीं बताऊंगा तो उन्हें नहीं पता लगेगा। बहुत समय के बाद कौआ कुटिया में वापस पहुंचा। कौए को दूर से देख कर ऋषि बहुत प्रसन्न हुए।

लेकिन जब कौए ने उनको अमृत से भरा हुआ कमंडल दिया तब अमृत को देखकर ही ऋषि समझ गए कि यह अमृत जूठा है।

   उनकी क्रोध की अब कोई सीमा नहीं रही, उन्होंने क्रोध में बोला, ” मूर्ख! मैंने तुझे चेताया था न, कि अमृत को पीना मत लेकिन तूने मेरी बात नहीं मानी और अमृत को अशुद्ध कर दिया।

अब ये मेरे किसी भी काम का नहीं रहा। मैं तुझे श्राप देता हूँ कि, अब तू कभी भी अपने ऊपर गर्व नहीं के सकेगा, तेरा रंग आज से काला हो जाएगा। तुझे कभी भी लोगों द्वारा सम्मान नहीं मिलेगा।

” इतना कहकर ऋषि में उसे कीचड़ में डूबा दिया और कीचड़ में डूबने की वजह से वह काला हो गया औरउसके साथ उसकी पूरी प्रजाति भी काली हो गयी।

और तब से ही कौए काले हो गए।


■ सीख | Panchatantra Stories in Hindi : ” किसी के द्वारा किये गए विश्वास को हमेशा अपनी जान से भी बढ़कर समझना चाहिए। “


” अंगूर खट्टे हैं “

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पंचतंत्र की कहानियां- एक बार जंगल में सभी जानवरों के बीच बहुत बड़ी सभा का आयोजन किया गया। रात्रि का समय था। सभा चल रही थी। सभी जानवर उस सभा में सम्मिलित हुए थे।

सभी जानवर जंगल के विकास और खाने की उपलब्धता के विषय में बात कर रहे थे। जंगल में बिना मां के बच्चों को खाने की बहुत समस्या थी, इसलिए सभी इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयत्न कर रहे थे।

      उसी सभा में एक लोमड़ी बैठी हुई थी। उसको बहुत जोरों की भूख लगी हुई थी। अब सभा में तो खाने का आयोजन किया ही नहीं गया था तो आखिर वह खाती तो क्या खाती!

   सभा खत्म हुई। लोमड़ी की जान में जान आई। लोमड़ी ने सोचा, अब अच्छा सा भोजन ढूंढ़ कर खाऊँगी। सुबह से मैंने कुछ खाया ही नहीं है,

और जब भोजन की तलाश में थी तो, इन मूर्ख लोगों ने सभा का आयोजन कर दिया। अब मैं अपने लिए आराम से भोजन ढूंढ सकती हूं।

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- वह अब भोजन के लिए जंगल में विचरण करने लगी। जंगल मे घूमते हुए वह एक बाग में घुस गई।

उस बाग में बेलों पर बहुत सारे, सुंदर सुंदर काले और हरे अंगूर लगे थे।

अंगूर बेलों से नीचे की ओर लटक रहे थे! लोमड़ी सोच रही थी, की ये अंगूर मेरी ही प्रतीक्षा कर रहे थे तभी तो मुझे ऐसे एकटक देखे ही जा रहे है।

अब लोमड़ी अंगूर खाने के लिए ऊपर उछली, उसके मुंह मे एक भी अंगूर नहीं आया। जब तक वह थक नही गयी, तब तक वह उछलती ही रही। लेकिन उसको अंगूर का एक भी दाना नसीब नहीं हुआ।

Stories of Panchatantra in Hindi Moral Part- तभी उसी रास्ते से सभा से लौटे हुए कुछ और जानवर भी अपने घर को जा रहे थे, उन्हें लोमड़ी दिख गयी। और उन्होंने यह भी देख लिया कि कैसे लोमड़ी भोजन के लिए उछल रही है, और उसके हाथ कुछ भी नहीं आ रहा।

   लोमड़ी थक गयी थी, जब उसने उन जानवरों को अपनी ओर देखते हुए देखा तो वह सम्भल गयी। और उनकी ओर देखकर मुस्कुरा कर कहने लगी, ” ही ही ही अंगूर तो बहुत खट्टे है। कौन खाएगा ऐसे अंगूर।”

  लोमड़ी वहां से चली गयी। औऱ जानवर भी उसकी इस बात पर हंसते हुए अपने घर की ओर चल दिये।


■ सीख | Panchatantra Stories in Hindi : ” उपेक्षा करने वालों के डर से कभी भी अपने प्रयास नही छोड़ने चाहिए । क्योंकि कभी कभी गुच्छे की आखरी चाबी ही ताला खोलने में कामयाब होती है।”


