9+ Spacial Princess Story in Hindi- Rajkumari ki Kahani | राजकुमारी की कहानियाँ

मनोरंजक और प्रेरक Princess Story in Hindi. आशा है आपको आज की यह कहानियां पसन्द आएंगी। तो चलिए शुरू करते हैं राजकुमारी की कहानियाँ-

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Princess Story in Hindi


” घमण्डी राजकुमारी “

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  बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य में एक राजा का शासन था। वे बहुत ही दयालु राजा थे। उनकी एक पुत्री थी। राजा के स्वभाव के विपरीत, राजकुमारी बहुत ही निर्दयी और घमण्डी थी,

उसे अपनी सुंदरता पर बहुत घमण्ड था। उसे अपने अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता था।

   राजा उसके व्यवहार से बहुत दुखी हो गए। अंत मे राजा ने उसके विवाह करवाने का निर्णय लिया। राजा ने बहुत अच्छे और प्रतिष्ठित राजकुमारों को बुलाया जिसमे से एक राजकुमार, विक्रम बहुत प्रतापी था।

राजकुमारी को बुलाया गया। राजकुमारी ने राजकुमारों को देखते ही उनमे नुक्स निकलना शुरू कर दिया और सभी राजकुमारों का अपमान भी किया।

राजा अपनी पुत्री के इस व्यवहार से बड़े दुखी हुए और सभी राजकुमारों से माफी मांगी।

  फिर उन्होंने घोषणा करी कि, कल सुबह जो भी युवक पहले हमारे राज्य में प्रवेश करेगा उस से ही राजकुमारी का विवाह होगा। अगले दिन सुबह एक भिखारी राजा के महल में आया।

राजा ने राजकुमारी को बुलवाया और उससे कहा कि तुम्हारा विवाह इसके साथ होगा राजकुमारी ने कहा मै इस भिखारी से विवाह नहीं करूंगी राजा ने राजकुमारी की बात नहीं मानी और उसका विवाह करा दिया।

विवाह करने के बाद वह उस भिखारी के साथ चली गयी। कुछ समय तक दोनों एक साथ ही रहे, राजकुमारी को घर का एक भी कार्य नही आता था ,

अतः भिखारी ने उसे राजकुमार विक्रम के घर सेविका बनाकर भेज दिया क्योंकि वहां एक सेविका की आवश्यकता थी और राजकुमार की शादी भी होने वाली थी।

   एक दिन काम करते करते राजकुमारी ने राजकुमार को देखा, तो राजकुमार वही थे जिनका उसने निरादर किया था। उसको अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ।

   राजा विक्रम ने उसे माफ कर दिया और बताया कि, वह जिस भिखारी के साथ इतने समय से रह रही है, वह राजकुमार विक्रम ही है।

दोनो का फिर से धूमधाम से विवाह कराया गया। अब दोनो खुशी खुशी रहने लगे।


सीख | Princess Story in Hindi : “कभी भी घमण्ड नहीं करना चाहिए।

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काली परी और राजकुमारी

राजकुमारी की कहानियाँ


  एक बार परी लोक में एक काली परी रहती थी। वह स्वभाव की बहुत ही अच्छी थी। वह हमेशा ही दूसरों की मदद करती थी। परन्तु उसका कोई मित्र नहीं था।

वह हमेशा इंसान बनना चाहती थी। उसने पक्षियों, तितलियों आदि को अपना मित्र बनाया था।

      एक बार एक तितली पृथ्वी पर भृमण के लिए आ रही थी तो उसने काली परी को भी बुलाया। दोनो रानी मां की आज्ञा लेकर धरती पर आ गए। वे दोनों एक नदी के किनारे रुके।

और वहाँ के  पेड़ और जल को देखने लगे। जब परी ने नदी के जल को छुआ तो उसे झटका लगा। वह अचंभित रह गयी। तभी एक राजकुमार वहां पहुंचा, उसने नदी से पानी पिया।

उसके बाद जब वह वापस जा रहा था तो उसकी नजर काली परी पर पड़ी। उसको वो बहुत अच्छी लगी तो वह परी के पास गया औऱ बोला, ” मैं आपकी कुछ सहायता कर सकता हूँ?”

New Princess Story in Hindi Moral Part-​  राजकुमार के कंधे से खून बह रहा था। इससे पहले कि परी कोई जवाब देती, उसने कंधा देख लिया।

उसने अपने जादू की छड़ी को घुमाया और राजकुमार का घाव ठीक कर दिया।

राजकुमार ने इसके लिए परी का धन्यवाद दिया। वह उससे विनती कर रहा था कि वह उसके महल में चले।

  तभी वहां एक बाबा आ गए वे अपनी दो बकरियों को ढूंढ रहे थे। जब परी को पता लगा कि बाबा परेशान हैं। उसने तुरंत अपने जादू की छड़ी घुमाई और जादू से उनकी बकरियों को वहां उपस्थित किया। बाबा बहुत खुश हुए।

बाबा ने अपनी दिव्यदृष्टि से पता लगाया कि वह एक परी है और परीलोक से आई है। बाबा ने उसे अपने कमंडल से कुछ जल निकाला और परी पर छिड़क कर उसे एक राजकुमारी में बदल दिया।

