Best Vikram Betal Story in Hindi | Vikram aur Betaal-विक्रम बेताल की कहानियाँ

विश्व प्रख्यात मानी जाने वाली Vikram and Betal Story in Hindi. जिन्हें बेताल पच्चीसी के नाम से भी जाना जाता है, आशा करते हैं, आज की यह Vikram aur Betaal Kahani आपको पसन्द आएंगी,

तथा उनसे कुछ नया सीखने को भी मिलेगा। तब चलिये शुरू करते हैं, विक्रम बेताल की कहानियाँ-

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Vikram Betal Story in Hindi


  ” विक्रम बेताल की कहानियाँ (बेताल पच्चीसी) ”


     विक्रम और बेताल की कहानियों को ”बेताल पच्चीसी नाम से जाना जाता है। बेताल ने राजा विक्रम को ये कहानियां सुनाई थी और उनके प्रश्न भी पूछे थे।

          बहुत समय पहले की बात है, राजा विक्रम एक ऋषि के यज्ञ के लिए, श्मशान में  ,सिरस के वृक्ष पर लटके मुर्दे को लेने गए थे। वह मुर्दा ऋषि के यज्ञ के लिए आवश्यक था,

और उन्होंने ही राजा विक्रम को उस मुर्दे को लेने के लिए भेजा था। राजा उस के बारे में पहले से ही जानते थे। क्योंकि जब वे अन्य देशों की यात्रा कर के आ रहे थे तो,

उन्हें एक देव ने इस बारे में बताया था। और उससे सावधान रहने के लिए भी कहा था।

 ऋषि की आज्ञा पर, विक्रम श्मशान की ओर चल पड़े।

उनके मार्ग में अनेक जानवर , प्रेत आए ,जो कि एक दूसरे को मार रहे थे। कितने ही सांप उनके पैरों से लिपट रहे थे,

परन्तु विक्रम बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए और अपने मार्ग पर निरन्तर चलते रहे। श्मशान के बीचोंबीच एक सिरस का पेड़ था , वह पेड़ अग्नि की ज्वाला से धधक रही था,

ऐसे में ही, विक्रम उस पेड़ में चढ़ गए और रस्सी को अपनी तलवार से काट दिया। मुर्दा नीचे गिर गया।

नीचे गिरते ही वह जोर जोर से रोने लगा। राजा विक्रम को पता लगा कि वह बोल सकता था। जैसे ही विक्रम ने पूछा,” कौन हो तुम!”

वह जोर जोर से हंसने लगा। उसने राजा विक्रम को अपना नाम “बेताल” बताया.

उसने भी पूछा कि, तूम कौन है और इस मुर्दे को कहाँ ले जाना चाहते हो?

राजा विक्रम ने कहा, ” मेरा नाम विक्रम है। मैं धारा नगरी का राजा हूँ। मैं तुम्हें एक ऋषि के पास ले जाने आया हूँ।

बेताल बोला, “

मैं तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूं लेकिन तुम्हें मेरी शर्तों के अनुसार चलना होगा । मेरी शर्त यह है कि, यदि रस्ते में कहीं भी तुम कुछ भी बोलोगे तो मैं वापस पेड़ पर चला जाऊंगा।”

राजा विक्रम मान गए । फिर बेताल ने विक्रम से कहा, ” उचित रहेगा कि हम अपनी यात्रा को चर्चा के साथ तय करते हैं मैं तुम्हे एक कहानी सुनाता हूँ। सुनो…!