” आपसी फूट “


   बात उन दिनों की है, जब दो मुह- एक शरीर वाले पक्षियों का भी अस्तित्व होता था।

    एक भारुन नामक पक्षी था। उसके पास दो सर थे, लेकिन वे दोनों एक ही, धड़ से जुड़े हुए थे। दो सर होने के कारण उसके पास दो दिमाग भी थे।

जो कि सदैव विपरीत दिशा में ही विचार रखते थे। भारुन का एक दिमाग यदि पूर्व की ओर रहता था तो वहीं दूसरा दिमाग पश्चिम की ओर। उसके दोनों दिमागों में एकता नाम की चीज दूर दूर तक नहीं थी।

     भारुन का शरीर इस बात से बहुत परेशान रहता था, कि आखिर वह बात माने तो किसकी!

   एक दिन भारुन के एक सर को एक बहुत स्वादिष्ट फल दिखा वह अपने पूरे शरीर को इस फल के पास लेकर चल दिया, साथ साथ दूसरा सर भी उसके साथ चलने लगा।

उसने फल उठाया और उस पर अपनी चोंच मारी, जब उसने फल खाया तो उसे फल बहुत अधिक स्वादिष्ट लगा। उसने कहा, ” मैं ने अपने पूरे जीवन में इतना स्वादिष्ट फल नहीं खाया।

” ऐसा कहकर वह फल को मजे लेकर खाता ही जा रहा था। दूसरा सर उसे ही देख रहा था, दूसरे सर ने पहले सर से कहा, ” भाई! ला मुझे भी चखने दे, कितना स्वादिष्ट है यह फल! मैं देखना चाहता हूँ।”

   पहले सर ने मना कर दिया! और कहा, ” पेट तो हमारा एक ही है ना! तू खाए या मैं जाएगा तो पेट मे ही, एक ही बात है।”

   दूसरा सर बोला, ” भाई लेकिन मेरा मुह उस पेट में गए भोजन का स्वाद कैसे ले पाएगा।” इस पर पहले से ने कुछ भी नहीं कहा। और धीरे धीरे वह पूरा फल खा गया।

   दूसरे सर ने सोचा,  जिस प्रकार आज इसने मेरा तिरस्कार किया है, उसी प्रकार मैं भी इसको मजा चखाऊँगा। यह सोचकर अब वह मौके की तलाश में रहने लगा।

Stories of Panchatantra in Hindi Moral Part- एक दिन दूसरे सर को भी एक फल मिला, वह फल दिखने में बहुत ही सुंदर और विचित्र था। भारुन ने अभी तक वह फल नहीं चखा था। जब दूसरा सर अपनी दिशा में उस फल को लेने के लिए निकला,

तब पहले सर ने भी वह फल देख लिया! लेकिन यह क्या! वह फल तो जहरीला फल था। पहले सर ने यह बात दूसरे सर को बताई।

   दूसरा सर बोला, ” तू मुझे यह फल नहीं खाने देना चाहता है ना! तभी ऐसी बातें कर रहा है! मैं तो आज तेरी किसी भी बात को नहीं सुनूंगा।”

  यह कहकर उसने फल उठाया। पहले सर के लाख मन कर ने के बाद भी दूसरे सर ने वह फल खा लिया। फल सच में जहरीला था। कुछ ही देर में जहर पूरे शरीर में फैल गया और भारुन पक्षी ने तड़प तड़प कर अपनी जान दे दी।


■ सीख | Panchtantra ki Kahaniyan : ” साथ में रहने वालों के लिए आपसी सहमति और भाईचारा बहुत आवश्यक होता है। इसलिए सभी के साथ मिलजुल कर रहे।”


Story of Panchatantra in Hindi


” चींटी की मेहनत “


पंचतंत्र की कहानियां- बहुत समय पहले की बात है, एक चींटी और एक टिड्डे में गहरी मित्रता थी। दोनो एक दूसरे के घर आते जाते रहते थे।

   एक दिन टिड्डा अपने ही घर में खाना खाकर आराम से सोया हुआ था। गर्मी के दिन थे धूप भी बहुत तेज थी, ऐसे मे वह बाहर जाना ही नहीं चाहता था। तभी उसकी नजर बाहर जमीन पर पड़ी।

  उसने देखा कि बहुत सी चींटियां कुछ लेकर लाइन से कहीं जा रही हैं। वह बाहर आया तो उसने देखा कि चींटियों के पीठ पर कुछ खाना है, तब उसकी नजर अपनी दोस्त चींटी पर पड़ी।

उसकी पीठ पर भी खाना रखा हुआ था। वह अपनी दोस्त चींटी के पास गया औऱ बोला, ” दोस्त धूप तो इतनी तेज है, फिर भी आप लोग यह खाना लेकर जा रहे हो!