परी अब हमेशा के लिए इंसान बन गयी।

   राजकुमार को तो पहले से ही भा गयी थी। अतः उसने राजकुमारी से उसका विवाह के लिए हाथ मांग लिया। दोनो ने शादी कर ली और वे महल मे हंसी खुशी रहने लगे।


सीख | Rajkumari ki Kahani : दूसरों पर उपकार करने वालों के साथ हमेशा अच्छा ही होता है।”

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Rajkumari ki Kahani


नौ राजकुमारियां

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  बहुत समय पहले की बात है, विवेक नगर में एक राजा रहते थे। उनकी नौ पुत्रियां थी। राजा को भूलने की बीमारी थी, अतः जब राजकुमारियां पैदा हुईं तो,

राजा ने उनका नाम महीनों के नाम पर रख दिया। ताकि उसे नाम याद रहे।

    जनवरी, से लेकर सितंबर तक राजकुमारियां थी। अब धीरे धीरे सब बड़ी हुईं। एक दिन राजा ने अपनी सभी पुत्रियों को एक एक तोता उपहार में दिया। सभी राजकुमारियां बहुत खुश हुई।

राजा अपनी सबसे छोटी राजकुमारी, सितम्बर से बहुत प्रेम करते थे। जो बात अन्य राजकुमारियों को पसन्द नहीं थी। बदला लेने के लिए सभी राजकुमारियां सितम्बर के पास गई

और उससे कहा कि, तुम अपने तोते को अंदर ही रखना, यदि ये भाग गया तो, पिताजी तुमसे बहुत रुष्ठ होंगे और वे तुम्हें महल से भी निकाल देंगे।

  राजकुमारी डर गई। उसने अपने तोते को अंदर ही रखा और अपने खिड़की दरवाजे बंद कर दिए। राजकुमारी औऱ तोता दोनो ही धूप औऱ हवा न मिलने के कारण थोड़े ही दिनों में बहुत कमजोर हो गए।

तोते ने तो दाना भी खाना छोड़ दिया।

New Princess Story in Hindi Moral Part-​  जबकि अन्य राजकुमारियों के तोते हृष्ट पुष्ट थे। सितंबर के तोता एक दिन मर गया। उसे बहुत दुख हुआ। वह बीमार पड़ गयी।

उसकी सौतेली मां ने राजा को भड़काया और उससे बात करने के लिए भी मना कर दिया।

   अब राजकुमारी अकेली कमरे में पड़ी रहती। उसकी बहने भी उससे मिलने नहीं आती थी ।

   एक दिन एक चिड़िया वाला उस राज्य में आया। राजकुमारी ने उसे अपनी खिड़की से देख लिया। उन चिड़ियाओं को देखकर राजकुमारी को अपने तोते की याद आई। उससे रहा नही गया।

वह दौड़ती हुई नीचे गयी और एक चिड़िया रख ली। लेकिन पिताजी का उसे डर था, तो वह पहले अपने पिता के पास गई, चिड़िया रखने की अनुमति मांगने। राजकुमारी के पिता को उसकी हालत देखकर बहुत दुख हुआ।

और उसे हां कह दिया। वहीं एक राजकुमार भी उपस्थित था, जो कि राजा से बात कर रहा था। उसे राजकुमारी सितम्बर बहुत पसंद आई और उसने राजा के सामने राजकुमारी से विवाह का प्रस्ताव रखा।

राजा बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपने ही महल में दोनो का विवाह करा दिया। अब राजकुमारी , अपनी चिड़िया को लेकर राजकुमार के साथ उसके महल चले गई और खुशी से रहने लगी।


सीख | Prince and Princess story in Hindi : ” अच्छे लोगों के साथ हमेशा अच्छा ही होता है। लोग चाहे कितनी भी चालाकी क्यो न कर ले, वे अच्छे लोगों का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाते।”

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राजकुमारी और सात बौने

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   एक राज्य में एक राजकुमारी रहती थी, नाम था उसका स्नो व्हाइट। स्नो व्हाइट दूनीया की सबसे खूबसूरत लड़की थी। उसकी मां की मृत्यु उसके पैदा होने पर ही हो गयी थी।

उसकी देखभाल के लिए और उसको मां का प्यार देने के लिए राजा ने दूसरी शादी कर ली और स्नो व्हाइट के लिए एक सौतेली माँ ले आए।

     सौतेली मां एक जादूगरनी थी। उसके पास एक जादुई आईना भी था। जब वह अपने देश मे थी तो, उसका जादुई आईना उसकी बहुत तारीफ करता था,

और उसे उस देश की सबसे खूबसूरत महिला बताता था।

  लेकिन जब उसकी सौतेली माँ स्नो व्हाइट के घर पर आ गयी तो, जादुई आईना स्नो व्हाइट को सबसे सुंदर बताने लगा।

स्नो व्हाइट की सौतेली मां को बहुत गुस्सा आया। उसने अब राजकुमारी स्नो व्हाइट को मारने की योजना बनाई। उसने अपने एक सैनिक से स्नो व्हाइट को जंगल मे ले जा कर मारने के लिए कहा।

