7 Best Short Tenali Raman Stories in Hindi with Moral | Tenali ke Kisse

यह हैं , 7 Best Moral Short Tenali Raman Stories in Hindi. जिन्हें पढ़ आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। और यह कहानियां एंटेरटेनिंग भी हैं,

जिससे आप इन स्टोरीज को पढ़ते समय बिलकुल बोर भी नही होंगे।


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Tenali Raman Stories in Hindi 1-2 :


” अंतिम इच्छा “


राजा कृष्ण देव राय बहुत परेशान था, और उनकी परेशानी का कारण थीं, उनकी माँ।

उनकी माँ 82 वर्ष की उम्र में अत्यधिक बीमार रहने लगी थी। राजा कृष्ण देवराय ने यह सोच लिया था कि उनकी माँ अब अधिक दिन तक जीवन नहीं जियेगी।


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राजा की माँ को भी अब लगने लगा था, कि वह अब ज्यादा जीवन नही जियेगी। राजा कृष्णदेवराय की माता को आम खाने का बहुत पुराना शौक था।

एक दीन राजा की माता ने राजा को अपने कक्ष में बुलाया, और कहा- बेटा कृष्णदेव अब मेरे पास अधिक समय नही है। पता नहीं में कब भगवान को प्यारी हो जाऊं।

मेरी एक आखरी इच्छा है, क्या तुम उसे पूरा करोगे?

राजा नम्र स्वभाव से बोले- जी माँ बोलिये।

बेटा मेरी आखरी इच्छा यह है, की में अपनी पसंदीदा चीज आमों का ब्रह्मडो मैदान करवाना चाहती हूं। राजा ने कहा- जी माँ अवश्य। में प्रबन्ध करवाता हूँ।

परन्तु राजा के प्रबंध करने से पहले ही उनकी माता का देहांत हो गया। अब राजा बहुत परेशान हो गए।

राजा ने ब्राह्मणों को राज दरबार बुलवाया। और सारी बात बताई। यह सुनकर ब्राह्मण बोले- यह तो बहुत बुरा हुआ महाराज। अब आपकी माता की आत्मा भटकते रहेगी।

राजा बहुत परेशान हो गए। राजा ने ब्राह्मणों से इसका उपाय पूछा, तब एक ब्राह्मण बोला, महाराज आपकी माता की आत्मा को शांति दिलाने के लिए,

आपको उनकी पुण्यतिथि पर ब्राह्मणों को सोने के आम चढ़ाने होंगे। तभी उनकी आत्मा को शांति मिल पाएगी।

राजा ने ऐसा ही किया, और ब्राह्मणों को पूर्णतिथि के दिन सोने के आम भेट किये।

तेनाली राम को यह बात पता चली। और उन्हें यह भी आभास हुआ , कि ब्राह्मणों ने राजा के सीधेपन का फायदा उठाया है।

तब तेनाली ने एक योजना बनाई, और ब्राह्मणों को एक पत्र भेजा। जिस पत्र में उन्होंने लिखा था, हमारी माता जी की भी हम अंतिम इच्छा पुरी नही कर पाए थे।

इसलिए शायद हमारी माता जी की आत्मा भटक रही है। कृपया आप आएं औऱ हमारी माता जी की आत्मा को शांति दिलवाएं।

ब्राह्मणों ने सोचा, तेनाली भी राजा का मंत्री है, उसके यहां से भी अच्छा दान मिलेगा।

निश्चित दिन सभी ब्राह्मण तेनाली के घर मे पहुचे। तेनाली ने सभी को भोजन कराया। और दो सोने की छड़ो को आग में गरम करने लगा।

और ब्राह्मणों के पास आकर बोला, आप सभी पिछे घूम जाइये। ब्राह्मण बोले , यह आप क्या कर रहर हैं?