इतने खाने का करोगे क्या! यह तो आपके पर्याप्त भोजन से कही अधिक प्रतीत हो रहा है! मुझे तो बहुत गर्मी लग रही है, यहाँ धूप में खड़ा होना भी अत्यंत मुश्किल कार्य है।

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- तब चींटी बोली, ” हां हम यह बहुत सारा खाना ले जा रहे हैं, अपने घर!  अभी गर्मी के दिन हैं धूप भी खिल रही है,

लेकिन गर्मी के बाद बरसात के ही दिन आते हैं।

और बरसात मे खाना ढूंढना कितना कठिन कार्य है, इसलिए हम इतना भोजन इकट्ठा कर रहे हैं, जिससे कि हम पूरी बरसात भर आराम से भोजन खा सकें और हममें से कोई भी भूखा न मरे!

यही सोचकर हम भोजन इकट्ठा कर रहे हैं।”

   चींटी की इस बात पर टिड्डे को बहुत हंसी आई, चींटी समझ गयी कि यह टिड्डा मेरी मजाक बना रहा है , लेकिन वह बिना कुछ बोले ही वहां से अपने अन्य साथियों के साथ चली गयी।

   टिड्डा भी अपने घर चला गया , और चैन की नींद सो गया।

थोड़े ही दिनों बाद बरसात आ गई। शुरू के 1-2 हफ्ते इतनी बारिश हुई कि, कहीं भी आना, जाना मुश्किल हो गया। टिड्डे ने तो अपने लिए भोजन की व्यवस्था करी ही नहीं थी, उसके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था।

Stories of Panchatantra in Hindi Moral Part- अब उससे उसकी भूख सहन भी नहीं हो रही थी, उनके भूखे मरने के दिन आ गए।

    तब उसे याद आया कि उसकी दोस्त चींटी ने तो बहुत सारा खाना इकट्ठा किया हुआ है, मुझे उसके ही पास मदद के लिए जाना चाहिए।

   टिड्डा चींटी के घर पर पहुंच गया। चींटी अपने साथियों के साथ अपने घर पर आराम कर रही थी। टिड्डा चींटी के पास गया और उससे कहा, ” दोस्त ! दो हफ्ते हो गए हैं, और मैं ने कुछ भी  नहीं खाया है,

कृपया मेरी मदद कर दो, और मुझे खाने के लिए थोड़ा सा खाना दे दो! चींटी को बहुत गुस्सा आया वह बोली, “गर्मी के दिनों  तो तुम गाना गा कर चैन की नींद सोते थे,

उस समय ही हम धूप में कड़ी मेहनत कर अपने लिए खाना एकत्र करते थे, मुझे याद है, तुमने मेरी हंसी भी उड़ाई थी, लेकिन मैं ने तुम्हें कुछ भी नहीं कहा, देखो अब वक्त तुम्हारी हंसी उड़ा रहा है।

मैं तुम्हें अपना दोस्त समझकर खाने के लिए भी दे देती, लेकिन हमने केवल अपने खाने के लिए भोजन एकत्र किया हुआ है मुझे माफ़ करना।”

इतना कहकर चींटी ने टिड्डे के सामने दरवाजा बंद कर दिया। टिड्डे भी उतरा हुआ मुँह लेकर बरसात में ही खाने की तलाश में चल पड़ा।


■ सीख | Panchtantra ki Kahaniyan : ” आलस्य को त्याग कर अपने कर्म करने चाहिए, यही भविष्य मे हमारे सहायक होते हैं।”


पंचतंत्र की कहानियां


” जंगल की रानी? “


पंचतंत्र की कहानियां– बहुत घना जंगल था, उस जंगल एम बहुत से जानवर रहते थे, जो कि अपने अस्तित्व को लेकर रोज जंगल में निरन्तर प्रयासरत रहते थे।

एक दिन एक गौरैया कड़ी मेहनत के बाद एक रोटी का टुकड़ा कहीं से बहुत कठिन परिश्रम कर के ले कर आई। टुकड़ा बड़ा था, जिससे कि वह अपना गुजारा, तीन चार दिनों के लिए आराम से कर सकती थी।

    रोटी का टुकड़ा गौरैया के लिए बहुत ही बड़ा था, उसका भार वह सहन नहीं कर पा रही थी, रोटी के टुकड़े को थोड़ी देर तक उड़ने के बाद वह रुककर एक डाली में बैठ जाती थी,

