Best Story for Nursery Class in Hindi | Nursery Kids Stories

प्रेरणादायक सीख देने वाली Story for Nursery Class in Hindi. आशा करते हैं आपको हमारी आज की यह पसन्द आएंगी, और इनसे बहुत कुछ सीखने को भी मिलेगा।

तो चलिए शुरू करते हैं Hindi Story for Nursery Class.


Story for Nursery Kids in Hindi 1


”  हाथी और चतुर खरगोश “


एक बार जंगल में एक हाथी रहता था। उसके साथ अन्य भिन्न जातियों के जीव भी रहते थे। प्रारंभ से ही सब एक साथ मिलकर, प्रेम से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे।

   एक बार जंगल में बहुत महीनों से बारिश नहीं हुई। वहां के पेड़ पौधे सब पानी और सिंचाई के बिना सूखने लगे। जंगल के आस पास के सभी जलाशय सूखने लगे।

सभी जानवर पानी की तलाश में जंगल छोड़कर इधर उधर भटकने लगे।

   हाथी भी जंगल से बाहर आ गया। करीब एक हफ्ते के कठिन रस्ते में चलने के बाद उसे दुर किसी दूसरे जंगल के किनारे एक बहुत ही बड़ा पानी का जलाशय दिखा।


story for nursery kids


वह वहां गया। उस जलाशय का पानी बहुत ही मधुर था। मानो अमृत का दरिया उसी जलाशय में था। हाथी को बहुत समय से  पानी की तलाश थी, वह अपने सामने पानी को देख बहुत खुश हुआ।

वह जलाशय के करीब गया और वहां से कई सारा पानी पी लिया, जब तक उसकी तृप्ति नहीं हुई वह पानी पीता ही गया। उसने मन में सोचा कि,

मेरे जंगल के साथी भी तो काफी समय से प्यासे हैं, मैं उन्हें भी इस जगह में ले आता हूँ। फिर हम सब यही पास के जंगल में अपना बसेरा कर लेंगे।

 वह फिर से जंगल मे गया और अपने सभी साथियों को इस विषय के बारे में विस्तार से बताया। उसके सभी साथी जानवर बहुत खुश हुए। हाथी सभी जानवरों को उस जलाशय तक ले आया।

       उस जलाशय के रास्ते में आस-पास बहुत से खरगोश अपना बिल बनाकर रहा करते थे। उन्होंने सारी जमीन में अपने बिल के सुराख कर रखा था।

   पहले जब केवल हाथी आया था, तब तो उतना नुकसान नहीं हुआ। लेकिन जब सभी जानवर एक साथ उस जलाशय में आए तो रास्ते में जिस जमीन से वो होकर आए,

उस हिस्से के सारे खरगोशों के बिल टूट गए। उनमे रहने वाले सभी खरगोशों  को बहुत हानि उठानी पड़ी।

हाथी और उसके साथियों के भारी भरकम पैरों की वजह से ,किसी खरगोश का सिर फूट गया, किसी की टांग टूटी और जिस खरगोश को ज्यादा लगी वे तो मर भी गए।

जलाशय में आकर सभी जानवरों ने अपनी प्यास बुझाई और फैसला किया कि, अब वे सभी पास के जंगल में ही रहेंगे।

   सभी जानवर पास के जंगल में चले गए। सभी ने वही अपना डेरा डाल दिया। अब वे सभी जानवर रोज उस जलाशय में पानी पीने आते, और कई सारे खरगोश निर्मम ही मारे जाते।

      खरगोशों की प्रतिदिन होने वाली इतनी मृत्युओं को देख कर खरगोशों का राजा बहुत ही परेशान हो गया।

उसने अपने सभी खरगोशों को एकत्रित किया। उसने उन लोगो से कोई समाधान निकालने की विनती की, उसने कहा , ” यदि शीघ्र ही कोई समाधान नहीं निकला तो हम सबकी मृत्यु निश्चित ही है।”

सभी खरगोश भी बहुत परेशान थे। उन्हें डर था कि, क्या पता किस दिन हमारी बारी आती है, जानवरों द्वारा शहीद होने की।

    झुंड में से एक खरगोश ने सुझाव दिया, कि हमें यह स्थान छोडकर किसी अन्य स्थान को अपने रहने के लिए खोजना चाहिए। ताकि हम यहाँ से जाकर वहां सुकून से रह सकें।