तेनाली बोले- हमारी मां के पीठ में छाले थे, माँ ने मुझसे मरते वख्त गर्म छड़ो से उनकी सिकाई करने के लिए कहा था। परन्तु जब तक मे यह करता वह परलोक सिधार गईं।

अब उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए, में इन सोने की छड़ों से आप लोगों की सिखाई करूँगा।

यह सुनकर सभी ब्राह्मण बोखला गए, और तेनाली से कहा- हमे माफ़ कर दीजिये। हमने महाराज के भोलेपन का फायदा उठाया। और अगले दिन उन्होंने सोने के आम भी जाकर महाराज को लौटा दिए।

जब महाराज को यह पता चला, तो उन्होने तेनाली राम को प्रसन्न होकर सोने के आम भेट दे दिए।


सीख़ | Stories of Tenali Raman in Hindi Moral :-

किसी भी काम को सोच समझकर करना ही बुद्धिमानी है।


” तेनाली का उपहार “


एक बार की बात है, तेनाली राम ने राजा की जान बचाई, बदले में राजा कृष्णदेव राय ने तेनाली राम को खुश होकर एक पूरा शहर उपहार स्वरूप देने को कहा।

तेनाली राम इससे बहुत खुश हुए, और खुश होते हुवे राजा कृष्णदेव राय को धन्यवाद दिया।

2 सप्ताह गुजर गए। पर राजा तेनाली राम से किया हुआ वादा भूल चुके थे। तेनाली राम भी बहुत चिंता में थे, कि कब राजा अपना वचन निभाएंगे, और मुझे शहर उपहार में देंगे।

तब तेनाली राम ने सोचा, अगर में राजा से उपहार की बात करूंगा, तो राजा पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचेंगे। तब से तेनाली राम , राजा से नगर उपहार में देने की बात कहने का अच्छा मौका ढूंढते रहते थे।

इसी बीच दुबई से एक व्यक्ति , दो ऊंट के साथ तेनाली राम के नगर घूमने आया। विजयनगर के लोगों ने ऊंठ के बारे में सुना तो था, परन्तु कभी देखा नही था।

इसलिए सभी नगर वासीयों की भीड़ ऊंठ को देखने के लिये इकट्ठा हो गयी।

यह बात राज दरबार तक पहुँच गयी। क्योंकि राजा और तेनाली राम ने भी ऊंठ को कभी नहीं देखा था, इसलिए बे भी ऊंठ को देखने पहुंचे।

सब नगर वासी ऊंठ को देखकर तरह तरह की बातें कर रहे थे। राजा भी ऊंठ को देखकर बोले, हमने अपनी पूरे जीवनकाल में कभी ऊंठ नहीं देखा। आज ऊंठ को हैम पहली दफा देख रहे हैं।

तेनाली राम बोले – जी महाराज, यह कितना बड़ा प्राणी है।
राजा बोले- हाँ तेनाली! निःसंदेह ऊंठ एक बहोत अजीब जानवर है। इसकी इतनी ऊंची गर्दन है,

और पीठ पर दो बड़े बड़े कूबड़ निकले हुवे हैं। पता नहीं बेचारे ने पिछले जन्म में क्या पाप किये होंगे, जो भगवान ने इतने अच्छे जानवर को इतना बड़ा कूबड़ दे दिया।

राजा की ऊंठ की इस बात से तेनाली राम को नगर उपहार में देने वाली बात  को कहने का एक अच्छा मौका मिल गया।

और जैसा कि हर बार उनके पास हर बात का उपयुक्त जवाब होता था, इस बार भी उन्होंने राजा की इस बात पर कहा- जी महाराज ! आपका कहना बिल्कुल सही है।

शायद.., शायद क्या यही हुआ होगा कि यह ऊंठ भी किसी जन्म में एक राजा हुआ करता होगा,

और इसने भी अपने किसी मंत्री से प्रसन्न होकर उसे एक नगर उपहार स्वरूप देने को कहा होगा। परन्तु अपना वादा पूरा नहीं किया होगा। इसी कारण इसे भगवान ने दंड स्वरूप इस जन्म में इतने बड़े दो कूबड़ दे दिए।

महाराज ने कुछ देर सोचा, फिर उनको अपने वचन की याद आयी। और राज दरबार जाते ही तेनाली को एक नगर राज्य उपहार में देने की कारवाही कर दी।

तेनाली ने इसके लिए राजा को धन्यवाद कहा। और एक बार फिर अपनी बुद्धिमानी से राजा द्वारा दिया वचन राजा को याद दिलाया।

सीख़ | Tenali Raman stories in Hindi :- 

बुद्धिमानी से किसी भी व्यक्ति विशेष का मन दुखाये बिना कोई भी बात की जा सकती है.