जिससे कि उसकी थकावट दूर हो सके। उड़ते उड़ते वह अपने घोंसले के पेड़ के समीप वाले पेड़ पर पहुंच गई। वह बहुत थक चुकी थी इसलिए उस ही पेड़ पर बैठ गयी।

लेकिन रोटी का टुकड़ा उसने अपने मुँह, अपनी चोंच में ही दबाए रखा।

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- एक लोमड़ी जंगल मे खाने की ही तलाश में घूम रही थी। लोमड़ी को अपने लिए खाने को ढूंढने में बहुत ही आलस आ रहा था।

वह सोच रही थी कि आज तो मुझे कुछ भी मिल जाता तो मैं उसी से अपना पेट भर लेती,

लेकिन आज तो जंगल में खाने का एक दाना तक नहीं मिल रहा है। अब मैं क्या करूँ।

   तब यही सोचते हुए लोमड़ी उसी पेड़ के पास जा पहुंची जहां , पेड़ में चिड़िया रोटी का टुकड़ा लिए आराम कर रही थी। लोमड़ी की नजरें बहुत तेज थीं उसने, दूर से ही रोटी के टुकड़े को पहचान लिया,

उसके मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे। उसने सोचा आज मैं इसी रोटी के टुकड़े से अपनी भूख मिटाऊंगी, छोटा है लेकिन परिश्रम करने से तो यही उचित होगा।

   जब लोमड़ी पेड़ के पास पहुंची तो, उसने देखा कि रोटी का टुकड़ा तो एक चिड़िया ने अपनी मुँह की चोंच में दबा रखा है, उसने रोटी के टुकड़े को पाने के लिए, खड़े खड़े एक योजना बनाई।

Panchtantra ki Kahaniyan Moral Part- और गौरैया से बोली, ” नमस्ते गौरैया बहन! आज तो आप बहुत सुंदर लग रहीं हैं, मैं तो सोचती हूँ,

आपको ही इस जंगल की रानी होना चाहिए, आप सबकी कठिनाई में सहायता भी करती है,

और सुंदर भी हैं, आप मे रानी बनने के सभी गुण हैं। “

  तब गौरैया ने अपने मन मे सोचा, कह तो यह ठीक रही है, मैं सुंदर हूँ और मैं ही जंगल की रानी बनने के योग्य हूँ। यह सोचकर जैसे ही गौरैया ने अपना मुह हामी भरने के लिए खोला,

गौरैया के मुह से वह रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया। जब तक गौरैया अपने टुकड़े को उठती, लोमड़ी उस टुकड़े पे लपक पड़ी। लोमड़ी ने उस टुकड़े को झट से खा लिया और वहां से चली गयी।

गौरेया उसे देखती ही रह गयी।


■ सीख | Panchatantra Stories in Hindi : ” किसी की बातों पर तभी आना चाहिए, जब वह बात सत्य लगे! और उसका कोई अस्तित्व हो।”


” चूहा या शेर “


   बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल मे एक बहुत ही खूंखार शेर रहता था, शेर बहुत ही खतरनाक था। वह प्रतिदिन जंगल के कई जानवरों को खा जाता था।

2-3 जानवर रोज खा खा कर उसकी आदत भी अब यही बन गयी थी। जंगल के लोग इस बात से बहुत ही परेशान थे। यदि शेर यूं ही जानवरों को खाता रहेगा, तो जल्द ही सारे जानवर समाप्त हो जाएंगे,

और जंगल मे शेर के अलावा कोई भी नहीं बचेगा।

इस बात की चिंता अब सभी जानवरों को सताने लगी।

    जंगल में , इस प्रकार जानवर कम होने लग गए, जो जानवर जंगल मे बचे हुए थे, वे भी अब अपने अपने घरों से बाहर तभी निकलते थे, जब शेर जंगल मे न घूम रहा होता हो! शेर की तो आदत ही हो गयी थी,

हर रोज 2-3 शिकार खाने की। अब उसे खाने के लिए शिकार नहीं मिल रहा था, जिस कारण वह बेचैन हो गया। अब शेर ने अपनी भूख को मिटाने के लिए, गांव की ओर पलायन कर लिया।

गांव में जाकर उस शेर ने अब लोगों के पालतू जानवरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। जब लोगों को इस बारे में पता लगा तो, सभी लोग डर गए।

   एक दिन गांव के सरपंच ने सभा का  आयोजन किया। सभा मे सभी का एक ही मुद्दा था कि इस परेशानी से कैसे छुटकारा पाया जाए! सरपंच भी इस बारे में सोच रहा था,

तभी किसी ने सुझाव दिया कि क्यों न शेर को कैद कर लिया जाए। सभी इस सुझाव से सहमत हुए। लेकिन फिर एक समस्या थी कि कैद करने जएगा कौन!

