New Rabbit and Tortoise Story in Hindi | Khargosh aur Kachua ki Kahani

यह है, Rabbit and Tortoise Story in Hindi. आशा करते हैं, आपको आज की हमारी यह Khargosh aur Kachua ki Kahani आपको पसंद आएगी, तब चलिये शुरू करते हैं।


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Rabbit and Tortoise Story in Hindi:


◆  कछुआ और खरगोश ◆


बहुत समय पहले की बात है, एक बार एक जंगल में  सभी जानवर  आपस में बैठकर कुछ चर्चा कर रहे थे।

चर्चा में जंगल के सभी जानवर सम्मिलित थे। सभी अपनी अपनी विशेषताओं के बारे में बता रहे थे।

खरगोश को अपने तेज दौड़ने पर बहुत घमण्ड था,

तो खरगोश अपनी जगह से उठा और घमंड से बोला ” मुझसे तेज धावक इस पूरे जंगल में कोई नहीं है ”

और हँसते हुए कहने लगा,” कछुऐ चाचा इस जंगल में सबसे धीरे चलते हैं।”

जंगल का राजा शेर वहीं बैठे यह सब सुन रहा था,

उसको समझ में आ गया कि इस में घमंड की भावना उतपन्न हो चुकी है,

और यह घमंड इसको एक न एक दिन पछताने पर मजबूर कर देगा। शेर ने एक घोषणा कर दी, “ठीक है यदि यही बात है,

तो कल सुबह जंगल में एक दौड़ का आयोजन किया जाएगा,

जिसमें खरगोश और कछुआ दोनों को भाग लेना होगा। जो इस दौड़ में जीत जाएगा वही विजेता असली तारीफ का हकदार होगा।”

सभी जानवर बहुत खुश होते हैं क्योंकि उनका भी इस खेल में मनोरंजन होने वाला था।

    दूसरा दिन उदित होता है। सभी जानवर इस रोमांचित खेल को देखने के लिए जंगल के खुले मैदान में इकट्ठा हो गए।

कछुआ और खरगोश मुख्य मार्ग पर आए जहां से दौड़ शुरू की जानी थी।

खरगोश बोला ,”क्यों कछुए चाचा डर तो नहीं लग रहा?” फिर वह हंसने लगा।

बन्दर ने दोनों को हरी झंडी दिखाई। दौड़ शुरू हो गयी। खरगोश अपनी तेज रफ्तार में दौड़ने लगता है,

और कछुआ धीरे धीरे आगे बढ़ता है।

खरगोश बहुत आगे पहुँच जाता है, और रुककर पीछे की ओर देखता है तो कछुआ उसे दूर दूर तक कैन दिखाई नहीं देता तो वह अपनी दौड़ने की रफ्तार कुछ कम कर देता है।

कुछ दूरी पर उसे एक पेड़ दिखाई देता है और वह उस पेड़ के नीचे बैठ जाता है खरगोश फिर अपने मन में सोचता है, ” अभी तो कछुए चाचा बहुत पीछे होंगे थोड़ी देर यहीं आराम कर लेता हूँ।”

वहीं बैठे बैठे उसे नींद आ जाती है और वह सो जाता है।

कुछ देर बाद वहां तक कछुआ भी पहुंच जाता है, वह बिना किसी आवाज़ किये धीरे-धीरे वहाँ से आगे बढ़ जाता है,

वह अपनी दौड़ पूरी कर लेता है।

खरगोश की आंख खुलती है और उसे समय का पता ही नहीं चलता। वह खड़े होकर इधर उधर देखता है,

उसको कछुआ कहीं भी नजर नहीं आता।

खरगोश सरपट तेज दौड़ लगते हुए उस जगह पर पहुंचता है और वहाँ पहुंचकर हैरान हो जाता है।

कछुआ वहाँ पहले से ही मौजूद था और वह दौड़ जीत चुका था।

खरगोश को बहुत शर्मिंदगी होती है और उसका घमण्ड चूर चूर हो जाता है।

शेर कछुए को विजयी घोषित करता है। सभी जानवर कछुए का अभिनन्दन करते हैं। सभी खुशी से नाचने गाने लगते हैं और जश्न मनाते हैं।