Stories of Tenali Ram in Hindi 3-4:


” कव्वों की गिनती “


एक बार राजा कृष्णदेव राय से मिलने नेपाल के रक्षा मंत्री आये हुए थे। राजा ने नेपाल के शिक्षा मंत्री का अपने राज दरबार मे भव्य स्वागत किया। और उनके खाने पीने की उचित व्यवस्था की।

एक दिन दरबार चल रहा था, सभी दरबार मे उपस्थित थे, नेपाल के शिक्षामंत्री भी दरबार मे शामिल हुए। उन्होंने तेनाली राम के बारे में सुन रखा था,

कि उनके पास हर सवाल का जवाब है। और बड़े बड़े विद्वान उनके सामने टिक नहीं पाते।

तेनालीराम को आजमाने के लिए उन्होंने तेनाली राम से कहा- तेनाली जी हमने आपके बारे में बहुत सुना है, और सभी लोगों का यह कहना है, की आप बड़े बुद्धिमान हैं।

हम आपकी बुद्धि को आजमाने के लिए आपसे एक सवाल करना चाहते हैं, सवाल थोड़ा उटपटांग है, पर इससे आपकी बुद्धिमानी का पता चल जाएगा।

तेनाली राम ने उनसे बड़े नम्र स्वभाव में कहा, जी महाशय पूछिये।

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शिक्षा मंत्री बोले- आप हमें यह बताइये, की आपके राज्य में कुल कव्वों की संख्या कितनी है?

तेनाली राम ने थोड़ी देर सोचा और कहा- मंत्री जी हमे इस सवाल के जवाब के लिए एक दिन का समय चाहिए।

मंत्री जी- जी बिल्कुल ,हमें आप काल बताइयेगा की आपके राज्य में कुल कव्वों की संख्या कितनी है?

महाराज सभा खत्म होने के बाद तेनाली राम से बोले, तेनाली हमारे राज्य की इज्जत का सवाल है। उत्तर सोच समझकर ही देना। तेनाली राम- आप चिंता मत कीजिये महाराज, हम आपकी लाज रखेंगे।

अगले दिन दरबार मे सभा लगी। सभी दरबार मे पहुँच गए थे, पर तेनाली राम कही नज़र नहीं आ रहे थे, सभी उनकी प्रतीक्षा में लगे थे।

आखिरकार तेनाली दरबार मे आये। और अपने आसन में बैठ गए।

नेपाल के शिक्षा मंत्री ने तेनालीे राम से पूछा- तो तेनाली जी आपको प्रश्न का उत्तर मिला?

तेनाली राम बड़े आत्मविश्वास के साथ बोले- जी मंत्री जी, हमारे राज्य में कुल कव्वों की संख्या 5 लाख 45 हजार 366 है। और अगर आपको यकीन नहीं आता, तो गिनवा लीजिये।

मंत्री बोले- तुम इतने आत्मविश्वास से कह रहे हो, अगर यह संख्या गलत निकली तो?

तेनाली- मंत्री जी , यह संख्या गलत हो ही नही सकती। और अगर इससे ज्यादे हुए तो, हमारे राज्य के कव्वों से उनके मित्र या रिश्तेदार मिलने आये होंगे।

और यदि कम निकली तो हमारे राज्य के कव्वे अपने रिश्तेदारों से मिलने गए होंगे।

कुछ देर तक तो राजा कृष्णदेव राय और सभी मंत्री गण तेनाली राम की तरफ़ एकटुक देखते रहे, फिर सभी ठहाके मार के हसने लगे।

नेपाल के शिक्षा मंत्री बोले- हमने सच ही सुना था , तुम्हारे बारे में तेनाली। तुम वाकई में बहुत बुद्धिमान हो।

राजा भी तेनाली से खुश होकर बोले- वाह तेनाली वाह। सचमे तूम हमारे एक अनमोल रत्न हो।


सीख़ | Short Stories of Tenali Raman in Hindi :-

बुद्धिमानी से किसी को भी प्रसन्न किया जा सकता है।

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” तेनाली राम का प्रायश्चित “