और उस की पहली कहानी , बेताल पच्चीसी की पहली कहानी के नाम से जानी जाती है।

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Vikram aur Betaal 1st Story


 पापी कौन ?


  vikram aur betaal


 °°°काशी के वीरकुट नामक राज्य में एक राजा का शासन था। उसका एक बेटा था जिसका नाम राजकुमार वज्रवीर था।

यह तब की घटना है जब राजकुमार बड़ा हो गया था।

एक दिन राजकुमार अपने मित्र दिवान के बेटे के साथ शिकार खेलने के लिए जंगल की ओर गया। जंगल में भटकते हुए उन्हें एक तालाब मिला।

तालाब के आस पास का नजारा बेहद खूबसूरत था। तालाब में कमल खिले हुए थे। किनारों पर घने पेड़ थे, जिनपर पक्षी चहचहा रहे थे। दोनों मित्र वहां रुक गए,

और तालाब में हाथ मुँह धोकर पेड़ के नीचे सुस्ताने के लिए बैठ गए।

    थोड़ी ही देर में वहां एक राजकुमारी और उसकी सहेलियां, स्नान करने आई। राजकुमार का दोस्त तो पेड़ पर चढ़ गया। परन्तु जैसे ही राजकुमार ने राजकुमारी को देखा वह उस पर मोहित हो गया।

राजकुमारी भी उसे एकटक देखने लगी। राजकुमार ने वहीं तालाब से एक कमल तोड़कर उसे दिया। परन्तु राजकुमारी ने उस पुष्प को, पहले कान से लगाया, दांत से कुतर दिया, पैर से दबाया और फिर सीने से लगा लिया।

   थोड़ी ही देर में वह अपनी सहेलियों के साथ वहां से चले गई।

परन्तु राजकुमार उसके इस रवैये से अचंभित हो गया। तभी उसका दोस्त पेड़ से उतरा और उसे राजकुमारी के ऐसा करने का रहस्त समझाया। उसने कहा कि,

” कान से लगाने का अर्थ है , वह राजकुमारी कर्नाटक की है, दांतों से कुतरने का मतलब है, की वह वहां के राजा दंतबाट की बेटी है। पैरों से कुचलने के अर्थ है,

कि उसका नाम “पद्मावती” है। और सीने से लगने का अर्थ है कि वह भी आपको प्रेम करने लगी है “

इतना सुनते ही राजकुमार फूला न समाया और अपने मित्र से बोला मुझे कर्नाटक ले चलो।

अब दोनो मित्र एक साथ कर्नाटक की ओर चल पड़े। दिन बीत जाने के बाद वे आराम से कर्नाटक पहुंचे।

 वहां महल के ही पास एक बुढ़िया अपनी कुटिया में निवास करती थी। उन दोनों को वह मिल गयी। उनका व्यवहार, और शक्ल सूरत देखकर बुढ़िया को उन दोनों के प्रति प्रेम उमड़ पड़ा।

उसने उन दोनों को अपनी छोटी सी कुटिया में रहने के लिए कहा। वे दोनो वहीं रुक गए। 1-2 दिन के बाद राजकुमार ने राजकुमारी पद्मावती के बारे में उस बुढ़िया से पूछा,

बुढ़िया ने उसे सारी जानकारी दे दी। राजकुमारी के बारे में भी और उसके राजपरिवार के बारे मे भी।

राजकुमार ने बुढ़िया को कुछ स्वर्ण मुद्राएं दी और उससे कहा, ” जाओ राजकुमारी को बता कर आओ की एक राजकुमार आया है जो आपसे मिलना चाहता है… आप उनसे मिल चुकी हो एक तालाब के पास।”

बुढ़िया राजकुमारी के पास उसका संदेश लेकर चले गयी। लेकिन फिर राजकुमारी ने अपनी चंदन में लिपटी हुई उंगलियों के सारे छाप बुढ़िया के गालों पर लगा दी और बुढ़िया को भगा दिया।

     बुढ़िया ने अपने घर आकर यह बात उन दोनों को बताई।

तभी राजकुमार का मित्र बोला, वह कहना कुछ औऱ चाहती है ,  उसने बताया कि, दसों अंगुलयाँ चंदन में भिगोकर रखना अर्थात वह कहना चाहती है,

कि अभी 10 दिन चांदनी के है। उसके बीत जाने पर मैं आपसे मिलूंगी।

राजकुमार मान गया। 10 दिन बीत गए।अब राजकुमार ने बुढ़िया को फिर से राजकुमारी पद्मिनी के पास जाने को कहा। बहुत बहला फुसलाने के बाद वह मानी।