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“सीख | Tortoise and Rabbit Story in Hindi – “कभी भी घमण्ड नहीं करना चाहिए व दूसरों की काबिलियत पर शक नहीं करना चाहिए।”


Another Rabbit and Tortoise Story in Hindi:


◆ कितने कौए ..! ◆


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      एक घने जंगल में बहुत से जानवर रहते थे । वे सब हर हफ्ते में एक बार एक सभा का आयोजन करते थे, उस सभा में सभी जानवर भाग लेते थे,

और प्रश्नोत्तर, पहेलियाँ , कहानियां, चुटकुले  सबके सामने प्रस्तुत करते थे। भाग लेने वालों को उनका मनपसन्द भोजन, शिकार, फल मांस आदि दिया जाता था ।

सभी को बड़ा ही आनंद आता था और सभा खत्म होने के बाद सभी अगले हफ्ते की आनेववाली सभा का इंतजार किया करते थे।

एक दिन सभा के दौरान खरगोश ने सभी से एक प्रश्न पूछा ,-

हमारे जंगल में कितने कौए हैं ?”

सभी जानवर इस सवाल को सुनकर अचम्भे में पड़ गए। किसी को इस प्रश्न का उत्तर नहीं पता था। सभी एक दूसरे का मुंह तांक रहे थे।
इतने में एक कछुआ उठा और बोलने लगा,-

” मुझे इस प्रश्न का उत्तर मालूम है!” सभी को जानने की बहुत उत्सुकता हो रही थी इतने में खरगोश ने पूछा, ” क्या? आपको पता है! यदि पता है तो बताइए।”

कछुए ने बुद्धिमत्ता से जवाब दिया,

“इस जंगल में कुल पचास हजार पांच सौ बीस कौए हैं”

यह सुनकर सभी जानवर चौंक गए, आपस में फुसफुसाने लगे और सभी कछुए से प्रश्न करने लगे। –

असम्भव! तुमने कब गिने? तुम अपने मन से कुछ भी बोल रहे हो! यह गलत उत्तर है! आदि।

इतने में खरगोश ने बोला- “कैसे”?

Intrusting part of this tortoise and rabbit story in hindi- कछुए ने बड़ी ही नम्रता से जवाब दिया।

“इस जंगल मे कुछ पचास हजार पांच सौ बीस ही कौए हैं ,

यदि आप लोगो को यकीन न हो तो आप सभी गिन सकते हैं, लेकिन वे सब उड़ने वाले पक्षी हैं तो दूसरे जंगलों में भी जाते रहते हैं ,

उनके दूसरे जंगलों में भी कई रिश्तेदार होते हैं अतः अगर इस गिनती में से एक कौआ भी कम निकल जाए तो शायद वह अपने रिश्तेदारों से मिलने गया हो सकता है!

और यदि यहां कौओं की संख्या अधिक होगी तो उनके रिश्तेदार उनसे मिलने आए हो सकते हैं।”

इतना कहकर वह चुप हो गया। सभी जानवर उसकी बातें ध्यान से सुन रहे होते हैं। और सभी उसकी इस बुद्धिमत्ता भरे जवाब को सुनकर बहुत प्रभावित होते हैं।

सभी उसके इस जवाब को सुनकर उसके लिए ताली बजाते  हैं और अपने द्वारा लाया गया भोजन इनाम के तौर पर उसे भेंट कर देते हैं और सभा समाप्त हो जाती है।

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“सीख | Moral of Rabbit and Tortoise Story in Hindi – “कोई भी कसठिन प्रश्न हो या जीवन की कठिनाई उसका बुद्धिमत्ता से डटकर मुकाबला करना चाहिए। बुद्धि सर्वश्रेष्ठ होती है।”


Story like Rabbit and Tortoise Race Story:


  ◆ टिड्डा और चिंटी ◆


        एक बार की बात है, गर्मियों के दिन थे। खिली हुई धूप थी और मौसम साफ था, सभी जानवरों कीट-पतंगों के पास अनाज का भरपूर भंडार था।