एक बार तेनाली राम ने राजा कृष्ण देवराय के कहने पर एक कुत्ते की पूछ को सीधा किया था। पर जबरजस्ती कुत्ते की पूछ को सीधा करके,

और उसे नुकसान पहुचाने के कारण कुत्ता ज्यादे दिन तक नही जी पाया। और कुछ दिन बाद हो उसकी मृत्यु हो गयी।

तेनाली राम को जब यह पता चला, तो उन्हें भी तेज बुखार आ गया। तभी तेनाली के घर एक पंडित पहुचे, और तेनाली से बोले, तुम्हे भगवान ने कुत्ते की जबरजस्ती पूछ सीधी करने का दण्ड दिया है।

जब तक तुम आपने इस पाप का प्रायश्चित नहीं कर लेते , तुम ठीक नहीं हो सकते।

तेनाली राम पंडित की बातों से भयभीत हो गए। और पंडित से कहा, मुझे प्रायश्चित करने के लिए क्या करना होगा?

पंडित बोले- तुम्हे कुत्ते की आत्मा को शांत करने के लिए, एक पूजा का आयोजन करना होगा। और पूजा करने वाले पंडीत को कुछ दान भी करना होगा।

तेनाली राम ने इन सब मे आने वाला खर्चा पूछा, तब पंडित जी बोले तुम्हे पूजा के साथ मुझे 100 सवर्ण मुद्राएं देनी होँगी। तेनाली राम बोले मेरे पास 100 स्वर्ण मुद्राएं कहाँ से आएंगी?

पंडित कुछ देर सोचने के बाद बोला, जो तुम्हारे पास घोड़ा है, तुम उसे बेच देना उससे तुम्हे इतनी मुद्राये मिल जाएंगी।

तेनाली राम के पास कोई और चारा न होने के उन्होंनेे कारण हाँ कर दी।

2 दिन बाद नियम अनुसार पूजा कराई गई। और कुछ देर बाद पूजा सम्पन्न होने के बाद जब पंडित ने दान की बात करी, तब तेनाली बोले- मेने अभी तक घोड़ा नहीं बेचा।

और मैं अभी बाजार जाकर घोड़े को बेचने की हालत में भी नही हूँ।

आप कृपया मेरे ठीक होने तक का इंतज़ार करें। मेरे ठीक होने के पश्चात हम दोनों स्वयं जाकर इसे बाजार में जाकर बेच देंगे। और मिली हुई धनराशि को में आपको सौप दूंगा।
पंडित ने तेनाली राम की मजबूरी को समझते हुए उसकी बात मान ली।

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डेढ़ हफ्ते बाद जब तेनाली राम ठीक हो गए, तब पंडित उससे मिलने आया। और कहा, अब तुम ठीक हो गए हो, तुम्हारे वचन निभाने की बारी आ गयी है।

तुमको घोड़े को बेचकर जो भी धनराशि मिलेगी उसे मुझे देना होगा।

लेकिन तेनाली को यह पता था, की मैं पूजा के कारण नहीं बल्कि दवाई के कारण ठीक हुवा हूँ।

तब तेनाली राम पंडित की बात मानकर एक घास का गट्ठा और घोड़े को लेकर बाजार चल दिये।

बीच बाज़ार जाकर वे जोर जोर से आवाज लगाने लगे, घोड़ा मात्र 1 पैसे का, घोड़ा मात्र 1 पैसे का।

इतने में एक जमींदार तेनाली राम से आकर बोला, तुम्हारा घोड़ा बहुत सुंदर है। कितने में बेच रहे हो इसे?

तब तेनाली राम बोले घोड़ा तो मात्र 1 पैसे का है, पर इसके साथ आपको यह घास का गट्ठा खरीदना पड़ेगा जो 100 स्वर्ण मुद्राओं का है।

घोड़ा बहुत सुंदर होने के कारण जमींदार ने तुरंत घोड़ा खरीद लिया। और तेनाली राम को 100 स्वर्ण मुद्रायें घास के लिए व 1 पैसा घोड़े के लिए दिया।

तेनाली राम ने 1 पैसा पंडित को देते हुवे कहा, यही मुझे घोड़े की कीमत मिली है, इसे आपको देकर में अपना वचन पूरा कर रहा हूँ।

पंडित क्रोध से तेनाली राम को जाता देखता रहा, पर कुछ कह न पाया। और तेनाली राम ने एक बार फिर अपनी बुद्धिमानी का प्रमाण दिया।


सीख़ | Tenali Raman Short Stories in Hindi Moral :-

अगर आप बहुत भोले हैं, तो सब आपका फायदा उठाना चाहेंगे.