स्नो व्हाइट को नशीली चीज सूंघा दी गयी और वह बेहोश हो गयी।

  जंगल में जाकर, सैनिक को राजकुमारी के ऊपर दया आ गयी और उसने राजकुमारी को कुछ नहीं किया। उसने राजकुमारी को वैसे ही जंगल मे छोड़ दिया।

और महल जाकर सौतेली मां को बता दिया कि स्नो व्हाइट अब मर चुकी है। वह बहुत खुश हुई।

    इधर जब स्नो व्हाइट को होश आया तो उसने खुद को जंगल में पाया। वह बहुत डर गई। और इधर उधर घर जाने के लिए रास्ता ढूंढने लगी। तभी उसे एक छोटा सा घर दिखा।

उसके अंदर सात प्लेटो में स्वादिष्ट खाना लगा हुआ था। स्नो व्हाइट को भूख लग रही थी, वह अंदर गयी और उसने सभी मे से खाना खा लिया। खाना खाने के बाद उसे अब नींद आने लगी।

तो वह वहीं एक बिस्तर में सो गई।

  असल मे वह घर सात बौनो का था। शाम को वे जब घर पर आए तो उन्होंने अपना खाना खत्म पाया। फिर उनकी नजर स्नो व्हाइट पर पड़ी। उन्होंने उसे नहीं उठाया।

जब सुबह स्नो व्हाइट उठी तो उसने देखा कि सात छोटे छोटे आदमी उसके चारों ओर खड़े हैं। वह थोड़ा सहम गयी। तब बौनो ने उसे विश्वास दिलाया कि वह उबके साथ सुरक्षित है।

  स्नो व्हाइट को उनके साथ ठीक लगा और उनको अपनी सारी कहानी बता दी। बौनो ने उससे कहा कि अब वह यहीं रहेगी उनके साथ।

  दूसरी तरफ, जब उसकी सौतेली मां जादुई आईने से पूछती की सबसे सुंदर कौन है, तब आईना स्नो व्हाइट का ही नाम लेता था। अब उसे लगा कि हो न हो स्नो व्हाइट अभी भी जीवित है।

स्नो व्हाइट का पता लगाने के लिए वह जंगल मे गयी। बहुत ढूंढने के बाद उसे भी वह छोटा घर दिखाई दिया। जब उसने बाहर से झांक कर देखा तो उसे अंदर स्नो व्हाइट दिखी ।

जल्द से उसने अपना रूप बदला और एक बुढ़िया का रुप धारण किया। उसने अपने जादू से पास में पड़े सेबो में जहर भर दिया और स्नो व्हाइट को बाहर बुलाने लगी। स्नो व्हाइट बहुत सीधी थी।

उसने बूढ़ी महिला समझ कर उससे सारे सेब ले लिए और एक चख कर भी देखा।

जहरीले सेब का टुकड़ा मुह में रखते ही वह बेहोश हो गयी। सौतेली मां ने सोचा कि अब वह मर चुकी है। अतः वह वहाँ से चली गयी।

Rajkumari ki Kahani Moral Part-​  शाम को जब बौने घर आए तो उन्होंने स्नो व्हाइट को देखकर सोचा कि अब वह मर गयी है। वे सभी रोने लगे।

तभी वहां से एक राजकुमार गुजर रहा था। उसने भीड़ को देखा तो उससे रहा नहीं गया।

वह वहां गया तो उसने स्नो व्हाइट को देखा। वह उसको बहुत पसंद आई। स्नो व्हाइट को वह अपने साथ ले जाना चाहता था। लेकिन बौनो ने उसके मरने की खबर उसे बताई।

   वह बहुत दुखी हुए और वह भी रोने लगा। उसका हाथ राजकुमारी के पेट मे जोर से लगा, तो राजकुमारी को झटका लगा और उसके मुह से वह जहरीला सेब निकल गया। वह फिर से उठ गई।

सभी लोग बहुत खुश हुए। राजकुमार ने अपना परिचय देते हुए बौनो से स्नो व्हाइट का हाथ मांगा। बौनो ने दोनो की शादी कराई और उसको अपने घर से विदा कराया।


सीख | Princess Story in Hindi : ” सभी को स्नो व्हाइट की तरह दयालू होना चाहिए। लेकिन सभी बुराई का सामना करके उसे दूर हटाने की क्षमता भी होनी चाहिए।”

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Prince and Princess Story in Hindi


राजकुमारी और दानव


   एक बार एक राजा की तीन पुत्रियां थी। तीनो बहुत ही ही सुंदर थी। लेकिन जो सबसे छोटी राजकुमारी थी वह सुंदर के साथ दयालु भी थी।

   एक दिन उनके पिता कहीं जा रहे थे। तो उन्होंने अपनी पुत्रियों से पूछा, ” क्या क्या लाना है तुम्हारे लिए?”