   उसकी बातें सुनकर एक दूसरा खरगोश बोला, ” मैं तो अपनी पूर्वजों की जगह छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा। यहां से हमारी कितनी यादें जुड़ी हुई हैं। हम यहां से कहीं भी नहीं जाएंगे। “

कुछ खरगोश उसकी बात से सहमत हुए।

तभी एक बुद्धिमान खरगोश ने उठकर अपने राजा खरगोश से कहा , ” महाराज! यहां पर हाथ में हाथ धरे बैठकर अपनी मृत्यु को देखने,

और हमारी इस पुश्तैनी जगह को छोड़कर कही और जाने से बेहतर है, की हम इस समस्या का समाधान करें। “

उसने कहा, कि हममें से किसी एक को ख़रगोशों का प्रतिनिधि बनकर हाथी और उसके साथी जानवरो से बात करनी होगी। क्या पता वे हमारी बात को समझें ।

समस्या से भागना तो कोई समाधान नहीं होता।

सभी ख़रगोशों ने फैसला किया कि, उस बुद्धिमान खरगोश को ही जंगल में हाथी और उसके दल में वार्ता के लिए भेजा जाएगा।

शाम का समय हो गया। वह बुद्धिमान खरगोश जंगल चले गया। वहां हाथी और उसके साथी जानवर आपस  में बैठकर कुछ बातें कर रहे थे।

तभी खरगोश उनके ध्यान को आकर्षित करने के लिए उनकी सभा में उन के बीच में चला गया।

    हाथी बोला, कौन है तू? औऱ यहाँ क्या कर रहा है! खरगोश ने उत्तर दिया,’ मैं एक  खरगोश हूँ। चन्द्रमा पर रहता हूं। मुझे तुम्हारे पास चन्द्रदेव ने भेजा है। “

हाथी ने सोचा, यह तो सच में चन्दमा की तरह सफेद और चमदार है। शायद यह सच कह रहा है।

 हाथी ने उस खरगोश को प्रणाम किया और पुछा , ” क्या आप यहाँ चन्द्रदेव कहने पर ही आए हैं?”

खरगोश ने कहा, “हाँ! मेरी बात ध्यान से सुनो! तुम लोग जहाँ पानी पीने जाते हो यह जलाशय चन्द्रदेव का है। उन्हें तुम्हारे पानी पीने से कोई दिक्कत नहीं है।

परन्तु अब यह जलाशय वे सूर्यदेव को भेंट करने वाले हैं।  उन्होंने सन्देश दिया है कि, अब तुम लोग उसका पानी पीने वहां नहीं  आओगे। आज वह इस जलाशय को लेने स्वयं यहा आए हैं।

और साथ ही उन्होंने तुम लोगों के लिए पास के जंगल में पानी की व्यवस्था कर दी है। तुम सबको वहां जाने का आदेश भी दिया है।”

हाथी को चन्द्रमा के धरती पर आने की बात से बहुत खुशी हुई। उसने खरगोश से कहा कि, क्या मैं एक बार उनके दर्शन कर सकता हूँ?

खरगोश ने कहा, ‘क्यो नहीं’

चलो मेरे साथ ।

वह हाथी को लेकर जलाशय पहुँचा। जलाशय में चंद्रमा की परछाई दिख रही थी।  हाथी ने उसी परछाई को चन्द्रमा समझ कर उस परछाई को प्रणाम किया। और चुप चाप वहां से चला गया।

  वह अपने साथ सभी जानवरों को लेकर दूसरे जंगल चले गया।

खरगोश ने अपनी बुद्धिमानी से अपने सभी साथी ख़रगोशों की जान बचाई।


★ सीख | Story for Nursery Class in Hindi : “कठिनाई की स्थिति से भागना समझदारी नहीं है। उससे लड़कर उसका सामना करना ही उस स्थिति से बाहर निकाल सकता है।”

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Story for Nursery Kids in Hindi 2


” दो मछलियों और एक मेंढक की कथा “


     बहुत समय पहले, एक बार एक गांव में सूखा पड़ गया। गांव के लोग बहुत परेशान थे। उनका मुख्य व्यवसाय मछली पालन सूखे की वजह से अस्त-व्यस्त हो गया।