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Moral stories of tenali raman in hindi 5:


” तेनालीराम को मृत्युदंड “


सुल्तानपुर के राजा राजेन्द्र रघुवंशी ने एक बार विजयनगर के दो सीमा से लदे शहर रायगड और जिनपुर हड़प लिए। राजेन्द्र रघुवंशी को यह डर लग रहा था,

की जो उसने राजा कृष्ण देवराय के नगर हड़पे हैं, वे उसे छीनने के लिए उस पर हमला जरूर करेंगे।

क्योंकि उसने यह सुना था, कि पहले भी एक राजा ने कृष्णदेवराय के नगर हड़पे थे, और कृष्णदेवराय ने वह नगर तो वापस लिए ही लिए, और उस राजा को भी मृत्यु दंड दे दिया ।

उसके पास दोनों हड़पे नगरों को बचाने का एक ही चारा बच गया था, कि वह कृष्णदेव को मरवा दे। उसने यह काम करने के लिए तेनालीराम के बचपन के दोस्त शांताराम को बुलवाया,

और उसको 1000 स्वर्ण मुद्राएं देते हुवे कहा, अगर तुमने यह काम कर दिया, तब मैं तुम्हे 10000 स्वर्ण मुद्राएं और दूंगा। यह सुनकर शांताराम को लालच आ गया,

और वह ,यह काम करने के लिए तुरन्त मान गया।

शांताराम , तेनालीराम के घर पहुँचा, तेनालीराम ने शांताराम को बहुत सालों बाद देखकर गले से लगा लिया। और उसका खूब आदर सत्कार किया। तेनालीराम ने शांताराम के रहने और खाने की उचित व्यवस्था की।

तीसरे दिन तेनालीराम किसी कारण दूसरे नगर गया था, शांताराम को यही मौका अच्छा लगा, उसने तेनालीराम के नाम का पत्र राजा को भेजा, जिसमे उसने लिखा था,

मुझे एक ऐसी बहुत बड़ी बात पता चली है, जो आपसे आजतक छुपाई गयी।

जैसे ही राजा को वह पत्र प्राप्त हुआ, और उन्होंने उसे पढा, वे बिना कुछ सोचे समझे, और बिना किसी हथियार के तेनालीराम के घर को चल दिये, पर उनके सैनिक उनके पीछे पीछे उनके साथ गए।

शांताराम दरवाजे के पीछे छिपा था। जैसे ही राजा ने तेनालीराम के घर का दरवाजा खोला, शांताराम ने राजा पर वार कर दिया। पर राजा भी बड़े बलशाली थे। उन्होंने शांताराम का हाथ पकड़ा, और मरोड़ दिया।

तब तक राजा के सिपाही वहां पहुचे , और शांताराम को वहीं ढेर कर दिया।

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अगले दिन सभा बिठाई गयी। ( राज्य का कानून था, कि राजा को मारने वाले या ऐसा चाहने वाले को पनाह देने वाले आदमी को भी उसकी आखिरी इच्छा के साथ मृत्युदण्ड दिया जाए )

तेनाली राम को दरबार मे पेश किया गया, और राजा ने उसे मृत्युदण्ड दिया। तेनालीराम ने बहुत माफी मांगी, पर राजा ने राज्य के पहले से ही बने कानून को तोड़ने से मना कर दिया।

राजा ने पूछा तेनाली तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है, हमे कानून के हिसाब से उसे पूरा करना पड़ेगा।

तब तेनालीराम ने राजा से कहा, पहले आपको मुझे वचन देना होगा, आप मेरी आखरी इच्छा पक्का पूर्ण करेंगे। तब राजा ने भी वचन दिया।

तब तेनाली राम बोले- मेरी आखरी इच्छा यह कि मेरी मृत्यु बुढ़ापे में हो। और आपने मुझे वचन दिया है, आपको यह पूर्ण करना पड़ेगा।

राजा थोड़ी देर तक तेनालीराम की तरफ देखते रहे, फिर हँसकर बोले, इस बार भी बच गए।


सीख़ | Tenali Ram story in Hindi with Moral :-

तेनाली राम जैसा चालक व्यक्ति अपनी मृत्यु को भी चकमा दे सकता है.

