Great Two Cats and a Monkey Story in Hindi | दो बिल्लियां और एक बंदर की कहानी

प्रेरक और मनोरंजक Two Cats and a Monkey Story in Hindi. आशा करते हैं आपको आज की यह कहानी पसन्द आएगी, और बहुत कुछ सींखने को भी मिलेगा।

two cats and a monkey story in hindi


Two Cats and a Monkey Story in Hindi


बन्दर का इंसाफ


    एक बार दो बिल्लियां बहुत अच्छी दोस्त थीं। दोनों ही एक साथ रहती थीं। उनमे प्रेम भी बहुत था, लेकिन वे आपस में झगड़ा भी बहुत करती थीं।

   एक बार दोनो ही एक साथ रस्ते से जा रही थी। आगे रास्ते मे एक रोटी का टुकड़ा गिरा हुआ था। दोनो ने ही उस रोटी के टुकड़े को देख लिया और एक साथ उस पर झपट पड़ी।

   एक बिल्ली ने उसे उठा लिया। लेकिन दूसरी बिल्ली वह रोटी का टुकड़ा उससे झपटने लगी। वे दोनों रोटी के टुकड़े के लिए झगड़ा कर रहे थे। एक बिल्ली कहती,

” यह रोटी का टुकड़ा मेरा है मैं ने इसे उठाया है। मैं इसे किसी को भी नहीं दूँगी।”

दो बिल्लियां और एक बंदर की कहानी

    दूसरी बिल्ली कहती, ” यह रोटी का टुकड़ा मेरा है, मैं ने इसे पहले देखा था। “

बस इसी बात को लेकर दोनो रोटी की छीना – झपटी में अड़ी हुई थीं। दोनो का फैसला ही नहीं हो पा रहा था।

   तभी वहां एक बन्दर आया और बिल्लियों के झगड़े को देख कर उनके पास चला आया। बन्दर बोला, ” बिल्ली मौसियों आप दोनों लड़ क्यों रही हो? कोई समस्या है तो मुझे बताओ।”

  तब एक बिल्ली ने उसे रोटी का टुकड़ा देते हुए कहा, ” देखो न बन्दर भाई, यह रोटी का टुकड़ा मुझे मिला था, और यह कह रही है कि यह मेरा है।’

  इस तरह दोनो ने ही अपनी अपनी बातों को बन्दर के सामने रखा। बन्दर ने भी रोटी पकड़ ली। रोटी को देखकर उसके मन मे लालच आ गया। लालच की वजह से वह बोला,

” आप दोनो झगड़ा मत करो। मैं इस रोटी को आप दोनो में बराबर कर बांट देता हूँ। ऐसे दोनो को ही बराबर रोटी मिलेगी और झगड़ा भी नहीं होगा।”

   दोनो बिल्लियां राजी हो गयी। अब बन्दर ने रोटी के दो हिस्से किये। और अपने तराजू में डाल दिया।  उसने जानबूझकर एक हिस्सा बड़ा और एक हिस्सा छोटा रखा।

तराजू का एक पलड़ा भारी था इसलिए वह झुक गया। फिर उसने अपना सर हिलाते हुए कहा, ” नही नहीं, यह तो गलत हो गया।इन दोनों में से एक रोटी का टुकड़ा बड़ा और ज्यादा है।

इसमें से थोड़ा तोड़कर मैं खा लेता हूँ, फिर यह दोनो बराबर हो जाएंगे “

बन्दर ने बड़ी रोटी में से कुछ हिस्सा निकालकर खुद खा लिया। अब वह फिर से रोटियों को तौलने लगा। अब दूसरा वाला टुकड़ा बड़ा हो गया और वह छोटा।

   बन्दर ने फिर से बड़े वाले टुकड़े से थोड़ी रोटी खा ली।

इस प्रकार वह बड़ी रोटी से थोड़ा थोड़ा खाता गया। बिल्लियां उसे देख रही थीं। अब अंत मे केवल दो छोटे से रोटी के टुकड़े बचे थे।

   बन्दर ने बिल्लियों से कहा, ” यह तो केवल छोटे से टुकड़े ही बचे हैं।अब इसको आप लोग कैसे खाओगे। इससे तो आपका पेट भी नहीं भरेगा। चलो इसको भी मैं ही खा लेता हूँ।”

   बन्दर ने वे दोनों छोटे टुकड़े भी अपने मुह में डाल लिए और नमस्कार करते हुए वहाँ से चलता बना।

