Great Two Pots Story in Hindi with Images | Do Ghade ki Kahani- दो घड़े

मनोरंजन और प्रेरणा से भरी Two Pots Story in Hindi. आशा करते हैं, आपको आज की यह दो घड़े कहानी पसन्द आएगी, तो चलिए शुरू करते हैं।

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Two Pots Story in Hindi


दो मटके


    बहुत समय पहले की बात है, रामपुर नामक गांव में एक किसान रहा करता था। उसका नाम मोहन था। मोहन एक मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था।

वह अपने हर कार्य को पूरी लगन औऱ बुद्धिमानी से किया करता था। वह अपना सुबह का काम करके सीधा खेत चला जाता था फिर शाम को ही घर वापस आता था।

   उसके घर मे पीने के पानी के लिए एक घड़ा था। एक दिन जब वह नदी से उसे भर कर ला रहा था तो उसकी एक व्यक्ति से जबरदस्त टक्कर हो गयी।

जिस वजह से मोहन का पानी और घड़ा दोनो ही नीचे गिर गए और घड़ा तो मिट्टी का था तो वह चकनाचूर हो गया।

do ghade ki kahani-दो घड़े

    घड़ा तो चाहिए ही था, क्योंकि घर मे पीने के पानी को भर कर रखने के लिए और कोई बर्तन नहीं था। इसलिए मोहन पहले घर आया अपने कपड़े बदले औए चल पड़ा सीधे मटकों की दुकान में।

  मोहन ने मटके वाले से मटके दिखाने को कहा। मटके वाले ने अपनी पूरी दुकान उसे दिखाई और कहा कि इनमें से जो भी तुम्हें पसन्द हो वह तुम ले जा सकते हो।

    मटके वाला गया और अपने लिए एक अच्छा सा मटका देखने लगा। वह इधर उधर देख ही रहा था कि उसकी नजर एक फुटे हुए मटके पर पड़ी। वह बहुत ही उदास था।

मोहन ने कुछ सोचा और वह फूटा हुआ मटका और एक अच्छा मटका घर ले आया।

    अब वह उनमे नदी से पानी भर लाया और घर में रखकर खेत की ओर चल दिया। जब वह मटके भर कर ला रहा था तो उस फूटे हुए मटके का आधा पानी तो रास्ते मे ही गिर गया।

फूटे हुए मटके को इस बात का बहुत बुरा लग रहा था।

   वह घर मे बहुत जोर जोर से रोने लगा। शाम को मोहन घर वापस आया। फूटे मटके ने उसे देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा। कहता भी किस मुह से, उसे स्वयं पर अपने फूटे होने की ग्लानि हो रही थी।

  अगले दिन सुबह मोहन फिर से गया और दोनों मटको में पानी भर लाया। उस दिन भी फूटे हुए मटके का आधा पानी रस्ते में ही गिर गया। फूटा हुआ मटका इस बात को लेकर बहुत दुखी था।

वह सोचता कि शायद मालिक को उसके फूटे हुए होने के बारे में नहीं पता है यदि पता होता तो वे कबका मुझे घर से बाहर कर , मेरे स्थान पर एक नया मटका ले आते।

   कुछ दिन यूं ही चलता रहा। फिर एक दिन जब मोहन मटके में पानी लाया और खेत चल दिया तो फूटे हुए मटके को बहुत रोना आ रहा था। वह रोए ही जा रहा था।

उसके आंसू की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। तभी अच्छे मटके ने उससे पूछा, ” क्या हुआ भाई तुम रो क्यों रहे हो?”

   फूटा मटका रोते हुए बोला, ” क्या करूँ भाई मैं बहुत परेशान हूं। तुम्हें शायद पता नहीं है, मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ। जिस कारण मालिक जब भी मुझमें पानी लाते हैं तो मेरा आधा पानी तो रास्ते मे ही गिर कर बर्बाद हो जाता है।

और इस तरह मालिक केवल आधा पानी ही मुझमें ला पाते हैं। मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है मैं क्या करूँ। शायद मालिक को मेरे फूटे होने की बात पता नहीं होगी।'”

   अच्छा मटका बोला, ” तुम परेशान मत हो। और ऐसा मत सोचो कि तुम फूटे हुए हो! क्या पता मालिक को यह बात पता हो! मनुष्य बहुत बुद्धिमान होते हैं। शायद उन्हें तुम्हारे फूटे होने की खबर पहले से होगी। “

    इस बात पर वह और रोने लगा। और उसने सोचा आज ही मैं अपने फूटे होने की बात मालिक को बता दूँगा।