   तब दोनों बड़ी राजकुमारियों ने गहने और अच्छे वस्त्र मांगे। छोटी राजकुमारी ने केवल एक गुलाब का फूल मांगा। राजा चल दिया। रस्ते में एक घनघोर तूफान आया। जिसमें उसके सारे सैनिक उससे बिछड़ गए।

राजा भी तूफान में फंस गया था। राजा का धन भी सेनापति के ही पास रह गया। अब राजा के पास कुछ भी नहीं था। तूफान भी थमने का नाम नहीं ले रहा था। राजा ने सोचा कहीं अच्छी जगह रुक कर तूफान के थमने का इंतजार करना चाहिए।

तब वह अच्छी जगह ढूंढने लगा।

   उसे एक बहुत पुराना किला दिखाई दिया और वह उसके अंदर चला गया। राजा ने वहां रखा भोजन खाया और एक कमरे में जाकर सो गया। अगला दिन हुआ और, वह अपने महल को जाने लगा।

तभी उसको बगीचे के गुलाब दिखाई दिए। उसको याद आया कि छोटी राजकुमारी ने गुलाब का फूल मांगा था, उसने बगीचे से एक गुलाब का फूल तोड़ लिया। जैसे ही उसने गुलाब तोड़ा,

एक दानव वहां प्रकट हो गया। दानव ने उसके गुलाब तोड़ने पर राजा को खूब डांटा। राजा बहुत डर गया और उसे अपनी छोटी बेटी के गुलाब मांगने के बारे में बताया।

   दानव बोला, ” अगर तुम अपनी जान की सलामती चाहते हो तो, उस लड़की को यहां भेजो जिसको यह गुलाब चाहिए।”

राजा वहां से अपने महल चला गया। राजा ने यह बात अपनी तीनो पुत्रियों को बताई। छोटी राजकुमारी वहां जाने के लिए राजी हो गयी। लेकिन उसके पिता उसको भेजना नही चाहते थे।

राजकुमारी बिन बताए ही जंगल के किले में चली गयी। उसको अपने पिता की बात याद थी। वह किले के अंदर गयी और खाना खाया। फिर वह सीधे बगीचे में चली गयी । उसने भी एक गुलाब तोड़ लिया।

तब दानव आया। उसने राजकुमारी के साथ नरम व्यवहार किया।

उसे उसका कमरा दिखाया। राजकुमारी को कमरा बहुत पसन्द आया। कमरा बिल्कुल राजकुमारी के हिसाब से सजा रखा था। राजकुमारी को यह देखकर विश्वास ही नही हुआ कि दानव ने यह सब उसके लिए किया है।

  अब राजकुमारी के लिए वह सब कुछ करता। और उसे किसी चीज की कुछ कमी नही होने देता। एक दिन राजकुमारी को अपने पिता की बहुत याद आई। उसने दानव से इस बारे में बात की।

दानव उससे बोला, ” मैं तुम्हें तुम्हारे पिता के पास भेज सकता हूँ लेकिन यदि तुम यहाँ सातवें दिन तक वापस नहीं आई तो मैं मर जाऊंगा।

” राजकुमारी ने उससे वादा किया कि मैं सातवें दिन लौट आऊंगी।

Rajkumari ki Kahani Moral Part-​  अब राजकुमारी अपने पिता के घर चली गयी। वहां उसको अपने पिता और बहनों से बहुत प्यार मिला।

जिससे वह दानव को भूल गयी। फिर जब सातवां दिन आया तब राजकुमारी को अचानक याद आया कि मुझे तो दानव के पास जाना है। वह घर मे बिन कुछ कहे जल्द से जंगल आ गयी।

उसने पूरे किले में दानव को ढूंढा लेकिन वह कहीं नहीं मिला। वह बगीचे में गयी तो उसने देखा कि दानव जमीन पर गिरा हुआ है। उसने सोचा दानव सच में मर गया है।

वह दानव के पास जाकर रोने लगी। राजकुमारी के आंख के आंसू जैसे ही दानव पर गिरे उसे होश आया और वह दानव से एक राजकुमार में बदल गया।

राजकुमारी को यह सब देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। तब राजकुमार ने बताया कि मुझ पर एक श्राप था जिस कारण मैं दानव बन गया था। आज तुमने मुझे नया जीवन दिया है। मैं तुम्हारा आभारी हूँ।

इसके बाद पूराना किला भी एक अच्छे और सुंदर महल में बदल गया। अंततः राजकुमार ने राजकुमारी के साथ राजा के आशीर्वाद से विवाह कर लिया और दोनो खुशी खुशी रहने लगे।


सीख | Rajkumari ki Kahani : ” नम्रता और दयालुता का भाव सदा ही बड़ी मुश्किलों का हल बन जाता है।”


राजकुमार और जलपरियों की राजकुमारी


राजकुमारी की कहानियाँ- एक राज्य का एक राजकुमार था। वह बहुत ही बुध्दिमान था। उसे शिकार का बहुत शौक था। एक दिन राजकुमार शिकार खेलने के लिए घने जंगल की ओर जा रहा था।

तब उसके पिता ने उसे कहा, ” राजकुमार आपको अभी उस जंगल के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। यदि आपको किसी वजह से वहीं रुकना पड़े तो किसी के माध्यम से हमे सूचित कर दीजिएगा।

नहीं तो हमे आपकी चिंता लगी रहेगी।”

​राजकुमार ने अपने पिता की बात मानी और जंगल को चल दिया।

​   दिन में ही उन्हें एक अच्छा सा शिकार दिख गया। राजकुमार ने हिरन का शिकार कर लिया। वह हिरन था। उसे सैनिकों को सौंप दिया।