गांव के सभी लोग पलायन करने लगे। कोई कहीं गया कोई कहीं। गाँव में रहने वाले मछुआरों ने किसी जलाशय वाली जगह को ढूंढना शुरू कर दिया।

औऱ उनकी तलाश खतम हुई। उन्हें एक बड़ी सी नदी दिखाई दी।

उन सभी ने अपना वहीं नदी के किनारे डेरा डाल दिया।

नदी में बहुत सारी मछलियां रहती थी। मछलियों के कई सारे समुदाय थे। उनमें से दो मछलियों की आपस में बहुत गहरी मित्रता थी।

1 मछली का नाम था, सहस्रबुद्धि और दूसरी का नाम था शतबुद्धि।

सहस्रबुद्धि के पास एक हजार बुद्धियाँ थी, और शतबुद्धि के पास सौ।

दोनो अपने कुल की इकलौती ऐसी मछलियां थी, जो कि इतनी अधिक बुद्धिशाली थी। उन दोनों का एक उभयनिष्ठ मित्र था, मेंढक ।

उसके पास केवल एक ही बुद्धि थी,लेकिन वह फिर भी उन दोनों का मित्र था।

एक दिन नदी के बाहर मेंढक, शतबुद्धि और सहस्रबुद्धि आपस में बातचीत कर रहे थे।

सहस्रबुद्धि बोली, ” मेरे पास तो 1000 बुद्धियाँ हैं। मैं संसार मे सबसे ज्यादा बुद्धिशील और बलशाली हूँ।”

इतने में शतबुद्धि ने कहा, ” ठीक ही कह रही हो, मेरे पास भी 100 बुद्धियाँ हैं, मैं भी बुद्धिशाली और बलवान हूँ। ” मेंढक इन दोनों की बातें सुन रहा था, वह चुप रहा।

तब सहस्रबुद्धि ने मेंढक से पूछा! तुम क्यों चुप हो, कुछ कहो!

मेंढक बोला!, ” मेरे पास तो एक ही बुद्धि है, पता नहीं तुम दोंनो मुझे अपना मित्र मानती हो या नहीं। आखिर इतनी बुद्धि वाली मछलियां मुझसे क्यो दोस्ती करेंगे भला??”

तब शतबुद्धि बोली, “मित्रता बुद्धि से नही , सच्चे हृदय से की जाती है। और तुम्हारे पास सच्चा हृदय है। तुम्हें तो खुद होना चाहिए कि तुम्हारे मित्र हैं, वरना किसी के तो मित्र ही नहीं होते।”

इतने में सहस्रबुद्धि भावुक हो गयी। वह नम स्वर में बोली, ” चलो हम तीनों आपस में वादा करते हैं कि हम सब अपनी मित्रता पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।”

दोनों ने हामी भरी।

अब तीनो ख़ुशी मनाने लगे। शाम हो चली। अब तीनों ने फैसला किया कि उन्हें अब अपने अपने घर चलना चाहिए।

तीनो अपने अपने घर चले गए।

अब वे तीनों रोज मिलते और खूब सारी मस्ती करते।

एक दिन वे तीनों नदी की सैर करने निकले। जब वे वहां वापस आए तो उन्होंने देखा कि, कुछ मछुआरे वहां अपने जाल को लेकर खड़े हैं।

ये वही मछुआरे थे जो पलायन करके नदी के पास के गांव में रहने लगे थे।

अब तीनों मित्र डरने लगे। सहस्रबुद्धि बोली,” यह हमें और हमारे साथियों को पकड़ने आए हैं। चलो हम किनारे चलते हैं।”

तीनो दोस्त किनारे आ गए। मछुआरों ने अपना जाल फेंका। बहुत सी मछलियां उसमें फंस गई और अपना दम तोड़ दिया।

एक मछुआरा बोला, ” भाई यहां यो बहुत सी मछलियां हैं, हमारे तो भाग्य खुल गए। हमने अपने रहने के लिये बिल्कुल सही जगह चुनी है।

यहां से ये नदी कितनी पास है, हमें मछलियों को पकड़ने में कम मेहनत लग रही है।”