  परन्तु इस बार  राजकुमारी ने तीन अंगुलियां केसरी रंग में भिगोकर बुढ़िया को मारकर भगा दिया।

पिछली बार की ही तरह, बुढ़िया घर आई और राजकुमार को सच्चाई बताई। इस बार भी राजकुमार के मित्र ने उसे इसका अर्थ समझाया। और कहा कि,

” राजकुमारी आपसे मिलना चाहती है लेकिन तीन दिन बाद।”

राजकुमार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तीन दिन बीत गए।वह तैयार हो गया जाने के लिए।

    वह खिड़की के सहारे राजकुमारी के कक्ष तक गया।

राजकुमारी ने उसे अपने साथ रख लिया। रात को वे दोनों 1 साथ रहते और दिन में राजकुमारी उसे छिपा देतीं। ऐसा बहुत दिनों तक चलता रहा।

राजकुमार ,राजकुमारी के प्रेम में इतना अंधा हो गया था कि, उसे किसी और काम की कोई सुध नहीं थी।

अचानक एक दिन राजकुमार को अपने मित्र की याद आई। उसने अपने मित्र के बारे में सब राजकुमारी को बता दिया। राजकुमारी को आश्चर्य हुआ परन्तु फिर उसने राजकुमार के दोस्त के लिए 1 दिन स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की और राजकुमार को उस तक ले जाने को दे दिया।

   राजकुमार का मित्र समझदार था, उसको पता लग गया था कि खाने में जहर है। उसने अपनी और राजकुमार की तसल्ली के लिए वह खाना कुत्ते को खिलाया। कुत्ता खाना खाते ही मर गया।

   अब राजकुमार के दोस्त ने उसे बताया कि, “राजकुमारी को हमारी मित्रता से जलन होने लगी है। अब हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हम उसे घर ले जा सकें।

दोनों ने साधु और युवक का वेश धरा और कुछ टिगड़म बैठाकर राजकुमारी को महल से बाहर निकलवा दिया। राजकुमार, राजकुमारी को अपने साथ ले आया। अब वे सब सुखी से अपना जीवन जीने लगे।°°°°

अब बेताल राजा विक्रम से बोला,” हे राजन ! तुम मुझे यह बताओ कि इस पूरी कहानी में पाप किस को लगा? “


राजा विक्रम बोले  | Vikram Betal Story –

पाप राजा को लगा, दीवान के बेटे ने अपने स्वामी की आज्ञा का पालन किया, और राजकुमार ने अपना मनोरथ पूर्ण किया। राजा ने पाप किया ,अपनी पुत्री को बिन सोचे समझे महल से निकाल दिया।”

विक्रम के इतने कहने तक ही, बेताल फिर से सिरस के पेड़ पर जा लटका। क्योंकि राजा विक्रम ने उसकी शर्त का पालन नही किया।

अब राजा विक्रम दुबारा उसे लेने गये, उसकी रस्सी काटकर उसे अपने पीठ पर बैठाया। अब बेताल उनको नई कहानी सुनाने लगा।

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Vikram and Betal 2nd Story


_संजीवनी, विद्या की पोथी_


     °°°प्राचीन समय में , यमुना नदी के किनारे एक कुटिया में ब्राह्मण परिवार रहा करता था। उनके परिवार में एक ब्राह्मण युगल ,उनका बेटा और बेटी रहते थे। बच्चे अब जवान हो चले थे।

ब्राह्मण, ब्राह्मणी और उनके बेटे को अपनी घर की इकलौती बेटी की शादी की चिंता सताने लगी। वह बहुत ही सुंदर और सर्वगुण सम्पन्न थी, उसका परिवार उसके लिए कोई योग्य वर ही ढूंढ़ना चाहते थे।

      एक दिन ब्राह्मण सपने मित्र के बेटे की शादी में गए। वहां उन्हें 1 लड़का मिला जो उनकी बेटी के लायक था। उन्होंने उससे बात की और उसे शादी के लिए राजी कर लिया।