लेकिन आगे चलकर, राजकुमार का घोड़ा अचानक दौड़ पड़ा जिस कारण, राजकुमार अपने सैनिकों के झुंड से अलग हो गए तथा अपना रास्ता भटक गए। रात हो चली और राजकुमार जंगल मे ही भटकते रहे।

तभी उन्हें जंगल से एक मधुर आवाज आई। मध्यरात्रि का समय था। राजकुमार आवाज की दिशा मे आगे बढे। वह एक तालाब के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक सुंदर सी लड़की मछलियों से बातें कर रही है।

राजकुमार उस लड़की के पास गए और उसको अपने बारे में बताया फिर उससे ,उसके बारे में पूछा।

Rajkumari ki Kahani Moral Part-​  लड़की बोली, ” मैं जलपरीयो की राजकुमारी हूँ। पहले मैं भी इन मछलियों की तरह ही एक मछली थी। एक दिन जब मैं पानी मे तैर रही थी,

तो मेरे सामने एक परी प्रकट हुई जो कि मुझे देखकर बहुत प्रसन्न हुई। उन्होंने खुश होकर मुझे यह रूप दिया।”

​   राजकुमार ने फिर अपना हाल बताया कि वह कैसे इस जंगल मे फंस गया। राजकुमार को भूख भी लगी थी।

जलपरी ने बिन बोले ही उसके सामने अपने जादू से खाने के कई व्यंजन रख दिये। राजकुमार ने उन्हें खाया और उसका पेट भर गया। फिर उन्होंने खूब सारी बातें की। सुबह होने ही वाली थी।

 राजकुमारी ने कहा, ” अब मुझे जाना होगा। तुम्हारे सैनिक भी तुम्हें ढूंढते हुए इधर आ रहे हैं। तुम यही उनका इंतजार करो।” इतना कहकर राजकुमारी पानी के अंदर चली गयी। कुछ ही देर में वहां सैनिक भी आ पहुंचे।

फिर राजकुमार अपने सैनिकों के साथ वापस महल चले गए। उन्होंने मन ही मन परी का धन्यवाद दिया।


सीख | Prince and Princess story in Hindi : ” दूसरों की सहायता करने के लिए हमेशा ततपर रहना चाहिए।


राजकुमारी की कहानियाँ


राजकुमारी का संघर्ष


    एक राज्य था। उसमें राजा और रानी रहते थे। उन दोनों की बारह संताने हुई। सभी लड़के थे। उन सबके अस्तित्व का राजा ने एक एक स्तम्भ बनाया हुआ था।

जब राजा की बारहवीं संतान हुई तो, जिस कमरे में स्तम्भ था उस मे एक भविष्य वाणी हुई कि यदि राजा कि अगली संतान लड़की हुई और उसने अपने भाइयों को छुआ तो सभी राजकुमार कौए बन जाएंगे।

राजा और रानी डर गए। राजकुमार भी बड़े होने लगे।

   राजकुमार अब धीरे धीरे बड़े होने लगे। राजा की तेरहवीं संतान होने वाली थी। और वह लड़की हुई। रानी बहुत डर गई। रानी ने सभी राजकुमारो को जंगल मे सुरक्षित पहुंचा दिया।

राजकुमार अब वहीं एक छोटी सी कुटिया बनाकर रहने लगे। अपनी बहन को उन्होंने देखा भी नही था।

 सब अब बड़े हो चुके थे। राजकुमारी तो बड़ी होकर बहुत सुंदर हो चुकी थी। राजकुमार भी जवान हो गए थे। राजकुमारी को अपने भाइयों के बारे में जानकारी नहीं थी।

एक दिन राजकुमारी को स्तम्भ वाला कमरा दिखाई दिया। राजकुमारी ने द्वार पर खड़े सैनिकों से इसका राज पूछा तो किसी ने भी नहीं बताया क्योंकि, रानी ने उन्हें मना किया था।

रानी उधर आ गयी। रानी ने राजकुमारी की उत्सुकता देखी और उसे उसके बारह भाइयों के बारे में बताया।

राजकुमारी अपने भाईयों के बारे में सुनकर बहुत खुश हुई और वह उस ही समय अपने भाईयों को ढूंढते हुए जंगल आ गयी। उसे वही छोटी सी कुटिया दिखी। वहां उसको अपने भाई मिले।

सभी भाई अपनी बहन से मिलकर बहुत खुश हुए। लेकिन जैसे ही उसने अपने भाईयों को छुआ वैसे ही उसके सभी भी कौआ बन गए।

इस बारे में उसकी माँ  ने उसे नहीं बताया क्योंकि इससे पहले ही राजकुमारी अपने भाईयों से मिलने के लिए आ गयी थी।

   तब वहां एक भविष्य वाणी और हुई, ” यही नियति थी। लेकिन यदि तुम बारह वर्षों तक मौन व्रत रखोगी तो तुम्हारे भाई तुम्हें वापस मिल सकते है।”

   राजकुमारी ने प्रण लिया कि वह मौन रहेगी। वह जाकर एक पेड़ में बैठ गयी।  कुछ दिनों बाद एक राजकुमार वहां आया। उसने राजकुमारी को देखा तो उसको वह भा गयी।

लेकिन उसने राजकुमारी से जब बात की तो उसे कोई उत्तर नही मिला। राजकुमार स्वंय जाकर राजकुमारी को ऊपर से उतार कर अपने महल ले गया। उसने उससे विवाह कर लिया।