ऐसे मौसम में एक टिड्डा अपना भोजन कर के एक पेड़ में बैठकर गाना गा रहा था। तभी उसकी नजर नीचे जमीन पर चल रही चींटियों पर पड़ी,

चींटियां लाइन से चल रही थी शायद वे कुछ खाने का सामान जुटा रहीं थी। उसने देखा कि चींटियां भरी दोपहर में इतना कठिन परिश्रम कर अपने लिए भोजन की व्यवस्था कर रही हैं।

उन चींटियों में से एक चिंटी उस टिड्डे की दोस्त थी।

उसने उस दोस्त चिंटी से पूछा कि तुम इतनी धूप में इतनी मेहनत क्यों कर रही हो। तब चिंटी ने जवाब दिया,

“गर्मियों के बाद बरसात के दिन आ जाएंगे, बरसात में खाना ढूंढना बहुत कठिन होता है हम सभी यह खाना बरसात के लिए जमा कर रहीं हैं। ताकि हम सबको बाद में कोई परेशानी न हो।”

यह सुनकर टिड्डा बहुत जोर से हंसने लगा। उसने चिंटी से कहा,

“तुम सभी पागल हो गयी हो। भला खाने के लिए कोई इतनी मेहनत करता है!”

उसकी बात को अनसुना कर वह चिंटी, अन्य चींटियों के साथ भोजन एकत्र करने चले गयी। टिड्डा भी गाना गाने में लग गया।

  गर्मियों के बाद बरसात का मौसम शुरू हुआ, आकाश में बादल छा गए। सभी जानवरों को खाना जुटाने में दिक्कत आने लगी।  अब टिड्डे को भोजन मिलना कठिन हो गया।

उसके सामने भूखे मरने की समस्या खड़ी हो गयी।

एक दिन टिड्डे ने अपनी दोस्त चींटी से जाकर मदद मांगी। उसने कहा, “दोस्त मैं कई दिनों से भूखा हूँ। और बरसात के चलते मैं खाना भी नहीं जूटा पा रहा। कृपया तुम मुझे कुछ खाने को दोगी?”

“गर्मी के दिनों तुम गाना गाकर आराम करते रहे, अभी भी कहीं जाकर नाचो! तुम्हे भोजन अपने आप मिल जाएगा।

तुम जैसे निकम्मे, आलसी को मैं अन्न का एक दाना भी नहीं दूँगी, चले जाओ यहाँ से।”

चींटी ने गुस्से से कहा,और उसके मुंह पर दरवाजा पटक कर बन्द कर दिया।

टिड्डा भी निराश होकर वहाँ से चले गया।


“Moral of like the Rabbit and the Tortoise Story in Hindi-”आज की थोड़ी सी बचत भविष्य में काम आती है,

मेहनत करने से कभी पीछे न हटें।”


Another Moral Story in Hindi:


◆ लोमड़ी की शरारत ◆


        एक बार की बात है, एक सारस और एक लोमड़ी के बीच गहरी मित्रता हो गयी। वे दोनों सभी चीजें एक साथ करते थे। बहुत सारा समय एक-दूसरे के साथ बिताते थे।

       एक दिन लोमड़ी ने सारस को अपने घर पर खाने पे बुलाया। सारस बहुत खुश हुआ और राजी हो गया। सारस उसके घर कुछ उपहार भी लेकर गया। लोमड़ी भी खुश थी, लेकिन उसके मन में शरारत सूझी।

लोमड़ी ने खाने में सूप बनाया था औऱ अपने और सारस के लिए सूप एक सपाट बर्तन में लेकर गयी। दोनो खाने बैठे।

     लोमड़ी ने सूप चाटना शुरू किया और अपने बनाए सूप की तारीफ करने लगी। –

“कितना मजेदार सुप है ना! कहते जाओ, मैं ने खास तुम्हारे लिए बनाया है” लोमड़ी ने कहा।

सारस की चोंच थोड़ी लम्बी थी, वह एक बूंद भी सूप नहीं चख पा रहा था। लोमड़ी ने सारा सूप खत्म कर दिया।