दूसरी ओर, घर में एक योगी ब्राह्मण आया, उसने ब्राह्मणी से जल मांगा। उसका रंग ढंग ,ब्राह्मणी को बहुत पसंद आया और उसे ब्राह्मण के घर न लौटने तक अपने घर पर ही रखा, और उसे सारी बात बताकर शादी के लिए राजी कर लिया।

वही लड़की का भाई जहां पढ़ने गया था, उसे भी वहां एक योग्य लड़का मिल गया। उसने भी उस लड़के से बातचीत कर शादी के लिए राजी करवा लिया।

    कुछ समय बाद बाप-बेटे एक साथ घर पहुंचे तो, उन्होंने देखा कि एक युवक उनके घर मे था और दो युवकों को वे अपने  साथ ले आए।

    सब अचरज में पड़ गए कि– अब क्या हो!!

तभी दैवयोग हुआ और वहां एक सांप आ गया, सांप ने लड़की के पैर में काट लिया। लड़की उसी समय वहां मर गयी। तीनो लड़को ,लड़की के माता-पिता-भाई , सबने लड़की को बचाने का प्रयास क़िया।

परन्तु वह तो मर चुकी थी!

दुखी होकर वे लड़की को शमशाम ले गए,  सब ने मिलकर उसका क्रियाकर्म कर दिया।

तीनो युवकों में से एक ने उसकी हड्डियां चुन लीं और वह फकीर बन गया। दूसरे ने राख की गठरी ली और वहीं झोपडी बनाकर रहने लगा। तीसरा योगी बन गया और इधर उधर घूमने लगा।

   तीसरा योगी एक दिन , घूमते घूमते एक स्त्री के घर पहुंचा। उसने योगी का बहुत आदर सत्कार किया। स्त्री ने योगी को खाना दिया ही था कि  उसका छोटा बेटा वहां आकर अपनी माँ का पल्लू पकड़कर बैठ गया।

बहुत प्रयासों के बाद भी जब लड़के ने उसका पल्लू नहीं छोड़ा तो उसे बहुत गुस्सा आया और उसे जलते चूल्हे में झौंक दिया। वह बच्चा वहीं जलकर भस्म हो गया।

Intrusting Part Of this vikram betal story in hindi – योगी को गुस्सा आया और उसने खाना छोड़ दिया, वह वहां से जा ही रह था कि, तभी बच्चे के पिता घर आ गए। उन्होंने घर पर हुई घटना देख अपनी पत्नी को बहुत डाँठा और अंदर से “संजीवनी विद्या की पोथी” ले आए।

उन्होंने उसको खोला और  कुछ मन्त्र पड़े। वह लड़का जिंदा हो गया। सब खुश हो गए। तभी योगी ने सोचा यदि यह मैं उस जगह ले जाऊं जहाँ वह लड़की मरी थी, तो शायद उसको भी जीवन दान मिल जाए।

  योगी ने वहां , बच्चे के पिता के साथ भोजन किया और  रात होने तक वहीं रुक गया। रात हुई, सब सो चुके थे। योगी चुपचाप से जाकर वह पोथी ले आया।

      वह पोथी को लेकर उसी स्थान पर गया जहाँ वो लड़की सांप के काटने से मर गयी थी। वही वो दो युवक भी बैठे थे, योगी ने दोनों से रख और हड्डियां मांगी। योगी ने पोथी खोली औऱ वही मन्त्र पड़ा। लड़की जीवित हो गयी। सब अचम्भे में पड़ गए। और बहुत खुश भी हुए।

लेकिन सब उससे विवाह करने के लिए लड़ पड़े।°°

अब बेताल ने राजा विक्रम से पूछा, कि “लड़की की शादी किस युवक से होनी चाहिए और क्यों।”