Princess Story in Hindi Moral Part- बहुत समय बीत गया राजकुमारी ने उससे कोई भी बात नहीं की। राजकुमार भी अब अपने राज्य में व्यस्त हो गया। राजकुमार की माँ बहुत ही गन्दी थी।

उसने राजकुमार को राजकुमारी के बारे में भड़काना शुरू किया। राजकुमार भी अपनी मां की बातों में आ गया। उसने राजकुमारी की न बोलने वाली गलती के राजकुमारी को जलाने का आदेश सुनाया।

अगले दिन राज्य के बीचोंबीच एक हवन का आयोजन किया गया।

   और राजकुमारी को उसमें डालने के लिए लाया गया। जिस क्षण राजकुमारी को आग में डाला जा रहा था उस समय ही बारह वर्षों का आखरी क्षण भी पूरा हो गया।

  उस समय ही बारह कौए उधर आ गए। जैसे उन्होंने जमीन को छुआ वे सभी मनुष्य रूप में वापस आ गए। उनकी बहन की तपस्या सफल हुई। सभी भाइयों ने अपनी बहन को गले लगाया ।

राजकुमार यह सब देख रहा था। तभी उसने अपनी पत्नी को बोलते हुए देखा। उसे बहुत खुशी हुई। वह भी अपनी पत्नी के पास गया और उससे माफी मांगी।

  तब उसके भाइयों ने राजकुमार को सारी बात बताई। राजकुमार ने राजकुमारी के भाइयों से भी माफी मांगी। राजकुमारी के भाइयों ने दूबारा से राजकुमार और राजकुमारी की धूमधाम से शादी कराई।


सीख | Prince and Princess story in Hindi : ” कठिन रास्तों में चलकर, हमेशा लक्ष्य प्राप्त होता है।”


प्रिन्सेस सिंड्रेला


राजकुमारी की कहानियाँ- एक लड़की थी। जिसका नाम सिंड्रेला था।वह बहुत ही सुंदर थी। अपने पूरे नगर में वह सबसे सुंदर लडक़ी थी। उसकी दो सौतेली बहने थी। जो कि उससे घृणा करती थीं।

उसकी सौतेली मां भी उसे अच्छा नहीं मानती थी। उससे घर का सारा काम करवाती थी। फिर भी सिंड्रेला चुपचाप अपने ऊपर हुए अत्याचार सहन कर लेती थी।

    अब एक दिन यूं ही सिंड्रेला घर की सफाई कर रही थी तो, एक सैनिक सिंड्रेला के घर आया। और उनके घर आकर कहा, ” राजकुमार के जन्मदिन पर एक जलसा रखा गया है।

आप सभी आमंत्रित हैं। खास कर युवतियां, क्योंकि राजकुमार उनहीँ में से अपना वे चुनने वाले हैं।”

  यह सुनकर सिंड्रेला की सौतेली मां बहुत खुश हुई। लेकिन फिर इसके मन मे विचार आया कि यदि सिंड्रेला उस जलसे में गयी तो राजकुमार मेरी बेटियो को तो पसन्द ही नहीं करेंगे।

मुझे सिंड्रेला को पार्टी में जाने से रोकना होगा।

   तभी सिंड्रेला अपनी मां के पास आई और बोली, मां मुझे भी जलसे में जाना है। तब उसकी मां ने उसे बुरी तरह से डाँठ लगाई और उससे साफ मना कर दिया।

   पार्टी का दिन नजदीक आ रहा था। सिंड्रेला से उसकी माँ ने अपनी दोनो बेटियों के लिए अच्छे अच्छे वस्त्र बनवाए। लेकिन फिर भी सिंड्रेला से अपने साथ आने को नहीं कहा।

बल्कि उसने सिंड्रेला को इतना अधिक काम दे दिया कि सिंड्रेला कभी भी पार्टी में पहुंच ही न सके।

   अब पार्टी का दिन आ गया। सिंड्रेला बहुत उदास थी। शाम को सिंड्रेला की सौतेली माँ औऱ उसकी दोनो बहने जलसे के लिए रवाना हो गयी। सिंड्रेला अपनी स्वर्गवासी मां की तस्वीर के सामने बैठकर रोने लगी।

वह अपनी मां को याद किये जा रही थी और स्वयं को कोसे जा रही थी।

तभी अचानक एक उजाला सा हुआ और उसके सामने एक परी प्रकट हुई। परी ने सिंड्रेला से कहा, ” रोओ मत सिंड्रेला। मुझे तुम्हारी माँ ने ही भेजा है।

” सिंड्रेला खुश हुई  और उसको बताया कि मैं भी पार्टी में जाना चाहती हूं। लेकिन मेरे पास अच्छे कपड़े नही है।

   परी ने फिर उसे अपने जादू से एक सुंदर परी के समान ही तैयार कर दिया। उसकी ड्रेस बहुत सुंदर थी। उसके बाल बहुत ही अच्छे लग रहे थे। फिर परी ने उसे एक सुंदर जुती की जोड़ियां दी।