तभी सरपंच ने एक उपाय सुझाया।

उपाय के अनुसार जिस जगंल के रास्ते से होकर शेर गांव में आता था, लोगों ने उस रास्ते पर एक बड़ा सा पिंजरा रख दिया। उसके अंदर कुछ मांस भी रखा जिसकी सहायता से शेर पिजरे के अंदर आ सके।

पिंजरे का मुँह खुला ही रखा गया।  और सब वहां से चले गए।

  उस ही दिन शाम को, जब शेर गांव की ओर जा रहा था तो उसे मांस की खुशबू पिजरे के अंदर तक खींच लाई। जैसे ही शेर ने पिंजरे के अंदर प्रवेश किया,

उसके भार के कारण झट से पिंजरे का दरवाजा अपने आप बन्द हो गया। शेर वहां कैद हो गया, और जोर जोर से चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर सभी जानवरों और गांववालों को यह पता चल गया कि वह अब कैद हो चुका है। सभी खुश हुए।


■ सीख | Panchtantra ki Kahaniyan : ” बुद्धिमानी से लिये गए सभी फैसले, सभी के लिए लाभदायक होते हैं।”


Panchatantra Stories in Hindi


” बुराई का बुरा अंत “


पंचतंत्र की कहानियां- बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक धनी सेठ के वहां तीन चोरों ने जमकर चोरी की। वहां से उन्हें बहुत सारा धन भी प्राप्त हुआ।

उन्होंने तीन बोरियों में वह धन-जेवर और बाकी अब सामान भर लिया।

सामान बहुत ज्यादा था, तीनों ने एक एक बोरी उठाई और चल पड़े।

वे सब अपने अपने घर को जा रहे थे, तब उन सभी को सामान बहुत देर तक पकड़ने के बाद और लम्बा रास्ता पैदल तय करने के बाद बहुत जोरों की भूख लग गयी। उनके पास खाने कक कोई सामान नही था,

आस पास घनघोर जंगल था, वहां से तो खाने पीने की कोई भी वस्तु नहीं ली जा सकती थी।

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- तीनों ने निश्चय किया कि, उनमे से एक चोर भोजन लेने के लिए पास के गांव जाएगा और बाकी बचे हुए दो चोर, लुटे गए सामान की रक्षा करेंगे।

तीनो चोरों की सहमति पर एक चोर पास के गांव में भोजन की व्यवस्था करने के लिए चल दिया। तीनो चोरों के मन में अब लुटे हुए धन को लेकर लालच उतपन्न हो गया।

बेईमान तो वे लोग पहले से थे, एक दूसरे का सामान चुराना तो आम बात थी, लेकिन आज सवाल था उस तीन बोरियों भरे धन का। जो चोर खाना लेने के लिए गया था, उसने गांव में जाकर खूब दबा कर भोजन किया।

और अपने साथियों के लिए भोजन बांध लिया। जब वह रस्ते से आ रहा था तब उसने अपने दोस्त चोरों के भोजन में जहर मिला दिया, ताकि दोनों चोर मर जाए और सारा खजाना उस का हो जाए।

   वही दूसरी ओर अन्य दोनों दोस्त भी उसको मारने की योजना बना रहे थे, ताकि सारा लुटा हुआ धन वो दोनो आपस मे बांट सकें।

Panchatantra Story in Hindi ​​Moral Part- चोर खाना लेकर अपने दोस्तों के पास पहुंचा। जैसे ही उसमे अपने दोस्तों को खाना दिया,

दोनो दोस्त उसके ऊपर टूट पड़े और चाकू उसके पेट मे गुबाकर उसकी हत्या कर दी।

    दोनो दोस्त उसकी लाश को ठिकाने लगा कर आ गए, अब उन्होंने सोचा कि एक बार अब निश्चिंत होकर भोजन कर लेते हैं, फिर धन और खजाने का बंटवारा करेंगे। यह सोचकर दोनों खाना खाने बैठे।

खाने में तो जहर था। दोनो खाना खाते ही मर गए।

तीनो दोस्त अब अपनी अपनी बुराई के शिकार खुद हो गए। और उन्हें इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।


■ सीख | Panchatantra Stories in Hindi :” बुराई का अंत हमेशा बुरा ही होता है।’


” अनोखी दौड़ “


पंचतंत्र की कहानियां- बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल मे एक कछुआ रहता था, सभी कछुए वैसे धीरे धीरे ही चलेते हैं, लेकिन वह कछुआ कु छ ज्यादा ही धीरे चला करता था।