विक्रम, बेताल के वापस भाग जाने के डर से थोड़ी देर चुप रहे,

परंतु बेताल के उकसाने पर,


राजा विक्रम बोले  | Vikram Betal Story in Hindi – ” जो कुटिया बनाकर रहा, वही कन्या से विवाह करने योग्य है।

क्योंकि जिसने उसको जीवन दान दिया वह उसके पिता के समान है। जिस युवक ने हड्डियां रखी वह उड़के बेटे के समान है। जो राख लेकर अपनी झोपडी में रहा वही शादी के लिए उचित है।”

राजा का जवाब सुनकर, बेताल फिर उड़कर पेड़ पर चला गया। विक्रम फिर से उसे लेकर आए और बेताल ने एक नई कहानी शुरू कर दी।

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3rd Vikram Betal Story in Hindi


_मृत शेर को जीवनदान_


      °°एक नगर में एक ब्राह्मण का परिवार रहता था। ब्राह्मण ब्राह्मणी के 4 पुत्र थे। चारों बचपन से ही बहुत होशियार थे।

 जब वे बच्चे बड़े हो गए तो अचानक एक दिन उनके पिता की मृत्यु हो गयी। उनकी माता ने भी पति-वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। अब वे चारों अनाथ हो चुके थे।

उनके रिश्तेदारों ने उन चारों भाइयों को बहला-फुसलाकर उनसे उनका सारा धन छीन लिया, बदले में उनकी परवरिश भी नहीं की गयी।

Main Vikram Betal Stories start- वे चारों भाई अपने नाना के वहां चले गए। कुछ दिन अच्छे से बीतने के बाद वहां भी उनके साथ बुरा व्यवहार होने लगा।

 तब सभी भाईयों ने मिलकर इस बारे में बहुत सोचा और निर्णय किया कि, हम सभी भाई मिलकर कुछ विद्या सीखते हैं। जिससे कि हम समाज में सम्मान पा सकें।

  यह सोचकर सभी भाई अलग अलग दिशा में चल पड़े। उन्होंने अलग अलग प्रकार की विद्याएं ग्रहन की।

 और कुछ समय पश्चात विद्या सीखकर मिले।

सभी ने एक -दूसरे को अपनी – अपने बारे में, और अपनी विद्या के बारे में बताया।

पहले ने कहा, ” मैं ने ऐसी विद्या सीखी है कि, मैं अपनी विद्या के बल पर किसी मृत कंकाल में मांस चढ़ा सकता हूँ।”

    दूसरे ने कहा, “मैं मृत शरीर पर चमड़ी और बाल उगा सकता हूँ।”

तीसरे ने कहा, “मैं उस मृत के अंग पुनर्निमित कर सकता हूँ।

और चौथे ने कहा कि, ‘मैं किसी भी मृत शरीर में प्राण डालकर उसे जिवित कर सकता हूँ।’

Intrusting Part Of this vikram aur betaal – फिर वे सभी अपनी अपनी विद्या का परीक्षण करने एक साथ जंगल की ओर चल दिये। चलते चलते उन्हें कुछ हड्डियां मिली, और चारों ने हड्डियों को इकट्ठा किया,

औऱ  बिना ये सोचे कि, हड्डियां किस जानवर की हैं वे हड्डियों को लेकर एक सुनसान जगह पर चले गए।

असल में वे हड्डियां एक शेर की थीं।

हड्डियों को नीचे रखा गया, एक ने उन अल्फा अलग प्रकार की हड्डियों को जोड़ा औऱ उस पर मांस चढ़ा दिया। दूसरे ने मांस के ऊपर खाल और बाल लगा दिये।

तीसरे ने अंगों को विकसित किया। अब शेर का मृत साँचा बनकर तैयार हो चुका था।

    औऱ अन्ततः चौथे ने उस मृत शेर के शरीर में प्राण डाल दिये। शेर जीवित हो उठा। और भूखे होने के कारण उसने, उन चारों भाइयों को मारकर खा लिया। उनकी विद्या भी उनके ही साथ चले गयी°°°°

अब कहानी सुनाकर बेताल ने फिर से राजा विक्रम से पुनः प्रश्न किया, की उन चारों में से अपराधी कौन हुआ?