Hindi Princess story Intrusting Part- सिंड्रेला सुंदर तो थी ही, लेकिन परी ने उसे इस प्रकार तैयार किया कि अब जब वह तैयार हुई तो वह किसी राजकुमारी की तरह लग रही थी।

उसने परी का धन्यवाद दिया। लेकिन अब एक समस्या वाहन की भी थी।

परी ने पास में पड़े हुए कद्दूओं से एक रथ बना दिया। सिंड्रेला उस मे बैठ कर जाने लगी। लेकिन जाते वक्त परी ने सिंड्रेला को समझाया कि मेरा जादू रात के बारह बजे तक ही तुम पर रहेगा।

तो तुम उससे पहले ही पार्टी छोड़ कर आ जाना। सिंड्रेला ने हां कहा और वह चली गयी।

   पार्टी में जैसे ही वह पहुंची सब उसी को देखने लगे। सिंड्रेला की माँ और बहने भी उसे नहीं पहचान पाई। राजकुमार ने जैसे ही सिंड्रेला को देखा वह उस पर मोहित हो गया।

उसने सिंड्रेला को डांस करने के लिए आमंत्रित किया। दोनो डांस करने लगे। और सब उन दोनों को ही देख रहे थे। राजा को भी विश्वास हो गया कि राजकुमार अब इसी कन्या से विवाह करेगा।

राजकुमार ने सिंड्रेला से नाम तक नहीं पूछा और उसके साथ डांस करता रहा और उसको देखता रहा। सिंड्रेला भी राजकुमार को ही देख रही थी।

   इन सब मे समय का पता ही नहीं चला और मध्यरात्रि होने को आई। सिंड्रेल की नजर जैसे ही घड़ी में पड़ी वह सहम गई और राजकुमार का हाथ छोड़ कर भागने लगी। राजकुमार भी उसके पीछे दौड़ा।

हड़बड़ी में सिंड्रेला की चप्पल वहीं छूट गयी। और सिंड्रेला अपने घर वापस आ गयी।

Princess Story in Hindi Moral Part- सिंड्रेला के पार्टी में जाने की खबर उसकी मां को नहीं थी। अतः वे जब घर आए तो सिंड्रेला उन्हें घर पर उसी हालत में मिली जिस में वे उसको छोड़ कर गए थे।

  अगले दिन राजकुमार उस चप्पल को लिए नगर में उस लड़की की तलाश करने लगा जो कि पार्टी में आई थी। राजकुमार ने पूरा नगर छान मारा लेकिन किसी के पैर में भी वह जूती नहीं आई।

अब अंत मे सिंड्रेला का घर ही बचा हुआ था। उसकी दोनो बहनों ने जुती को पैर में डालने का प्रयास किया लेकिन उन्हें भी जूतियां नहीं आयी।

  सिंड्रेला छिप कर पीछे से यह सब देख रही थी। राजकुमार की नजर उस पर पड़ी उसने सिंड्रेला को भी बाहर बुलवाया और उसके पैर में अपने हाथों से जुती पहनाई। सिंड्रेला को वह जुती आ गयी।

फिर वह अंदर से दूसरी जुती भी लाई और उसे पहन लिया। जैसे ही सिंड्रेला ने दोनो जूतियां पहनी वह अपने उस ही रूप में आ गयी जैसे वह पार्टी में गयी थी। राजकुमार को उसकी राजकुमारी मिल गयी।

वह उसको अपने साथ महल ले गया और धूमधाम से उससे विवाह किया।


सीख | Princess Story in Hindi : ” अत्याचार का अंत एक न एक दिन अवश्य ही हो जाता है।”


Story of Princess in Hindi


सात परियाँ और राजकुमारी


राजकुमारी की कहानियाँ- बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक राजा रहते थे। उनकी शादी के कई वर्ष हो गए थे, लेकिन उनकी कोई सन्तान नहीं हुई। रानी बहुत ही परोपकारी थी।

एक दिन उसने एक बिल्ली की सहायता की जो कि मूर्छित हो गयी थी। वह बिल्ली कोई सामान्य बिल्ली नहीं बल्कि एक परी थी। वह इसकी सेवा से प्रसन्न हुई और उससे कुछ मांगने को कहा।

रानी ने उसे अपनी परेशानी बताई तो परी ने उसे आशीर्वाद दिया कि उसकी एक सुंदर कन्या होगी। रानी ने उसका धन्यवाद दिया और घर आ गयी।

उसके दो साल बाद राजा और रानी के घर एक परी जैसी लड़की ने जन्म लिया। सभी उसे आशीर्वाद देने के लिए आने वाले थे तो रानी ने मन ही मन परी से भी आग्रह किया कि वे भी उकी पुत्री को आशीर्वाद देने के लिए आएँ।

   परियों ने उसकी प्रार्थना सुनी और परीलोक की सात परियाँ छोटी बच्ची को आशीर्वाद देने के लिए आईं। परियों के पीछे एक बुरी परी भी आई। वह छिप गए।

   सभी ने राजकुमारी को आशीर्वाद दिया। फिर परियाँ भी आशीर्वाद देने के लिए आई।

जब छठी परी ने आशीर्वाद दिया तो वैसे ही बुरी परी भी सामने आ गयी। सब डर गए।

   उसने राजा से कहा, ” राजन अपने तो मुझे न्योता दिया ही नहीं। चलो मैं खुद ही आ गयी। अब मेरा भी कर्तव्य बनता है कि मैं परियों की तरह ही अपना कर्तव्य निभाऊं।”