  बिल्लियां एक दुसरे का मुह ही तंकती रह गयी।


सीख | दो बिल्लियां और एक बंदर की कहानी : ” आपस मे झगड़ा कभी नहीं करना चाहिए। क्योंकि कोई तीसरा उसका फायदा उठा सकता है।”

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लोमड़ी और चिड़िया


   बहुत समय पहले की बात है। एक बहुत घना जंगल था। उसमें बहुत सारे पशु पक्षी रहा करते थे।

    जंगल के जानवरों में से सबसे चालाक लोमड़ी थी। वह अपने कार्य के लिए किसी को भी मूर्ख बना लेती थी।इसलिए सब उससे बचकर ही रहा करते थे।

   एक बार एक चिड़िया अपने लिए भोजन को ढूंढने के लिए जंगल से बाहर किसी गांव में गयी थी। गांव में किसी घर के बाहर उस को एक रोटी मिली। वह उसके हिसाब से बहुत बड़ी थी।

चिड़िया उसे पाकर बहुत खुश हुई और उसको जंगल मे अपने घर, अपने घोंसले में ले जाने लगी। रोटी बड़ी थी अतः उसके साथ उड़कर आने में चिड़िया को बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी।

    चिड़िया रुक रुक कर आ रही थी। जब वह थक जाती तो वह अपने पास के ही पेड़ में बैठकर आराम कर लेती थी। फिर दुबारा अपनी उड़ान भरती थी।

    अब वह अपने घोंसले वाले पेड़ पर पहुंचने ही वाली थी। लेकिन वह अब बहुत अधिक थक चुकी थी। उसने सोचा, अब अंतिम बार इस पेड़ पर आराम कर लेती हूं। फिर सीधा घोंसले पर ही रुकूँगी।

वह पास के पेड़ पर बैठ गयी। लेकिन रोटी अभी भी चिड़िया के मुंह पर ही थी।

   तब वहां से एक लोमड़ी गुजर रही थी। लोमड़ी भी अपने लिए भोजन ही ढूंढ रही थी। उसको  बहुत भूख लगी थी। उसने सुबह से कुछ भी नहीं खाया था। दोपहर हो चली थी।

वह सोच रही थी कि उसे खाने के लिए कुछ भी मिल जाता तो वह खा लेती।

    अब लोमड़ी की नजर ऊपर बैठी चिड़िया के मुह की रोटी पर पड़ी।लोमड़ी को भूख तो लगी ही थी। उसने सोचा, यदि यह रोटी मुझे मिल जाती तो अभी का गुजारा हो जाता।

भूख बहुत तेज लगी है।

  अब वह चिड़िया के पास गई औऱ बोली, ” नमस्कार चिड़िया बहन! कैसी हो?”

  चिड़िया कुछ भी नहीं बोली। क्योंकि उसके मुह में तो रोटी थी। यदि वह कुछ भी बोलती तो उसकी रोटी नीचे गिर जाती।

  तब लोमड़ी फिर बोली, ” चिड़िया बहन आज आप बहुत सुंदर लग रही हो। मैं तो कल ही बन्दर से बात कर रही थी कि, चिड़िया बहन इतनी सुंदर हैं।

मेरे विचार में तो उनको ही जंगल की रानी होना चाहिए था।

तब बंदर भी यही कह रहा था। मेरे विचार से आपको भी जंगल के चुनाव में अपना नामांकन करवा लेना चाहिए।”

   चिड़िया को अपनी तारीफ पसन्द थी और जंगल की रानी बनने के नाम से तो वह बहुत अधिक खुशह हो गयी। तो सब कुछ भूलकर वह बोलने के लिए अपना मुह खोल ही रही थी,

कि उसके मुँह की रोटी नीचे गिर गयी। इससे पहले की वह उड़कर नीचे आकर अपनी रोटी ले पाती, लोमड़ी ने उस रोटी को झपट लिया और उस रोटी को लेकर वहाँ से दौड़कर चली गयी।

   चिड़िया बेचारी ने उतनी मेहनत से वह रोटी पाई थी। उसे अपनी एक छोटी सी गलती पर बहुत पछतावा हुआ।


सीख | Two Cats and a Monkey Story in Hindi : ” दूसरों की चिकनी चुपड़ी बातों पर कभी नहीं आना चाहिए।”

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Conclusion | दो बिल्लियां और एक बंदर की कहानी


आज आपने पढ़ी Two Cats and a Monkey Story in Hindi. उम्मीद है आपको आज की यह दो बिल्लियां और एक बंदर की कहानी कहानी पसन्द आयी होगी, अगर आयी तो बताइए कममेंट्स में। और बने रहिये sarkaariexam के साथ।

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