राजा विक्रम बोले  | Vikram Betal Kahani –

” जिसने उस शरीर में प्राण डाले वह ही इसका अपराधी है, पूरे मृत शरीर के बन जाने पर, सबको पता लग गया था कि वह शेर का शरीर है ,

फिर भी उसने अपनी बुद्धि का प्रयोग किये बिना ही उस पर अपनी विद्या का प्रयोग किया। बाकी तीनो का कोई दोष नहीं है।”

यह सुनकर बेताल फिर से पेड़ पर जा लटका। राजा उसे फिर से लेकर आया। फिर एक नई कहानी बेताल ने शुरू कर दी।


4th Vikram Betal Stories


_ योगी पहले क्यों हंसा और बाद में क्यो रोया_


°°° बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक ब्राम्हण परिवार रहता था। उनका एक बहुत ही होनहार पुत्र था। उसके बड़े होने के साथ साथ, उसके पिता ने उसको बहुत सारी ,शिक्षा-दीक्षाएं दीं ।

उसने 16 वर्ष की उम्र में ही सभी विद्याएं प्राप्त कर लीं। परन्तु तब उसके साथ एक  दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई। वह सोलह बरस का होने के पश्चात मृत्यु को प्राप्त हो गया।

उसकी मृत्यु के बाद सभी बड़े दुःखी हुए और रोते हुए उसे शमशाम की ओर ले गए।

Intrusting Part Of this vikram betal story in hindi – रास्ते में एक दूसरे ब्राह्मण की कुटिया थी, रोने का कोलाहल सुनकर वे बाहर आए ,

वे बहुत ही वृद्ध हो चुके थे, उनके पास सभी प्रकार की विद्याएं थी।

   छोटे से बच्चे की मृत्यु देख उन्हें बड़ा दुःख हुआ और वे पहले तो जोर जोर से रोए, और फिर अचानक से हंसने लगे।

ततपश्चात उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया और उस बालक के शरीर में अपनी आत्मा द्वारा प्रवेश लिया, मृत बालक को पुनः जीवित पाकर उसके माता पिता बहुत खुश हुए।

और उल्लासपूर्ण रूप से उसे हर ले गए।°°

बेताल ने विक्रम से प्रश्न पूछा, ” हे राजन ! वह योगी ब्राह्मण पहले रोए, और बाद में हंसे क्यों? “


राजा विक्रम बोले  | Vikram Betal Story in Hindi –

” इसमें कोई संदेह की बात नहीं है, वह पहले इसलिए रोए क्योंकि उनको अपने पुराने शरिर को त्यागने का दुख था। और फिर वे हंसे इसलिए क्योंकि उन्हें नए शरीर ने आकर और विद्याए प्राप्त करने को मिलेंगी।”

राजा का जवाब सुनकर बेताल फिर पेड़ से जा लटका। इस बार जब विक्रम बेताल को वापस ला रहे थे तो , बेताल ने उनसे कहा, की मैं तुम्हारे निर्भीक उत्तरों से बहुत प्रसन्न हूँ।

बार बार आने-जाने  की परेशानी भी उठा रहे हो । इस बार मैं तुमसे एक कठिन प्रश्न पूछने वाला हूँ। सोच समझकर उत्तर देना।

अब नई कहानी शुरू कर दी।

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Vikram aur Betaal 5th Story


_रिश्ता_


   किसी नगर में , एक राजा, रानी रहते थे। उनका एक बड़ा सा महल था। उनके विवाह के पश्चात उनकी एक कन्या हुई। कुछ वर्षों पश्चात कन्या बड़ी हो गयी।

      राजा के भाई बंधुओं ने मिलकर राजा का राज पाठ हथिया लिया। राजा, रानी और अपनी बेटी को लेकर रानी के मायके चल दिया।