तभी दूसरा मछुआरा बोला, ” हां भई! ठीक कह रहे हो। इतनी मछलियां दो दिन तक चल जाएंगी। हम परसों को फिर यहां आएंगे।”

  फिर मछुआरे मछलियों से भरे जाल को अपने कंधों में उठा कर वहां से चले गए।

सहस्रबुद्धि ,शतबुद्धि और मेंढक यह बात सुन रहे थे। उन्होंने यह बात जल्द से सभी मछलियों को बता दी। सब बहुत चिंतित थे। उन सबने मिलकर एक सभा का आयोजन किया,

Intrusting Part of this story for nursery kids- इस मुसीबत से बचने के लिए सबने अपनी अपनी राय देने के लिए, सभा शुरू हुई।

लेकिन किसी को कुछ सूझ ही नहीं रहा था। तब सहस्रबुद्धि ने कहा,

” आप सब चिंता न करें । मैं अपनी बुद्धि के प्रयोग से आप सब को बचा लुंगी। ” शतबुद्धि ने भी उसका साथ देते हुए कहा, ” हां यह ठीक कह रही है।

हम दोनो अपनी बुद्धि के बल पर आप सब को बचा लेंगे।”

  सभी मछलियों को उन पर विश्वास हो गया।  अब निश्चिंत होकर सब अपने अपने घर चले गये।

   सबको तो विश्वास हो गया था लेकिन, मेंढक को उन पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ। लेकिन उसने यह बात अपनी दोस्तों को नहीं बताई।

ताकि उनको बुरा न लगे। उसे लगा कि, इन दोनों में घमण्ड आ गया है, इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।

   वह दिन आ ही गया। मछुआरे फिर अपना जाल लेकर वहां , नदी के किनारे आ पहुंचे।

मेंढक ने पहले ही अपने लिए एक दूसरे जलाशय को खोज चुका था। वह अपनी मेंढकी को लेकर उस जलाशय में चला गया।

   मछुआरों ने अपना जाल , नदी में फेंक दिया। इस बार छोटी छोटी मछलियों के साथ दो बड़ी मछलियां भी जाल में फंस गई। वह दो बड़ी मछलियां सहस्रबुद्धि और शतबुद्धि ही थे।

उन्होंने अपनी बुद्धि के बल पर कई पैंतरे अपनाए, लेकिन वे काम नहीं आए। सब मछलियों ने एक एक करके अपना दम तोड़ दिया।

मछुआरे उन्हें लेकर वहां से चले गए। मेंढक को जब यह पता चला कि उसकी दोनों दोस्त अब नहीं रहीं उसको बहुत बुरा लगा।

और अब वह बची हुई सारी मछलियों को अपने साथ नए जलाशय में ले गया।


★ सीख | Story for Nursery Class in Hindi : ” कठिन समय मे एक बुद्धि का उचित प्रयोग ही पर्याप्त होता है। स्वयं के होशियार होने पर , या खुद को होशियार समझने पर कभी घमण्ड नही करना चाहिए। यह घमण्ड एक दिन बहुत हानि पहुंचाता है।”

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Kids Moral Short Story 3


” सांपों की कथा “


    बहुत समय पहले भारत देश के किसी प्रान्त में, एक तेजस्वी राजा का राज था। वह न्यायप्रिय होने के साथ साथ बहुत उदार और दयालु भी था। उसका एक पुत्र था।

  एक बार राजकुमार बहुत बीमार हो गया। उसे उसके कक्ष में रखा गया। उसकी चिकित्सा उसके ही कमरे में हो रही थी। एक दिन जब कक्ष में कोई नहीं था,

तब खिड़की के रास्ते से एक सांप आकर राजकुमार के पेट मे चले गया। राजकुमार की तबियत और खराब होने लगी।

कितने ही वैद बुलवाए, कितनी दवा चलाईं गयीं लेक़िन कुछ भी अंतर नही हो पा रहा था।

      बहुत दिन बीत गए। अब सांप ने उसके पेट में अपना बिल बना लिया था। राजकुमार अब बड़ा हो गया। उसके पेट में सांप अभी तक था।

राजकुमार तंग आकर राज्य से बाहर दूसरे राज्य में चला गया। वह वहां जाकर एक मंदिर में भिखारी बनकर रहने लगा।