Hindi Princess story Intrusting Part- उसने राजकुमारी को श्राप दिया कि वह उसके 18वें जन्मदिन पर एक कांटा चुभने की वजह से मर जयगी। रानी यह सुनकर रोने लगी।

इसके बाद बुरी परी वहां से चली गयी। सभी शोक में डूब गए।

  तब सातवीं परी आगे आई और उसने रानी से कहा, ” रानी आप चिंता मत करिए। मैं इस श्राप को काट तो नहीं सकती लेकिन हम सभी ने जो आशीर्वाद इसे दिए हैं वो भी व्यर्थ नहीं होंगे।

मैं इसे आशीर्वाद देती हुँ कि, यह अपने अठारहवें जन्मदिन पर कांटा चुभने से केवल बेहोश होगी और उस ही समय इस पूरे महल का समय थम जाएगा। सभी गहरी नींद में सो जाएगें

और जब एक नेकदिल राजकुमार इधर आएगा और राजकुमारी को छुएगा तो राजकुमारी पुनः उठेगी। रानी और राजा ने सभी परियों का धन्यवाद दिया । इसके बाद सभी परियाँ चली गईं।

  अब धीरे धीरे राजकुमारी बड़ी हुई और सुंदर भी। राजकुमारी का अठाहरवीं जन्मदिन की वर्षगांठ भी आ गयी। उसके जन्मदिन पर सातों परियाँ भी आईं। लेकिन वे छिप गईं।

  राजकुमारी बगीचे में सुंदर फूल चुन रही थी। तभी उसे एक सफेद और सुंदर खरगोश दिखाई दिया उसे वह बहुत पसंद आया। राजकुमारी उसके पीछे गयी।

खरगोश भाग गया। राजकुमारी भी उसके पीछे पीछे गयी और वे दोनो एक छोटी सी कुटिया के अंदर पहुंच गए।

  असल मे वह खरगोश बुरी परी ही थी। जो खरगोश का रूप धारण कर राजकुमारी को मारने के उद्देश्य से वहां आई थी।

   राजकुमारी जैसे ही उस खरगोश को छूने के लिए जा रही थी वैसे ही उसके पैर में घास में छिपा हुआ एक कांटा चुभ गया और वह बेहोश हो गयी।

  बुरी परी को परियों के आशीर्वाद के बारे में कुछ भी नहीं पता था। अतः उन्होंने सोचा कि अब राजकुमारी मर गयी है। वह बहुत ही खुश हुई और उसको वहीं छोड़ कर वहां से चली गयी।

परियां यह सब छिपकर देख रही थी। उन्होंने राजकुमारी को उस कुटिया से बाहर निकाला और बेहोश अवस्था मे ही उसे महल ले गयी।  परी के वरदान के अनुसार महल में भी सब गहरी नींद में सो चुके थे।

महल का समय भी थम गया था।

   अब परियों ने राजकुमारी को बहुत ही अच्छे से तैयार किया और उसे उसके कमरे में ही सुला दिया। और परियाँ वहां से चली गईं।

  बहुत समय बीत गया और वह महल इसी अवस्था मे पड़ा रहा। लगभग 4 सालों के बाद एक राजकुमार उस रास्ते से गुजर रहा था। वह बहुत ही अच्छा और नेकदिल भी था। वह महल के द्वार पर आकर रुक गया।

उसको महल के आस पास कोई चहलकदमी नहीं दिखी तो उसे आश्चर्य हुआ। वह अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए महल के अंदर गया। तो सब सोए हुए थे। उसे सबको देखकर बहुत ही आश्चर्य हुआ।

Princess Story in Hindi Moral Part- फिर उसने नीचे देखा तो उसके मार्ग में बहुत सुंदर फूल बिछे हुए थे। वह फूलों के रास्ते राजकुमारी के कक्ष तक पहुंच गया।

जब उसने राजकुमारी को देखा तो वह उसको देखता ही रह गया।

उसे वह बहुत पसंद आई और वह उसके पास जाकर बैठ गया।

  राजकुमार ने बोलकर उसे उठाने की कोशिश की लेकिन वह नही उठी। फिर राजकुमार ने उसे छू कर उठाने का प्रयास किया। जैसे ही राजकुमार ने उसे छुआ वह चेतना में आ गई।

उसने राजकुमार को देखा और उसको सारी बात बताई।

  बाहर सब भी उठ चुके थे। सभी ने राजकुमार का धन्यवाद दिया। अंत मे राजकुमारी ने राजकुमार को अपने वर के रूप में चुना तथा दोनो का विवाह हो गया।


सीख | Rajkumari ki Kahani : “बुराई चाहे कितनी भी प्रभावशाली क्यो न हो वह अधिक समय तक अस्तित्व में नहीं रहती।”


Conclusion | राजकुमारी की कहानियाँ


आज आपने पढ़ी Princess Story in Hindi. आशा है आपको Rajkumari ki Kahani यह पसंद आयी। ऐसी राजकुमारी की कहानियाँ ही अन्य रोचक कहानियां पढ़ने के लिए बने रहें के साथ.

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