वे लोग पैदल ही सफर कर रहे थे। मार्ग बहुत ही बड़ा और कठिन था। वे चलते चलते एक जंगल मे पहुंच गए। थोड़ी दूरी पर एक बस्ती थी। उसमें रहने वाले लोग बहुत ही खतरनाक थे।

राजा ने अपनी पत्नी से कहा, तुम हमारी पुत्री का ध्यान रखना और दोनों यहीं रुकना औऱ मेरा इंतज़ार करना मैं आगे का हाल देखकर आता हूँ।

Main vikram aur betaal Kahani start- राजा जब उस बस्ती में गया तो उसका उस बस्ती के लोगों से बहुत लड़ाई हुई। राजा बहुत पराक्रम से लड़ा।

लेकिन अकेले होने की वजह से मारा गया।

    बहुत देर तक राजा के न आने पर उसकी पत्नी सुर बेटी बहुत चिंतित हुए। वह आगे चल पड़े। बस्ती के पास जाते ही उन्हें खबर मिली कि राजा की मृत्यु हो चुकी है।

रानी बहुत दुःखी हुई वह बहुत रो रही थी। पुत्री भी बहुत दुखी थी। पुत्री अपनी मां को, लेकर वह एक तालाब के  किनारे पहुंच गई।

   वहां से एक साहूकार और उसका बेटा अपने अपने घोड़ों पर तालाब के किनारे से गुजर रहे थे। उन्हें रस्ते में दो जोड़े औरतों के पैरों के निशान दिखाई दिए।

साहूकार ने अपने पुत्र से कहा, ” इन दोनो में से तुम्हें जो भी पसन्द हो तुम उससे विवाह कर लेंना। ” पुत्र ने जवाब दिया मैं छोटे पैरों वाली स्त्री से विवाह करूँगा।

संजोग से पुत्री के पैर बड़े और माँ के छोटे थे।

Intrusting Part Of this vikram betal story in hindi – दोनो थोड़ा आगे गए तो उन्हें वे दोनों महिलाएं दिखी। साहूकार ने दोनों से बात की।

और छोटे पैर वाली स्त्री को अपने पुत्र से विवाह के लिए मना लिया।

पुत्र के निवेदन पर साहूकार ने भी रानी की पुत्री से विवाह करना सुनिश्चित किया।

वे दोनों महिलाओं को घर ले आए। दोनो ने रानी और उसकी पुत्री से विवाह करा। अब पुत्री सांस बन गयी थी और मां उसकी बहु और भविष्य में उनकी बहुत भी संतानें हुईं।°°°

अब बेताल का राजा विक्रम से यह प्रश्न था कि, रानी की सन्तानो का पुत्री की सन्तानो से क्या सम्बंध था!”

राजा विक्रम इस बार संकोच में पड़ गए। कोई उत्तर न सूझने के बाद वह चुप रहे।


बेताल बोला | Vikram aur Betaal-

“कोई बात नही। मैं तुम्हारे धीरज और पराक्रम से खुश हूँ। अब मैं इस मुर्दे के शरीर से चले जाता हूँ।

तुम इस मुर्दे को योगी के पास ले जा सकते हो । परन्तु सावधान रहना, वह योगी असल में तुम्हारी बलि देकर संसार का स्वामी बनना चाहता है, और यदि तुमने उसकी बलि आज दे दी, तो तुम ही सारे विश्व में राज्य करोगे।”

राजा विक्रम ने उसकी बातें ध्यान से सुनी और मुर्दे को लेकर चल पड़ा योगी की ओर।

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Conclusion | विक्रम बेताल की कहानियाँ


बेताल पच्चीसी या विक्रम और बेताल की कहानियां पूरे हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली कहानियों में से एक है। जिन्हें हर कोई पढ़ना पसन्द करता है।

आज आपने पढ़ी Vikram Betal Story in Hindi. आशा करते हैं आपको यह विक्रम बेताल की कहानियाँ पसन्द आईं होंगी। आपको यह Vikram aur Betaal Stories कैसी लगी, बताइये हमे कमैंट्स में।

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