   शाम होने को आई। फूटा मटका मोहन का इंतज़ार करने लगा। मोहन भी कुछ देर में आ गया। फुटा मटका रो ही रहा था।

मोहन ने घर से किसी के रोने की आवाज सुनी तो वह चकित हो गया और घर मे इधर उधर उस आवाज को ढूंढ़ने लगा। छानबीन करने पर उसने पाया कि फूटा हुआ मटका रो रहा था।

   तब मोहन उसके समीप गया और उस से पूछा, ” क्या हुआ मेरे प्यारे मटके तुम ऐसे रो क्यो रहे हो? “

तब मटका रोते हुए बोला, ” मालिक आप बहुत अच्छे हो। मैं आपके लायक नहीं हूं। शायद आप जानते नहीं कि मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ।

अपने दुकानमें अच्छे से देखा नहीँ होगा , मैं तो अलग से रखा गया था और आप मुझे ही ले आए। आप मुझमें पानी भरकर लाते हैं, और वह पानी बर्बाद हो जाता है।  मैं आपकी पूरी मेहनत बर्बाद कर देता हूँ।”

Two Pots Story in Hindi Intrusting Part– मोहन बोला, ” अरे? रोते क्यो हो? तुमने कोई मेरी मेहनत बर्बाद नही की है। बल्कि तुम्हारी वजह से मुझे फायदा होने लगा है।

और मैं जानबूझकर तुम्हें अपने घर लेकर आया था।”

  तब फूटे हुए मटके को आश्चर्य हुआ और वह मालिक को आश्चर्य से देखने लगा। वह बोला, ” मालिक मुझे मालूम है यह सब आप मेरा मन रखने के लिए बोल रहे हो। मैं तो किसी काम का नहीं हूं।

आपको भी मुझे बाहर फेंक देना चाहिए। “

मोहन बोला, ” तुम्हे मुझपर  और मेरी बातों पर विश्वास नहीं है न? तो कल खुद ही चलकर देखना। तुम रास्ते को गौर से देखोगे तो तुम्हें मेरी बाते स्वतः ही समझ आ जाएंगी।”

   अगली सुबह मोहन फिर से उन दोनों मटकों में पानी भर कर लाया। लेकिन फूटे हुए मटक को रस्ते में कुछ नहीं दिखा स्वंय से गिरते हुए पानी के अलावा। तब सब घर पहुंचे।

   फूटे मटके ने उदास होकर मोहन से कहा, ” मालिक अपने मुझसे झूट ही कहा था। मुझे तो रास्ते मे कुछ भी नहीं दिखाई दिया।”

  तब मोहन बोला, ” तुमने रास्ते के वे फूल नहीं देखे जो आजकल ही खिल रहे हैं।”

 फूटे मटके को आश्चर्य हुआ।

  फिर मोहन उस मटके को बाहर ले गया और उसे वह फूल दिखाए। मोहन बोला, ” इन फूलों को देखो।यह सब तुम्हारी ही वजह से खिले हैं। जब मैं ने तुम्हें पहले दिन दुकान में देखा था तो तुम अलग से रखे हुए थे।

तुम दुकानदार के किसी काम के नहीं थे, तो मैं ने तुम्हें कम दाम में खरीद लिया। जब उस दिन मैं तुम दोनों मटकों में पानी भरकर लाया तो, उससे पहले ही मैं ने रास्ते के किनारे कुछ फूलों के पौधे लगा दिए थे।

जब मैं पानी भरकर लाया तो तुम्हारा पानी उन पौधों पर पड़ा और वे जल्दी बड़े होने लगे अब उन पर फूल भी आ चुके हैं।

यह सब तुम्हारी ही वजह से हुआ है। तुम ही रोज उन्हें पानी देकर उन्हें बड़ा करते आए हो। और परिणाम इतनी जल्दी आया कि आज वह हमारे सामने है। इन फूलों को मैं बाजार में दे आता हूँ।

जिनसे मुझे रुपये मिलते हैं और लाभ भी होता है। इसलिए मेरे लिए तुम फायदेमंद हो। स्वंय को कोसना अब छोड़ दो।”

   मालिक की बातें सुनकर मटका खुश हुआ। और अगले दिन से वह खुश खुशी मालिक के साथ पौधों को सींचने का कार्य करने लगा।


सीख | Do Ghade ki Kahani : ” अच्छी संगति से और अच्छे आचरण से बुराई के ऊपर विजय प्राप्त की जा सकती है।”

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Conclusion | दो घड़े


आज आपने पढ़ी Two Pots Story in Hindi. आशा है आपको आज की यह Do Ghade ki Kahani पसन्द आयी, अगर आयी तो बताइए कमैंट्स में और बने रहिये के साथ।

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