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Stories of tenali raman in hindi 6:


” अधिक भाग्यशाली कोन? “


एक बार की बात है, तेनालीराम के शहर विजयनगर में बिल्लू और टिल्लू नाम के दो लोग रहते थे। वह थोड़े से कपटी और झगड़ालू किस्म के थे। एक दिन उन्होंने सोचा, हमारे पास कुछ पैसे है,

क्यों न इन पैसों का एक लॉटरी का टिकट खरीद जाए। उन्होंने लॉटरी का टिकट खरीदा। और भगवान से लॉटरी निकलने की भिक्षा मांगने लगे। अगले दिन लॉटरी निकलने का फिन था।

उस दिन वे लोग लॉटरी की दुकान पर गए,  और उन्हें पता चला कि उन दोनों उनकी लॉटरी लग गयी थी।  वे दोनों बहुत अधिक खुश हुए। दोनों ने शाम को जश्न मनाया। और नाच – झूम के सो गए।

अगले दिन वे उठे, दोनों ने स्नान किया, और खाना खाने लगे, खाना कहते वख्त एक कोयल बहोत जोर जोर से कुहू कुहू कर रही थी। उनके गांव में यह मान्यता थी,

की सुबह को कोयल की आवाज सुन्ना मतलब किस्मत खुलने वाली है, और निश्चित ही पैसा मिलेगा।

दोनों टिल्लू और बिल्लू कुछ देर बाद जंगल की ओर को चल दिये। अपने साथ दो बकरियों को भी वे साथ ले गए। उन्होंने शाम होने तक बकरियों को चराया। फिर दोनों गपशप करने लगे।

दोनों अपनी अपनी बहादुरी के किस्से हांकने लगे। थोड़ी देर बाद ही दोनों एक दूसरे की बेज़्ज़ती पर उतर आये। थोड़ी ही देर हुई थी, की

टिल्लू , बिल्लू से बोला- देखना आज मेने सुबह सुबह कोयल की मीठी आवाज सुनी है, रात तक मेरे भाग्य खुल जाएंगे।

बिल्लू यह सुनकर टिल्लू की बात का बहिष्कार करते हुए बोला-
तुम्हारा भाग्य मुझसे अच्छा नहीं हो सकता। तुमसे ज्यादा तो मैं भाग्यशाली हूँ।

मेने तुमसे जोर से सुबह कोयल की आवाज सुनी है। जो आवाज कोयल ने सुबह मेरा भाग्य खुलने के लिए लगाई थी। आज तुम्हारा भाग्य नही बल्कि मेरा भाग्य खुलेगा।

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टिल्लू को यह सुनकर बड़ा गुस्सा आ गया, और वह अपनी बात और अड़ा रहा। बिल्लू को भी टिल्लू की बातों से गुस्सा आने लग गया। दोनों की तू तू में में कब हाथापाई पर आ गयी, पता ही नहीं चला।

दोनों इसी बात पर एक दूसरे को खूब पीटने लगे। अब दोनों के हाथ पैर से खून बहने लगा। दोनों एकसाथ गांव के निजी वैध के पास पहुचे। वैध ने ऐसी दुर्दशा में देखकर दोनों से पूछा, तुम्हारी इतनी बुरी दुर्दशा कैसे हुई?

तब टिल्लू ने वैध जी को सारी बाते स्पष्ट रूप में समझाई।  और उनसे भी पूछा- वैध जी आप ही बताइए? इस प्रकार हम दोनों में से ज्यादा भाग्यशाली कौन हुआ, और कोयल ने किसके भाग्यशाली होने की सूचना दी थी?