     उस राज्य में एक राजा अपने महल में रहता था। उस राजा को, उसकी चापलूसी करने वाले लोग बहुत भाते थे, लेकिन जो उसकी चापलूसी नही करता था,

उसकी हा में हां नही मिलाता था, उसे वह दण्डित कर देता था।

उस राजा की दो बेटियां थी। वह भी अब जवान हो चुकी थी।

रोज सुबह वे दोनों, अपने  पिता को प्रणाम करने उनके कक्ष में जाया करती थीं। पहली राजकुमारी अपने पिता के अभिवादन में कहती थी, ” महाराज! इस संसार में जो कुछ भी है, आपकी वजह से ही है।”

दूसरी अपने पिता से कहती, ” ईश्वर सदा आपकी रक्षा करें।”

अपनी दूसरी पुत्री की बातें उसे बिल्कुल अच्छी नही लगती थीं। उसको अपनी पुत्री की बातें सुनकर बहुत ही क्रोध आ जाता था।

एक दिन तो उसके सब्र का बांध टूट ही गया। उसको अपनी दूसरी पुत्री पर बहुत ही गुस्सा आ गया। उसने अपने मंत्री को बुलवाकर,

उसकी शादी मंदिर के किसी भिखारी से कर देने का आदेश दिया। उसकी पुत्री ने कुछ नहीं कहा, और चुप चाप अपने पिता का आदेश मान लिया।

Intrusting Part of this story for nursery class in hindi- उस लड़की की शादी , भिखारी बने राजकुमार से कर दी गयी। लड़की ने उसे अपना भाग्य समझकर स्वीकार कर लिया।

राजकुमारी अपने पति की खूब सेवा करती थी। अब दोनों उस मंदिर को छोड़ कर किसी अन्य स्थान जाने लगे।

   रास्ते में वह एक तालाब के पास बैठकर आराम कर रहे थे, तो उसकी पत्नी कुछ सामान लेने चली गयी। उसका पति आराम करते हुए वहीं पेड़ के नीचे सो गया।

जब वह सो रहा था तो, उसके पेट का सांप उसके मुंह से निकलकर बाहर आ गया। पेड़ के नीचे एक बिल था उसमें भी एक सांप रहता था। दूसरे सांप की गन्ध सूंघ कर वह भी बाहर आ गया।

   तभी उसकी पत्नी भी वापस आ गयी। वह अपने पति के पास पहुंचने ही वाली थी, कि उसने देखा कि ,उसका पति दो सांपों के बीच बेहोश पड़ा है, वह थोड़ी देर छिप कर उनको देखने लगी।

    दोनो सांप आपस में बात करने लगे।

बात करते करते, दोनों ने एक दूसरे की पोल खोल दी। पेट वाले साँप ने, बिल वाले साँप के सोने के मटके का रहस्य भी बता डाला। और बिल वाले साँप ने उसको मार डालने का रहस्य बता दिया।

    यह सारी बातें उसकी पत्नी ने सुन लीं। उसने सांपों के बताए गए उपायो द्वारा उन दोनों सांपों को ही नष्ट कर दिया। अब उसका पति एकदम स्वस्थ हो गया।

उन दोनों को सांप के बिल से एक सोने का मटका भी मिल गया। जिससे वे अब धनी हो गए। तभी राजकुमार ने अपनी सच्चाई अपनी पत्नी को बताई।

    दोनों लौट कर राजकुमार के महल चले गए। राजमहल में उनका खूब स्वागत हुआ। राजकुमार का पिता, उन दोंनो को देख कर बहुत खुश हुआ। अब सब प्रेम से महल में ही अपना जीवन व्यतीत करने लगे।


★ सीख | Story for Nursery Class in Hindi : ” अंत भला तो सब भला। यदि अंत भला नही है तो समझिए कि वह अंत ही नहीं है।”

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Conclusion | Nursery Class Stories


आज आपने पढ़ी Story for Nursery Kids in Hindi. जिनसे आपको निश्चित ही प्रेरणादायक सीख मिली होगी।

जिसे आप अपने जीवन मे निवेश करके सफलता हासिल कर सकते हैं, Story for Nursery Class in Hindi ऐसी ही और मोरल कहानियां जानने कर लिए बने रहिये sarkaariexam के साथ।

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