सारस को उसकी इस हरकत का बहुत बुरा लगा । वह मुह लटकाकर अपने घर चले आया।

अगली बार सारस ने लोमड़ी को अपने घर बुलाया और खाने में सूप ही बनाया। लेकिन सारस ने इस बार ठान रखा था कि मैं लोमड़ी को सबक सिखा कर ही रहूंगा। लोमड़ी आई।

सूप की मजेदार खुशबू आ रही थी, सारस ने सूप दो पतले मुह वाली सुराहियों में डाला और उसे लोमड़ी के सामने रख दिया।

सारस ने अपनी लम्बी चोंच के सहारे सुराही से सूप पीना शुरु किया। वह कहने लगा,-“वाह! कितना स्वादिष्ट सूप है, ऐसा सूप मैने जीवन भर नहीं पिया”

लोमड़ी उसका मुंह ताकती रह गयी। उसका मुह पतले मुँह वाली सुराही में नहीं घुस पा रहा था। उसको अपनी की हुई शरारत याद आ गयी, वो बहुत दुखी हुई औऱ सारस से माफी मांगने लगी।

सारस ने कहा,” मुझे भी माफ कर दो, मेरा इरादा तुम्हारे साथ गलत व्यवहार करने का नहीं था। मैं तुम्हें बताना चाहता था कि किसी के साथ जब बुरा करते हैं तो खुद को तो मज़ा आता है,

लेकिन दूसरों को बहुत ठेस पंहुचती है।

    दोनों ने एक दूसरे से माफी मांगी और सारस ने उसके लिए अलग चौड़े बर्तन में सूप निकाल कर दिया। दोनों ने सूप पिया।

अब उनके बीच की सभी गलतफमियाँ दूर हो गई। वे दोनों फिर से अच्छे दोस्त बन गए। दोनों पहले की तरह हँसी खुशी से साथ रहने लगे।


“सीख | Moral of like Rabbit and Tortoise story in Hindi -“जो जैसा करता है वो वैसा ही भरता है।”


◆ चोरों की कहानी ◆


एक बार तीन चोर एक पूरे गांव को लूटकर, अपना लुट का सामान अपने- अपने कंधों पर रखकर शहर की ओर जा रहे थे। वो जंगल में पहुंचे ही थे कि, रस्ते में उन्हें जोरों की भूख लग गयी।

उनमे से एक चोर खाना लेने के लिए आगे दुकान तक गया। बाकी दोनो चोर लूट के समान की रक्षा कर रहे थे।

     दुकान जाकर चोर ने खुद जमकर भोजन करा। और उसने सोचा अगर मैं किसी तरह उन दोनों को मार दूंगा तो सारा लूट का माल मेरा हो जयगा!

उसने दोनों चोरों के लिए खाना पैक करवाया। रस्ते में उसने खाने में जहर मिला दिया। ताकि उसके मित्र जहर वाला खाना खाकर मर जाए और सारा लूट का माल वो हड़प जाए।

वहीं दूसरी ओर उसके मित्र भी कुछ ऐसा ही सोच रहे थे उन दोनों ने  मिलकर उसको मारने की साजिश रची जिससे कि लूट का माल वो आपस में बांट सकें।

  उनका दोस्त जैसे ही खाना लेकर उनके सामने पहुंचा तो वो दोनों उस पर टूट पड़े और उसको मौत के घाट उतार दिया। अब दोनो चैन से बैठकर उस चोर द्वारा लाया गया खाना खाने लगे।

उन दोनो को खबर नही थी कि उस खाने में जहर मिला है।

दोनों ने खाना खाया और खाने के तुरंत बाद ही वो दोनों भी मर गए। सारा माल वहीं जंगल में ही रह गया।

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“सीख | Moral of Like this Story of Rabbit and Tortoise in Hindi -” जैसा बीज बोओगे वैसी ही फसल काटोगे।

” कभी बबुल के पेड़ पर आम नहीं उगा करते।”


Stories Conclusion :


आज आपने जानी Rabbit and Tortoise Story in Hindi .आशा करते हैं, आपको हमारी यह कहानी Khargosh aur Kachua ki Kahani पसन्द आयी।

ऐसी और वैलनेस कहानियां जानने के लिए बने रहिये, sarkaariexam.com के साथ।

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thanks..।

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