वैध जी मुस्कुराते हुए बोले- भाग्यशाली तो मैं हुआ, और शायद कोयल ने मेरे भाग्यशाली होने की सूचना दी थी। तुम लोग अगर इसी प्रकार आपस मे लड़ते झगड़ते रहे, तो मुझे तुम्हारे इलाज के रूप में धन मिलता रहेगा।


सीख़ | Tenali Raman Stories in Hindi with Moral :-

बेकार के झगड़े करने से दूसरों को ही फायदा होता है।

दोस्तों आपने पढ़ी बहुत सारी tenali ke kisse in hindi. अगर आपका मन तेनालीराम की कहानियों से भर गया है, तो पढ़िए ये एक मोरल स्टोरी। जिसमे आपको सचमुच जीवन की नैय्या को पार लगाने वाली सिख मिलेगी।


Short tenali ram Moral Story 7:


” चूहा और भगवान “


एक बार की बात है, एक जंगल मे एक छोटे से बिल मे एक चूहा रहता था, उसी जंगल मे एक बिल्ली भी रहती थी। बिल्ली को चूहे के बारे में पता चल गया था,

इसलिए वह उस चूहे का शिकार करने के लिए हमेशा उसके इर्द गिर्द ही घूम करती थी।

चूहा बिल्ली से बहुत परेशान था, एक दिन चूहे को बिल्ली बिल के बाहर नही जाने दे रही थी। वह बिल के बाहर ही चूहे का इंतज़ार कर रही थी।

चूहे ने थोड़ी देर इंतज़ार किया, फिर परेशान होकर जोर से बोला, हे भगवान आपने मुझे चूहा क्यों बनाया? काश में बिल्ली होता।

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भगवान को चूहे के ऊपर दया आ गयी। और चूहे को बिल्ली बना दिया। कुछ दिन बाद बिल्ली (जो पहले चूहा था) जंगल की सैर पर निकला। उसके पीछे कुत्ते पड़ गए।

वह बड़ी मुश्किल में घर पहुँची, और परेशान होकर बोली, हे भगवान काश में एक कुत्ता होता।

भगवान ने उसपर दया दिखाई और कुत्ता बना दिया। अब वह जंगल आराम से घूमने लगा।

एक दिन जंगल मे टहलते हुए उसे एक शेर दिखा। शेर उसके पीछे ही पड़ गया। शेर से पीछा छुड़ाकर जब वह घर पहुँचा, तब उठाने बोला- है भगवान आपने मुझे कुत्ता क्यों बनाया, काश में शेर होता।

भगवान ने अभी भी उसपर दया दिखाई, और उसे शेर बना दिया। अब वह पूरे जंगल मे राज करने लगा। सारे जंगल के  जानवर उससे डरते थे।

पर एक दिन एक शिकारी जंगल आया, और उसपर धारदार तीरों से वार करने लगा।

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उसने बड़ी मुश्किल से उस शिकारी से पीछा छूटाया, और घर आकर बोला, हे भगवान आपने मुझे शेर क्यों बनाया? काश में मनुष्य होता।

इस बार भगवान को उस पर दया नहीं आयी, और भगवान बोले- मूर्ख चूहे! में तुझे चाहे भगवान ही क्यों न बना दु, तू रहेगा चूहा ही। और यह कहते हुए भगवान ने वापस उसे चूहा बना दिया।


सीख | Moral Stories of Tenali Raman in Hindi :-

यह कहानी हमे सीख देती है, कि जो इंसान अपनी खराब चल रही परिस्तिथियों से घबरा कर पलायन कर देता है, उसे चाहे कितनी भी सुख सुविधाएं देदें, वह हमेशा परेशान ही रहेगा।

अतः हमें अपनी परिस्तिथियों से घबराकर कभी भागना नहीं चाहिए, बल्कि उनका डटकर सामना करना चाहिए।


Conclusion :-


आज आपने पढ़ी 7 Best Short Tenali Raman Stories in Hindi with Moral हमको यह आशा है, कि आपको हमारी यह tenali ke kisse in hindi पसन्द आयी होंगी। तथा इन कहानियों से बहुत कुछ सीखने को भी मिला होगा।

ऐसी और पोस्ट पढ़ने के लिए बने रहिये sarkaariexam.com के साथ।

thanks…!

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