कछुए के धीरे चलने के कारण सब उसकी बहुत ही मजाक बनाया करते थे, लेकिन कछुआ बहुत ही शालीन था, वह किसी की भी बात का बुरा नही मानता था और अपने रस्ते चलता रहता था।

    एक दीन कछुए की मुलाक़ात एक खरगोश से हुई। खरगोश मनमौजी था, वह हर कार्य को मजे के लिए ही करता था। खरगोश ने पहले तो कछुए से बहुत ही अच्छे से बात की,

लेकिन जब कछुआ जाने लगा तो उसकी चाल को देखकर वह खूब जोर जोर से हँसा, वह अपनी हंसी रोक ही नहीं पा रहा था, वह बोला, ” कोई इतने धीरे धीरे कैसे चल सकता है, हा हा हा….

  कछुए को बहुत बुरा लगा। कछुआ, बिना कुछ बोले वहां से जाने लगा।

तब खरगोश ने उसे रोका। यह तमाशा देखने के लिए अब कई जानवर इकट्ठा हो गए। खरगोश ने कछुए से कहा, ” क्यों न एक दौड़ हो जाए, क्या पता तुम जीत जाओ,..हा हा हा”

  अब कछुए की आन का सवाल था। उसने कहा, ”मुझे तुम्हारी चनौती मंजूर है। “

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- खरगोश बोला, ” अरे! मैं तो मजाक कर रहा था। तुम ने तो मेरी बात को दिल से ही लगा लिया। चलो अब तुम कहते हो तो, दौड़ तो होनी ही चाहिए।

ठीक है फिर अब कल को दौड़ का आयोजन होगा,

तुम समय से जंगल के अंडे जो मैदान है, वहां पर पहुंच जाना। सब वहां से चले गए।

   चिंटू चिड़िया ने यह खबर पुरे जंगल मे फैला, दी कि कल सुबह कछुए और खरगोश के बीच दौड़ होने वाली है, सब समय से पहुंच जाना।

पूरे जंगल को अब इस अनोखी दौड़ के बारे में पता चल गया।

अब वह दिन आ ही गया, जिस दिन दौड़ होने वाली थी। सभी इस दौड़ के लिए बहुत ही उत्साहित थे।

जंगल के सभी जानवर दौड़ का मजा लेने के लिए जंगल के बीच मे बने मैदान में पहुंच गए। खरगोश भी पहुंच गया। लेकिन अभी तक कछुए का कोई अता पता नहीं था।

बहुत देर हो चुकी थी, सबने सोचा कछुआ डर गया है, अब वह नहीं आएगा। लेकिन थोड़ी ही देर के बाद कछुआ वहां पहुंच गया।

   सब चकित रह गए। किसी ने भी कछुए से कोई सवाल नहीं किया। दोनो, खरगोश और कछुआ दौड़ के रास्ते पर आए। बन्दर ने उनको हरी झंडी दिखाई। दोंनो अपनी अपनी मन्जिल की ओर चल दिये।

कछुआ अपनी धीमी चाल से चल रहा था और खरगोश अपने खूब तेज दौड़ रहा था। खरगोश दौड़ते दौड़ते बहुत आगे पहुँच गया, जब उसने पीछे मुड़कर देखा तो, कछुआ उसे दूर दूर तक नहीं दिखाई दिया।

उसने सोचा, मैं इतनी मेहनत क्यो कर रहा हूँ मेरा जितना तो निश्चित ही है। मैं दौड़ दौड़कर बहुत थक गया हूँ अब मुझे थोड़ा आराम कर लेना चाहिए।

Panchatantra Story in Hindi ​​Moral Part- यह सोचकर वह पेड़ के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया। बैठे बैठे कब उसे नींद आ गयी उसे पता ही नहीं चला।

  वहीं दूसरी ओर,कछुआ अपनी धीमी चाल से चलते हुए, खरगोश के बराबर आ पहुंचा, खरगोश तो सोया हुआ था, उसे देखकर कछुआ मुस्कुराया। और अपनी उस ही चाल से आगे बढ़ता गया। कछुआ ने अपनी दौड़ पूरी कर ली।

   खरगोश की अब आंख खुली, वह थोड़ा घबराया। उसने आगे-पीछे देखा कहीं भी कछुआ नहीं था। उसने सोचा कछुआ अभी पीछे ही होगा। वह आराम आराम से चलकर आगे गया।

लेकिन उसने आगे जाकर देखा कि, कछुआ तो वहाँ पहले से ही मौजूद था। सभी जानवरों ने मिलकर उसे अपने कंधे में उठाया हुआ था। खरगोश समझ गया कि मैं हार गया हूँ।

उसका घमंड वहीं चकनाचूर हो गया। खरगोश ने अब कछुए से उसके द्वारा किये गए गलत बर्ताव के लिए माफ़ी मांगी।

कछुए ने भी उसे माफ कर दिया अब सभी कछुए की जीत का जश्न मनाने लगे।


■ सीख | Panchtantra ki Kahaniyan : ” धैर्य और लगन से किया गया हर कार्य सफल होता है। और कभी भी अपनी क्षमताओं के ऊपर घमण्ड नहीं करना चाहिए।”


Panchatantra Stories in Hindi for Children


” बन्दर का कलेजा “


पंचतंत्र की कहानियां- ​बहुत समय फके की बात है, ​एक नदी के किनारे जामुन का एक विशाल पेड था। उस पर बहुत सारे स्वादिष्ट जामुन लगे रहते थे।

यह जामुन साल भर यूं ही उस पेड़ पर लडजे रहते थे।

उसी पेड पर एक बदंर रहता था। वह जी भरकर फल खाता और कूदता-फांदता रहता। उस बंदर के जीवन में एक ही कमी थी कि उसका अपना कोई नहीं था।

मां-बाप के बारे में उसे कुछ याद नहीं था न उसके कोई भाई थाऔर न कोई बहन, जिनके साथ वह खेलता। उस क्षेत्र में कोई और बंदर भी नहीं था जिससे वह दोस्ती कर पाता।

एक दिन वह एक डाल पर बैठा नदी का नजारा देख रहा था कि उसे एक लंबा विशाल जीव उसी पेड की ओर तैरकर आता नजर आया। बंदर ने ऐसा जीव पहले कभी नहीं देखा था।

उसने उस आते हुए जीव से पूछा “अरे कौन हो तुम और इधर क्यो चले आ रहे हो?”

​पानी से आवाज ने उत्तर दिया “मैं एक मगरमच्छ हूं। भोजन की तलाश में घूमता-घूमता इधर आ गया हूं।”

​बंदर दिल का अच्छा था। उसने सोचा कि पेड पर इतने फल हैं, इस बेचारे को भी उनका स्वाद चखना चाहिए। उसने एक जामुन का गुच्छा तोडकर मगर की ओर फेंका।

मगर ने जामुन खाया बहुत रसीला और स्वादिष्ट वह फटाफट जामुन का पूरा गुच्छा खा गया और आशा से फिर बंदर की ओर देखने लगा।​बंदर ने मुस्कराकर और जामुन फेकें।

मगरमच्छ सारे फल खा गया और अंत में उसने डकार ली और उसका पेट भर चुका था उसने बन्दर से कहा “धन्यवाद, बंदर भाई। अब चलता हूं।” बंदर ने उसे दूसरे दिन भी आने का न्यौता दिया।

​मगर दूसरे दिन आया। बंदर ने उसे फिर जामुन खिलाए। इसी प्रकार बंदर और मगरमच्छ में दोस्ती होने लगी। मगर रोज आता दोनों जामुन खाते, और खूब बातें करते।

बंदर तो वैसे भी अकेला रहता था। उसे मगरमच्छ से दोस्ती करके बहुत प्रसन्नता हुई। उसका अकेलापन दूर हुआ। एक साथी मिला।

दो मिलकर मौज-मस्ती करते थे तो दिनों ही बहुत खुद रहते थे। एक दिन बातों-बातों में पता लगा कि मगर का घर नदी के दुसरी ओर है। जहां उसकी पत्नी भी रहती हैं।

यह जानते ही बंदर ने कहा, “मगर भाई, तुमने इतने दिन मुझे भाभीजी के बारे में नहीं बताया मैं अपनी भाभीजी के लिए रसीले जामुन देता। तुम अपना पेट भरते रहे और मेरी भाभी के लिए कभी जामुन लेकर नहीं गए। ​

Panchatantra Stories in Hindi Interesting Part- उस शाम बंदर ने मगर को जाते समय ढेर सारे जामुन चुन-चुनकर दिए। अपने घर पहुंचकर मगरमच्छ ने वह जामुन अपनी पत्नी मगरमच्छनी को दिए।

मगरमच्छ की पत्नी ने वह स्वाद भरे जामुन खाए और बहुत संतुष्ट हुई।

मगरमच्छ ने उसे अपने मित्र के बारे में बताया। पत्नी को विश्वास न हुआ। वह बोली “ बंदर की कभी किसी मगरमच्छ से दोस्ती हुई हैं?”

​​मगर ने यकीन दिलाया “यकीन करो भाग्यवान! वर्ना सोचो यह रसीले जामुन मुझे कहां से मिले? मैं तो पेड पर चढने से रहा।”

​​मगर मच्छ की पत्नी को यकीन करना पडा। उस दिन के बाद मगरमच्छ की पत्नी को भी रोज बंदर द्वारा भेजे फल खाने को मिलने लगे। उसे जामुन के फल खाने को मिलते यह तो ठीक था,

पर मगर का बंदर से दोस्ती के चक्कर में दिन भर दूर रहना उसे खलना लगा।

​मगरमच्छ की पत्नी​ स्वभाव से दुष्टा थी। एक दिन उसने सोचा, “जो बंदर इतने रसीले फल खाता हैं,उसका कलेजा कितना स्वादिष्ट होगा?” अब वह चालें सोचने लगी।

एक दिन मगरमच्छ शाम को घर आया तो उसने अपनी पत्नी को दर्द में पाया। पूछने पर उसने बताया “मुझे एक खतरनाक बीमारी हो गई है। वैद्यजी ने कहा हैं ,

कि यह केवल बंदर का कलेजा खाने से ही ठीक होगी। तुम अपने उस मित्र बंदर का कलेजा ला दो।”

​​पत्नी की बात सुनकर मगरमच्छ घबरा गया। उठा। बीवी-बच्चों के मोह ने उसकी अक्ल पर पर्दा डाल दिया। वह अपने दोस्त से विश्वासघात करने, उसकी जान लेने चल पडा।

​मगरमच्छ को सुबह-सुबह आते देखकर बंदर चकित हुआ। कारण पूछने पर मगरमच्छ बोला “बंदर भाई, तुम्हारी भाभी बहुत नाराज हैं। कह रही हैं कि देवरजी रोज मेरे लिए रसीले फल भेजते हैं,

पर कभी दर्शन नहीं दिए। सेवा का मौका नहीं दिया। आज तुम न आए तो देवर-भाभी का रिश्ता खत्म। तुम्हारी भाभी ने मुझे भी सुबह ही भगा दिया। अगर तुम्हें साथ न ले जा पाया तो वह मुझे भी घर में नहीं घुसने देगी।”

​बंदर खुश हुआ और चकराया भी “मगरमच्छ मैं आऊं कैसे? मित्र, तुम तो जानते हो कि मुझे तैरना नहीं आता।” मगर बोला “उसकी चिन्ता मत करो, मेरी पीठ पर बैठो। मैं ले चलूंगा न तुम्हें।”

​​बंदर मगर की पीठ पर बैठ गया।नदी में जाने पर ही मगर पानी के अंदर गोता लगाने लगा। बंदर चिल्लाया “यह क्या कर रहे हो? मैं डूब जाऊंगा।”

​​मगर हंसा “तुम्हें तो मरना है ही।”

​​उसकी बात सुनकर बंदर का माथा सनका, उसने पूछा “क्या मतलब?”

​मगर ने बंदर को कलेजे वाली सारी बात बता दी। बंदर हक्का-बक्का रह गया। उसे अपने मित्र से ऐसी बेइमानी की आशा नहीं थी।

Panchatantra Story in Hindi ​​Moral Part- बंदर चतुर था। तुरंत अपने आप को संभालकर बोला “तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?

मैं अपनी भाभी के लिए एक तो क्या सौ कलेजे दे दूं। पर बात यह हैं कि मैं अपना कलेजा पेड पर ही छोड आया हूं।

तुमने पहले ही सारी बात मुझे न बताकर बहुत गलती कर दी हैं। अब जल्दी से वापिस चलो ताकि हम पेड पर से कलेजा लेते चलें। देर हो गई तो भाभी मर जाएगी। फिर मैं अपने आपको कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।”

​अक्ल का कच्चा मगरमच्छ उसकी बात सच मानकर बंदर को लेकर वापस लौट चला। जैसे ही वे पेड के पास पहुंचे, बंदर झट से पेड की डाली पर चढ गया और बोला “मूर्ख, कभी कोई अपना कलेजा बाहर छोडता हैं?

अब जा और अपनी दुष्ट बीवी के साथ बैठकर रो।” ऐसा कहकर बंदर तो पेड की टहनियों में लुप्त हो गया और अक्ल का दुश्मन मगरमच्छ अपना माथा पीटता हुआ लौट गया।


​■ ​सीख | Panchatantra Stories in Hindi : “कठिनाई के समय बुध्दिमानी से कार्य करना चाहिए।


Conclusion | पंचतंत्र की कहानियां


आज आपने पढ़ी Panchatantra Stories in Hindi आशा है आपको आज की यह Panchtantra ki Kahaniyan पसन्द आयी। और इनसे कुछ नया सींखने को मिला।

पंचतंत्र की कहानियां ऐसी ही रोचक कहानियां पढ़ने के लिए बने रहिये के साथ।

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